क्रॉकरी बॉय बनकर शादी में घुसा युवक, गहने चोरी करते ही पकड़ा गया, जमकर पीटा

ग्वालियर/ एक शादी समारोह में दूल्हे के पिता की सतर्कता से लाखों के गहने चोरी होने से बच गए। दूल्हे के पिता ने समय पर पहुंचकर चोर को रंगे हाथ पकड़ लिया। इसके बाद चोर को बारातियों ने जमकर पीटा है। घटना मंगलवार रात राधिका मैरिज गार्डन की है। पकड़े गए युवक को पुलिस को सौंप दिया गया है। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है।

बहोड़ापुर थाना क्षेत्र स्थित राधिका मैरिज गार्डन में मंगलवार को सुरेश गुप्ता के बेटे का विवाह समारोह का कार्यक्रम हो रहा था। रात 10 बजे के लगभग जब बारात के बाद स्टेज का कार्यक्रम हुआ और दुल्हन के लिए रखे गहने उठाने के लिए सुरेश पहुंचे तो देखा कि एक युवक रूम के अंदर था। उनको संदेह हुआ तो उन्होंने अपने कुछ परिचितों को फोन कर वहीं बुला लिया। अंदर देखा तो युवक लाखों रुपए के गहने समेट चुका था। इस पर सुरेश ने तत्काल उसे पकड़ लिया। फिर तो दूल्हे के पिता और बारातियों ने जमकर चोर की मारपीट की है। पकड़े गए संदेही की पहचान प्रमोद निवासी पुरानी छावनी के रूप में हुई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और प्रमोद को पकड़कर थाना ले आई है। अभी इस मामले में FIR दर्ज नहीं हुई है। पुलिस पूछताछ कर शादी समारोह में चोरी की वारदातों के संबंध में पूछताछ कर रही है।

क्रॉकरी का कर्मचारी बनकर हुआ था दाखिल

पकड़ा गया संदेही ने पुलिस को इतना बताया है कि शादी समारोह में घुसने के लिए उसने खुद को क्रॉकरी बॉय बनाया था। एक दो लोगों ने उससे पूछताछ भी की, लेकिन उसने खुद को क्रॉकरी का कर्मचारी बताया और निकल गया। पर वह वारदात में कामयाब नहीं हो सका। पकड़े जाने के बाद क्रॉकरी संचालक ने उसे पहचानने से भी इनकार कर दिया है।

मुख्यमंत्रियों के साथ मीटिंग में बोले PM मोदी- वैक्सीनेशन बढ़ाना होगा, उधर ममता बोलीं- केंद्र बंगाल को वैक्सीन नहीं दे रहा

देश के कई राज्यों में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को मुख्यमंत्रियों के साथ वर्चुअल (ऑनलाइन) बैठक कर रहे हैं। बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने सभी मुख्यमंत्रियों से कहा कि हमें वैक्सीनेशन बढ़ाने पर जोर देना होगा। गांव में कोरोना बढ़ा तो परेशानी होगी, इसलिए राज्य बंदिशें अपने हिसाब से तय करें। हमें इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि लोगों में दहशत न फैले। उन्होंने कहा- हमें वैक्सीन की बर्बादी रोकनी होगी, उनकी एक्सपायरी डेट देखनी होगी। जो वैक्सीन पहले आई, उसका उपयोग पहले होना चाहिए।

इस बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और छत्तीसगढ़ के CM भूपेश बघेल शामिल नहीं हुए, लेकिन ममता ने बंगाल से ही PM मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार बंगाल को वैक्सीन नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि बिहार में पीएम मोदी ने मुफ्त वैक्सीन की बात कही थी। क्या वहां के लोगों को वैक्सीन मिल पाई। उन्होंने अपना वादा पूरा नहीं किया। उन्होंने झूठ बोला।

PM ले सकते हैं वैक्सीनेशन और कोरोना की स्थिति को लेकर अपडेट
माना जा रहा है कि PM मुख्यमंत्रियों से उनके राज्यों में कोरोना से बने हालात, वैक्सीनेशन की स्थिति और संक्रमण को काबू करने के लिए की जा रही कोशिशों पर फीडबैक ले सकते हैं। पीएम मोदी ने देश में वैक्सीनेशन ड्राइव शुरू होने से पहले जनवरी में भी मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत की थी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होने वाली इस बार की बैठक में देश भर में सख्त पाबंदियों पर भी फैसला हो सकता है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि हमने मीटिंग से जुड़े हर पहलू के लिए तैयारी कर ली है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट एंड एडवाइजर डॉ. सुनीला गर्ग ने कहा कि इस समय वैक्सीनेशन कवरेज और कोरोना के बढ़ते मामले चिंता का विषय हैं। वैक्सीनेशन के लिए लोगों की झिझक को देखते हुए यह प्रोग्राम धीमा हो गया है। दूसरी बात देश में बढ़ते मामलों की संख्या दूसरी लहर शुरू होने की ओर इशारा कर रहे हैं।बैठक में दोनों मसले उठाए जाने की संभावना है। रिव्यू के आधार पर वैक्सीनेशन प्रोग्राम को बेहतर बनाने के लिए कुछ फैसले लिए जा सकते हैं। वैक्सीनेशन पर सरकार के सलाहकार डॉ. गजेंद्र सिंह का कहना है कि रिव्यू के बाद प्रधानमंत्री की ओर से कुछ निर्देश या सिफारिशों की उम्मीद की जाती है। इसमें ज्यादा वैक्सीनेशन सेंटर खोलने और वैक्सीन के लिए उम्र सीमा 60 से 50 साल करना है।

कॉम्बेट ट्रेनिंग के लिए टेक ऑफ कर रहा एयरफोर्स का MiG-21 हादसे का शिकार, ग्रुप कैप्टन शहीद

इंडियन एयरफोर्स (IAF) का MiG-21 बायसन एयरक्राफ्ट बुधवार सुबह हादसे का शिकार हो गया। इसमें IAF के एक ग्रुप कैप्टन शहीद हो गए। हादसा एयरफोर्स के सेंट्रल इंडिया बेस में उस समय हुआ, जब MiG-21 एयरक्राफ्ट कॉम्बैट ट्रेनिंग के लिए टेक ऑफ कर रहा था। हादसे में शहीद ग्रुप कैप्टन का नाम ए गुप्ता बताया जा रहा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक कॉम्बैट ट्रेनिंग एयरफोर्स के ग्वालियर बेस पर चल रही थी।

IAF ने इस हादसे के पीछे की वजह पता करने के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (जांच) बैठा दी है। एयरफोर्स ने हादसे में शहीद कैप्टन ए गुप्ता के लिए संवेदना व्यक्त की है। IAF ने कहा कि इस दुख की घड़ी में हम उनके परिवार के साथ खड़े हैं।

जिस सचिन वझे के सहारे अर्नब-कंगना को तंग किया गया, क्या उसी के जरिये मुकेश अंबानी को भी निशाने पर लिया गया?

उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर-एंटीलिया के बाहर विस्फोटक लदी गाड़ी किसने खड़ी की और उसका मकसद क्या था, ऐसे सवालों के जवाब राष्ट्रीय जांच एजेंसी ही दे सकती है, लेकिन कुछ सवाल ऐसे भी हैं जिनके जवाब मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र सरकार को देने हैं, जैसे हिरासत में मौत के मामले में निलंबन के बाद नौकरी छोड़ चुके सहायक पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वझे पर इतनी मेहरबानी दिखाने की जरूरत क्यों थी और राज्य के सारे महत्वपूर्ण और खासकर विरोधियों को सबक सिखाने वाले मामले उसे ही क्यों सौंपे जा रहे थे? सचिन वझे को हिरासत में मौत के एक मामले में 2004 में निलंबित किया गया। जब उसे तीन साल तक अपनी बहाली होती नहीं दिखी तो उसने पुलिस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया और फिर शिवसेना में शामिल हो गया। कोरोना महामारी और महाविकास अघाड़ी सरकार उसके लिए काम की साबित हुई।

नौकरी छोड़ चुके सहायक पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वझे पर ठाकरे सरकार मेहरबान

महामारी में पुलिस कर्मियों की कमी का हवाला देकर उसे फिर से नौकरी पर ले लिया गया। यह काम इसके बावजूद किया गया कि वह हिरासत में मौत के मामले से बरी नहीं हुआ था। कायदे से बहाली के बाद भी उसे महत्वपूर्ण काम नहीं सौंपा जाना चाहिए था, लेकिन उद्धव ठाकरे की सरकार ने मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच में उसकी तैनाती का रास्ता साफ किया। इसके बाद उसे सारे बड़े मामले सौंपे जाने लगे। रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी को गिरफ्तार करने के लिए उसकी सेवाएं ली गईं। टीआरपी घोटाले की जांच भी उसे सौंपी गई। कंगना रनोट-रितिक रोशन का मामला भी उसके हवाले किया गया। अन्य हाई-प्रोफाइल मामले भी उसके पास पहुंचते रहे। अनुमान लगाइए कि ऐसा किसके इशारे पर हुआ होगा?

अंबानी के घर के बाहर कार में जिलेटिन की छड़ें रखने का काम या तो वझे ने किया या उसके गुर्गों ने

एंटीलिया के बाहर विस्फोटक पाए जाने के मामले में भी सचिन वझे की एंट्री पाई गई। वह विस्फोटक लदी गाड़ी के मालिक मनसुख हीरेन को जानता था। मनसुख की मानें तो उनकी गाड़ी चोरी हो गई थी। कुछ दिनों बाद उनका शव पानी में मिला। कहा गया कि उन्होंने आत्महत्या की है। फिर पता चला कि वह तो अच्छे तैराक थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बताया कि उनके मुंह में कपड़े ठूंसे गए थे और शरीर पर चोट के निशान भी थे। मतलब उनकी हत्या की गई। किसने की? संदेह है कि सचिन वझे या फिर उसके इशारे पर उसके लोगों ने। अब तो यह संदेह भी उभर आया है कि मुकेश अंबानी के घर के बाहर कार में जिलेटिन की छड़ें रखने का काम भी या तो खुद सचिन वझे ने किया या फिर उसके इशारे पर उसके गुर्गों ने। अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता, क्योंकि इस कांड के तार तिहाड़ जेल से बरामद एक मोबाइल फोन से भी जुड़ रहे हैं। कहा जा रहा है कि इस मोबाइल का इस्तेमाल आतंकी तहसीन अख्तर कर रहा था और उसी ने गुमनाम से आतंकी संगठन जैश उल हिंद की ओर से अंबानी को वह धमकी भरा पत्र लिखा, जो जिलेटिन लदी गाड़ी में पाया गया। यह भी पता चल रहा कि जिलेटिन भरी गाड़ी चोरी ही नहीं हुई थी और उसका उपयोग सचिन वझे पहले से ही कर रहा था। कहानी बड़ी रहस्यमय है। पता नहीं रहस्य की परतें कब खुलेंगी, लेकिन शिवसेना की ओर से सचिन वझे की तरफदारी हैरान करती है।

सचिन वझे के सहारे मुकेश अंबानी को परेशान करने की कोशिश हो रही थी?

महाराष्ट्र सरकार ने शर्मिंदगी से बचने के लिए सचिन वझे को निलंबित भले कर दिया हो, लेकिन शिवसेना के नेता उसकी तारीफ के पुल बांधने में लगे हुए हैं। शिवसेना सांसद संजय राउत को यह रास नहीं आया कि जिलेटिन कांड की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआइए करने लगी, लेकिन उनकी आपत्ति के बावजूद जरूरी यही है कि मनसुख की हत्या की भी जांच यही एजेंसी करे। सचिन वझे की तरफदारी संजय राउत के साथ खुद उद्धव ठाकरे भी कर रहे हैं। उनकी शिकायत है कि विपक्ष सचिन को ओसामा बिन लादेन की तरह पेश कर रहा है। जिसे खुद उनकी सरकार ने निलंबित किया हो, उसे किस रूप में पेश किया जाए? यह सवाल भी कई सवाल खड़े करता है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि जिस सचिन वझे के सहारे अर्नब गोस्वामी और कंगना रनोट को तंग किया गया, क्या उसी के जरिये मुकेश अंबानी को भी परेशान करने की कोशिश हो रही थी? क्या यह संभव है कि यह काम सचिन वझे अपनी मर्जी से कर रहा हो? पता नहीं सच क्या है, लेकिन यह सबको पता है कि राहुल गांधी मुकेश अंबानी को लांछित करने में जुटे हुए हैं।

मुंबई पुलिस के साथ महाराष्ट्र सरकार की फजीहत

एक अर्से से राहुल गांधी किन्हीं अज्ञात कारणों से अंबानी-अदाणी को खलनायक साबित करना चाह रहे हैं। कहना कठिन है कि सचिन वझे की गिरफ्तारी से इन कारणों का निवारण हो सकेगा या नहीं, लेकिन यह कहने में कठिनाई नहीं कि मुंबई पुलिस के साथ महाराष्ट्र सरकार की जमकर फजीहत हो रही है। वैसे तो इसके लिए वही दोषी हैं, लेकिन यदि पुलिस सुधार लागू हो गए होते तो शायद ऐसी खतरनाक अंधेरगर्दी देखने को नहीं मिलती। जितना यह सही है कि राज्य सरकारें पुलिस सुधार लागू करने के लिए इच्छुक नहीं, उतना ही यह भी कि केंद्र सरकार भी इन सुधारों को अपनाने के लिए तैयार नहीं। नि:संदेह बीते छह सालों में मोदी सरकार ने कई उल्लेखनीय काम किए हैं, लेकिन पुलिस सुधार के मोर्चे पर कुछ नहीं किया गया। इसी का नतीजा है कि सचिन वझे जैसे लोग पुलिस की बदनामी का कारण बन रहे हैं। नौकरी छोड़ राजनीतिक दल की सदस्यता ग्रहण कर चुके सचिन वझे की बहाली यह और अच्छे से बताती है कि राज्य सरकारें पुलिस सुधार क्यों नहीं करना चाहतीं? अच्छा हुआ कि वह गिरफ्तार हो गया, लेकिन कल्पना करें कि यदि वह एनआइए के हत्थे नहीं चढ़ता तो क्या होता?

किसान आंदोलन पर अपनों से ही घिरने लगी केंद्र सरकार, सुब्रमण्यन स्वामी ने पीएम मोदी को बनाया निशाना

केंद्र सरकार किसान आंदोलन पर अपनों से भी घिरने लगी है। मोदी सरकार के नियुक्त राज्यपाल से लेकर बीजेपी नेता तक, किसान आंदोलन पर नरमी बरतने की सलाह सरकार को दे रहे हैं। सबका कहना है कि केंद्र सरकार को किसानों की मांगों पर गौर करना चाहिए और उसे उचित मांगों के मुताबिक तीनों नए कृषि कानूनों को संशोधित करने से भी नहीं हिचकना चाहिए। इसी क्रम में बीजेपी के दिग्गज नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने पीएम मोदी पर ही निशाना साधा तो मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने आज फिर सरकार की कड़ी आलोचना की। आइए जानते हैं कौन-कौन से अपने, किसान आंदोलन पर मोदी सरकार को घेर रहे हैं…

चीन पर नरम तो किसानों पर गरम क्यों मोदी: स्वामी

बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने कहा यह कहकर पीएम मोदी की आलोचना की है कि वो चीन की अकड़ के आगे तो झुक रहे हैं, लेकिन किसानों की मांगों पर नरम नहीं हो रहे। स्वामी ने कहा, “चीन की भाव-भंगिमा अब तक ठीक नहीं है, फिर भी मोदी उसके साथ रिश्ते दोबारा सामान्य करने करने जा रहे हैं। चीन के साथ व्यापार भी सामान्य स्तर पर आ रहा है और राष्ट्रपति शी (जिनपिंग) जल्द ही हमारे सरकारी अतिथि होंगे। लेकिन, वो (मोदी) किसानों से कड़ाई से निपटना चाहते हैं। हजारों किसान खुली जगह में सत्याग्रह कर रहे हैं। साहस का ऐसा एकतरफा प्रदर्शन क्यों?”

सबसे कड़े आलोचक सत्यपाल मलिक

किसान आंदोलन पर सरकार की सबसे कड़ी आलोचना मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक कर रहे हैं। उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंचों से मोदी सरकार की आंदोलनकारी किसानों के प्रति कड़े रुख पर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने भी कहा कि कुतिया भी मर जाए तो हमारे नेताओं का शोक संदेश आता है, लेकिन 250 किसानों की मौत पर किसी ने चूं तक नहीं बोला है। उन्होंने कहा कि किसानों की मौत पर चुप्पी संवेदनहीनता दिखाती है। मलिक दिल्ली से डिडवाना जाते वक्त राजस्थान के झुंझुनूं में रुके और एक निजी कार्यक्रम में ये बातें कहीं। इससे पहले, 15 मार्च को उन्होंने उत्तर प्रदेश के बागपत में यहां तक कहा कि किसान यूं ही वापस नहीं लौटने वाले हैं। उन्होंने केंद्र सरकार को नसीहत दी कि वो किसानों की बात मान ले। 

किसानों के हाथ में ही सौंप दें कानून: चौधरी बीरेंद्र सिंह

एक और बीजेपी नेता और मोदी सरकार में मंत्री रहे चौधरी बिरेंद्र सिंह भी किसान आंदोलन का समर्थन कर चुके हैं। उन्होंने केंद्र सरकार को कहा कि वो तीनों नए कृषि कानून आंदोलनकारी किसानों को सौंपकर पूछे कि इनमें क्या-क्या सुधार होने चाहिए। जिंद के नरवाणा में किसान नेता सर छोटू राम की जंयती के मौके पर आयोजित समारोह में कहा कि सरकार को चाहिए कि वो कानून में बदलावों को लेकर किसान के साथ बातचीत करे। उन्होंने कहा, “अमेरिका में 44 साल पहले 1,500 ट्रैक्टर सड़कों पर आ गए थे और अमेरिकी सरकार को कानून में संशोधन करना पड़ा था। अब आप समझ सकते हैं।”

ग्वालियर सहित आठ शहरों में आज से रात 10 बजे बंद होंगे बाजार, भोपाल और इंदौर में नाइट कर्फ्यू

होली-रंगपंचमी मिलन समारोह पर राज्य सरकार ने लगाई रोक

व्यापार मेला; मास्क नहीं पहन रहे
सैलानी, संक्रमण काे आमंत्रण

प्रदेश में कोरोना संक्रमण के तेजी से बढ़ते मामलों के बाद भोपाल और इंदौर में बुधवार से नाइट कर्फ्यू लागू करने के साथ ही होली-रंगपंचमी पर होने वाले मेले, उत्सव और मिलन समारोह पर भी राज्य सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है।

यह प्रतिबंध भोपाल-इंदौर के साथ दस जिलों ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, रतलाम, छिंदवाड़ा, बुरहानपुर, बैतूल और खरगौन में लागू रहेगा। ग्वालियर सहित इन जिलों में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक दुकानें-व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहेंगे। इसके साथ ही यहां खुले मैदान में होने वाले सामाजिक, शैक्षणिक, राजनीतिक, धार्मिक, मनोरंजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम व खेल आयोजनों में भी लोगों की संख्या 100 से अधिक नहीं होगी। होली-रंगपंचमी पर व्यक्तिगत आयोजनों को कहीं नहीं रोका जाएगा, लेकिन जुलूस नहीं निकाले जा सकेंगे। खुले स्थान के बड़े कार्यक्रम नहीं होंगे। कोरोना की समीक्षा के बाद मंगलवार को राज्य सरकार ने यह व्यवस्था कर दी।

कार्रवाई : मास्क नहीं लगाने पर जुर्माने के साथ होगी ओपन जेल
जिन जिलों में अधिक मामले सामने आ रहे हैं, उनमें ओपन (खुली) जेल और मास्क न लगाने पर फाइन की व्यवस्था लागू रहेगी। यह कुछ समय के लिए मास्क न लगाने वाले व्यक्ति को मूवमेंट से रोकने की व्यवस्था है।

विधानसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण विधानसभा की कार्यवाही मंगलवार को बजट सहित अन्य विधेयक पारित करने के बाद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ से चर्चा के बाद यह फैसला लिया। सत्र के दौरान पांच विधायक व विधानसभा के कई अधिकारी-कर्मचारी भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।

इन्हें रहेगी छूट: दवाइयों, राशन और खानपान की दुकानों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। गैर आवश्यक आवा-गमन बंद रहेंगे। केवल अस्पताल, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन आने-जाने के लिए आवागमन की अनुमति होगी।

ग्वालियर: मार्च में पहली बार 1320 सैंपल की जांच, 32 नए मरीज मिले
जिले में कोरोना संक्रमण फिर से बढ़ने लगा है। मार्च में मंगलवार को 1320 सैंपल की जांच हुई। इनमें 32 लाेग संक्रमित पाए गए हैं। मंगलवार को संक्रमित मिले लाेगाें में से 15 की रिपाेर्ट जीआरएमसी की वायरोलॉजिकल लैब से, 4 की जेएएच के रेपिड एंटीजन टेस्ट में और 5 की जिला अस्पताल मुरार के रेपिड एंटीजन टेस्ट में आई है। जबकि प्राइवेट लैब की जांच में 6 लाेग संक्रमित मिले हैं। जिले में 24 मार्च 2020 से अबतक 18304 कोरोना संक्रमित मरीज मिल चुके हैं। इनमें से 310 लोगों की मौत कोरोना के कारण हो चुकी है।

छापामार कार्यवाही में नकली दूध बनाते पकड़े गए मिलावट खोर, की बड़ी संख्या में अमानक सामग्री बरामद

भिण्ड । मिलावटखोरी करने वाली डेरियों पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने बड़ी सफलता हाँसिल की है। हजारों लीटर दूध किया बरामद। मंगलवार देर शाम पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार सिंह के निर्देशन में डीएसपी हेडक्वार्टर मोती लाल कुशवाहा ने अपने दल के साथ हरिओम दूध डेयरी पर छापामार कार्यवाही करते हुए वहाँ से माल्टोस पावडर सहित बड़ी माना मात्रा में अमानक सामग्री जप्त की गई है। वही 25000 लीटर नकली दूध भी पकड़ने की खबर है। डेयरी पर छापा मारने के बाद पुलिस ने फूड विभाग के अधिकारियों को बुलाया और जानकारी के अनुसार कार्रवाई देर रात तक की जाती रही।
डीएसपी मोतीलाल कुशवाहा के बताया अभी एक ताला बन्द गोदाम को खोला जाना है जिसमे बड़ी मात्रा में नकली दूध बनाने की अमानक सामग्री मिलने की संभावना प्रबल है। यहाँ बता दें ज़िला पुलिस ने मिलावट खोरी पर अंकुश लगाने के लिए ताबड़तोड़ कार्यवाहियां की जा रहा है। विगल दिनों अटेर रोड पर लक्ष्मी डेयरी से भी बड़ी मात्रा में अमानक सामग्री पुलिस ने बरामद की थी जिससे नकली दूध बनाया जाता था । पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार सिंह कहते हैं कि प्रदेश में मिलावट खोरी पर अंकुश लगाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी संवेदनशील व गंभीर है। इसी के मद्देनजर निर्देषों का पालन करते हुए किसी भी कीमत पर मिलावट खोरी बर्दाश्त नहीं करूंगा।

मिलावट खोरी का कड़े एक्शन मंहगा पड़ा था। कलेक्टर को,,,,
तकरीबन 15 दिन पहले गोहद कस्बे में जब नकली मसाले बनाने की सामग्री फ़ूड विभाग जिला प्रशासन की टीम ने पकड़ी थी । इत्तेफाकन वह व्यापारी सत्ता पक्ष पार्टी से ताल्लुक रखने वाला निकला था। नेताओं की लाख सिफारिश के बाद भी कार्रवाई नहीं रुक सकी थी। नतीजतन कुछ दिन बाद तत्कालीन कलेक्टर डॉ वीरेंद्र सिंह रावत का स्थानांतरण कर दिया गया था। फिर हुआ था चर्चाओं का बाजार गर्म कि कलेक्टर का स्थानांतरण मिलावट माफिया के द्वारा ही करवाया गया है।

अमरिंदर सिंह और सिद्धू के लंच पर टिकी निगाहें, पंजाब के उप मुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं नवजोत सिंह

चंडीगढ़
पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू बुधवार को लंच पर साथ होंगे। इस मुलाकात को पंजाब की सियासत की बड़ी मुलाकात माना जा रहा है। कांग्रेस नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब का उपमुख्यमंत्री बना सकती है। कहा जा रहा है कि यही एक विकल्प है कि पार्टी अस्थिर नेता को शांत कर सकती है और विधानसभा चुनाव से पहले राज्य इकाई में चीजों का निपटान कर सकते हैं।

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के डेप्युटी सीएम के रूप में सिद्धू मिलकर राज्य के लिए अच्छा काम करेंगे। अमरिंदर सिंह सक्रिय रूप से सीएम का चेहरा होंगे क्योंकि कांग्रेस राज्य इकाई में कोई अशांति नहीं चाहती।

गांधी परिवार के हैं नजदीकी

जब से सिद्धू अमरिंदर सिंह सरकार से बाहर हुए हैं, कांग्रेस उन्हें मनाने की कोशिश कर रही है। क्रिकेटर से राजनेता बने सिद्धू के राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ अच्छे संबंध हैं। इस तथ्य के अलावा उन्हें एक प्रभावी प्रचारक के रूप में देखा जाता है, जो पार्टी की मदद कर सकते हैं।

सिद्धू को नहीं मनाया तो कांग्रेस को है यह डर
कांग्रेस को लगता है कि सिद्धू अगर किसी प्रतिद्वंद्वी के साथ जुड़ते हैं, तो पार्टी को नुकसान पहुंचाने की मारक क्षमता रखते हैं, भले ही यह व्यक्तिगत रूप से उनकी बहुत मदद न करें। वह अकाली दल में शामिल नहीं हो सकते हैं, आम आदमी पार्टी निश्चित रूप से उनके लिए एक विकल्प है। आम आदमी पार्टी ने चुनाव प्रचार के लिए पहले से ही चुनाव प्रचार के लिए प्रशांत किशोर को काम दिया है। इसके अलावा उन्हें राज्य सरकार में सलाहकार भी बनाया गया है। वह पहले चुनाव में भी सलाहकार थे।

बयान बताते हैं कि नाराज हैं सिद्धू
हाल ही में, सिद्धू ने पंजाब के वित्त राज्य की आलोचना की है और राज्य सरकार को केंद्रीय कृषि कानूनों को बेअसर करने के लिए वैकल्पिक बिलों का मसौदा तैयार नहीं करने के लिए भी नारा दिया। बयानों में भी व्यापक रूप से उन्हें पार्टी के असंतुष्ट नेता के तौर पर देखा गया।

सांसद रामस्‍वरूप शर्मा ने गले में फंदा लगाकर की खुदकुशी कर ली बीमारी के कारण डिप्रेशन में थे सांसद, चारधाम यात्रा पर थीं पत्‍नी

मंडी, ।  हिमाचल प्रदेश के मंडी संसदीय क्षेत्र से सांसद 62 वर्षीय रामस्‍वरूप शर्मा ने दिल्ली स्थित अपने सरकारी आवास में गले में फंदा लगाकर की खुदकुशी कर ली। बताया जा रहा है उनका दरवाज़ा अंदर से बंद था। पुलिस ने दरवाज़ा तोड़कर शव बाहर निकाला। वह कुछ समय से अस्‍वस्‍थ थे। लेकिन अब उनके स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार बताया जा रहा था। लेकिन इस बीच उनके खुदकुशी करने की खबर आई है। बताया जा रहा है रामस्वरूप शर्मा अपनी बीमारी की वजह से डिप्रेशन में थे। वह हृदय रोगी थे व तीन साल पहले स्‍टेंट डाले गए थे। लेकिन उसके बाद वह पूरी तरह स्‍वस्‍थ नहीं हो पाए और लगातार कमजोर हो रहे थे। मंडी के शिवरात्रि महोत्सव के शुभारंभ पर 12 मार्च को जब लोगों ने उनकी हालत देख हर कोई स्‍तब्‍ध था। उसी दिन शाम को सांस्कृतिक संध्या में भी उनके स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर नेताओं में चर्चा बनी हुई थी।

सांसद की पत्नी चंपा शर्मा चारधाम की यात्रा पर गई थीं। उनको सांसद के निधन की जानकारी जयपुर में मिली। चंपा शर्मा वहां से सीधे दिल्ली के लिए निकलीं। सांसद अपने तीनों भाइयों में दूसरे स्थान पर थे। बड़े भाई का नाम त्रिलोक शर्मा है तथा रामस्‍वरूप से छोटे सुरेंद्र शर्मा का 2006 में निधन हो गया है। सांसद रामस्वरूप शर्मा के घर पर केवल बड़ी बहू ही मौजूद है। बड़ा बेटा दिल्ली के लिए रवाना हो गया है।

खुद को बताते थे मोदी का सुदामा

रामस्वरूप शर्मा खुद को मोदी का सुदामा बताते थे, उन्‍होंने मंडी का नाम छोटी काशी के रूप में उभारा। रामस्‍वरूप शर्मा ने 1985 तक एनएचपीसी में नौकरी की थी व कबड्डी के खिलाड़ी भी रहे। चंबा में इसी दौरान आरएसएस से जुड़ गए व प्रचारक बन गए। उसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्‍हें भाजपा का टिकट मिला।

वीरभद्र सिंह की पत्‍नी को हराकर पहुंचे थे संसद

रामस्‍वरूप शर्मा इस बार मंडी संसदीय क्षेत्र से दूसरी बार सांसद बने थे। 2014 में नरेंद्र मोदी की लहर के बीच उन्‍होंने कांग्रेस कद्दावर नेता एवं पूर्व मुख्‍यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्‍नी प्रतिभा सिंह को हराया था। सामान्‍य परिवार से संबंध रखने वाले रामस्‍वरूप शर्मा मूलत मंडी जिला के जोगेंद्रनगर के रहने वाले थे। संगठन के कार्यों में भी वह सक्रिय रहते थे। जिला मंडी के भाजपा अध्‍यक्ष रणवीर सिंह ने बताया कि सांसद के निधन की सूचना मिली है। पार्टी पदाधिकारी व कुछ उनके करीबी लोग दिल्‍ली के लिए रवाना हुए।

मंडी शिवरात्रि महोत्‍सव की सांस्‍कृतिक संध्‍या रद

सांसद के गृह जिला में चल रहे मंडी शिवरात्रि महोत्‍सव की सांस्‍कृतिक संध्‍या व कार्यक्रम रद कर दिए गए हैं। सात दिवसीय शिवरात्रि महोत्‍सव के शुभारंभ कार्यक्रम में सांसद जयराम ठाकुर के साथ मौजूद थे। लेकिन अब अचानक उनके निधन की खबर से जिलावासी भी शोक में हैं।