रामविलास पासवान के निधन से बिहार चुनाव में नया मोड़, कुछ यूं बदलेगा वोटों का खेल

नई दिल्‍ली/पटना
पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का निधन बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों पर असर डाल सकता है। उनके बेटे चिराग ने इस चुनाव में नीतीश कुमार को उखाड़ फेंकने का दम भरा है। ऐसे में सीनियर पासवान के निधन से लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) सहानुभूति वोट बटोर सकती है। पासवान के जाने से दुसाध वोट चिराग के साथ खड़े हो सकते हैं। रामविलास पासवान दशकों तक दुसाधों के सबसे बड़े नेता रहे। चुनाव में दुसाधों की सक्रिय भागीदारी के चलते ही पासवान की राजनीतिक ताकत कभी कमजोर नहीं हुई। चिराग उसी ताकत को नीतीश के खिलाफ इस्‍तेमाल करना चाहते हैं।

दुसाध एकजुट होकर एलजेपी को कर सकते हैं वोट
सीनियर पासवान बीमार होने के चलते पहले ही इन चुनावों में भागीदारी नहीं करने वाले थे। ऐसे में सवाल उठ रहे थे कि चिराग क्‍या दुसाधों को उसी तरह साध पाएंगे जैसे उनके पिता करते थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री के निधन ने इसकी संभावना बढ़ा दी है कि दुसाध एकजुट होकर एलजेपी के लिए वोट करें। पार्टी ने गुरुवार को नीतीश और जेडीयू को झटका लेने वाले प्‍लान पर कदम आगे बढ़ा दिए हैं। करीब महीना भर पहले चिराग ने पिता की बीमारी का जिक्र करते हुए कहा था कि वह उनके राजनीतिक काम को आगे बढ़ाना चाहते हैं। बीमारी के चलते पासवान प्रचार भी नहीं करने वाले थे। एक दलित नेता के रूप में पासवान का जो कद था, वह बिहार ही नहीं, राष्‍ट्रीय स्‍तर के नेता थे।

चुनाव में बीजेपी-जेडीयू से होना है मुकाबला
बीजेपी के लगभग हर बड़े नेता ने पासवान के निधन पर शोक जताया है। हालांकि चुनाव में बीजेपी और जेडीयू को एलजेपी से दो-दो हाथ करने पड़ेंगे। ऐसे कयास हैं कि बीजेपी ने एलजेपी को भी साधा हुआ है लेकिन वह ऐसी परिस्थिति नहीं चाहती जहां जेडीयू के साथ उसका गठबंधन बहुमत से दूर रह जाए क्‍योंकि तब चिराग को ऐडवांटेज होगा। चुनाव प्रचार शुरू रहा है, ऐसे में बीजेपी पासवान को श्रद्धांजलि तो देगी लेकिन एलजेपी का विरोध करेगी। बीजेपी के शीर्ष नेता नीतीश कुमार के लिए अपना समर्थन बार-बार दोहरा चुके हैं।

चिराग के आगे खुद को साबित करने की चुनौती
पासवान का जाने से चिराग पर खुद को साबित करने का दबाव बढ़ गया है। सीनियर पासवान कई विरोधाभासों के बावजूद अपने राजनीतिक लक्ष्‍य हासिल कर लेते थे। सीनियर पासवान ने वाजपेयी सरकार में मंत्रालय बदलने पर एनडीए छोड़ दिया था और फिर यूपीए में मंत्री बने। इसके बावजूद उन्‍होंने बीजेपी से हाथ मिलाया और 2014 में फिर केंद्र में मंत्री पद हासिल किया। हाल ही में चिराग ने वोटर्स और पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील में कहा था कि ‘पापा का अंश हूं इसलिए उन्‍हें पता है कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में सफल होते हैं।’ सूत्रों के मुताबिक, एलजेपी लोगों के बीच जाकर यह कहेगी कि वह पासवान के ‘सपने’ को पूरा करेगी।

पासवान के निधन से चंद घंटे पहले ही एलजेपी ने एक पत्र सार्वजनिक किया था। 24 सितंबर को बीजेपी अध्‍यक्ष जेपी नड्डा को लिखी चिट्ठी में चिराग ने कहा था कि जब उनके पिता राज्‍यसभा सीट के लिए नामांकन दाखिल करने से पहले मुलाकात कर समझाने गए थे तो नीतीश का व्‍यवहार ‘ठीक नहीं था। जब यह चिट्ठी सार्वजनिक हो गई है तो इसे फैलाकर एलजेपी की पोजिशन को और मजबूत करने की कोशिशें होंगी।

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