पूर्व सीएम कमलनाथ पहुचे सीएम हाउस , शिवराज ने खुद बाहर आकर किया रिसीव, किसानों की समस्याओं को लेकर हुई बात

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ शुक्रवार सुबह 10:30 बजे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलने सीएम हाउस पहुंचे थे। दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनिट की मुलाकात हुई। इसको लेकर कांग्रेस के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने कहा कि कमलनाथ ने शिवराज से किसानों की समस्याओं को लेकर बात की है। इसके अलावा लीज नवीनीकरण के दो तरह के नियमों के चलते लोगों को आ रही परेशानी के बारे में मुख्यमंत्री को अवगत कराया है। इसको लेकर कमलनाथ ने एक दिन पहले गुरुवार को एक पत्र भी शिवराज को लिखा था। बताया जाता है कि कमलनाथ ने कृषि कानूनों और किसान आंदोलन को लेकर शिवराज सिंह से चर्चा की है।

कमलनाथ ने बताया कि कृषि कानूनों से किसानों को किस तरह नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि राजनीति से परे हटकर किसान हितैषी व्यक्ति को इन कानूनों का विरोध करना चाहिए। हमारा देश कृषि पर आधारित है। इन कानूनों से खेती और किसान दोनों को नुकसान होगा। कमलनाथ ने विकास के मुद्दों पर भी शिवराज से चर्चा की। हालांकि सीएम हाउस के सूत्रों का कहना है कि कमलनाथ केवल सौजन्य भेंट करने आए थे। मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि बजट सत्र से पहले कमलनाथ और शिवराज की मुलाकात को अहम माना जा रहा है। दरअसल, सत्र के पहले दिन विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव होगा। विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से अध्यक्ष बीजेपी से ही बनेगा। इसके अलावा यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि कमलनाथ नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ सकते हैं। हालांकि इसको लेकर कमलनाथ पहले कह चुके हैं कि नेता प्रतिपक्ष कौन होगा, यह विधायक आपस में समन्वय बनाकर तय करेंगे। इससे पहले कमलनाथ 11 नवंबर 2020 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से मुलाकात करने सीएम हाउस पहुंचे थे। यह मुलाकात उप चुनाव का परिणाम आने के ठीक एक दिन बाद हुई थी। तब कमलनाथ ने शिवराज को जीत की बधाई दी थी। जबकि चुनाव के दौरान दोनों नेताओं के बीच तल्ख बयानबाजी हुई थी। बावजूद दोनों नेता पूरी आत्मीयता से मिले थे। उस दौरान कमलनाथ के साथ उनके बेटे व छिंदवाड़ा से सांसद नकुलनाथ भी थे।

कौन ज्योतिरादित्य ? मैं नहीं जानता ! मैं भाजपा कार्यकर्ता हूं , गुटबाजी के सवाल पर बोले सिंधिया

ग्वालियर। राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बार-बार गुटों संबंधी सवालों पर विराम लगाते हुए कहा कि कौन ज्योतिरादित्य सिंधिया. मैं नहीं जानता, मै सिर्फ भाजपा कार्यकर्ता हूं। यह बात ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा के प्रदेश प्रभारी मधुकर राव के इंदौर में सिंधिया समर्थकों के समावेश के संबंध में दिए गए बयान के संदर्भ कही। सिंधिया गुरुवार की रात को निजी कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए तीन घंटे के अल्पप्रवास पर आए थे।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्टेशन पर मीडिया से चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण व योजना आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एनके सिंह का आभार जताते हुए कहा कि चंबल का पानी मुरैना व ग्वालियर लाने, चंदेरी के बुनकरों व महकाल मंदिर के जीणोद्धार के लिए पत्र लिखा था। यह पत्र मैंने कोरोना संक्रमण काल में लिखा था। इन तीनों कार्यों के लिए केंद्र सरकार ने 400 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद स्वीकृत की है। उन्होंने कहा कि मेरी कोशिश होगी कि जब में यहां आओ, खाली हाथ नहीं आओ।

वैचारिक मतभेद अलग बात हैं- सदन में दिग्विजय सिंह से हुए संवाद पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि विचारों का आदन-प्रदान होते हैं। विचारधार में मतभेद हो सकते हैं। राजनीति का एक स्तर होना चाहिए। मैंने 20 साल के राजनीतिक जीवन में इसी स्तर को बनाए रखा है। सदन में जो दिग्विजय सिंह को कहना था, उन्होंने कहा, जो मुझे कहना था, वो मैंने कहा। उमा भारती द्वारा शराब बंदी को लेकर दिए बयान पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।

मेला पिछले साल की तुलना बराबर रिवेन्यू हासिल हो- मेला के संबंध में सिंधिया ने कहा कि पहले का रिवेन्यू गिरकर 100 करोड़ रुपये रह गया था। उसके बाद चार सौ करोड़ हुआ. पिछले साल आठ सौ करोड़ रहा। कोरोना संक्रमण के बाद लग रहे मेला का रिवेन्यू पिछले साल के बराबर रहना चाहिए। इसकी कोशिश की जा रही है।

भारत की राह पर ईरान, पाकिस्‍तान की सीमा में ‘सर्जिकल स्‍ट्राइक’ करके छुड़ाए अपने सैनिक

तेहरान
पाकिस्‍तानी आतंकियों के लगातार हमले से भड़के ईरान की सेना ने भारत की राह पर चलते हुए कथित रूप से पाकिस्‍तानी सीमा में घुसकर सर्जिकल स्‍ट्राइक किया और अपने दो सैनिकों को छुड़ा लिया। बताया जा रहा है कि ईरान के अत्‍यंत प्रशिक्षित रिवाल्‍यूशनरी गार्ड्स ने पाकिस्‍तानी आतंकी संगठन जैश अल-अदल के ठिकाने पर हमला करके करीब ढाई साल से बंदी अपने जवानों को छुड़ा लिया। ईरान की फार्स न्‍यूज एजेंसी के मुताबिक जैश उल-अदल एक कट्टरपंथी वहाबी आतंकवादी गुट है जो दक्षिणी-पश्चिमी पाकिस्‍तान में ईरान सीमा पर सक्रिय है।

फार्स न्‍यूज एजेंसी ने बताया कि जैश उल-अदल ने ही फरवरी 2019 में ईरान सेना पर हमले की जिम्‍मेदारी ली थी जिसमें कई जवान मारे गए थे। ईरान सेना ने गुप्‍त सूचना के आधार पर मंगलवार की रात को इस ‘सर्जिकल स्‍ट्राइक’ को अंजाम दिया। ईरानी सेना ने एक बयान जारी करके कहा, ‘मंगलवार की रात को एक सफल ऑपरेशन को अंजाम दिया गया है और पिछले ढाई साल से जैश उल अदल के कब्‍जे में बंदी दो सैनिकों को छुड़ा लिया गया।’

ईरान ने जैश उल अदल को आतंकी संगठन घोषित किया
बयान में कहा गया है कि ईरानी सैनिक सफलतापूर्वक देश वापस लौट आए हैं। एनाडोलु एजेंसी के मुताबिक 16 अक्टूबर 2018 को जैश उल-अदल ने ईरानी सेना के 12 बार्डर गार्ड्स का अपहरण कर लिया था। इस घटना को पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के मर्कवा शहर में अंजाम दिया गया था। यह इलाका पाकिस्तान-ईरान सीमा के नजदीक स्थित है। इसके बाद दोनों देश की सेना ने जवानों को छुड़ाने के लिए एक ज्वाइंट कमेटी भी बनाई थी।

जैश उल अदल ने इनमें से 5 सैनिकों को नवंबर 2018 में छोड़ दिया था। 21 मार्च 2019 को पाकिस्तानी सेना ने अपनी कार्रवाई में ईरानी सेना के 4 अन्य सदस्यों का रेस्क्यू कर लिया था। ईरान ने जैश उल अदल को आतंकी संगठन घोषित किया हुआ है। यह संगठन ईरान के खिलाफ सशस्त्र अभियान चलाता रहता है। इसमें बलोच सुन्नी मुसलमान शामिल हैं जो ईरान सुन्नियों के अधिकारों की रक्षा करने का दावा करते हैं।

कौन है जैश उल-अदल आतंकी संगठन
जैश उल-अदल लंबे समय से पाकिस्‍तान-ईरान सीमा पर सक्रिय है और उसी ने ईरान के बसीज अर्द्धसैनिक ठिकाने पर हमला किया और ईरानी सेना के कई जवानों की हत्‍या कर दी थी। इस आतंकी गुट का दक्षिणी-पाकिस्‍तान में ठिकाना है और उसने सुन्‍नी आतंकी गुट जूनदुल्‍लाह के सदस्‍यों को अपने गुट में शामिल करके अपने अभियान की शुरुआत की थी। ईरान ने जूनदुल्‍लाह के कमांडरों को अरेस्‍ट कर लिया था। इसके बाद उसके बचे हुए सदस्‍य जैश उल-अदल में चले गए।

जैश उल अदल ने वर्ष 2014 में भी 5 ईरानी सीमा रक्षकों का सीस्‍तान और बलूचिस्‍तान की सीमा से अपहरण कर लिया था और उन्‍हें पाकिस्‍तान के अंदर ले गए थे। करीब दो महीने बाद चार सैनिकों को छोड़ दिया गया था और एक सैनिक की हत्‍या कर दी गई थी। उसका शव ईरान को मिला था। मार्च 2015 में जैश उल अदल के एक सरगना सलाम रिगी को एक बस से अरेस्‍ट कर लिया था।

सांसद नंदकुमार चौहान की हालत नाजुक, एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाने की तैयारी

भोपाल। खंडवा से भाजपा के सांसद नंदकुमार सिंह चौहान की हालत नाजुक हैं, वे पिछले कुछ दिनों से कोरोना से संक्रमित थे। लेकिन, उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आने के बावजूद उनकी हालत बिगड़ गई है। बताया जा रहा है कि उनकी हालत को देखते हुए उन्हें एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाया जाएगा। हाल ही में दिल्ली एम्स के डाक्टरों की टीम ने भी उनके स्वास्थ्य का परीक्षण किया था। शुक्रवार को सुबह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उनके हालचाल लिए।

गौरतलब है कि नंद कुमार सिंह चौहान 16वीं लोक सभा के सदस्य हैं और वे मध्य प्रदेश के खंडवा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। नंदू भैया नाम से चर्चित चौहान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और भोपाल के 74 बंगला स्थित बंगले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पड़ोसी हैं।

मंदिरों में महामृत्युंजय जाप

इससे पहले जब सांसद नंदकुमार सिंह चौहान की रिपोर्ट कारोना पाजिटिव आई थी और हालत बिगड़ने लगी थी तो पिछले कुछ दिनों से मंदिरों में महामृत्युंजय का भी पाठ किया जा रहा है। बुरहानपुर जिले के बोहरड़ा के महादेव संगमेश्वर मंदिर में महामृत्युंजय का पाठ कर शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रार्थना की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि सांसद नंदकुमार सिंह चौहान (नंदू भैया) की रिपोर्ट कोरोना पाजिटिव आई थी और उन्हें भोपाल के चिरायु अस्पताल में भर्ती कराया गया था। नंदू भैया ने ट्वीट पर लिखा था कि प्रिय साथियों में अस्वस्थ महसूर कर रहा था, कोरोना की जांच कराने के बाद मेरी रिपोर्ट पाजिटिव आई है। पिछले दिनों जो भी मेरे संपर्क में आई थें वे भी अपनी जांच करवा लें।

रूस भारत को इस साल दे देगा ‘ब्रह्मास्‍त्र’ S-400, भारतीय सैनिकों ने शुरू की ट्रेनिंग

मास्‍को
रूस ने ऐलान किया है कि वह तय समय पर इस साल के आखिर तक S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम भारत को सौंप देगा। S-400 मिसाइल एयर डिफेंस सिस्‍टम बनाने वाली रूसी कंपनी रोसोबोरोनएक्‍सपोर्ट ने कहा कि भारत के साथ समझौते को तय समय पूरा किया जाएगा। इससे पहले रूसी सेना के तकनीकी सहयोग मामले के डायरेक्‍टर व्‍लादिमीर द्रोझझोव ने खुलासा किया था कि भारतीय सेना के विशेषज्ञों ने इस ‘ब्रह्मास्‍त्र’ को चलाने की ट्रेनिंग शुरू कर दी है।

द्रोझझोव ने भी कहा कि इस साल के आखिर तक भारत को यह प्रणाली दे दी जाएगी। उन्‍होंने कहा, ‘भारतीय विशेषज्ञ रूस पहुंच गए हैं और उन्‍होंने एस-400 को चलाने की ट्रेनिंग शुरू कर दी है। भारत ने वर्ष 2015 में रूस के साथ एस-400 को खरीदने की इच्‍छा जताई थी और अक्‍टूबर 2018 में रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान इस समझौते पर हस्‍ताक्षर हुआ था।

अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा, भारत खरीद पर अटल

बता दें कि रूस को अपना दुश्‍मन नंबर एक बता चुके अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडेन भारत को एस-400 डील पर बड़ा झटका दे सकते हैं। दरअसल, भारत रूस से अत्‍याधुनिक S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम खरीदने के फैसले पर अटल है लेकिन अमेरिका इस डील का कड़ा विरोध कर रहा है। यही नहीं अब खतरा मंडरा रहा है कि बाइडेन तुर्की की तरह से भारत पर भी कड़े प्रतिबंध लगा सकते हैं। एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम अब मोदी सरकार और बाइडेन प्रशासन के बीच दोस्‍ती में बड़ा ‘कांटा’ बन गया है।

भारत रूस से 5.4 अरब डॉलर में एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम ले रहा है। यही नहीं भारत रूस के हथियारों का बहुत बड़ा ग्राहक है। भारत ने अमेरिका के ऑफर को ठुकराकर रूसी सिस्‍टम पर दांव लगाया है। भारत ने ऐसा चीन और पाकिस्‍तान के खतरे को देखते हुए अपनी सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए किया है। हाल ही में चीन ने भी भारतीय सीमा के पास एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम ही तैनात कर रखा था। इस वजह से भारत को इस सिस्‍टम की और ज्‍यादा जरूरत आन पड़ी है।

‘नाटो सदस्‍य देश तुर्की भी अमेरिकी प्रतिबंधों से नहीं बच सका’

भारत ने अमेरिका को दो टूक बता दिया है कि वह इस सिस्‍टम को खरीदने से पीछे नहीं हटेगा। भारत रूस ही नहीं अमेरिका से भी बड़े पैमाने पर हथियार खरीद रहा है। इसमें अपाचे हेलिकॉप्‍टर, चिनूक और पी-8 आई निगरानी विमान शामिल हैं। हालांकि अभी भी भारत के 60 फीसदी हथियार रूसी हैं। भारत के अपने फैसले पर अटल रहने पर अब अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा पैदा हो गया है। अमेरिका ने रूस से एस-400 खरीदने पर तुर्की के खिलाफ CAATSA के जरिए प्रतिबंध लगा दिया था।

अमेरिका को डर है कि एस-400 के जरिए रूस अमेरिकी हथियारों से जुड़े राज जान सकता है। एमआईटी में राजनीति विज्ञान के प्रफेसर विपिन नारंग ने हिंदुस्‍तान टाइम्‍स से बातचीत में कहा, ‘असलियत यह है कि नाटो सदस्‍य देश तुर्की भी अमेरिकी प्रतिबंधों से नहीं बच सका, इससे पता चलता है कि अमेरिका एस-400 को लेकर कितना चिंतित है। यह संभवत: केवल कूड़ा नहीं है। भारत का इस साल एस-400 लेने पर जोर बाइडेन प्रशासन को भारत के खिलाफ प्रतिबंध लगाने पर मजबूर कर सकता है।’ बता दें कि भारती सेना के विशेषज्ञों को जल्‍द ही एस-400 के इस्‍तेमाल का प्रशिक्षण‍ मिलने वाला है।

वाह जी महाराज वाह…आखिर किस बात पर संसद में दिग्विजय सिंह को सिंधिया ने हाथ जोड़कर कहा- आपका ही आशीर्वाद है

राज्यसभा में आज यानी गुरुवार को विभिन्न विपक्षी दलों ने तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के चल रहे विरोध प्रदर्शन के मुद्दे पर सरकार पर हमला बोलते हुए मौजूदा आंदोलन से निपटने के तरीके पर सवाल उठाया। हालांकि, इस दौरान राज्यसभा में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया में एक गजब सी जुगलबंदी देखने को मिली। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मोदी सरकार का पक्ष रख कांग्रेस को घेरा, मगर जब दिग्विजय सिंह की बोलने की बारी आई तो उनकी बातें ऐसी थीं कि पूरा सदन ही ठहाकों से गूंजने लगा। 

दरअसल, जब भारतीय जनता पार्टी के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह बोलने के लिए खड़े हुए तो उन्होंने सबसे पहले कहा, ‘सभापति महोदय! मैं आपके माध्यम से सिंधिया जी को बधाई देना चाहता हूं, जितने अच्छे ढंग से वे यूपीए सरकार में सरकार का पक्ष रखते थे उतने ही अच्छे ढंग से आज उन्होंने भाजपा का पक्ष रखा है। आपको बधाई हो, वाह जी महाराज वाह, वाह जी महाराज वाह!’

दिग्विजय सिंह की इस बात पर मुस्कुराते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हाथ जोड़ लिए और जब दिग्जविजय सिंह की बात खत्म हुई तो ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, ‘सब आपका ही आशीर्वाद है।’ इसके बाद राज्यसभा में ठहाके गूंजने लगे। इतना ही नहीं, खुद दिग्विजय सिंह भी मुस्कुराने लगे। ज्योतिरादित्य सिंधिया की यह बात सुन दिग्विजय सिंह ने तुरंत कहा- ‘हमेशा रहेगा, आप जिस पार्टी में रहें, आगे भी जो हो, हमारा आशीर्वाद आपके साथ था, है और रहेगा।’

सिंधिया ने कैसे किया सरकार का बचाव
भाजपा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नए कृषि कानूनों का बचाव करते हुए कहा कि किसान देश के लिए रीढ़ की हड्डी और अन्नदाता हैं और वे अपना ही नहीं पूरे विश्व का पेट भरते हैं। उन्होंने कहा कि तीनों कृषि कानून इसलिए लाए गए ताकि उनकी प्रगति हो सके। उन्होंने कहा कि देश को राजनीतिक आजादी करीब 70 साल पहले मिल गयी थी लेकिन किसानों को उनकी वास्तविक आजादी नहीं मिल पायी। भाजपा नेता ने कहा कि नए कृषि कानूनों से किसानों को आजादी मिल सकेगी और वे देश भर में कहीं भी अपनी उपज बेच सकेंगे जिससे उनकी आय भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ 11 बार संवाद हुआ है और सरकार ने 18 महीने कानून स्थगित करने की भी बात की है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

सिंधिया का कांग्रेस पर हमला
उन्होंने इस क्रम में कांग्रेस पर हमला बोला और कहा कि पार्टी ने 2019 में अपने चुनावी घोषणा पत्र में कृषि सुधारों का वायदा किया था। इसके अलावा राकांपा नेता और तत्कालीन संप्रग सरकार में कृषि मंत्री शरद पवार ने 2010-11 में हर राज्यों के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कृषि क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को अनिवार्य बनाने संबंधी बात की थी। सिंधिया ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, ‘जुबान बदलने की आदत बदलनी होगी… जो कहें, उस पर अडिग रहें।’

कोरोना पर भी कांग्रेस को घेरा
भाजपा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि कोरोना वायरस के कारण पिछला साल काफी चुनौतीपूर्ण रहा लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा समय से उठाए गए कदमों से स्थिति में काफी सुधार हुआ। उन्होंने कहा कि महामारी से मुकाबला करने के लिए प्रधानमंत्री ने सभी प्रयासों को एक ही मुट्ठी में बांधा और युद्धस्तर पर नीति तैयार की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी के खिलाफ न सिर्फ भारत में बल्कि साझा विश्व अभियान का भी नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि समय से उठाए गए कदमों के कारण भारत मामारी के दूसरे चरण से बच गया और लाखों जानें बच सकीं। महामारी पर काबू पाने के लिए लगाए गए लॉकडाउन की चर्चा करते हुए भाजपा नेता ने कहा कि 60 दिनों के अंदर भारत ने महत्वपूर्ण कामयाबी हासिल की और पीपीई किट का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन गया तथा साल भर के अंदर देशी टीका तैयार कर लिया गया।

भारत को बदनाम करने की साजिश रचने वाली ग्रेटा थनबर्ग के समर्थन में कांग्रेस, अधीर रंजन चौधरी PM मोदी पर कसा तंज

नई दिल्ली  । कृषि कानूनों के विरोध में अब कांग्रेस खुलकर विदेशी सेलिब्रिटी व सामाजिक कार्यकर्ताओं के समर्थन में आ गई है। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने विवादित पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग का समर्थन किया है और प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा है। गौरतलब है कि कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने पॉप स्टार रिहाना के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए किसान आंदोलन को देश का आंतरिक मामला बता रहे हैं, वहीं अधीर रंजन चौधरी ने विवादित पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा का समर्थन करते हुए कई ट्विट किए हैं। अधीर रंजन चौधरी ने ट्विट किया है कि अब हम एक ग्लोबल विलेज में रहते हैं। फिल हमें आलोचना से डरना क्यों चाहिए। हमें अपने फैसलों पर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। आप सभी किसानों द्वारा उत्पादित भोजन को खाकर बड़े हुए हैं। ठीक ये होगा कि आप भी उन भारतीय किसानों के साथ एकजुटता दिखाएं।

एक अन्य ट्विट ने अधीर रंजन चौधरी ने लिखा कि पॉप स्टार रिहाना और ग्रेटा थनबर्ग ने देश में चल रहे किसान आंदोलन के प्रति एकजुटता दिखाई है तो हम इतना अधिक परेशान क्यों हो रहे हैं? अधीर रंजन चौधरी ने प्रधानमंत्री मोदी पर भी तंज कसते हुए एक ट्विट किया है, जिसमें लिखा है कि हमारे कुछ राष्ट्रवादियों ने अमेरिका में कहा कि ‘अबकी बार, ट्रंप सरकार’, इसका क्या मतलब था? जब हमने जॉर्ज फ्लॉयड के साथ हुई क्रूरता का विरोध किया, तब तो किसी ने सवाल नहीं किया?

आखिर क्या है ग्रेटा थनबर्ग का टूलकिट मामला

ग्रेट थनबर्ग सिर्फ 18 साल की एक पर्यावरण कार्यकर्ता है, जिन्होंने हाल ही में पावर प्वाइंट सॉफ्टवेयर पर बनाई हुए एक टूलकिट (किसान आंदोलन के संबंध में प्लानिंग) ट्वीट की थी। जब इस टूलकिट के बारे में शुरुआती जांच की गई तो पता चला कि इस टूलकिट को कनाडा में स्थित एक खालिस्तानी समर्थन संगठन ने तैयार किया है और उसे ही ग्रेटा थनबर्ग ने शेयर किया था। ऐसे में यह आशंका को जोर मिला कि ग्रेटा थनबर्ग को खालिस्तानी संगठनों की ओर से फंडिंग भी की जा रही है और खालिस्तानी संगठनों ने ही ग्रेटा थनबर्ग को किसान आंदोलन को इस्तेमाल करने के लिए खड़ा किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ग्रेटा थनबर्ग ने जो टूलकिट शेयर की थी, उसे भारत के हितों को नुक़सान पहुंचाने के उद्देश्य से पीस फॉर जस्टिस नाम की संस्था ने तैयार किया है। इस विवादित संस्था के सह-संस्थापक मो धालिवाल खुद को खालिस्तान समर्थक बताते हैं और कनाडा के वैंकूवर में रहते हैं।

विवाद बढ़ने पर ग्रेटा थनबर्ग डिलीट कर दी टूलकिट

खालिस्तानी संगठन पीस फॉर जस्टिस द्वारा तैयार की गई टूलकिट को शेयर करने पर ग्रेटा थनबर्ग पर सवाल उठने लगे तो उन्होंने तत्काल ट्विट को डीलिट कर दिया। टूल किट में कुछ इस तरह की हेडिंग दी गई थी “भारत की ‘योगा और चाय’ की छवि को तोड़ना”, “26 जनवरी को प्रवासी भारतीयों में संगठित वैश्विक हंगामा”, “कृषि कानूनों को निरस्त करना” आदि। लेकिन थनबर्ग ट्विट डीलिट करती, उससे पहले ही कई लोगों ने स्क्रीनशॉट ले लिए और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए। ऐसे में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी द्वारा ग्रेटा थनबर्ग का समर्थन करना कांग्रेस को सवालों के घेरे में खड़ा कर सकता है।

बैंकों में जमा हैं 35,000 करोड़ रुपये! लेने वाला कोई नहीं, देखें कहीं आपका पैसा भी तो यूं ही नहीं फंसा, जानें कैसे करें क्‍लेम

देश के कई बैंकों में एक-दो लाख नहीं बल्कि 35 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा ऐसा पैसा जमा है, जिसे कोई निकालने आता ही (Unclaimed Deposits) नहीं है. यह पैसा फिक्स डिपॉजिट (Fixed Deposits) के साथ ही सेविंग और करंट अकाउंट्स (Saving & Current Accounts) में 10 साल से ज्यादा वक्त बीतने के बाद भी पड़ा है.


नई दिल्‍ली. हमारी आदत होती है कि पैसों को संभाल कर रखते हैं और बाद में भूल जाते हैं. गद्दों के नीचे, किचन में डिब्‍बों में तो कई बार जेब में ही पैसे पड़े रह जाते हैं. देश में चार साल पहले यानि 8 नवंबर 2016 को हुई नोटबंदी के बाद न जाने घरों से कितने रुपये निकले जो महिलाओं ने आड़े वक्त के लिए बचाकर रखे थे. बाद में कई वाकये ऐसे भी आए, जिसमें बड़ी-बड़ी रकम भी निकली जो लोग खुद रखकर भूल गए थे. यहां तक तो समझ में आता है, लेकिन क्या आप अपना पैसा बैंक में जमा (Bank Deposits) करके निकालना तो नहीं भूल गए. एक बार दिमाग पर जोर डालिए क्‍योंकि आंकड़े तो यही कह रहे हैं कि देश में लाखों लोग अपना पैसे की सुध लेना ही भूल गए हैं.

हमारे देश में जहां कुछ रुपयों के लिए बड़े-बड़े अपराध हो जाते हैं, वहां कई बैंकों में एक-दो लाख नहीं बल्कि 35 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा ऐसा पैसा जमा है, जिसे कोई निकालने आता ही (Unclaimed Deposits) नहीं. ऐसा नहीं है कि यह पूरा पैसा फिक्स डिपॉजिट (Fixed Deposits) में जमा है, बल्कि सेविंग व करंट अकाउट्स (Saving & Current Accounts) में दस साल से ज्यादा के वक्त के बाद भी पड़ा है. वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने देश के बैंकों में पड़े ऐसे ही अनक्लेम अमाउंट को लेकर रिपोर्ट तैयार की है.

सिर्फ बीमा कंपनियों के पास ही 53 हजार करोड़ से ज्यादा
बैंकों में पैसा रखकर भूल जाने के अलावा इस रिपोर्ट में ऐसे लोगों का भी जिक्र भी है, जिन्‍होंने विभिन्‍न कंपनियों के जरिए बीमा या पॉलिसी करवाई, लेकिन उसका भी क्लेम नहीं लिया. जानकार हैरानी होगी कि अलग-अलग बीमा कंपनियों के पास आज की तारीख में ऐसे 53,116 करोड़ रुपये पड़े हैं, जिन पर किसी ने दावा ही नहीं किया है. इसमें भी नॉन लाइफ इश्योरेंस पॉलिसी यानि एक्सीडेंट कवर इंश्‍योरेंस, हाउस होल्‍ड इंश्योरेंस, टर्म प्लान, हेल्थ इंश्योरेंस का क्लेम लेने कोई नहीं आया. ऐसे मामलों में 1579.47 करोड़,
जबकि लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी कंपनियों के पास 53,115.86 करोड़ रुपये दावा नहीं किए जाने के कारण पड़े हैं.

ऐसे मिल सकता है आपको अपना पैसा
बैकिंग विशेषज्ञ जितेश श्रीवास बताते हैं कि कई लोग एक से ज्यादा बैंक में खाता खुलवाते हैं. जहां उनके 500 से 1000 रुपये तक जमा रहते हैं, लेकिन वो उन्हें यह सोचकर नहीं निकालते हैं कि शायद बैंक ने कई चार्जेज लगाकर पैसा काट लिया होगा. हालांकि, ऐसा सिर्फ उन खातों में होता है, जहां न्यूनतम राशि बैंक में रखना अनिवार्य होती है. अगर मिनिमम बैलेंस रखना अनिवार्य नहीं है तो आप जब चाहें अपना पैसा निकाल सकते हैं. यही नहीं आपको बैंक ब्याज सहित पैसा वापस करेगा. साथ ही यदि आप छिपकर भी किसी बैंक में पैसा जमा करते हैं तो उसकी जानकारी भी अपने किसी परिजन को जरूर दें ताकि आपके नहीं रहने पर घर की जरूरत के लिए वो पैसा निकाला जा सके.

SBI के ATM से पैसे निकालते हैं तो ये नया नियम जान लीजिए वरना जुर्माना लगेगा

लाइन तो लगेगी रे बाबा! क्योंकि अंदर वाला पहले अकाउंट बैलेंस चेक करेगा, तभी पइसा निकालेगा. (फाइल फोटो- PTI)

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ATM से पैसा निकालते हैं, तो थोड़ा ज्यादा सावधान रहिएगा. वजह? देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक ने ATM से मनी विदड्रॉअल को लेकर नया नियम जारी किया है. कहा है कि अपर्याप्त बैलेंस के कारण फेल हुए हर ट्रांजेक्शन पर अब यूज़र को फाइन भरना होगा. माने आपके बैंक अकाउंट में जितना पैसा है, ATM से निकालते वक्त उससे ज़्यादा अमाउंट डाल रहे हैं तो अव्वल तो आपका वो ट्रांजेक्शन फेल तो होगा ही. फिर इस फेल हुए ट्रांजेक्शन के लिए बैंक आपसे पैसा भी वसूलेगा. कितना? 20 रुपए प्लस GST.

ये जुर्माना तभी भरना होगा, जब आपका ट्रांजेक्शन अपर्याप्त बैलेंस के कारण फेल हुआ हो. बाकी किसी तकनीकी खामी की वजह से या ATM में कैश न होने की वजह से अगर ट्रांजेक्शन फेल होता है तो बैंक आप पर जुर्माना नहीं लगाएगा. ये उनकी ग़लती है.

ऐसे बच सकते हैं इस जुर्माने से

अब इस जुर्माने से कैसे बचें? एक ही तरीका है- अपने अकाउंट बैलेंस की जानकारी रखें और उसकी लिमिट में ही ATM से मनी विड्रॉल करें. अकाउंट बैलेंस की जानकारी के लिए SBI की मिस्ड कॉल मारकर मैसेज पर अकाउंट बैलेंस मंगाने वाली सेवा है. कस्टमर केयर कॉल करके भी बैलेंस जान सकते हैं. ATM पर पैसा निकालने से पहले भी वहीं अकाउंट बैलेंस चेक कर सकते हैं. या फिर Online SBI इस्तेमाल करते हैं तो वहां से जानकारी ले सकते हैं. SBI के टोल फ्री नंबर इस ट्वीट में देख सकते हैं.