बजट सत्र: गेहूं-खाद घोटाले में शिवराज सरकार ने माना- चौकीदार ही चोर है, ग्वालियर में अवैध खनन का मामला उठा

बजट सत्र के चौथे दिन गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान मंदसौर और नीमच में ट्रांसपोर्टर द्वारा गेहूं तथा खाद को सोसाइटी तक पहुंचाने में हेराफेरी का मामला उठा। मामला मंदसौर से बीजेपी विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया ने उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि वेयरहाउस में चौकीदार का बेटा ही ठेकेदार है जिसने यह हेराफेरी की है। इसका जवाब देते हुए प्रदेश के सहकारिता मंत्री अरविंद सिंह भदौरिया ने कहा कि इस मामले में चौकीदार की संलिप्तता भी सामने आई है। ट्रांसपोर्टर और चौकीदार ने मिलकर 4 करोड़ 63 लाख की हेराफेरी की है। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ FIR कराई जाएगी। को ऑपरेटिव सोसायटी को इस संबंध में सहकारिता आयुक्त ने FIR करने के लिए 15 फरवरी को एक पत्र भेज दिया है। मंत्री भदौरिया ने बताया कि आरोपियों से वसूली की कार्रवाई भी शुरू की जा रही है। इनके खिलाफ संपत्ति कुर्क करने की भी जानकारी की जाएगी। इसके लिए शासन स्तर पर एक जांच दल गठित किया जाएगा। यदि सोसायटी के महाप्रबंधक इसमें शामिल पाए जाते हैं तो उनको हटाकर 3 माह में जांच की जाएगी।

ग्वालियर में अवैध खनन का मामला उठा
कांग्रेस विधायक लाखन सिंह यादव ने ग्वालियर के लोहानी गांव में अवैध खदान का मामला सदन में उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह खदान स्वीकृत नहीं है बावजूद इसके माफिया रेत निकाल रहे हैं। इसकी जानकारी कलेक्टर को 15 बार फोन पर दी बावजूद इसके कोई कार्यवाही नहीं की गई। इसके जवाब में खनिज मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि अभी तक जो कार्रवाई की गई है उसमें 8 प्रकरण दर्ज किए गए हैं और 4 पोकलेन जब्त की गई है। इस पर लाखन सिंह यादव ने कहा कि वसई में स्वीकृत रेत खदान में रेत नहीं है। उसकी आड़ में आसपास के गांव से रेत निकाली जा रही है। इसको लेकर मंत्री ने कोई जवाब नहीं दिया।

पानी में खराब हो गया 4 हजार टन गेहूं
विदिशा से कांग्रेस विधायक शशांक भार्गव ने आरोप लगाया कि खुले में पड़ा 4 हजार टन गेहूं पानी में खराब हो गया। इसके लिए कौन दोषी है और इसकी भरपाई कैसे की जाएगी? इसका जवाब देते हुए खाद्य मंत्री बिसाहूलाल सिंह ने कहा कि सरकार ने पूरा गेहूं खरीद लिया है।
पूर्व विधायक जितेंद्र डागा के अवैध निर्माण हटाए जाने का मामला विधानसभा में उठा

पूर्व मंत्री pc शर्मा ने पूर्व विधायक जितेंद्र डागा के अवैध निर्माण को तोड़े जाने का मामला विधानसभा में उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार बदले की भावना से काम कर रही है और कांग्रेस के नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि इस मामले पर विधानसभा अध्यक्ष ने कोई टिप्पणी नहीं की। इस पर चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह जितेंद्र डागा के यहां चले गए लेकिन उनको सीधी बस हादसे में मृतकों के परिवार वालों से मिलने की फुर्सत नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पीसी शर्मा जब होशंगाबाद के प्रभारी मंत्री थे तब नर्मदा के घाटों में अवैध रेत उत्खनन जोरों पर हुआ। कोरोना संक्रमण को लेकर सारंग ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है लेकिन सावधानी बरतने की जरूरत है। सरकार ने फैसला किया है कि लॉकडाउन नहीं होगा।

गोडसे के पुजारी की कांग्रेस में एंट्री पर नरोत्तम मिश्रा ने साधा निशाना, बोले कांग्रेस का महात्मा गांधी के सिद्धांतों से कोई सरोकार नहीं

ग्वालियर नगर निगम वार्ड नंबर 44 से पार्षद और हिंदू महासभा के नेता बाबूलाल चौरसिया ने बुधवार को कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है। गुरुवार को गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि गोडसे के पुजारी का कांग्रेस की सवारी करने से कांग्रेस का दोहरा चरित्र का पता चलता है। तथाकथित गांधी परिवार और कांग्रेस का राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सिद्धांतों से कोई सरोकार नहीं रह गया है। अब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी उनके लिए सिर्फ वोटों के लिए रह गए हैं। कांग्रेस ने सरदार पटेल और डॉक्टर अंबेडकर के नाम का इस्तेमाल भी सिर्फ वोटों के लिए किया है। बता दें कांग्रेस मुख्यालय में बुधवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की मौजूदगी में बाबूलाल चौरसिया ने कांग्रेस की सदस्यता ली। इसके बाद हिंदू महासभा ने बाबूलाल चौरसिया को निष्कासित भी कर दिया।

मेरी घर वापसी हुई हैं

कांग्रेस की सदस्यता लेने के बाद बाबूलाल चौरसिया ने कहा कि मैंने घर वापसी की है। घर वापसी करके बहुत खुश हूं। मेरी उनकी विचारधारा मेल नहीं खाती थी। बता दें बाबूलाल पहले कांग्रेस में ही थे। पिछले चुनाव में टिकट नहीं मिलने की वजह से उन्हाेंने कांग्रेस छोड़कर हिंदू महासभा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीते थे।

गोडसे की पूजा पर दी सफाई

पार्षद बाबूलाल चौरसिया ने गोडसे की प्रतिमा पूजन पर सफाई दी कि महासभा अंधेरे में हुई थी। पूजन के बारे में बाद में पता लगा था। इस पर नाराजगी जताई थी और पार्टी से किनारा कर लिया था।

पुडुचेरी में मोदी बोले- यहां की सरकार कांग्रेस हाईकमान की सेवा में लगी रही, पूर्व CM पार्टी के टॉप लीडर्स की चप्पलें उठाने में एक्सपर्ट थे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को सियासी संकट से जूझ रहे पुडुचेरी पहुंचे। यहांं उन्होंने लगभग 3 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी। इसके बाद उन्होंने एक रैली की। इसमें उन्होंने कहा कि कांग्रेस के हाईकमान कल्चर से पुडुचेरी को नुकसान हुआ। मैं देख रहा हूं कि पुडुचेरी की हवा बदल रही है।

मोदी ने कहा कि 2016 में पुडुचेरी को लोगों की सरकार नहीं मिली। उन्हें ऐसी सरकार मिली जो दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान की सेवा में व्यस्त थी। उनकी प्राथमिकताएं अलग थीं। आपके पूर्व CM अपनी पार्टी के टॉप लीडर की चप्पल उठाने में एक्सपर्ट थे। पुडुचेरी एक ऐसी सरकार का हकदार है, जिसकी हाईकमान यहां के लोग हों, न कि दिल्ली में बैठा कांग्रेस नेताओं का एक छोटा ग्रुप। NDA यह भरोसा देगा कि अगली सरकार लोगों की होगी।

भाषण में 2015 की घटना का जिक्र
हाल में पुडुचेरी की कांग्रेस सरकार गिर गई थी। नारायणसामी इसमें मुख्यमंत्री थे। 2015 में नारायणसामी का एक वीडियो सामने आया था। इसमें वे तब कांग्रेस के उपाध्यक्ष रहे राहुल गांधी की चप्पलें उठाते दिख रहे थे। राहुल गांधी पुडुचेरी के दौरे थे। इस दौरान वे ऐसे इलाके में गए थे, जहां बाढ़ आई हुई थी। पानी से निकलने के लिए राहुल ने चप्‍पलें उतारीं तो नारायणसामी ने चप्पलों को हाथ में उठा लिया। कुछ देर बाद नारायणसामी ने राहुल के सामने चप्‍पलें रखीं। राहुल ने बिना कुछ कहे चप्‍पलें पहन लीं थीं।

मोदी 14 दिन में दूसरी बार​ तमिलनाडु जाएंगे
पुडुचेरी से प्रधानमंत्री मोदी तमिलनाडु जाएंगे। 14 दिन में वह दूसरी बार ​​तमिलनाडु का दौरा करेंगे। यहां वे कोयंबटूर में 12,400 करोड़ रुपए की लागत से कई परियोजनाएं शुरू करेंगे। विधानसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु में भाजपा का फोकस उस एससी-एसटी और अल्पसंख्यक समुदाय पर पकड़ बनाना है, जो वहां की आबादी का 30% हैं। इसके अलावा भाजपा उत्तर भारतीय पार्टी होने की छवि को भी तोड़ना चाहती है।

नेपाल में जल्द खत्म नहीं होगा राजनीतिक संकट, PM Oli ने इस्तीफा देने से किया इनकार, संसद का करेंगे सामना

काठमांडू: नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस्तीफा नहीं देंगे. ओली के प्रेस सलाहकार ने बताया कि वह इस्तीफा देने के बजाये संसद में फ्लोर टेस्ट का सामना करेंगे. ओली के इस रुख से साफ हो गया है कि नेपाल (Nepal) में चल रहा राजनीतिक संकट जल्द समाप्त होने वाला नहीं है. बता दें कि नेपाली सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने प्रधानमंत्री ओली को झटका देते हुए संसद की भंग की गई प्रतिनिधि सभा को बहाल करने का आदेश दिया था, जिसके बाद से ओली के इस्तीफे की मांग की जा रही है. 

13 दिनों में बुलाना है सत्र

अपने ऐतिहासिक फैसले में मुख्य न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर (Cholendra Shumsher) के नेतृत्व में पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने मंगलवार को संसद के 275 सदस्य वाले निचले सदन को भंग करने के ओली सरकार के फैसले को असंवैधानिक करार दिया था. कोर्ट ने सरकार को अगले 13 दिनों के भीतर संसद सत्र बुलाने का भी आदेश दिया है. नेपाल में राजनीतिक संकट उस वक्त चरम पर पहुंच गया था, जब राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी (Bidya Devi Bhandari) ने संसद को भंग करने की PM की सिफारिश को स्वीकार करते हुए नए सिरे से चुनाव करवाने का ऐलान किया था.

Court के फैसले पर सवाल

ओली के प्रेस सलाहकार सूर्या थापा (Surya Thapa) ने कहा कि प्रधानमंत्री इस्तीफा नहीं देंगे, बल्कि उच्चतम न्यायालय के फैसले पर अमल करेंगे और दो सप्ताह में बुलाए जाने वाले संसद सत्र में हिस्सा लेंगे. थापा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का फैसला विवादास्पद है, लेकिन फिर भी उसे स्वीकार कर लागू किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि इसका असर भविष्य में देखने को मिलेगा, क्योंकि इस फैसले से राजनीति समस्याओं का कोई समाधान नहीं मिला है.

Oli पर बढ़ गया है दबाव

थापा ने आगे कहा कि शीर्ष अदालत के फैसले से अस्थिरता आएगी और सत्ता की लड़ाई का मार्ग प्रशस्त करेगा. हिमालयन टाइम्स ने थापा के हवाले से कहा कि प्रधानमंत्री फैसले पर अमल करते हुए प्रतिनिधि सभा का सामना करेंगे, लेकिन इस्तीफा नहीं देंगे. वहीं, ओली के मुख्य सलाहकार बिष्णु रिमल ने कहा कि हम सभी को फैसला स्वीकार करना होगा. हालांकि यह मौजूदा राजनीतिक समस्या का कोई समाधान प्रदान नहीं करता. दोनों अधिकारियों की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ओली पर इस्तीफे का दबाव बढ़ रहा है.

Media ने किया स्वागत

नेपाल के अधिकतर मीडिया घरानों ने उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है. उनका कहना है कोर्ट ने लोकतांत्रिक मूल्यों को बरकरार रखा है और संविधान की रक्षा की है. इस बीच, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (CPN) के उपाध्यक्ष बामदेव गौतम ने प्रधानमंत्री ओली से पद छोड़ने की अपील की है. गौतम ही अब तक ओली और उनके विरोधियों के बीच संतुलन बनाने का काम करते आ रहे थे. गौतम ने कहा कि अदालत के फैसले ने साबित कर दिया है कि पीएम का कदम असंवैधानिक था, इसलिए उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए.

माकपा ने किया केन्द्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बंगले का घेराव

ग्वालियर। किसान विरोधी काले कानूनों को पास लेने की मंाग को लेकर विगत लंबे समय से अंादोलन कर रहे किसान संघर्ष मोर्चा और कम्यूनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं ने यहंा ग्वालियर के रेसकोर्स रोड़ स्थित केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के बंगले का घेराव कर बंगले के गेट पर प्रदर्शन किया। किसान नेताओं का कहना है कि केन्द्रीय मंत्री ने विगत दिनों कहा था कि किसान नेताओं द्वारा कानून की कमियंा नहीं बताई गई है यह सरासर झूठ है इसलिए इन तीनों काले कानूनों में व्याप्त खामियों की पूरी लिस्ट उन्हें सौंपेंगे जिससे वे कानून की कमियों को दूर करने का प्रयास करें। केन्द्रीय मंत्री पर बंगले पर धरने के चलते यहंा बडी संख्या में पुलिस बल भी तैनात रहा और प्रदर्शनकारियों को समझाबुझा कर शंात कराया लेकिन यहंा धरना देने पहंुचे लोग अपनी मंागों को लेकर अड़े हुए हैं।

सूदखोरों से त्रस्त व्यापारी ने लगाई शिप्रा नदी में छलांग, तैराक दल ने बचाया तो बोला- दो माह से न तो पत्नी का पता न ही बच्चों का

सूदखोरों से त्रस्त एक व्यापारी ने शिप्रा नदी में छलांग लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की। मौके पर मौजूद होमगार्ड के जवान और तैराक दल के सदस्यों ने पानी में डूब रहे व्यापारी को बचा लिया। मौके से एक डायरी मिली है। उसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से व्यापारी ने गुहार लगाई है कि उसका शव जिला अस्पताल से सीधे चक्रतीर्थ ले जाया जाए। व्यापारी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उसका उपचार चल रहा है। व्यापारी की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
होमगार्ड सैनिक जगदीश कारपेंटर ने बताया कि बुधवार सुबह करीब नौ बजे वह और उनके साथ अन्य सैैनिक शिप्रा नदी के रामघाट स्थित छोटे पुल के नीचे अपनी नाव की सफाई कर रहे थे तभी एक व्यक्ति आया। उसने अपने मोबाइल रखा और जूते उतारे। उसके बाद अचानक पानी में कूद गया। हम लोगों ने देखा कि वह डूब रहा है तो फौरन हम लोगों ने उसे बचाते हुए पानी से बाहर निकाला। पूछताछ में उसने अपना नाम गोपाल कृष्ण पिता छोटे लाल गोले निवासी उर्दूपुरा गायत्री मंदिर के पास बताया।
सुसाइड की कोशिश की कहानी, व्यापारी गोपाल की जुबानी
मैं दुकान चलाता था। लॉकडाउन में कर्जा हो गया। मैं मानसिक रूप से बहुत ज्यादा परेशान हो गया था। लोगों से ब्याज पर पैसे लिए। अब लोग पैसे वापस लेने के लिए बहुत अधिक दबाव बना रहे थे। मेरे साले ने सलाह दी कि आवेदन दे दो। मैंने आवेदन दे दिया। उसमें मेरे साले ने उन सबके नाम लिखा दिए जिनसे मैंने कर्जा लिया था। उसके बाद वो लोग और दबाव बनाने लगे तो मेरे साले ने कहा कि कुछ दिन के लिए कहीं चले जाओ। तुम्हारी जान को खतरा है। दो महीने से मैं साले से संपर्क कर रहा हूं तो फोन नहीं मिल रहा है। घर पर न तो पत्नी है और न ही बच्चे। उनके भी फोन बंद हैं। पिछले दो महीने से परिवार को तलाशते हुए भटक रहा हूं

निकाय चुनाव से पहले हिंदू महासभा के नेता कांग्रेस में शामिल, कमलनाथ थे मौजूद

भोपाल: मध्य प्रदेश  के ग्वालियर नगर निगम में वार्ड नंबर 44 के पार्षद एवं हिन्दू महासभा  के नेता बाबूलाल चौरसिया  ने बुधवार, 25 फरवरी को कांग्रेस का हाथ थाम लिया. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ जी की मौजूदगी में चौरसिया कांग्रेस में शामिल हुए. चौरसिया जिस वार्ड से पार्षद हैं, वहां देश का इकलौता नाथूराम गोडसे का मंदिर है. चौरसिया के कांग्रेस में शामिल होने पर एमपी कांग्रेस ने ट्वीट कर इसकी जानकारी साझा की है.

बाबूलाल गोडसे की घर वापसी हुई है क्योंकि वह पहले भी कांग्रेस में थे लेकिन पिछले चुनाव में टिकट नहीं मिलने की वजह से उन्होंने कांग्रेस से बगावत करते हुए हिन्दू महासभा के टिकट पर पार्षदी का चुनाव लड़ा था और कांग्रेस की उम्मीदवार शम्मी शर्मा को हराया था.

चौरसिया के कांग्रेस में वापसी के मौके पर ग्वालियर साउथ के विधायक प्रवीण पाठक और प्रखंड अध्यक्ष संतोष शर्मा समेत पार्टी के कई नेता मौजूद थे.

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान की काली करतूतों का चिट्ठा खोला, आतंकवाद पर लगाई कड़ी फटकार

भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में बुधवार को जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार की स्थिति पर पाकिस्तान द्वारा की गई आलोचना को खारिज कर दिया। भारत ने आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाते हुए उसके देश में हो रहीं काली करतूतों का चिट्ठा भी खोल दिया। भारत ने इस्लामाबाद में दो टूक कहा कि उसे सरकार प्रायोजित आतंकवाद को खत्म करने के लिए विश्वसनीय कार्रवाई पर ध्यान देना चाहिए। पाकिस्तानी मानवाधिकार मंत्री शिरीन मजारी द्वारा जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र संघ के अपने संबोधन में आलोचना करने पर नई दिल्ली ने पाकिस्तान को ‘दुनिया के सबसे खराब मानवाधिकारों में से एक’ देश के रूप में बताया, जहां अल्पसंख्यकों के साथ बिना रुके हुए भेदभाव और उत्पीड़न जारी है। 

संयुक्त राष्ट्र में पर्मानेंट मिशन में सेकेंड सेकरेट्री सीमा पुजानी ने राइट टू रिप्लाई का विकल्प चुनते हुए पाकिस्तानी मंत्री के भाषण का जवाब दिया। उन्होंने कहा  कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ निराधार और दुर्भावनापूर्ण प्रचार के लिए विभिन्न प्लेटफॉर्म्स का लगातार दुरुपयोग करता रहा है और यह कोई नई बात नहीं है। पुजानी ने दो टूक कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय रूप से घोषित की गईं आतंकवादी संस्थाओं और आतंकियों के लिए संरक्षक की भूमिका निभाता रहा है। 

भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद को समाप्त करने के लिए विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय कदम उठाने का आह्वान करने और आतंकवादियों से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को ध्वस्त करने को कहा। पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों पर बरसते हुए पुजानी ने कहा, ”पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद न सिर्फ भारत के लिए ही खतरा है, बल्कि क्षेत्र के अन्य देशों के लिए भी खतरा बना हुआ है। पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा अल-कायदा के आतंकवादी और अमेरिकी पत्रकार डैनियल पर्ल के हत्यारे उमर सईद शेख को हाल ही में बरी कर दिया जाना इस तरह की संस्थाओं के साथ पाकिस्तानी प्रतिष्ठान की सांठगांठ का स्पष्ट उदाहरण है।” 

बुधवार को मजारी से पहले संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करने वाले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि आतंकवाद मानव जाति के लिए सबसे गंभीर खतरे में से एक है और वैश्विक मानवाधिकार एजेंडे के लिए एक बड़ी चुनौती है। जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को भंग करने के 2019 के फैसले का जिक्र करते हुए पुजानी ने कहा कि हम दोहराते हैं कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भारत का एक अभिन्न हिस्सा हैं। इन केंद्र शासित प्रदेशों में सुशासन और विकास सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम हमारे आंतरिक मामले हैं। भारतीय प्रतिक्रिया में कहा गया कि पाकिस्तान दुनिया के सबसे खराब मानवाधिकारों वालों में से एक देश है। भारत पर उंगली उठाने से पहले उसे अपना घर ठीक करना चाहिए।

पुजानी ने आगे कहा, ”ईसाईयों, सिखों और हिंदुओं सहित पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों द्वारा सामना की जाने वाली हिंसा, संस्थागत भेदभाव और उत्पीड़न को बेरोकटोक जारी रखा गया है।” मंदिरों पर हुए हमलों को लेकर पाकिस्तान को घेरते हुए पुजानी ने आगे कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों की पूजा के स्थानों पर लगातार हमले हुए हैं, जो धर्म और विश्वास की स्वतंत्रता के उनके अधिकार का घोर उल्लंघन है।

तुर्की ने संयुक्त राष्ट्र में फिर उठाया कश्मीर मुद्दा, आखिर चाहते क्या हैं एर्दोगन?

अंकारा
तुर्की ने एक बार फिर पाकिस्तान का साथ देने के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की बैठक में जम्मू और कश्मीर का मुद्दा उठाया है। तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुट कावुसोग्‍लू ने मानवाधिकार परिषद के 46 वें सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि हम भारत सरकार से मांग करते हैं कि वह जम्मू-कश्मीर में लगे प्रतिबंधों में ढील प्रदान करे। हम संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के आधार पर जम्मू कश्मीर की समस्या को शांतिपूर्ण तरीके से वहां के लोगों की अपेक्षाओं के हिसाब से हल होते देखना चाहते हैं।

एर्दोगन भी यूएन में उठा चुके हैं कश्मीर मुद्दा

इससे पहले कई मौकों पर तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोगन संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दे को उठा चुके हैं। पिछले साल सितंबर महीने में एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए कश्मीर राग छेड़ा था। उन्होंने कहा था कि कश्मीर एक ज्वलंत मुद्दा है और दक्षिण एशिया में शांति और स्थि‍रता के लिए बेहद अहम है। जम्मू कश्मीर के स्पेशल स्टेटस (अनुच्छेद 370) को हटाए जाने के बाद यह समस्या और भी गंभीर हो गई है। हम इस समस्या का संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के तहत हल चाहते हैं। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान पाकिस्तान की तारीफ भी की थी।

कश्मीर को फिलिस्तीन बता चुके हैं एर्दोगन

पिछले साल अगस्त में ईद उल अजहा के मौके पर तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति आरिफ अल्वी और प्रधानमंत्री इमरान खान से बात करते हुए कश्मीर पर समर्थन का आश्वासन दिया था। एर्दोगन ने पहले भी कई बार कश्मीर की तुलना फिलिस्तीन से की है। इतना ही नहीं, उन्होंने भारत पर कोरोना काल में भी कश्मीर में अत्याचार का झूठा आरोप भी लगाया था। जबकि सच्चाई यह है कि कश्मीर पर भारत को लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने की कोशिश कर रहे एर्दोगन तुर्की मे खुद एक कट्टर इस्लामिक तानाशाह के रूप में जाने जाते हैं।

भारत विरोधी गतिविधियों का केंद्र बना तुर्की

तुर्की अब पाकिस्तान के बाद ‘भारत-विरोधी गतिविधियों’ का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केरल और कश्मीर समेत देश के तमाम हिस्सों में कट्टर इस्लामी संगठनों को तुर्की से फंड मिल रहा है। एक सीनियर गवर्नमेंट अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि तुर्की भारत में मुसलमानों में कट्टरता घोलने और चरमपंथियों की भर्तियों की कोशिश कर रहा है। उसकी यह कोशिश दक्षिण एशियाई मुस्लिमों पर अपने प्रभाव के विस्तार की कोशिश है।

मुस्लिम देशों का नेता बनना चाह रहे एर्दोगन

एर्दोआन ने पिछले साल ऐतिहासिक हगिया सोफिया संग्रहालय को मस्जिद में बदल दिया जो सन 1453 तक एक चर्च रहा था। एर्दोआन मुस्लिम जगत में सऊदी अरब की बादशाहत को चुनौती देने की लगातार कोशिशों में लगे हैं। पिछले साल उन्होंने मलयेशिया के तत्कालीन पीएम महातिर मोहम्मद और पाकिस्तान पीएम इमरान खान के साथ मिलकर नॉन-अरब इस्लामी देशों का एक गठबंधन तैयार करने की कोशिश की थी।

कश्मीर में हिंसा के लिए भाड़े के लड़ाकों को तैनात करेगा तुर्की!

सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स और हावर न्यूज ने हाल के रिपोर्टों में दावा किया है कि तुर्की सीरिया में सक्रिय अपने भाड़े के लड़ाकों के संगठन सादात को कश्मीर में तैनात करने की प्रक्रिया में है। सादात का नेतृत्व एर्दोगन के सैन्य सलाहकार अदनान तनरिवर्दी करता है। जिसने कश्मीर में बेस तैयार करने के लिए कश्मीर में जन्मे सैयद गुलाम नबी फई नाम के आतंकी को नियुक्त किया है। फई पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के पैसों पर भारत के खिलाफ भाड़े के सैनिकों की भर्ती करने और टैक्स चोरी के लिए अमेरिका की जेल में दो साल की सजा काट चुका है। यह कट्टरपंथी संगठन जमात ए इस्लामी का भी सक्रिय सदस्य है। फई ने अमेरिका में कश्मीर के खिलाफ साजिश रचने के लिए अमेरिकी काउंसिल ऑफ कश्मीर (KAC) की स्थापना की थी। इस संस्था की फंडिग पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई करती है। इस बात की पुष्टि खुद अमेरिका की एफबीआई ने की है।

आंख बंद कर एक दूसरे का समर्थन करते हैं तुर्की-पाकिस्तान

तुर्की और पाकिस्तान केवल रक्षा संबंधों में ही नहीं, बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी एक दूसरे का आंख बंदकर समर्थन करते हैं। हाल में ही जब ग्रीस के साथ भूमध्य सागर में सीमा विवाद हुआ तो पाकिस्तान ने बिना सच्चाई जाने खुलेआम तुर्की के पक्ष में समर्थन का ऐलान किया था। इतना ही नहीं, भूमध्य सागर में पाकिस्तान और तुर्की की नौसेनाओं ने युद्धाभ्यास कर एकजुटता का ऐलान भी किया। इसके बदले में तुर्की कश्मीर के मामले में पाकिस्तान का खुला समर्थन करता है। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन तो इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भी उठा चुके हैं। एर्दोगन ने फरवरी 2020 में कहा कि यह मुद्दा तुर्की के लिए उतना ही महत्वपूर्ण था जितना कि पाकिस्तान के लिए।