संत हरिगिरी महाराज की शराबबंदी पदयात्रा में उमड़ा लोगों का हुजूम

ग्वालियर
शीतला के सातऊ से शुरू हुई पदयात्रा मुरैना तक जाएगी
गुर्जर समाज के बाद सर्व समाज के लिए छेड़ा अभियान
ग्वालियर।मुरैना में जहरीली शराब से दो दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत से आहत संत हरिगिरी महाराज ने शराबबंदी करने पदयात्रा शुरू की है। 6 दिन की यह पदयात्रा मंगलवार को सिरोल के हनुमान टेकरी से शुरू हुई। पदयात्रा में हरिगिरी महाराज के साथ ही लालगिरी महाराज, बालकदास महाराज और उनके सैकड़ों भक्त पदयात्रा में शामिल हुए है। इस दौरान पदयात्रा जिन क्षेत्रों से होकर गुजर रही है हरिगिरि महाराज द्वारा लोगों से शराब छोड़ने की अपील की जा रही है।
प्रदेश में एक बार फिर शराबबंदी की आवाज उठी है। इस बार यह आवाज किसी नेता या राजनीतिक दल ने नहीं, बल्कि गुर्जर समाज के संत हरिगिरी महाराज ने यह बात फिर से उठाई है। वह गुर्जर समाज में लगातार शराबबंदी, दहेज प्रथा, शादियों में विलासिता जैसी बुराइयों को बंद कराने के लिए प्रयास करते रहे हैं। इस बार संत हरिगिरी महाराज, संत लालगिरी महाराज, संत बालकदास महाराज ने सर्व समाज में शराबबंदी करने का निर्णय लिया है। इसके लिए वह पूरे अंचल में पदयात्रा करेंगे। पहले चरण में 22 फरवरी को ग्वालियर के सातऊं गांव शीतला मंदिर से अपने सैकडों भक्तों के साथ हरिगिरी महाराज ने 6 दिवसीय पदयात्रा का शुभारंभ किया है। मंगलवार को सिरोल में हनुमान टेकरी मंदिर से यह पदयात्रा फिर से शुरू हुई इसके बाद यात्रा मुरार, दीनदयाल नगर, भिंड रोड गिरगांव, लक्ष्मणगढ़ होते हुए बायपास के गांव में संपर्क करते हुए बानमोर, नूराबाद से मुरैना पहुंचेगी। इस दौरान रास्ते में जगह-जगह लोगों को शराब छोडने की शपथ भी दिलाई जा रही है।

मेयर पद की सशक्त दावेदार महिला नेत्री का दुःखद निधन

ग्वालियर । भाजपा में आज बहुत ही दुःखद खबर आई । भाजपा की वरिष्ठ नेता और राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती प्रमिला वाजपेयी का आज दुःखद निधन हो गया । वे ग्वालियर नगर निगम में भाजपा टिकिट की सशक्त दावेदार थीं।

श्रीमती वाजपेयी को अचानक हृदय का दौरा पड़ा । हालत में सुधार न होने पर उपचार के लिए दिल्ली ले जाया गया लेकिन दोपहर में ढाई बजे उनका दुःखद निधन हो गया । भाजपा सूत्रों के अनुसार  उनकी अंतिम यात्रा न्यू कृष्णा विहार दर्पण कॉलोनी स्थित आवास से मुरार मुक्तिधाम के लिए दोपहर 1:00 बजे प्रस्थान करेगी।

महापौर पद की सशक्त दावेदार थीं

स्व श्रीमती वाजपेयी आगामी नगर निगम चुनावो में भाजपा की सशक्त दावेदार थीं । राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रह चुकीं थीं । वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ी थीं और चर्चा थी कि अगले चुनावो में वे भाजपा की मेयर पद के लिए सशक्त दावेदार है । वे संघ की पसंद थी ।

स्व वाजपेयी का भी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के परिवार से ताल्लुकात रखती थी । उनका परिवार भी बटेश्वर से ही है। वे बेहद ही सरल स्वभाव की और मृदुभाषी  महिला थी । वे सभी के साथ आत्मीय सम्बन्ध रखती थी और भाजपा में अजातशत्रु मानी जातीं थीं।

मध्य प्रदेश आए तो अरेस्ट होंगे किसान नेता राकेश टिकैत? 8 मार्च को श्योपुर, देवास और रीवा में रैलियों का कार्यक्रम

भोपाल
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत 8 मार्च को मध्य प्रदेश आएंगे। केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदेश के किसानों का समर्थन हासिल करने के लिए टिकैत यहां आ रहे हैं। इधर, मध्य प्रदेश पुलिस टिकैत के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है। टिकैत के खिलाफ 2016 में ही एमपी का एक अदालत ने अरेस्ट वारंट जारी किया था।

दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन का खास असर अब तक एमपी में देखने को नहीं मिला है। ऐसे में टिकैत श्योपुर, रीवा और देवास में रैलियों को संबोधित करेंगे। मध्य प्रदेश भारतीय किसान यूनियन के महासचिव अनिल यादव ने बताया कि महिला दिवस के दिन टिकैत राज्य के किसानों से मिलेंगे। वे उन्हें नए कानूनों से होने वाले नुकसान के बारे में बताएंगे।

रोचक है कि टिकैत के खिलाफ एमपी में एक मामला पहले से लंबित है। 2012 में अनूपपुर जिले में उनके खिलाफ हत्या की कोशिश और अव्यवस्था फैलाने के मामले में अरेस्ट वारंट जारी हो चुका है। अनूपपुर के जैतहरी इलाके में पावर प्लांट के खिलाफ प्रदर्शन का नेतृत्व करने 2012 में टिकैत यहां आए थे। प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। प्रदर्शनकारियों ने कई वाहनों में आग लगा दी थी जिसमें कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। पुलिस ने इस मामले में टिकैत सहित 100 से ज्यादा लोगों के खिलाफ अव्यवस्था फैलाने, हथियारों के साथ अवैध रूप से प्रदर्शन करने और हिंसा फैलाने तथा हत्या की कोशिश करने का मामला दर्ज किया गया था।

टिकैत को 2012 में ही इस मामले में जमानत मिल गई थी, लेकिन इसके बाद वे अदालत के सामने कभी पेश नहीं हुए। कई सुनवाइयों में अनुपस्थित रहने के बाद 2016 में इनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट अदालत ने जारी किया था। अनुपपुर के एसपी मांगीलाल सोलंकी ने बताया कि पुलिस टिकैत के खिलाफ जरूरी कार्रवाई करेगी। ऐसे में टिकैत एमपी में आने पर गिरफ्तार किए जा सकते हैं।

पेट्राेल-डीजल: चार राज्यों ने घटा दिए टैक्स, अब केंद्र-बाकी राज्यों पर बढ़ा दबाव

पेट्रोल-डीजल की लागत का बड़ा हिस्सा टैक्स ही है

लगातार बढ़ रहा टैक्स घटाने का दबाव

अब तक चार राज्य टैक्स में कटौती कर चुके हैं

पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमत से जनता को कुछ राहत देने के लिए अब तक चार राज्य ईंधन पर टैक्स में कटौती कर चुके हैं. इसके बाद बाकी राज्यों और केंद्र सरकार पर भी इस बात का दबाव बढ़ता दिख रहा है कि पेट्रोल-डीजल पर टैक्स में कटौती लाई जाए. 

राजस्थान सरकार पिछले महीने पेट्रोल-डीजल पर वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) में 2-2 फीसदी की कटौती का ऐलान कर चुकी है. चुनाव वाले माहौल के बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने भी रविवार को पेट्रोल और डीजल पर वैट में प्रति लीटर 1 रुपये की कटौती की है. असम सरकार ने भी उस 5 रुपये के अतिरिक्त टैक्स को हटा दिया है जो पिछले साल कोविड संकट के बीच पेट्रोल और डीजल पर लगाया गया था.

इसी तरह मेघालय सरकार ने भी जनता को बड़ी राहत देते हुए पेट्रोल पर टैक्स में 7.4 रुपये और डीजल पर 7.1 रुपये प्रति लीटर तक की भारी कटौती की है. 

दूसरी तरफ, केंद्र सरकार लगातार इस बात से इंकार करती रही है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों के मामले में वह कुछ कर सकती है. पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संसद में दो टूक कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार कुछ नहीं कर सकती, क्योंकि तेल की कीमतें तय करने का अध‍िकार अब तेल कंपनियों के पास है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल में कहा कि अगर पिछली सरकारों ने कच्चे तेल पर देश की निर्भरता को कम किया होता, तो देश को महंगे तेल का बोझ नहीं सहन करना पड़ता. इससे ऐसा लग रहा है कि सरकार अभी टैक्सेज में कटौती करने के मूड में नहीं है. 

टैक्स की करारी मार 

पेट्रोल और डीजल की आज जो रिकॉर्ड कीमतें चल रही हैं, उसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि इन पर टैक्स बहुत ज्यादा है. देश के भीतर पेट्रोल या डीजल की कीमतों के तय होने के लिए हम दिल्ली का उदाहरण लेते हैं. सबसे पहले पेट्रोल की कीमत में बेस कीमत जुड़ती है. 

जैसे दिल्ली में 16 फरवरी 2021 के हिसाब से बेस कीमत 31.82 रुपये प्रति लीटर था. उसके बाद उसमें ढुलाई के 28 पैसे और जुड़ गए. इसके बाद ऑयल मार्केटिंग कंपनियां यह तेल 32.10 रुपये के भाव से डीलर्स को बेचती हैं. इसके बाद केंद्र सरकार हर लीटर पेट्रोल पर 32.90 रुपये का एक्साइज टैक्स (उत्पाद शुल्क)  लगाती है. इस तरह एक झटके में पेट्रोल की कीमत 65 रुपये हो जाती है.  

इसके अलावा हर पेट्रोल पंप डीलर हर लीटर पेट्रोल पर 3.68 रुपये का कमीशन जोड़ता है. इसके बाद जहां पेट्रोल बेचा जाता है उसकी कीमत में उस राज्य सरकार की ओर से लगाए गए वैट या बिक्री कर को जोड़ा जाता है. उदाहरण के लिए दिल्ली में वैट का 20.61 रुपया जुड़ जाता है. इस तरह कुल मिलाकर अंत में एक लीटर पेट्रोल के लिए आम आदमी को दिल्ली में 89.29 रुपये चुकाने पड़े. 

तेल पर टैक्स से सरकार को मोटी कमाई 

केंद्र सरकार को मौजूदा वित्त वर्ष में पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी से 3.49 लाख करोड़ रुपये हासिल होने का अनुमान है. यह वित्त वर्ष 2020-21 के बजट अनुमान 2.49  लाख करोड़ रुपये से 39.3 फीसदी या करीब 97,600 करोड़ रुपये ज्यादा होगा. यानी पेट्रोल और डीजल पर टैक्स से सरकार को कोरोना काल के बावजूद इस साल जबरदस्त कमाई होने वाली है. 

पाक के नापाक इरादों को भांप श्रीलंका ने इमरान खान को किया था बेइज्जत, मगर असली वजह बना भारत, जानें कैसे?

कश्मीर मसले पर झूठ बोलने की फिराक में लगे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को उस वक्त बेइज्जती का सामना करना पड़ा, जब श्रीलंका ने उनके नापाक मंसूबों पर पानी फेर दिया। दरअसल, श्रीलंका दौरे पर इमरान खान वहां की संसद में भाषण देने वाले थे, मगर श्रीलंका ने भारत से रिश्ते बिगड़ने की डर से उस स्पीच को ही कैंसल कर दिया। माना जा रहा है कि मौजूदा वक्त में श्रीलंका भारत से किसी तरह की तनातनी नहीं चाहता है। यही वजह है कि भारत के साथ टकराव से बचने के प्रयास में श्रीलंका ने संसद में प्रधानमंत्री इमरान खान के एक निर्धारित भाषण को रद्द कर दिया।

कोलंबो गैजेट में प्रकाशित डार जावेद की ‘इमरान खान की संसद के भाषण को रद्द करके श्रीलंका ने भारत के साथ टकराव को टाला है’ शीर्षक वाली एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे वक्त में जब श्रीलंका चीन के कर्ज तले दबा हुआ है और वह उसके ऋण-जाल में पूरी तरह फंस चुका है, कोलंबो सरकार भारत के साथ अपने संबंधों को खराब करने की जोखिम नहीं ले सकती। वो भी ऐसे वक्त में जब भारत वैक्सीन मुहैया कराकर पूरी दुनिया को बचा रहा है। भारत सरकार ने श्रीलंका को भी कोविशील्ड की 5 लाख खुराकें मुफ्त में गिफ्ट के तौर पर दी है। 

इसके अलावा, पिछले कुछ महीनों में श्रीलंका में मुस्लिम विरोधी भावनाएं पैदा हुई हैं क्योंकि बौद्ध लोग मस्जिदों में जानवरों की बलि जैसे मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं। इस वजह से उम्मीद जताई गई कि इमरान खान श्रीलंका की यात्रा के दौरान मुस्लिम कार्ड का इस्तेमाल कर सकते थे। उन्होंने पिछले साल अफगानिस्तान की यात्रा के दौरान कुछ इसी तरह का कार्ड खेला था।

जावेद ने कहा कि साल 2012 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने तालिबान का समर्थन करते हुए कहा था कि आतंकी गतिविधियां ‘पवित्र युद्ध’ हैं जो इस्लामी कानून द्वारा उचित हैं। उन्होंने मुस्लिम को भड़काने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा का उपयोग किया है, जिसे अक्सर अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के रूप में माना जाता रहा है। अक्टूबर 2020 में उन्होंने फ्रांसीसी-राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन द्वारा एक इस्लामी कट्टरपंथी द्वारा एक शिक्षक की हत्या पर चिंता व्यक्त किए जाने के बाद मुस्लिम-बहुल देशों से विरोध करने का आग्रह किया था। लेखक जावेद ने लिखा, इमरान खान ने मुस्लिम-बहुल देशों के नेताओं को ‘गैर-मुस्लिम देशों में बढ़ते इस्लामोफोबिया का मुकाबला करने के लिए एक लेटर भी लिखा था।

पिछली घटनाओं को देखते हुए यह स्पष्ट है कि उन्हें (इमरान खान) को बोलने के लिए संसद जैसा मंच देना किसी बड़े जोखिम से कम नहीं है। अगर उन्हें श्रीलंका की संसद में बोलने का मौका दिया जाता तो वह इस मंच का इस्तेमाल ऐसे बयानों के लिए करते जिनसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर श्रीलंका के बौद्ध लोगों और राजपक्षे सरकार दोनों के लिए गंभीर प्रभाव होते। ये वजहें भी हैं, जिस कारण इमरान के स्पीच को कैंसल किया गया।

जावेद ने कहा कि जिस तरह से इमरान खान ने श्रीलंकाई मुस्लिम नेता के अनुरोधों का जवाब दिया, इससे यह स्पष्ट हो गया था कि वह संसद के भाषण के दौरान श्रीलंका में अल्पसंख्यकों के साथ दुर्व्यवहार के मुद्दे को उठाते। इससे पहले ऑल-सीलोन मक्कल कांग्रेस के नेता ऋषद बाथुडीयन ने पाकिस्तान सरकार से अनुरोध किया था कि वह कोरोना के कारण मारे गए लोगों के लिए श्रीलंकाई सरकार की जबरन श्मशान नीति के मामले में हस्तक्षेप करे। प्रधानमंत्री इमरान खान ने सार्वजनिक रूप से श्रीलंका में शवों को दफनाने के मुद्दे पर भी टिप्पणी की।

एक ओर जहां मुस्लिमों के मसले पर उलूल-जुलूल बोलकर इमरान खान मुखिया बनने की कोशिश में हैं, वहीं दूसरी ओर उनके अपने पाकिस्तान में ही हालात बदतर हैं। इमरान खान अन्य देशों में मुसलमानों के साथ व्यवहार के मुद्दे को उठाने के लिए हमेशा उत्सुक रहते हैं, जबकि हकीकत यह है कि उनके देश पाकिस्तान में ही धार्मिक स्वतंत्रता लगातार बिगड़ती जा रही है, जिसका जिक्र संयुक्त राष्ट्र आयोग ने महिलाओं की स्थिति पर रिपोर्ट में किया गया है।  

आयोग ने आगे कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को दूसरे दर्जे के नागरिक की तरह ट्रीट किया जाता है। इसके अलावा पाकिस्तान में कई बौद्ध विरासत स्थलों को हाल ही में ध्वस्त कर दिया गया था। जबसे इस्लामिक सहयोग संगठन ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को ठुकराया है, तब से ही इमरान खान बौखला गए हैं और मुस्लिम देशों से समर्थन पाने और खुद को मुस्लिम दुनिया के चैंपियन के तौर पर दिखाने के लिए बेताब हो गए हैं।

उमा भारती ने फिर दोहराया पूर्ण शराबबंदी का संकल्प कहा- बिना राजस्व के लोग भूखों मरें तो मर जाएं लेकिन शराबबंदी होनी चाहिए

ग्वालियर प्रवास पर पहंुचे प्रदेश की पूर्व सीएम उमा भारती ने फिर से शराबबंदी अभियान छेड़ने का संकल्प दोहराया है उन्होने यहंा ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि सरकार पूर्ण शराबबंदी और पूर्ण नशाबंदी का प्रयास करे। गुजरात औश्र बिहार सरकार ने जिस तरह से शराबबंदी कर अपने प्रदेश के राजस्व को उबारा है वैसे ही मध्यप्रदेश भी उबर जाएगा। इसके लिए आठ मार्च को बैठक में वे रणनीति तैयार करेंगी।
उमा भारती ने कहा कि मुरैना में जहरीली शराब से हुई लोगों की मौत के मामले में जो दोषी अधिकारी हैं या जो भी लोग इस कारोबार से जुडे हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए और वे इस संबंध में प्रदेश सरकार से चर्चा करूंगी।
पूर्व सीएम उमाभारती ने कहा कि कोरोना काल में जब शराब पूर्णतः बंद रही तो किसी की भी मौत नहीं हुई तो शराब बंदी से क्या  नुकसान हो सकता है। फिर भले ही राजस्व की कमी के कारण लोग भूख से मरे तो मर जाएं लेकिन शराब पर प्रतिबंध जरूरी है।
पेट्रोल-डीजल के लगातार बढते दामों और देश में बढ रही मंहगाई के सवाल पर यहंा उमा भारती ने कोई भी जवाब देने से साफ इंकार कर दिया उन्होने कहा कि इस मामले पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना बयान दे दिया है और वे इस पर कुछ भी नहीं बोलना चाहती हैं।

बजट सत्र दूसरे दिन भी स्थगित:आंदोलन में दिवंगत किसानों को श्रद्धांजलि नहीं देने पर कांग्रेस ने बताया अन्नदाता का अपमान; एक घंटे ही चली विधानसभा

विधानसभा में बजट सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही को बगैर किसी कारण के एक घंटे में ही स्थगित कर दी गई। इस दिन कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश होने थे लेकिन सत्र स्थगित होने से ये टल गए। दरअसल, दूसरे दिन की शुरुआत में सरकार ने उत्तराखंड के चमोली हादसे और सीधी बस हादसे के मृतकों को श्रद्धांजलि दी। इस पर कांग्रेस ने सवाल उठाते हुए कहा कि दिल्ली सहित देश में किसान आंदोलन के दौरान करीब 200 किसानों की मौत हुई है, उन्हें श्रद्धांजलि क्यों नहीं दी जा रही है। विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने कहा- यह समय श्रद्धांजलि देने का है न कि विवाद का। मैं इसकी इजाजत नहीं देता हूं की श्रद्धांजलि के दौरान कोई व्यवधान उत्पन्न होl इसके बाद कार्यवाही कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

CM के खड़े होते ही साधौ ने ली आपत्ति, सज्जन ने बताया अन्नदाता का अपमान

सबसे पहले, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मोतीलाल वोरा को श्रद्धांजलि देने के लिए खड़े हुए। तभी पूर्व मंत्री विजयलक्ष्मी साधौ ने कह दिया जब उत्तराखंड खंड में बाढ़ मैं मृत लोगों को श्रद्धांजलि दी जा रही है तो दिल्ली में किसान आंदोलन के दौरान 200 किसानों की मौत हुई। उनको भी श्रद्धांजलि दी जानी चाहिए लेकिन विधानसभा की कार्यसूची में इसका कोई उल्लेख नहीं है। पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा ने कहा कि किसान देश के अन्नदाता हैं यदि आंदोलन के दौरान किसान की मौत होती है और उसे श्रद्धांजलि नहीं दी जाती है तो यह अन्नदाता का अपमान है।

इससे पहले, नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ में दिल्ली आंदोलन में मृत किसानों के साथ-साथ मुरैना में जहरीली शराब से मरने वालों को भी श्रद्धांजलि दीl कमलनाथ ने कहा कि यह पक्ष और विपक्ष का सवाल नहीं हैl क्या यह उचित है कि मृत किसानों को श्रद्धांजलि सदन में ना दी जाए? सीधी बस हादसे में मृतकों के परिवार को सरकार रोजगार उपलब्ध कराए। बसों में गरीब लोग ही सफर करते हैं । मरने वालों के परिजनों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। उनकी मदद करना चाहिए।

दिवंगत नेताओं को दी श्रद्धांजलि
विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा, पूर्व राज्यसभा सदस्य कैलाश सारंग, विधानसभा के पूर्व सदस्य लोकेंद्र सिंह, गोवर्धन उपाध्याय, श्याम होलानी, बद्रीनारायण अग्रवाल, कैलाश नारायण शर्मा, विनोद कुमार डागा, कल्याण सिंह ठाकुर समेत 26 पूर्व केंद्रीय मंत्रियों और विधानसभा के पूर्व सदस्यों को श्रद्धांजलि दी गईl

कांग्रेस-बीजेपी विधायक दल की बैठक हुई
विधानसभा अध्यक्ष के निर्वाचन और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के बाद बजट सत्र की बैठक एक दिन के लिए स्थगित कर दी गई थी। लेकिन अब सदन की बैठक में सत्ता और विपक्ष आमने-सामने होंगे। इसको लेकर दोनों ही दलों के विधायकों की बैठकें 22 फरवरी को देर शाम हुई थी। कांग्रेस विधायक दल की बैठक पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ के निवास पर हुई। जिसमें सरकार को घेरने की रणनीत बनाई गई।

यह पत्ता कर देगा आपके शरीर से मधुमेह व शुगर जैसी बीमारीयों को जड़ से खत्म


आज के आर्टिकल में हम बात करने जा रहे हैं मधुमेह है वह शुगर जैसी बीमारी को जड़ से खत्म कर देता है यह पता मैं आपको बताने जा रहा हूं आजकल यह दो बीमारी अधिकतम इंसानों में पाई जाती है ।


और इनसे बहुत ही इंसान परेशान हैं अगर हम बात करें मधुमेह मधुमेह का इलाज बहुत ही कम लोगों का हो पाता है और हम जो दवाइयां खाते हैं।

उनसे हमारे शरीर में साइडइफेक्ट होने का भी बहुत ही खतरा रहता है अगर आप इस रामबाण को अपनाते हो तो आपका मधुमेह व शुगर को जड़ से खत्म कर देता है यह पता इस पत्ते का नाम है।

अरबी का पत्ता कई जगह पर इसे कछु का पता भी कहा जाता है अगर हम इस पत्ते का सुबह-सुबह सेवन करते हैं तो हमारा यह बीमारी जड़ से खत्म हो जाता है यकीन न हो तो एक बार जरूर आजमा कर देखना ।

उबली हुई चाय की पत्तियां भी बहुत उपयोगी हैं, जिन्हें जानकर आप चौंक जाएंगे 

हमारे घरों में, दिन में चाय शुरू होती है। कुछ लोग चाय पीने के बाद ही बिस्तर से उठते हैं। हम अक्सर चाय बनाने के बाद चाय की पत्तियों को कचरे में दान कर देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस महंगी चाय पत्ती के कई फायदे हैं? आप उन्हें अपने दैनिक कार्य में उपयोग कर सकते हैं। आइए, जानते हैं इस बचे हुए चाय पत्ती के कुछ घरेलू फायदे –

संक्रमण से बचाव करें – चाय की पत्ती एक एंटीऑक्सीडेंट है। हम मामूली चोटों और घावों को ठीक करने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। चाय की पत्तियां हमें संक्रमण से बचाती हैं। चोट या घाव में उपयोग करने के लिए, आप चाय की पत्ती को उबाल लें और इसे चोट पर लगाएं। आप चाय के उबले पानी से अपनी चोटों और घावों को भी धो सकते हैं। यह आपको संक्रमित होने से बचाता है।

शाइन फर्नीचर हम लकड़ी से बने फर्नीचर बनाने के लिए चाय की पत्तियों का उपयोग भी कर सकते हैं। इस्तेमाल की गई चाय की पत्तियों को फिर से पानी में उबालें और एक बोतल में भर दें। इस पानी से लकड़ी के फर्नीचर की सफाई करने से उन्हें एक नई चमक मिलती है।

छोले बनाने में उपयोग इस्तेमाल की हुई चाय की पत्तियों को सुखा लें। काबुली चना बनाते समय, इस चाय पत्ती का एक पैकेट बनाएं और इसे डालें। उबले चने के पानी में काबुली चना का रंग और अधिक बढ़ जाएगा और काबुली चना और भी स्वादिष्ट हो जाएगा।

कंडीशनर का काम करें – चिपोटी बालों में कंडीशनर की तरह काम करता है। बालों में चमक लाने के लिए चपाती बहुत फायदेमंद है। उपयोग की गई चाय की पत्तियों को फिर से धोएं और उबालें। अपने बालों को धोने के लिए इस पानी का उपयोग करें। अगर आप नियमित रूप से ऐसा करते हैं तो आपके बाल तुरंत चमक जाएंगे।

क्रॉकरी चमकीली – आप वॉशिंग पाउडर में चाय की पत्ती मिलाएं और इससे अपनी क्रॉकरी साफ करें, आपकी क्रॉकरी चमकने लगेगी।

खाद करो – पौधों को बढ़ने के लिए नियमित खाद की आवश्यकता होती है। इस्तेमाल की हुई चाय पत्ती को धोकर साफ करें और इसे मिट्टी के बर्तन में मिलाएं। इससे आपके पौधे फलने-फूलने लगेंगे।