32 सीटर बस में भरीं थी 70 सवारी, आयुक्त बाेले-तुम नहीं सुधराेगे, इस बस काे जब्त कराे

ग्वालियर। सीधी बस हादसे के बाद परिवहन विभाग की नींद टूटी है। परिवहन आयुक्त मुकेश जैन खुद विभागीय अफसराें के साथ सड़काें पर उतरे आैर आेवरलाेड बसाें के खिलाफ कार्रवाई की है। इसके तहत गुरुवार काे ग्वालियर पनिहार हाइवे आैर मालवा कालेज के पास वाहनाें की जांच की गई है। इस दाैरान कई बसें आेवरलाेड दाैड़ती हुई मिली हैं। एक 32 सीटर बस में जब 70 यात्री भरे दिखाई दिए ताे परिवहन आयुक्त का गुस्सा फूट पड़़ा। उन्हाेंने बस चालक काे फटकार लगाते हुए कहा कि तुम लाेग नहीं सुधराेगे। इसके बाद परिवहन अमले काे बस काे जब्त करके थाने में रखवाने के निर्देश दिए गए।

ग्वालियर चंबल अंचल में बसाें में क्षमता से अधिक यात्रियाें काे ठूंस-ठूंस कर भरा जाता है। जितने यात्री सीट पर हाेते हैं, उतने ही बसाें में खड़े हाेकर यात्रा कर रहे हाेते हैं। कुछ बस चालक ताे सवारियाें काे छत पर भी बैठाते हैं। परिवहन विभाग के अफसराें की नींद भी तभी टूटती है, जब काेई हादसा हाेता है। अब सीधी बस हादसे के बाद परिवहन विभाग ने फिर फील्ड में कार्रवाई शुरू की है। गुरुवार काे परिवहन आयुक्त मुकेश जैन खुद अमले के साथ सड़काें पर चेकिंग के लिए निकले। इस दाैरान पनिहार के पास चेकिंग के दाैरान ग्वालियर से शिवपुरी जा रही बस काे चेकिंग के लिए राेका गया। जब आयुक्त ने बस में यात्रियाें की गिनती कराई ताे 32 सीटर बस में 70 यात्री भरे हुए थे। इसके बाद बस काे जब्त करके पनिहार थाने में रखवा दिया गया है।

वहीं एक बस में चार सवारी अतिरिक्त पाए जाने पर तीन हजार का जुर्माना किया गया है। साथ ही बिना परमिट सड़क पर दाैड़ रही एक बस काे जब्त करके झांसी राेड थाने में रखवाया गया है। मालवा कालेज से भी दाे बसाें काे जब्त किया गया है, जिसमें से एक बस में निर्धारित क्षमता से 17 यात्री अधिक सवार थे। इन वहीं बिना फिटनेस के दाैड़ रही एक बस काे भी जब्त किया गया है।

बंद को लेकर बनानी थी रणनीति, क्षेत्र बांटने को लेकर विवाद, कांग्रेस जिला अध्यक्ष के बेटे ने कार्यकर्ता से की मारपीट

प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में 20 फरवरी को भोपाल बंद को लेकर बुलाई गई बैठक में हंगामा हो गया। विवाद कार्यकर्ताओं के बीच क्षेत्र बांटने को लेकर शुरू हुआ। कार्यकर्ता अपने क्षेत्र में दूसरे को जिम्मेदारी देने पर झगड़ने लगे। आरोप है, कांग्रेस जिला अध्यक्ष कैलाश मिश्रा के बेटे ने दो कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की है। दोनों कार्यकर्ता पूर्व महापौर विभाग पटेल के समर्थक बताए जा रहे हैं। फिलहाल, मामले में कांग्रेस पदाधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में जिला अध्यक्ष कैलाश मिश्रा ने 20 फरवरी को भोपाल बंद की रणनीति को लेकर बैठक बुलाई थी। बैठक में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा भी मौजूद थे। बैठक में बंद कराने को लेकर पदाधिकारियों को अलग-अलग क्षेत्र बांटे जा रहे थे। इसी बीच क्षेत्र बांटने को लेकर विवाद हो गया। कार्यकर्ता अपने क्षेत्र में दूसरे को बंद की जिम्मेदारी देने को लेेकर आपत्ति जताने लगे। कुछ ही देर में हाथापाई शुरू हो गई। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है, कांग्रेस जिला अध्यक्ष कैलाश मिश्रा के बेटे अनिल मिश्रा और उनके समर्थक दो अन्य कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट करने लगे। इसमें एक कार्यकर्ता पूर्व महापौर विभा पटेल का समर्थक धर्मेन्द्र राय बताया जा रहा है।

बैठक में मौजूद लोगों ने बीच बचाव कर दोनों पक्षों को अलग किया। घटना का मीडिया को भी कवरेज करने से रोक दिया गया। मामले पर कांग्रेस के पदाधिकारी ने भी चुप्पी साध ली है। बैठक में कांग्रेस के कार्यालयीन मंत्री महेन्द्र सिंह चौहान, गोविंद गोयल, शेखर सिंह समेत अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे

ग्वालियर और डबरा में दिखा रेल रोको आंदोलन का असर, पुलिस को चकमा देकर रेलवे ट्रेक पर पहुंचे प्रदर्शनकारी, पुलिस ने हिरासत में लिया

ग्वालियर। किसानों के समर्थन में देशभर में जारी रेल रोको आंदोलन का ग्वालियर अंचल में खासा असर देखने को मिल रहा है और यहंा ग्वालियर और आसपास के जिले में किसान नेताओं द्वारा रेलवे ट्रेक पर प्रदर्शन किया जा रहा है ग्वालियर में भी फूलबाग से रैली निकाल कर पहंुचे प्रदर्शनकारियों ने यहंा रेलवे पुलिस और स्थानीय पुलिस को चकमा देकर पटरियों पर पहंुचने में सफलता पा ली और करीबन एक घंटे तक यहंा रेलवे ट्रेक पर किसान नेताओं माकपा कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन किया बाद में मौके पर पहंुची रेलवे पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों ने यहंा पुलिस पर लाठीचार्ज करने और दमनकारी नीति अपनाने का भी आरोप लगाया है।

कृषि कानून के विरोध में किसानों द्वारा बुलाए गए रेल रोको आंदोलन का असर केवल मध्य प्रदेश में केवल ग्वालियर अंचल में ही देखने को मिल रहा है। ग्वालियर के डबरा में किसान और कांग्रेस कार्यकर्ता रेलवे ट्रैक तक पहुंच गए। पुलिस ने क्रांसिंग पर ही उन्हें रोक लिया, इसके बाद वे पटरी पर बैठ गए। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है जो किसानों को पटरी से हटा रहा है, लेकिन किसान हटने को राजी नहीं। ग्वालियर में रेलवे स्टेशन पर चेकिंग लगा रखी थी, लेकिन प्रदर्शनकारी पुलिस को चकमा देते हुए एजी पुल के पास से आउटर से होते हुए रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए। उधर रीवा, सिंगरौली, बरगवां स्टेशन में विरोध करने पहुंचे किसान स्टेशन मास्टर को ज्ञापन सौपकर वापस लौट गए। यहां पुलिस के सख्त पहरे की वजह से कोई उग्र प्रदर्शन नहीं हो पाया।

नगदी और जेवरात लेकर भागी पेइंग गेस्ट युवतियों की लोकेशन दिल्ली में मिली

ग्वालियर। मनोहर एंक्लेव से 20 लाख रुपये व 10 तोला सोना समेटकर भागीं दो पेइंग गेस्ट युवतियों के मोबाइल की लोकेशन पुलिस को दिल्ली में मिली है। युवतियों की तलाश में पुलिस दिल्ली रवाना हो गई है। सिम कार्ड जिस स्थान पर रजिस्टर्ड है, वह फर्जी निकला है। उधर गाजियाबाद की श्वेता, जिसके कहने पर अशोक व किरण माखीजा ने बबीता व गगनप्रीत को बतौर पेइंग गेस्ट रखा था, उसका मोबाइल नंबर भी बंद आ रहा है और उसकी सिम जिस स्थान पर रजिस्टर्ड है, उसकी सही जानकारी नहीं मिल पा रही है। हालांकि पुलिस को मनोहर एंक्लेव में एक घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में दोनों युवतियों के फुटेज मिले हैं। जिसकी पहचान किरण माखीजा ने कर ली है।

गौरतलब है कि पटेल नगर स्थित मनोहर एंक्लेव में रहने वाले अशोक व किरण माखीजा अपने डुप्लेक्स में पेइंग गेस्ट रखते हैं। सोमवार को दो युवतियां उनके यहां ठहरने पहुंची थीं। जब मंगलवार दोपहर युवतियां बिना बताए वहां से चली गईं, तब उन्होंने अपने घर की अलमारी चेक की। अलमारी बंद थी, जिसे कटर से काटकर देखा तो उसमें रखे 20 लाख रुपये व 10 तोला सोना गायब था। इसमें सात लाख रुपये किरण के भाई के थे। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत की।विश्वविद्यालय थाना पुलिस का कहना है कि मामले में कई पेंच हैं। पहला तो यह कि घर में इतनी बड़ी रकम आखिर क्यों रखी गई थी। दूसरा यह कि जिस अलमारी में पैसा रखा था, उसमें चाबी क्यों लगाकर छोड़ी गई। इसके बाद जब चोरी की आशंका हुई और चाबी गायब मिली तो अलमारी का ताला किसी मिस्त्री से खुलवाने के स्थान पर उसे कटर से क्यों काटा गया। यह सभी बातें पुलिस को परेशान कर रही हैं। हालांकि इनके जवाब युवतियों के मिलने के बाद ही मिल सकेंगे।पुलिस का कहना है कि लग्जरी लाइफ स्टाइल और लग्जरी फ्लैट होने के बाद भी घर में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए। जिस कैमरे में युवतियां कैद हुई हैं, वहां पर शहर के कुछ प्रतिष्ठित लोग भी आते जाते दिखे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि माखीजा के घर पर युवतियों का ही अक्सर आना जाना लगा रहता था। हालांकि अशोक माखीजा पहले ही बता चुके हैं कि वह युवतियों को ही पेइंग गेस्ट के रूप में रखते थे। पर सवाल यह खड़ा हो रहा है कि इसकी जानकारी उन्होंने पुलिस को कभी नहीं दी।

CBRI की टीम तीसरी बार पहुंची महाकाल मंदिर, प्राचीनता व मजबूती बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी सुझाव रिपोर्ट

महाकालेश्वर मंदिर के स्ट्रक्चर की मजबूती की जांचने के लिए केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) रुड़की की टीम 17 फरवरी को दो दिन के लिए उज्जैन आई। इससे पहले भी यह टीम दो बार मंदिर के स्ट्रक्चर की जांच कर चुकी है। जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को दी जाएगी। महाकालेश्वर मंदिर के शिवलिंग क्षरण को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के स्ट्रक्चर की केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) रुड़की से जांच कराने के निर्देश दिए हैं। टीम ने मंदिर में पत्थरों के बने खंभों की जांच की।

जांच दल के प्रमुख वैज्ञानिक अचल मित्तल ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर मंदिर की प्राचीनता बनाए रखने के लिए CBRI के साथ GSI और ASI को भी लगाया गया है। तीनों संस्थान अपनी-अपनी तरह से रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। CBRI की टीम मंदिर में तीसरी बार जांच करने पहुंची है। इससे पहले काफी टेस्टिंग और विजुअल इंस्पेक्शन कर चुके हैं। अब फाइनल रिपोर्ट बनाने की ओर बढ़ रहे हैं।

उन्होंने बताया कि मंदिर की प्राचीनता बनाए रखने के लिए और क्या उपाय हो सकते हैं, पत्थरों और शिवलिंग के क्षरण रोकने और मंदिर को किसी तरह का नुकसान ना हो, इसकी जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम रिपोर्ट तैयार कर रही है।

पत्थरों पर एनेमल पेंट को हटाया गया

डॉ मित्तल ने बताया कि मंदिर में कई स्थानों पर पत्थरों को एनेमल पेंट से रंगरोगन किया गया था। जिसे ASI (ऑर्किलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) के निर्देश पर हटा दिया गया है। इससे पत्थरों की प्राचीनता बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि टीम अपनी रिपोर्ट में पत्थरों और शिवलिंग के क्षरण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट को अपना सुझाव देगी।

PoK में लगे आजादी के नारे, उतारा गया पाकिस्तानी झंडा

जम्मू-कश्मीर में आज एक ऐसी तस्वीर दिखी है जिसने पाकिस्तानी प्रोपगैंडा को तहस-नहस कर दिया है, पाकिस्तान के हर मंसूबे पर पानी फिर गया है, जो उसने 5 अगस्त 2019 के बाद भारत के खिलाफ बनाना शुरू किया था, ये दो तस्वीरें इसी का सबूत हैं, पहली तस्वीर उन कश्मीरियों पर पाकिस्तानी जुल्म की दास्तान है जो पीओके में हो रहा है, दूसरी तस्वीर उन कश्मीरियों की है जो खुशहाली के रास्ते पर चल कर खुश हैं, पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में आजादी के नारे लग रहे हैं, पाकिस्तानी झंडा उतारा जा रहा है, इधर जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने का असर, वहां के खिलखिलाते चेहरों पर साफ दिख रहा है, आज यहां पर 24 देशों के राजदूत इसी नए जम्मू-कश्मीर को देखने आए हैं.

श्रीलंका ने इमरान खान को किया बेइज्जत, संसद में बोलने का न्योता देकर कैंसल किया इवेंट; कश्मीर का है कनेक्शन

श्रीलंका ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की भारी बेइज्जती कर दी है। इमरान अगले सप्ताह श्रीलंका की संसद में बोलने की तैयारी में जुटे थे और इस बीच अचानक प्रोग्राम कैंसल कर दिया गया है। माना जा रहा है कि श्रीलंका ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि इमरान खान इस मौके का दुरुपयोग करते हुए कश्मीर पर बोल सकते थे।  

हालांकि, अधिकारियों ने पाकिस्तान को इसके लिए कोरोना संबंधी प्रतिबंधों को वजह बताया है, लेकिन कोलंबो में इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि सरकार ने इस बात पर दोबारा विचार किया है कि यदि इमरान अपने भाषण में कश्मीर का मुद्दा उठाते हैं तो इसका क्या असर होगा।

श्रीलंका के स्पीकर महिंद्रा अबेवर्देना ने पिछले सप्ताह राजनीतिक दलों के नेताओं को बताया था कि इमरान खान 22 फरवरी से दो दिवसीय दौरे पर संसद को संबोधित करेंगे। इमरान खान 24 फरवरी को संसद में बोलने वाले थे। खान राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे, प्रधानमंत्री महिंद्रा राजपक्षे और विदेश मंत्री दिनेश गुनावर्देना से भी मुलाकात करने वाले हैं।  

ऊपर उल्लेख किए गए शख्स ने बताया, ”लगता है संसद में संबोधन को लेकर पहले ठीक से विचार नहीं किया गया था। इमरान खान की ओर से कश्मीर मुद्दा उठाए जाने की संभावना को लेकर सरकार के भीतर काफी चर्चा हुई है। इसके बुरे असर की संभावना का आकलन करते हुए श्रीलंका ने इमरान खान के संबोधन को कैंसल करना ही बेहतर समझा।”

पाकिस्तान की सरकार कश्मीर मुद्दे को हर अंतरराष्ट्रीय फोरम पर उठा रही है, खासकर अगस्त 2019 में कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद से। पाकिस्तान ने पिछले साल भारत की ओर से कोरोना महामारी पर बुलाई गई सार्क देशों की वुर्चुअल बैठक में भी यह रोना रोया।  

कोलंबो गैजेट में छपी खबर के मुताबिक श्रीलंका के विदेश मंत्री ने अधिकारियों को बताया कि इमरान खान का संसद में संबोधन नहीं होगा। अन्य कार्यक्रम पहले से तय शेड्यूल के मुताबिक होगा। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान सरकार ने श्रीलंका से गुजारिश की थी कि इमरान खान से संसद को संबोधित कराया जाए। श्रीलंका की संसद को इससे पहले 2015 में पीएम नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया था। 

चीन से मीटिंग में नहीं बन रही थी बात, भारतीय सेना को मिली खुली छूट ने LAC पर पलट दी बाजी

नई दिल्ली
भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख सेक्टर में एलएसी (LAC- Line Of Actual Control) पर विवाद अपने नतीजे पर पहुंचता नजर आ रहा है। दोनों ही देश के सैनिक मोर्चे से पीछे हटने लगे हैं। बीते 9 महीनों से दोनों पड़ोसी देशों में जबर्दस्त सैन्य तनाव रहा था, जो अब खत्म होने के कगार पर है। भारतीय सीमा में फिंगर-4 तक घुस आए चीनी सैनिकों को आखिरकार वापस जाना पड़ रहा है। हालांकि, इन नतीजों तक पहुंचने में कई ऐसे मौके भी आए जब ऐसा लगा कि अब दोनों परमाणु संपन्न देशों में युद्ध तय है। गतिरोध के दौरान चीनी सैनिकों के खिलाफ किसी भी तरह का ऑपरेशन करने के लिए भारतीय सेना को खुली छूट दे दी गई थी। इसके बाद ही भारतीय सैनिकों ने एलएसी पर बाजी पलट दी।

LAC पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया शुरू

ये बातें सेना के नॉर्दर्न कमांड के चीफ लेफ्टिनेंट वाईके जोशी ने अपने एक इंटरव्यू में बताई है। जोशी ने बताया कि चीन हमारे क्षेत्र में फिंगर-4 तक आ पहुंचा था। गलवान में हिंसक झड़प भी हो चुकी थी। इसके अलावा बातचीत की मेज पर भी चीन का पलड़ा भारी था। ऐसे में बातचीत से जब सफलता मिलती दिखाई नहीं दी तब सेना को ऊपर से खास निर्देश मिले। इन निर्देशों में कुछ ऐसा करने को कहा गया था, जिससे चीन पर दबाव बने।

ऊपर से मिली खुली छूट

जोशी ने बताया कि हमें ऊपर से खुली छूट मिल चुकी थी कि जो ऑपरेशन चलाना है.. चलाइए। इसके बाद 29-30 अगस्त की दरमियानी रात को पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर रेजांग ला और रेचिन ला पर भारतीय सैनिकों ने कब्जा कर लिया और भारतीय फौज दबदबे के पोजिशन पर आ गई। इसके बाद जब अगले दौर की बातचीत हुई तो भारत का पलड़ा भारी था। हालांकि, इस दौरान ऐसा वक्त भी आया जब लगा कि अब दोनों देशों में युद्ध हो सकता है।

युद्ध के कगार पर खड़े थे दोनों देश

जोशी ने बताया कि 30 अगस्त को जब भारतीय सैनिकों ने रेजांग ला और रेचिन ला पर कब्जा कर लिया, तब चीनी सेना कैलाश रेंज में आमने-सामने आना चाहती थी। इसके अलावा भारतीय सैनिकों को भी किसी भी ऑपरेशन के लिए खुली छूट मिल चुकी थी। जोशी ने कहा कि ऐसे हालात में जब दुश्मन आप देश के सैनिकों को अपनी ओर आते देखते हैं तो युद्ध की संभावना प्रबल हो जाती है। उन्होंने कहा कि हम एकदम युद्ध की कगार पर ही खड़े थे। वह वक्त हमारे लिए काफी चुनौतीपूर्ण था।

गौरतलब है कि लंबे तनावपूर्ण माहौल के बाद पूर्वी लद्दाख के विवादित इलाके से चीनी और भारतीय सैनिक वापस लौटने लगे हैं। डिसइंगेजमेंट के लिए राजी होने के बाद चीन ने वहां अपने अस्थायी निर्माण को भी हटाना शुरू कर दिया है। बताया गया कि डिसइंगेजमेंट से एलएसी पर यथास्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा और चीन का भारतीय क्षेत्रों पर अतिक्रमण नहीं होगा।

अकेले रहना सेहत के लिए हो सकता है नुकसानदायक

अकेलापन सिर्फ दिमाग की ही अवस्था नहीं है बल्कि यह शारीरिक रूप से खुद को भी पूर्ण्तः प्रकट करता है और आपके स्वास्थ्य के लिए यह बहुत अधिक हानिकारक हो सकता हैं। एक हालिया अध्ययन से यह पता चलता है कि अकेले लोग दिल की गंभीर समस्याओं से मरने की संभावना से दोगुना हो जाते हैं। अकेले महसूस करना पुरुषों और महिलाओं दोनों की तुलना में दिल की गंभीर समस्याओं से खराब परिणामों में से मौजूद हैं।

“आज अकेले की तुलना में अकेलापन बहुत अधिक आम शब्द है और पूर्ण रूप से अधिकतर लोग अकेले रहते हैं।”पिछले शोध से यह पता चला है कि अकेलापन और सामाजिक अलगाव हृदय रोग और स्ट्रोक से जुड़ा हुआ है, लेकिन विभिन्न प्रकार के कार्डियोवैस्कुलर बीमारी वाले रोगियों में इसकी जांच नहीं हुई हैं”। अकेलापन कार्डियोवैस्कुलर बीमारी वाले मरीजों में समय से पूर्व मौत, खराब मानसिक स्वास्थ्य में अत्यधिक प्रभावी होता हैं। अकेले महसूस करने वाले पुरुष और महिलाएं चिंता और अवसाद के लक्षणों की रिपोर्ट से लगभग तीन गुना अधिक हैं।

गरीब सामाजिक समर्थन से पीड़ित लोगों के पास इससे सम्बंधित अत्यधिक खराब परिणाम हो सकते हैं, क्योंकि उनके पास अस्वास्थ्यकर जीवन शैली है, उपचार के साथ कम अनुपालनशील हैं, और तनावपूर्ण घटनाओं से भी अत्यधिक प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा, “हमने अपने विश्लेषण में जीवन शैली के व्यवहार और कई अन्य कारकों के लिए समायोजित किया है, और अभी भी पाया है कि अकेलापन स्वास्थ्य के लिए बहुत बुरा है।”