अब क्या करेंगे केपी ओली? नेपाली जमीन पर चीनी कब्जे के खिलाफ अपनी ही पार्टी में उठी आवाज

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अब तक चीनी कब्जे से आंखें मूंदे रहे। मीडिया, जनता और विपक्षी नेताओं की बात को केपी सरकार ने झूठा बता दिया, लेकिन अब उनकी पार्टी के भीतर भी आवाज उठने लगी है। नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी और स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य ने ही अपनी सरकार से कहा है कि नेपाल-चीन सीमा विवाद की सच्चाई देश को बताई जाए और हुम्ला में ड्रैगन के कब्जे की ठीक से जांच कराई जाए।

सत्ताधारी पार्टी की स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य भीम रावल ने सरकार से कहा है कि सरकार नेपाल-चीन सीमा मुद्दे पर तथ्यों को सार्वजनिक करे। उन्होंने यह भी डिमांड की कि हुम्ला के नामखा रूरल म्युनिसिपैलिटी में एक टीम से जांच कराई जाए, जिसमें सरकारी अधिकारी, सर्वे डिपार्टमेंट और विदेश मंत्रालय के सदस्य शामिल हों। 

सोमवार को एक ट्वीट में नेता भीम रावल ने कहा कि देश के भौगौलिक अखंडता से जुड़े मुद्दे का समाधान निष्पक्षता से होनी चाहिए। गौरतलब है कि चीन ने नेपाल के हुम्ला जिले में सीमा पार करके 9 इमारतों का निर्माण कर लिया है। पिछले महीने यह बात मीडिया में आई तो नेपाल सरकार ने आनन-फानन में इसका खंडन कर दिया।

इस बीच नेपाली कांग्रेस ने चीन पर हुम्ला से जुड़ी नेपाली भूमि पर अतिक्रमण करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस के केंद्रीय सदस्य और कर्णाली में मुख्य विपक्षी दल के नेता जीवन बहादुर शाही के नेतृत्व में एक टीम ने विवादित क्षेत्र की ऑन-साइट निगरानी करने के बाद रिपोर्ट को सार्वजनिक की है।

नेपाली न्यूज वेबसाइट कांतिपुर के मुताबिक, शाही के नेतृत्व में एक टीम नेपाल-चीन सीमा पर साइट का अध्ययन करने के लिए नाम्खा गांल नगरपालिका -6 में लिमी और लापचा पहुंची थी। टीम ने निष्कर्ष निकाला कि चीनी सरकार ने छह महीने पहले लोलुंगजोग और लिमी-लापचा की सीमा पर एक नया स्तंभ नंबर 12 बनाया है। शाही ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “सरकार की लापरवाही के कारण नेपाली भूमि का अतिक्रमण किया गया है। चीनी बिना किसी बाधा के नेपाली भूमि पर आ रहे हैं, लेकिन हुमला के लोगों को वहां जाने की अनुमति नहीं है।”

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