ड्रैगन को जमीन से लेकर समुद्र तक घेरने की तैयारी, आज म‍िल रहे Quad देश तो भड़का चीन

पेइचिंग
पूर्वी लद्दाख से लेकर ऑस्‍ट्रेलिया तक दादागिरी पर उतारू चीनी ड्रैगन पर नकेल कसने के लिए दुनिया के 4 शक्तिशाली देश आज जापान की राजधानी तोक्‍यो में बड़ी बैठक करने जा रहे हैं। भारत-ऑस्‍ट्रेलिया-अमेरिका-जापान के विदेश मंत्री ‘द क्वॉड्रिलैटरल सिक्‍यॉरिटी डायलॉग’ (Quad) के तहत आज मुलाकात करने जा रहे हैं जिसमें चीन की बढ़ती आक्रामकता का मुद्दा प्रमुखता से उठने जा रहा है। उधर, क्‍वॉड की इस बैठक से चीन भड़क उठा है और उसने इसे ‘षडयंत्रकारियों का विशेष दल’ करार दिया है।

क्‍वॉड की बैठक से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इसमें 5G कनेक्‍टविटी, साइबर सिक्‍यॉरिटी, मैनुफैक्‍चर‍िंग सेक्‍टर के लिए एक सप्‍लाई चेन, समुद्र नौवहन के क्षेत्र में सहयोग, इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर और कनेक्‍टव‍िटी के मुद्दे पर चर्चा होगी। इसके अलावा कोविड-19 वैक्‍सीन के वितरण के लिए एक अग्रिम योजना समेत उन सभी क्षेत्रों पर चर्चा होगी जहां पर चीन का विकल्‍प मुहैया कराया जा सके। यह बातचीत भारतीय समयानुसार दोपहर में करीब डेढ़ बजे शुरू होगी।

क्‍वॉड बैठक से भड़का चीन, बताया ‘मिनी नाटो’
उधर, इस बैठक से पहले ही चीन ने क्‍वॉड की बैठक को ‘षडयंत्रकारियों का विशेष दल’, चीन के खिलाफ अग्रिम मोर्चा और ‘मिनी नाटो’ करार दिया है। चीन ने कहा कि यह कोल्‍ड वॉर के समय की मानसिकता है जिसका नेतृत्‍व अमेरिका का कर रहा है। क्‍वॉड देशों के साथ ड्रैगन का तनाव बढ़ता जा रहा है और चीन के इन बयानों ने उसके इरादों को साफ कर दिया है। क्‍वॉड की इस बैठक और उसके परिणामों पर चीन की पूरी नजर रहेगी।

ड्रैगन के ख‍िलाफ एशियाई नाटो बनाने की तैयारी!
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक क्‍वाड की इस बैठक में शुरुआत में ‘क्षेत्रीय आकलन’ किया जाएगा जिसमें दक्षिण और पूर्वी चीन सागर, लद्दाख में 6 महीने से चल रहा गतिरोध, हॉन्‍ग कॉन्‍ग और ताइवान के मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। चारों देशों के नेता अंडमान सागर के पास नवंबर में होने वाले मालाबार नौसैनिक अभ्‍यास में ऑस्‍ट्रेलिया को शामिल करने पर चर्चा करेंगे। हालांकि इसमें अभी ऑस्‍ट्रेलिया को शामिल करने पर कोई फैसला नहीं हुआ है। ऑस्‍ट्रेलिया के शामिल होने की घोषणा भारत का रक्षा मंत्रालय करेगा। माना जा रहा है कि मालाबार अभ्‍यास से ‘एशियाई नाटो’ बनाने का रास्‍ता साफ हो सकता है।

चीन से अलग सप्‍लाइ चेन बनाने पर बनेगी रणनीति

इस बैठक में चारों देश चीन से अलग एक सप्‍लाइ चेन बनाने पर बात करेंगे ताकि ड्रैगन की मनमानी को काबू में किया जा सके। इसे जापान आगे बढ़ा रहा है ताकि भारत और ऑस्‍ट्रेलिया की मदद से चीन पर से निर्भरता को कम किया जा सके। इस बैठक में भारत से आसियान देशों के बीच ‘ईस्‍ट-वेस्‍ट’ कनेक्‍टविटी को बढ़ाने पर जयशंकर जोर देंगे ताकि चीन के नॉर्थ-साउथ कनेक्‍टविटी को करारा जवाब दिया जा सके। इसके अलावा इंडो-पैसफिक क्षेत्र में इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर परियोजनाओं के संयुक्‍त फंड‍िंग पर भी विचार किया जाएगा।

इस बैठक में हिस्‍सा लेने के लिए चारों देशों के विदेश मंत्रियों ने विशेष प्रयास किए। खासतौर पर ट्रंप प्रशासन इस बैठक को लेकर काफी उत्‍सुक है। बैठक से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा, ‘यह बहुत शानदार यात्रा होने जा रही है। इसको अमलीजामा पहनाने के लिए हम लंबे समय से काम कर रहे थे और यह बैठक उसी के समर्थन में हो रही है। अपने क्‍वॉड पार्टनर के साथ मुलाकात करने की योजना की हम तैयारी कर रहे थे। हम आशा करते हैं कि कई महत्‍वपूर्ण घोषणाएं और उपलब्धियां हासिल होंगी।’

चीन के खिलाफ साझा रणनीति बनाने पर होगी सहमति!
भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्‍ट्रेलिया की यह बैठक अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनाव से ठीक पहले हो रही है। माना जा रहा है कि इसमें चीन पर एक साझा समझ बनेगी और भविष्‍य में उठाए जाने वाले कदमों का खाका तैयार होगा। इस बैठक के महत्‍व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि डोनाल्‍ड ट्रंप बीमार हैं और उन्‍हें छोड़कर माइक पोम्पियो जापान पहुंचे हैं। दरअसल, कोरोना महामारी पर पूरी दुनिया में घिरे चीन के दोस्तों की फेहरिस्त घटती जा रही है।

अमेरिका, भारत, जापान सहित दुनिया के कई बड़े देश अब उसके खिलाफ हो रहे हैं। ऐसे में चीन के खिलाफ NATO और EU की तरह एक मजबूत मोर्चा बनाने की कवायद काफी तेज हो गई है। अमेरिका, जापान, ऑस्‍ट्रेलिया और भारत ‘द क्वॉड्रिलैटरल सिक्‍यॉरिटी डायलॉग’ (क्‍वॉड) को चीन के खिलाफ मजबूत गठबंधन के तौर पर तैयार करने में जुटे हैं। चीन की विस्तारवादी नीति के कारण उसके ज्यादातर पड़ोसी देश उससे खफा हैं। चीन के खिलाफ इस गठबंधन में कनाडा के भी शामिल होने की खबरें हैं। कनाडा की हाल के महीने में भारत के साथ काफी चर्चाएं हुई हैं और उसने SCS में ताईवान के रास्ते एक जंगी जहाज भी भेजा है।

ऑस्ट्रेलिया के कारण क्‍वॉड के गठन में हुई थी देरी

इस संगठन को पहली बार साल 2007 में स्थापित करने का ऐलान किया गया था, लेकिन 2008 में आई भीषण आर्थिक मंदी के कारण ऐसा हो न सका। उस समय ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री केविन रूड थे जो चीन के करीबी माने जाते थे। उनके कार्यकाल के दौरान ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच संबंध बेहद मजबूत हुए थे। रूड खुद चीनी भाषा मंडारिन भी बहुत अच्छी तरह बोलते थे। ऐसे में उन्होंने इस गुट में शामिल होने से खुद को अलग कर लिया था।

कभी क्‍वॉड की सबसे कमजोर कड़ी था भारत

क्‍वॉड की दूसरी सबसे कमजोर कड़ी भारत को माना जाता था। इसकी वजह दोनों देशों के बीच होने वाला आर्थिक व्यापार था। 2014 में जब भारत में सत्ता परिवर्तन हुआ उसके बाद से राष्ट्रवाद की भावना भी तेजी से बढ़ी। 1962 के बाद से ही भारत में चीन को शक की निगाह से देखा जाता रहा है। हाल में जब चीन ने लद्दाख के क्षेत्र में घुसपैठ की और गलवान की घटना को अंजाम दिया तब भारत का ड्रैगन से पूरा मोहभंग हो गया। इसी कारण भारत और अमेरिका भी तेजी से करीब आए।

क्या है क्‍वॉड जानिए

द क्वॉड्रिलैटरल सिक्‍यॉरिटी डायलॉग (क्‍वॉड) की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी। हालांकि इसकी शुरुआत वर्ष 2004-2005 हो गई जब भारत ने दक्षिण पूर्व एशिया के कई देशों में आई सुनामी के बाद मदद का हाथ बढ़ाया था। क्‍वाड में चार देश अमेरिका, जापान, ऑस्‍ट्रेलिया और भारत शामिल हैं। मार्च में कोरोना वायरस को लेकर भी क्वॉड की मीटिंग हुई थी। इसमें पहली बार न्यूजीलैंड, द. कोरिया और वियतनाम भी शामिल हुए थे।

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