युवाओं में बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक के मामले, जानिए कैसे करें इससे बचाव

कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक (Heart Attack) की घटनाओं के लिए विभिन्न कारकों को जिम्मेदार ठहराया गया है. इनमें बढ़ता मोटापा, प्रोसेस्ड फूड (Processed Food), पेय पदार्थों का अधिक सेवन, शारीरिक गतिविधियों में कमी और उच्च कोलेस्ट्रॉल (High Cholesterol) के बढ़ते मामले शामिल हैं.

तनाव और मोबाइल का ज्‍यादा इस्तेमाल भी दिल से जुड़ी समस्याओं को बढ़ाता है.

कुछ साल पहले तक ऐसा माना जाता था कि कोरोनरी धमनी रोग बुजुर्गों में होने वाली बीमारी है, लेकिन हाल के वर्षों में हार्ट अटैक की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. विशेष रूप से 40 साल से कम उम्र के वयस्कों (Adults) में. वास्तव में अमेरिका (America) में की गई एक रिसर्च (Research) के अनुसार जिन लोगों को हार्ट अटैक (Heart Attack) होता है उनमें से 20% लोग ऐसे हैं जिनकी उम्र 40 साल या इससे भी कम है. यह एक ऐसी दर है, जो पिछले 10 वर्षों से लगातार प्रति वर्ष 2% की दर से बढ़ रही है. साथ ही यह भी देखा गया है कि हार्ट अटैक के युवा मरीजों में मौत का जोखिम बुजुर्गों में मौत के जोखिम के समान ही होता है.

कम उम्र में हार्ट अटैक की घटनाएं बढ़ने के पीछे कारण क्या है?

कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक की घटनाओं के लिए विभिन्न कारकों को जिम्मेदार ठहराया गया है. इनमें सबसे प्रमुख कारकों में- बढ़ते मोटापे (कमर-हिप अनुपात), प्रोसेस्ड फूड (Processed Food) और पेय पदार्थों का अधिक सेवन और शारीरिक गतिविधि में कमी के कारण डायबिटीज, हाई बीपी और उच्च कोलेस्ट्रॉल की बढ़ती घटनाएं शामिल हैं. काम से जुड़ा तनाव और मोबाइल या लैपटॉप का अधिक से अधिक इस्तेमाल भी दिल से जुड़ी समस्याओं में महत्वपूर्ण योगदान देता है.

एक अन्य कारक जो युवाओं में हार्ट अटैक की बढ़ती घटनाओं के लिए जिम्मेदार है वह है युवा आबादी द्वारा अधिक से अधिक धूम्रपान करना और कोकेन और मारिजुआना जैसे मादक पदार्थों का सेवन करना. इन गलत और अनुचित मादक पदार्थों के सेवन से कोरोनरी यानी हृदय की धमनियों में अचानक संकुचन और कसाव उत्पन्न होता है जिससे हृदय में खून का प्रवाह बाधित होता है और इसके परिणामस्वरूप हार्ट अटैक हो सकता है.

इसके अलावा युवा आबादी में हार्ट अटैक की आनुवंशिक प्रवृत्ति का भी अच्छी तरह से अध्ययन किया गया है. आमतौर पर यह देखा जाता है कि अगर किसी व्यक्ति के पिता या भाई को 55 वर्ष से कम उम्र में दिल का दौरा पड़ता है या फिर अगर उनकी मां या बहन को 65 वर्ष से कम की उम्र में हार्ट अटैक का अनुभव होता है तो उस व्यक्ति को भी कम उम्र में ही कोरोनरी धमनी रोग होने की आशंका बढ़ जाती है. ऐसे लोगों को अपनी सेहत के प्रति अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होती है.

युवाओं में हार्ट अटैक की घटनाओं को रोकने के लिए क्या करना चाहिए?
सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि युवाओं को धूम्रपान और नशीले पदार्थों को छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. दूसरा तरीका ये है कि युवाओं को ऐसी जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए जो हार्ट हेल्दी हो. इसमें ज्यादा से ज्यादा ताजे फल और सब्जियों का सेवन किया जाना चाहिए, सप्ताह के अधिकांश दिनों में शारीरिक गतिविधियों में शामिल होना चाहिए, वजन कम करने और शरीर को नुकसान पहुंचाने वाली हानिकारक आदतों को छोड़ने के लिए जो भी करना हो जरूर करना चाहिए. अगर कोई व्यक्ति डायबिटीज और हाई बीपी से पीड़ित हो तो उसके लिए डाइट कंट्रोल और दवाओं का समय पर सेवन करना बेहद जरूरी है.

इसके अलावा एक्सपर्ट्स द्वारा यह भी सलाह दी जाती है कि 20 से 39 वर्ष के बीच के लोगों को हर 4 से 6 वर्ष में एक बार अपना कार्डिएक यानी हृदय संबंधी मूल्यांकन जरूर करवाना चाहिए. जिन लोगों को जेनेटिक यानी आनुवंशिक रूप से हृदय रोग होने का खतरा अधिक हो उन्हें हृदय जांच की आवृत्ति को बढ़ाना चाहिए यानी कम समय के अंदर 2-3 साल के बीच जांच करवानी चाहिए. यह भी देखने में आता है कि अगर किसी व्यक्ति को कम उम्र में ही दिल का दौरा पड़ता है, तो उन्हें जीवन में बाद के सालों में एक और हार्ट अटैक या स्ट्रोक होने का खतरा काफी बढ़ जाता है. हार्ट अटैक की प्रारंभिक पहचान और रोकथाम के उपायों के बारे में युवाओं में जागरूकता फैलाना इस स्थिति की सफल रोकथाम और प्रबंधन के मामले में सबसे महत्वपूर्ण कदम है.

इस आर्टिकल को माइ उपचार के लिए डॉ रोहित गोयल, सलाहकार, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टिट्यूट, गुरुग्राम ने लिखा है।

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