उपचुनाव के रंग : चुनाव प्रचार की थकान के बीच गोलगप्पे का मज़ा लेते नज़र आये नरेंद्र तोमर

केंद्रीय संगठन की ओर से ग्वालियर चंबल (Gwalior-chambal) की जिम्मेदारी नरेंद्र सिंह तोमर को दी गई है.यही वजह है कि यहां ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ साथ नरेंद्र सिंह तोमर भी पूरा दम दिखा रहे हैं

तोमर (Tomar) पिछले कुछ दिनों से ग्वालियर चंबल में मंडल सम्मेलनों में शामिल होकर बीजेपी(BJP) के बूथ स्तर की टीम को रिचार्ज कर रहे हैं

भोपाल. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में चुनाव तारीखों के ऐलान और प्रत्याशियों के नाम तय होने के बाद अब उप चुनाव (By Election) का रंग पूरी तरह से चढ़ गया है. कोरोना की वजह से लोगों के बीच भले ही थोड़ी सी घबराहट हो लेकिन राजनीतिक पार्टियां शायद अब इस डर से जीत पा चुकी हैं. यही वजह है कि उपचुनाव के अजब-गजब रंग नजर आ रहे हैं.

कुछ ऐसा ही रंग चंबल के भिंड में उस वक्त नजर आया जब प्रचार के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री और ग्वालियर चंबल के दिग्गज बीजेपी नेता नरेंद्र सिंह तोमर एक ठेले पर जाकर खड़े हो गए. नरेंद्र सिंह तोमर ने यहां न केवल गोलगप्पे का मजा लिया बल्कि अपने समर्थकों को भी इसका स्वाद दिलवाया. ग्वालियर चंबल इलाके में फुल्की का अपना ही मज़ा है यहां की कुछ सबसे ज्यादा बिकने वाली चीजों में से एक फुल्की है.

तोमर दिखा रहे दम

ग्वालियर चंबल उप चुनाव के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण है. उप चुनाव में 28 में से 16 सीटें इसी इलाके से हैं. दो साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में इन सभी पर कांग्रेस का कब्जा़ था. इन विधायकों ने सिंधिया के साथ कांग्रेस का हाथ छोड़कर बीजेपी का कमल पकड़ लिया है इसलिए यहां उप चुनाव हो रहे हैं.केंद्रीय संगठन की ओर से ग्वालियर चंबल की जिम्मेदारी नरेंद्र सिंह तोमर को दी गई है.यही वजह है कि यहां ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ साथ नरेंद्र सिंह तोमर भी पूरा दम दिखा रहे हैं. तोमर पिछले कुछ दिनों से ग्वालियर चंबल में मंडल सम्मेलनों में शामिल होकर बीजेपी के बूथ स्तर की टीम को रिचार्ज कर रहे हैं. वो लगातार इस इलाके में कैम्प कर रहे हैं. हालांकि ये इलाका उनका घर है लेकिन सियासी तौर पर इस बार घर ही उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है.

ग्वालियर चम्बल से निकलेगा सत्ता का रास्ता

मध्य प्रदेश में 28 सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव में सत्ता का रास्ता ग्वालियर चम्बल से ही निकलेगा. यही वजह है कि बीजेपी और कांग्रेस के लिए यहां सबसे बड़ा अखाड़ा बन गया है. कांग्रेस की ताकत यहां थोड़ी कमजोर हुई है क्योंकि सिंधिया के साथ उनके समर्थक विधायक भी बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. यही वजह है कि कमलनाथ पूरा फोकस ग्वालियर चंबल पर कर रहे हैं

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