रिटायर्ड ऑफिसर पूरी करेंगे लद्दाख की सड़क परियोजनाएं, पहाड़ी क्षेत्रों में जोखिम भत्ते में 733% का इजाफा

चीन-बांग्लादेश सीमा से राष्ट्रीय राजमार्गों का संपर्क सुदृढ़ करने के लिए सरकार तीनों सेनाओं सहित केंद्र व राज्य सरकार के शीर्ष स्तर के सेवानिवृत्त अधिकारियों की सेवाएं लेने जा रही है। इसका मकसद लद्दाख, कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड व पूर्वोत्तर के राज्यों में सामरिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण राजमार्ग परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में विषम परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने हाल में जोखिम भत्ते में 733 फीसदी का इजाफा किया है।

सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के सर्वाजनिक उपक्रम राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) ने 05 अक्तूबर को ठेके पर भर्ती के लिए सेवानिवृत्त अधिकारियों से आवेदन मांगे हैं। इसकी अंतिम तारीख 02 नवंबर है। उपक्रम में तकनीकी अथवा परियोजना पद पर कार्यकारी निदेशक, महाप्रबंधक, उप महाप्रबंधक, प्रबंधक, महाप्रबंधक (भूमि अधिग्रहण), उप महाप्रबंधक (वित्त) पदों पर भर्ती की जाएगी।

एनएचआईडीसीएल के एक शीर्ष अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कार्यकारी निदेशक को सरकारी फार्मुले के हिसाब से लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये महीने वेतन व 40,000 रुपये जोखिम भत्ता (लद्दाख) दिया जाएगा।

महाप्रबंधक को एक लाख 81 हजार से दो लाख 25 हजार रुपये वेतन व 36,000 रुपये जोखिम भत्ता, उप महाप्रबंधक को एक लाख 20 हजार से एक लाख 75 हजार रुपये व 32,000 रुपये जोखिम भत्ता, प्रबंधक को एक लाख 10 हजार से डेढ लाख रुपये वेतन व 24,000 रुपये जोखिम भत्ता दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि आवेदन करने वालों की योग्यता सिविल इंजीनियर, मैकेनिकल इंजीनियर, इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की डिग्री व निश्चित कार्यकाल का अनुभव होना चाहिए। शीर्ष अधिकारियों की उम्र 61 साल के ऊपर नहीं होनी चाहिए और उन्हें शुरू में दो साल के लिए ठेके पर रखा जाएगा। इसके पश्चात 65 साल उम्र तक उनको विस्तार मिल कसेगा।

हाईवे बनाने के लिए मैकेनिकल इंजीनियर, स्थायी भर्ती बंद
जानकारों का कहना है कि सीमा सड़क संपर्क जैसी अति महत्वपूर्ण परियोजनओं के लिए एनएचएआईडीसीएल में हाईवे इंजीनियरों की स्थायी भर्ती नहीं हो रही है। हाइवे निर्माण के लिए दक्ष हाईवे इंजीनियरों के बजाए उपक्रम में इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, सिविल इंजीनियरों को ठेके पर रखने का अदूरदर्शी फैसला किया जा रहा है। इनका सड़क निर्माण से कोई लेना-देना नहीं है। उपक्रम के स्थायी अधिकारी सड़क परियोजना को बेहतर तरीके से पूरा करने में सक्षम हैं और उनकी जवाबदेही तय होती है। जबकि ठेके पर रखे अधिकारियों पर यह बात लागू नहीं होती है। बताते हैं कि एनएचआईडीसीएल प्रशासन द्वारा आए दिन बड़े पैमाने पर तबादले करने से स्थायी अधिकारी उपक्रम को छोड़ रहे हैं। जिस कारण विभाग को ठेके पर भर्ती करनी पड़ रही है।

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