साइकिल पर निकले ऊर्जा मंत्री, खुला चेंबर देख हुए नाराज बोले- लौटकर आऊं तो ढक्कन लगा मिले

शनिवार को प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने साइकिल से वार्ड परिक्रमा की है। यहां गेंडेवाली सड़क पर खुला चेंबर देखकर वह काफी नाराज हुए हैं। साइकिल साइड में खड़ी की नगर निगम के अफसरों की क्लास ली। यहां वह बोले हैं कि लौटकर आऊंगा तब तक ढक्कन लगा मिलना चाहिए। इसके बाद वह आगे निकल गए। इस दौरान ऊर्जा मंत्री बोले हैं कि शहर को पॉल्यूशन फ्री बनाने लिए ज्यादा से ज्यादा साइकिल का उपयोग करें। इससे आपकी सेहद और पर्यावरण दोनों अच्छे रहेंगे।

प्रदेश सरकार में ऊर्जा मंत्री और सिंधिया खेमे के खास प्रद्युम्न सिंह तोमर दो दिन के ग्वालियर प्रवास पर हैं। दो दिन में ग्वालियर में विकास के लिए वह 30 से ज्यादा योजनाओं व कार्यक्रक का शुभारंभ करेगे। पर शनिवार सुबह उन्होंने अपने अभियान की शुरूआत एक अलग ही अंदाज में की है। वह कांचमिल में अपने घर से साइकिल चलाकर निकले हैं। वह हजीरा, तानसेन नगर होते हुए गेंडेवाली सड़क, घोसीपुरा तक गए हैं। वह अपनी विधानसभा क्षेत्र में घूमे हैं और लोगों से उनकी समस्याओं को जाना और उनका निराकरण किया है।

साइकिल पर वार्ड भ्रमण करते हुए ऊर्जा मंत्री गेंडेवाली सड़क पर पहुंचे हैं। यहां लापरवाही से चेंबल खुला पड़ा था। जिससे लोगों की जान को खतरा था। यह देखकर ऊर्जा मंत्री वहीं रूक गए। लोगों ने उन्हें बताया कि कई दिन हो गए नगर निगम के अफसरों को बताते-बताते पर यह सही नहीं हो रहा है। इस पर वह ऊर्जा मंत्री काफी नाराज हुए। मौके पर ही नगर निगम के अफसरों को बुलाकर फटकार लगाई है और जल्द इसे बनवाने के लिए कहा है।

जब ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह से पूछा गया कि वह साइकिल पर इसलिए निकले हैं क्योंकि उनकी सरकार ने पेट्रोल के दाम 100 रुपए प्रति लीटर के लगभग कर दिए हैं। इसे अपनी ही सरकार का सांकेतिक विरोध माना जा सकता है। इस पर ऊर्जा मंत्री ने कहा है कि वह इसे विरोध न माने। यह मैं अपने लिए कर रहा हूं। इससे दो बातें होंगी मेरी सेहद अच्छी रहेगी और मेरे शहर में पॉल्यूशन भी कम होगा। साथ ही मेरे साइकिल से निकलने पर वह लोग भी मुझसे मिल सकते हैं जो मेरे घर और दफ्तर नहीं आ सकते हैं।

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ममता को झटका:दिनेश त्रिवेदी BJP में हुए शामिल, नड्डा बोले- सही आदमी गलत पार्टी मे थे

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले ममता सरकार को करारा झटका लगा है। TMC के पूर्व राज्यसभा सांसद और ममता बनर्जी के करीबी दिनेश त्रिवेदी ने शनिवार को भाजपा का दामन थाम लिया। त्रिवेदी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा की मौजूदगी में शामिल हुए। इस दौरान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद थे।

12 फरवरी को दिया था इस्तीफा
त्रिवेदी को ममता का बेहद करीबी नेता माना जाता है। उन्होंने 12 फरवरी को बजट सत्र के दौरान खुद के इस्तीफे का ऐलान कर दिया था। वह पिछले 2 महीने से तृणमूल कांग्रेस से दूरी बनाकर चल रहे थे। TMC ने त्रिवेदी के फैसले को पार्टी और जनता के साथ विश्वासघात बताया था।

‘खेला’ खेलते-खेलते ममता अपने आदर्श भूलीं : त्रिवेदी
भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने तृणमूल कांग्रेस को नकार दिया है। राज्य की जनता तरक्की चाहती है, वो हिंसा और भ्रष्टाचार नहीं चाहती। राजनीति कोई ‘खेला’ नहीं होता, ये एक गंभीर चीज है। खेलते-खेलते वो (ममता बनर्जी) आदर्श भूल गई हैं।

त्रिवेदी सही व्यक्ति, गलत पार्टी में थे : नड्‌डा
वहीं, नड्‌डा ने कहा कि जब मैं त्रिवेदी की बात करता था, तो मैं हमेशा कहता था कि वे एक अच्छे व्यक्ति हैं, लेकिन गलत पार्टी में हैं। इसे वे खुद भी महसूस करते थे। अब सही व्यक्ति सही पार्टी में है, जहां हम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उनका उपयोग देश की सेवा में कर सकेंगे।

सिंधिया रियासत कालीन 109 साल पुरानी सरकारी प्रेस होगी बंद

ग्वालियर। शहर में मौजूद 109 साल पुरानी सरकारी प्रेस जल्द बंद होने वाली है. सिंधिया घराने के द्वारा 1912 में स्थापित इस प्रेस में जयाजी प्रताप अखबार प्रकाशित होता था. इस अखबार में हुक्मराजे और गजट का प्रकाशन होता था. बाद में यहां निर्वाचन की गोपनीय सामग्री सहित सरकारी दस्तावेज का प्रकाशन किया जाने लगा. यहां नगरीय निकाय चुनाव की 30 हजार डायरियों का प्रकाशन का काम चल रहा है, लेकिन जैसे ही सरकार के इस आदेश की खबर प्रेस में काम करने वाले लोगों को लगी तो उनके चेहरे पर मायूसी छा गई है. वहीं देश के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं.
दरअसल ग्वालियर की सरकारी प्रेस के साथ इंदौर, रीवा की सरकारी प्रेस भी बंद करने का आदेश जारी किए हैं. ग्वालियर सहित इंदौर और रीवा की सरकारी प्रेस में कुल 1286 पद स्वीकृत हैं, इनमें से 495 अभी खाली है खाली पदों को सरकार ने खत्म कर दिया है. मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर, रीवा और ग्वालियर की सरकारी प्रेस बंद करने का आदेश दिया है. सरकार की तरफ से कहा गया है कि ‘सरकारी कार्य ऑनलाइन होने से और रॉ मटेरियल महंगा होने से यह सरकारी प्रेस घाटे में जा रही है. इस कारण इन को बंद किया जा रहा है, लेकिन ऐसे में सरकारी पैसों में काम करने वाले कर्मचारियों की भविष्य पर रोजी-रोटी का संकट लगा है. मध्य प्रदेश की इंदौर और रीवा सहित पुरानी ग्वालियर की सरकारी प्रेस में 160 कर्मचारी कार्यरत है. ग्वालियर की सरकारी प्रेस 109 साल पुरानी है और इस प्रेस की बंद होने की सूचना मिलते ही कर्मचारी निराश हैं और वह आंदोलन करने के लिए तैयार है. कर्मचारियों का कहना है कि ‘सरकार ने इस देश को बंद करने का आदेश जारी किया है, लेकिन इस प्रेस में काम करने वाले कर्मचारी क्या करेंगे और उनके परिवार का भरण पोषण कैसे होगा.’

दमोह के जबेरा से विधायक की जन्मदिन पार्टी में चली गोलियां, दो की मौत

दमोह,  दमोह जिले में लगातार हत्याओं का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है। पिछले दिनों नरसिंहगढ़ में दिनदहाड़े एक अधेड़ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वहीं शुक्रवार की रात जबेरा विधायक धर्मेंद्र सिंह की जन्मदिन की पार्टी के दौरान नोहटा थाना क्षेत्र अंतर्गत वनवार चौकी खेर माता मंदिर के पास गोली चलने से दो लोगों की मौत हो गई। हालांकि घटना के समय विधायक वहां नहीं थे, वह रात करीब 8 बजे वहां से जा चुके थे। नोहटा थाना प्रभारी सत्येंद्र सिंह राजपूत ने बताया कि यह घटना शुक्रवार रात्रि करीब 10 बजे की है, दो पक्षों के विवाद के चलते मोनू उर्फ जोगेंद्र राजपूत ओर अरविन्द जैन विधायक प्रतिनिधि की घटना स्थल पर मौत हो गई। बताया गया विधायक प्रतिनिधि अरविंद पिता स्वर्गीय ओमप्रकाश (गुड्डा) जैन 30 जिसका नाम वनवार चौकी में पुरानी हिस्ट्री शीटर गुंडा सूची में दर्ज है और जिला वदल की कार्यवाही कलेक्टर के समक्ष जारी थी।

जानकारी के अनुसार जबेरा विधायक धर्मेंद्र सिह लोधी की जन्मदिन पार्टी का आयोजन कार्यकताओं के द्वारा ग्राम बनवार में रखा गया था। जिसमे विधायक 7 बजे पहुच गए थे। पार्टी खत्म होने के बाद विधायक वहां से निकल गए। इसके कुछ घंटों बाद अरविंद जैन के द्वारा कल्याण सिंह उर्फ (कलु) ठाकुर को गालियां दी जा रही थी। उसी समय हल्ला सुन पड़ोसी मोनू उर्फ जोगेंद्र पिता गोविंद सिंह राजपूत (30) बीच बचाव करने पहुच गया। तभी किसी ने गोली चला दी और दोनों लोग घायल हो गए। उन्हें तत्काल जिला अस्पताल लाया गया जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।

ग्वालियर में अनूठी लूट : कारोबारी की पत्नी के पैर छूकर लुटेरा बोला- आप मां जैसी हैं पर माफ करना मेरी बहन की शादी है…

ग्वालियर
मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में लूट की अनूठी वारदात सामने आई है। एक होजियरी कारोबारी के घर में घुसे लुटेरे ने उनकी पत्नी के पैर छुए और बोला- आप मेरी मां जैसी है, लेकिन माफ करना मेरी बहन की शादी है। इसके बाद लुटेरे ने टॉय गन व चाकू के दम पर कारोबारी की पत्नी व नौकरानी को बंधक बनाया और उनके हाथ-पैर बांधकर करीब चार लाख का माल ले उड़ा। 

डिलिवरी बॉय बनकर आया, पहले लूटा बाद में छूए पैर
लूट की यह अनूठी घटना ग्वालियर की समाधिया कॉलोनी के कृष्णा एनक्लेव दिलीप कुकरेजा के घर में हुई। लुटेरा डिलिवरी बॉय बनकर उनके घर में घुसा। उसने कुकरेजा की पत्नी वंदना को खिलौना पिस्तौल अड़ाई और हाथ-पैर बांधकर मुंह पर टेप लगा दिया। इसी तरह उसने नौकरानी सुनीता को चाकू दिखाकर धमकाया। लूटपाट करने के बाद बदमाश ने कारोबारी की पत्नी के पैर छूए। 

महाराज बाड़ा पर है दुकान
कारोबारी कुकरेजा की ग्वालियर के प्रसिद्ध महाराज बाड़ा पर होजियरी की दुकान है। गुरुवार सुबह दिलीप कुकरेजा और बेटा उमेश दुकान पर निकल गए थे। घर पर पत्नी वंदना और नौकरानी सुनीता थे। शाम करीब चार बजे एक युवक डिलिवरी बॉय बनकर आया। उसने आते ही वंदना पर पिस्तौल तान दी। इस पर दोनों के बीच झूमाझटकी हुई। इसी बीच लुटेरे की पिस्तौल गिरी तो टूट गई। इसके बाद उसने चाकू निकाल लिया। वंदना को काबू में करने के बाद उसने उनके हाथ-पैर बांध दिए। इसके बाद घर में से चार लाख रुपये का सामान ले उड़ा।  ग्वालियर के एएसपी सतेंद्र सिंह तोमर के अनुसार आसपास के इलाके के सीसीटीवी फुटेज देख कर बदमाश की तलाश की जा रही है। लूट के सामान में दो लाख पचास रुपये नकद, आभूषण व अन्य सामग्री है। 

हरियाणा की छात्रा ने राकेश टिकैत को कर दिया निरुत्तर, तीखे सवाल पूछे तो छीन लिया माइक

हिसार/झज्‍जर, । कृषि कानूनों में सुधार की मांग को लेकर कई जगह आंदोलन चल रहा है। मगर हरियाणाा के झज्‍जर जिले के पास ढांसा बॉर्डर पर चल रहे धरने में शुक्रवार शाम एक अलग ही वाकया देखने को मिला। आंदोलनकारी किसानों को संबोधित करने पहुंचे किसान नेता राकेश टिकैत से एक छात्रा ने ऐसा सवाल पूछ लिया कि हंगामा हो गया। मंच पर पहुंची छात्रा ने जब माइक मांगा तो दे दिया गया मगर जैसे ही लड़की ने राकेश टिकैत से 26 जनवरी के दिन ट्रैक्‍टर परेड के दौरान दिल्‍ली में हुई हिंसा के बारे में सवाल पूछा तो माहौल गरम हो गया। दरअसल, राकेश टिकैत शुक्रवार को ढांसा बॉर्डर पर विनोद गुलिया की अध्यक्षता में चल रहे धरने में लोगों से मुलाकात करने और अपना संदेश देने पहुंचे थे।

इस दौरान पेंट शर्ट पहने युवा लड़की ने कहा कि राकेश टिकैत ने ये तो बता दिया कि कृषि कानूनों से कितना नुकसान होगा। मगर ये कह रहे हैं कि जब तक सरकार मांगें नहीं मानती आंदोलन खत्‍म नहीं होगा। मैं पूछना चाहती हूं अगर किन्हीं परिस्थितियों में सरकार और किसानों के दोनों पक्ष में एक फीसद या फिर .005 फीसद भी पीछे नहीं हटे तो फिर समाधान किस बात पर होगा। यह जवाब सभी को चाहिए। धरने का समाधान मिलना चाहिए। ताकि, युवा भी परेशान नहीं हो और किसान भी परेशान नहीं हो।

युवा लड़की ने कहा कि मैं पूछना चाहती हूं कि दिल्‍ली में 26 जनवरी के दिन जो हिंसा हुई उसके लिए कौन जिम्‍मेदार है। अगर प्रदर्शनकारी जिम्‍मेदार नहीं है, सरकार जिम्‍मेदार नहीं है तो कौन जिम्‍मेदार है। 26 जनवरी जैसी घटना में किसका हाथ था, हमें नहीं पता। लेकिन, हमारे समाज, हमारे मेल-मिलाप पर इसका क्या असर पड़ रहा है। यह देखा जाना चाहिए। बात पूरी होती इससे पहले ही वहां खड़े किसान नेताओं ने युवा लड़की से ही सवाल पूछने शुरू कर दिए। माइक भी बंद कर दिया और युवा लड़की का नाम पूछा गया। लड़की ने बेबाकी से अपना नाम भी बता दिया।

लड़की ने माइक बंद होने के बाद भी अपनी बात जारी रखी और कहा कि अगर देश में 26 जनवरी जैसी हिंसा होगी तो देश का युवा सवाल तो पूछेगा ही। इस दौरान एक महिला भी मंच पर आ गई और युवा लड़की से सवाल करने लगी। युवा लड़की इस दौरान सभी से अकेली ही अपनी बात कहती रही और कहा कि मैंने किसी को दोषी नहीं कहा, बस ये सवाल किया है कि आखिर इस तरह की घटनाओं के लिए जिम्‍मेदार कौन है। मगर लड़की की बात नहीं सुनी गई।

छात्रा कहती रही कि हम टिकैत जी से जवाब चाहते है की धरने का समाधान कब तक होगा। हालांकि, जब यह छात्रा बोल रही थी तो उस दौरान भी बीच-बीच में कहा जा रहा था कि माइक ले लो। माइक को बंद कर दो। छात्रा को माइक किसने दिया। लेकिन, मंच पर पहुंची छात्रा ने करीब अढ़ाई मिनट के इस घटनाक्रम में समाज की पीड़ा और युवाओं के दर्द को बड़े बढ़िया ढंग से सभी के समक्ष रखा।

छात्रा के सवाल पूछने की वीडियो हुई वायरल

मंच पर सवाल पूछने के दौरान हुए इस वाकये की वीडियो भी वायरल हो गई है। दरअसल, पहले यह लड़की किसान आंदोलन के समर्थन में बोली। फिर उसने मिले जुले सवाल करना शुरू किया और इसके बाद 26 जनवरी को दिल्‍ली में हुई हिंसा पर भी सवाल पूछ लिया। इसके बाद मामला गरमा गया। हालांकि, राकेश टिकैत ने बाद में अपनी बात भी रखी। जो कि काफी सीमित रही और लड़की को अपने सवालों का जवाब नहीं मिला।

26 जनवरी पर ट्रैक्‍टर परेड के दौरान हुई थी हिंसा

बता दें कि 26 जनवरी को ट्रैक्‍टर परेड के दौरान दिल्‍ली में हिंसा हो गई थी। कुछ प्रदर्शनकारी लाल किला में पहुंच गए थे और यहां लगे पोल पर धर्म विशेष झंडा फहरा दिया गया था। इस मामले के बाद देशभर में विवाद हो गया था। मगर राकेश टिकैत और गुरनाम चढूनी ने इसे सरकारी की एक सोची समझी साजिश बताया था। मामले में पंजाबी फिल्‍म अभिनेता दीप सिद्धू का नाम भी सामने आया था। संयुक्‍त किसान मोर्चा ने भी कहा था कि इस घटना से किसानों को कोई लेना देना नहीं है। प्रदर्शनकारी किसानों के ट्रैक्‍टर भी तय रूट से अलग दिशा में चले गए थे और दिल्‍ली पुलिस से शाम तक झड़प होती गई।

सुप्रीम फैसला: प्रमोशन पर बढ़ा था पांच रुपये वेतन, 23 साल बाद दिल्ली पुलिस के हेड कान्सटेबल को मिला इंसाफ

साल 1995 में तंदूर हत्या मामले में सबसे पहले मौके पर पहुंचने वाले दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्सटेबल अब्दुल नजीर कुंजू को आखिरकार न्याय मिल गया है। 23 साल बाद कुंजू ने अपने विभाग के खिलाफ दायर मामला जीत लिया है।

दरअसल, मामले में मुख्य गवाह होने और बेहतरीन प्रदर्शन करने के चलते कुंजू का प्रमोशन किया गया था लेकिन सैलरी में सिर्फ पांच रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। अब इस मामले में कुंजू ने विभाग के खिलाफ जीत दर्ज की है और कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को दो महीने के अंदर उनकी वरिष्ठता को देखते हुए उन्हें सभी लाभ देने के निर्देश दिए हैं।

इस मामले में कुंजू की गवाही सबसे ज्यादा अहम थी क्योंकि वो कुंजू ही सबसे पहले मौका-ए-वारदात पर पहुंचे थे। इस मामले में दिल्ली युवा कांग्रेस के अध्यक्ष सुशील शर्मा अपनी पत्नी नैना साहनी की हत्या करने और फिर लाश को एक रेस्त्रां के तंदूर में जलाने के आरोप में दोषी पाया गया था। 

एक मीडिया संस्थान से बात करते हुए कुंजू ने बताया कि वह अपने विभाग की कार्यवाही से निराश थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बेहद संतुष्ट हैं। कुंजू ने बताया कि 1995 के तंदूर हत्या मामले में मेरे बेहतर प्रदर्शन की वजह से मेरा प्रमोशन तो हुआ लेकिन इंक्रिमेंट के तौर पर मेरा वेतन सिर्फ पांच रुपये बढ़ाया गया। उन्होंने आगे बताया कि पांचवें वेतन आयोग के बाद मेरा वेतन मेरे जूनियर से भी कम था। 

कुंजू ने बताया कि इस मामले में उन्होंने अपने एक वरिष्ठ अधिकारी से बात की लेकिन वहां भी कोई बात नहीं बनी, इसलिए आखिर में मैंने 2006 में सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) का रुख किया। कुंजू ने बताया कि साल 2011 में कैट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया लेकिन उनके विभाग ने फैसले को मानने की जगह दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। 

कुंजू अपने विभाग के इस व्यवहार से इतने टूट गए थे कि उन्होंने इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया और 2012 में दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी। कुंजू ने बताया कि उन्होंने अपने विभाग से स्वैच्छिक रिटायरमेंट ले लिया। 

कुंजू ने बताया कि मैं ही एक चश्मदीद गवाह था और मुझे अपना बयान बदलने के लिए दस लाख रुपये का ऑफर भी मिला था लेकिन मैंने मना कर दिया, इसके बाद मुझे कई तरह की धमकियां मिलने लगीं। लेकिन मेरे विभाग ने मेरी बहादुरी और मेरे काम की स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद मैंने दिल्ली पुलिस छोड़ दी।

कुंजू ने बताया कि साल 2013 में दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला भी मेरे पक्ष में आया था लेकिन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी। कुंजू के वकील अनिल सिंघल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कुंजू के पक्ष में अपना फैसला सुनाया है और दिल्ली पुलिस को कुंजू की वरिष्ठता के तौर पर एरियर और सभी लाभ देने के निर्देश दिए हैं।

किन्नरों के साथ मारपीट का वीडियो हुआ वायरल, हजीरा थाना इलाके के चार शहर का नाका की घटना

ग्वालियर। ग्वालियर के हजीरा थाना इलाके में किन्नरों के साथ मारपीट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है बताया गया है कि हजीरा इलाके के चार शहर का नाका इलाके में बने सोना गार्डन के पास का यह वीडियो है जिसमें कुछ युवक आॅटो में सवार किन्नरों के साथ लाठी-डंडों से मारपीट करते नजर आ रहे हैं। जिसके बाद किन्नरों ने आॅटो से निकलकर भागने की भी कोशिश की लेकिन इसके बाद भी उनकी मारपीट जारी रही इतना ही नहीं हमलावरों ने आॅटो चालक से भी मारपीट कर आॅटो में तोड़फोड की है। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस अब मामले की जंाच में जुट गई है हालंाकि अभी फरियादी पक्ष की ओर से पुलिस में मारपीट की शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

इंडिया ने किया Ramjet बूस्टर का सफल परीक्षण, मिसाइल को मिलेगी 5500 KM/H की स्पीड

भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने पांच मार्च यानी शुक्रवार की सुबह 10.30 बजे सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (Solid Fuel Ducted Ramjet – SFDR) का सफल परीक्षण किया है. यह एक प्रकार का बूस्टर इंजन है जो आगे चलकर भारत की मिसाइलों को ताकत देगा. कुछ दिन पहले भारत अस्त्र मिसाइल का सफल परीक्षण किया था. जिसके अगले वर्जन में यही बूस्टर इंजन लगाया जाएगा. 

ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से आज सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (Solid Fuel Ducted Ramjet – SFDR) का सफल परीक्षण किया गया है. यह पूरी तरह से स्वदेश में विकसित टेक्नोलॉजी है. रैमजेट इंजन लगने की वजह से मिसाइलों की गति काफी तेज हो जाएगी. इसका सबसे बड़ा फायदा यही होगा.

सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (Solid Fuel Ducted Ramjet – SFDR) की मदद से DRDO लंबी दूरी के एयर-टू-एयर मिसाइल (Air-To-Air Missile) को विकसित करने में मदद मिलेगी. इस इंजन की खास बात ये है कि इसके लगने के बाद मिसाइल उड़ते समय आवाज नहीं करेगी. इसके पीछे छूटने वाला धुआं भी दिखाई नहीं देगा. इससे दुश्मन को मिसाइल के आने की खबर तक नहीं लगेगी.

चीन और पाकिस्तान के साथ रक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर भारत ऐसी मिसाइल विकसित कर रहा है, जिससे भारतीय वायुसेना के विमान दुश्मन के विमान को हवा में 160 किलोमीटर दूर ही मार गिराएंगे. इस मिसाइल का नाम है बेयॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल अस्त्र (Beyond Visual Range Air-to-Air Missile ASTRA). इस मिसाइल की खासियत है इसकी रेंज, गति और दुश्मन को संभलने का मौका न देना.

इस मिसाइल का परीक्षण इस साल सितंबर में शुरू होगा. जो अगले साल तक खत्म हो जाएगा. इस मिसाइल का नाम रखा गया है  अस्त्र मार्क-2 (Astra Mark 2 Missile). इस मिसाइल की खासियत इसकी तेजी है. यह 4.5 मैक यानी 5556.2 किलोमीटर की गति से हमला करता है. यानी एक सेकेंड में 1.54 किलोमीटर की स्पीड. यह मिसाइल 2022 तक पूरी तरह से विकसित हो जाएगा. अस्त्र मार्क-3 मिसाइल में यही रैमजेट इंजन लगाया जाएगा.

फिलहाल ये तैयारी की जा रही है कि अस्त्र मार्क-2 (Astra Mark 2 Missile) को स्वदेशी फाइटर जेट LCA तेजस में लगाया जाए. इस जेट में फिलहाल 100 किलोमीटर रेंज तक की मिसाइलें लगी हैं. इस मिसाइल के लगने के बाद तेजस से इजरायली मिसाइल को हटा दिया जाएगा. अभी इजरायल की मिसाइल का आयात किया जाता है. जो अस्त्र मार्क-2 के आने के बाद हट जाएंगी.

भारतीय वायुसेना और नौसेना ने 288 अस्त्र मार्क-1 (Astra Mark 1 Missile) के ऑर्डर दिए हुए हैं. इस मिसाइल का उपयोग रूस में बने भारतीय फाइटर जेट सुखोई-30 एमकेआई (Su-30MKI) में किया जा रहा है. अस्त्र मिसाइल बनने के बाद भारत उन देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जो इस तरह की मिसाइलें बनाते हैं. ये देश हैं अमेरिका, रूस, फ्रांस और इजरायल.

अस्त्र मार्क-2 (Astra Mark 2 Missile) मिसाइल सुपरसोनिक फाइटर जेट्स के साथ लैस होने पर और ज्यादा घातक सिद्ध होगा. लंबी दूरी के काउंटर मेजर्स मिशन में दुश्मन के छक्के छुड़ा देगा. अस्त्र मार्क-2 (Astra Mark 2 Missile) में अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटर मेजर्स (ECCM) तकनीक लगाई गई है. ताकि ये दुश्मन के फाइटर जेट के संचार को बाधित कर दे. जब तक वह संभले तब तक उसका काम तमाम.

अस्त्र मार्क-2 (Astra Mark 2 Missile) की एक खासियत ये भी है कि ये पीछा करके मारता है. यानी एक बार दुश्मन का विमान टारगेट पर लॉक हुआ तो ये सामने से या पीछे से दौड़ा-दौड़ कर मार डालेगा. इस मिसाइल के पुराने वर्जन यानी अस्त्र मार्क-1 का उपयोग भारतीय वायुसेना मिग-29, मिग-29के, मिराज 2000, सुखोई-30 एमकेआई और तेजस एमके1/1A में कर रही है.

भविष्य में अस्त्र मार्क-2 (Astra Mark 2 Missile) का उपयोग LCA तेजस एमके-2, एमसीए और TEDBF में भी किया जाएगा. इसके बाद डीआरडीओ की तैयारी है अस्त्र मार्क-3 (Astra Mark 3 Missile) बनाने की. ये मिसाइल भी फिलहाल अंडर डेवलपमेंट है.

माना जा रहा है कि अस्त्र मार्क-3 (Astra Mark 3 Missile) 350 किलोमीटर रेंज की होगी. आपको बता दें कि अस्त्र मिसाइलें 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ सकती है. यानी जमीन से 66 हजार फीट की ऊंचाई पर भी दुश्मन के हमले को बर्बाद कर सकती हैं.