इंडियन आर्मी और एयरफोर्स के 2 दोस्त, जिनकी वजह से तय है चीन की लद्दाख में करारी हार!

पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन के बीच हालात अप्रैल महीने से ही काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। दोनों देशों की सेनाएं तनाव में नरमी लाने की पुरजोर कोशिशें कर रही हैं, लेकिन चीन की चालबाजी की वजह से सफलता नहीं मिल रही। इस वजह से सीमा पर किसी भी हालात से निपटने के लिए भारत की तीनों सेनाएं पूरी तरह से तैयार हैं। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) को बने हुए दस महीने हो गए हैं, जिसकी वजह से भारतीय सेना को और मजबूती मिली है। हालांकि, इन सबके बीच गौर करने वाली यह बात है कि इस समय एयरफोर्स और आर्मी के प्रमुख, दोनों नेशनल डिफेंस एकेडमी के कोर्समेट्स हैं और दोनों की ही सेनाएं संयुक्त रूप से पूर्वी लद्दाख में चीन से युद्ध लड़ने का अभ्यास कर रही हैं।

इस समय सेना के प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे और वायुसेना प्रमुख मार्शल आरकेएस भदौरिया हैं। दोनों ही एनडीए के दिनों से काफी करीबी दोस्त भी हैं। लेह के आसमान में भारतीय वायुसेना के C-17s, Ilyushin-76s और C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान देखे जा सकते हैं, जोकि चीनी सेनाओं के विपरीत आगे की ओर तैनात भारतीय सैनिकों के लिए राशन और आपूर्ति के साथ उड़ान भर रहे हैं। लद्दाख क्षेत्र में तैनात एक वरिष्ठ वायुसेना कमांडर ने कहा, “मुख्यालय के ऊपर से निर्देश स्पष्ट हैं कि सेना और अन्य सुरक्षा बलों द्वारा जो भी आवश्यकताएं हैं, उन्हें पूरा किया जाना चाहिए।”

फॉरवर्ड एरिया में तैनात सेना के एक अधिकारी ने कहा कि इन दिनों सीडीएस जनरल बिपिन रावत और दोनों सेनाओं के प्रमुख अक्सर चर्चा करते हैं और चीनी सेना के खिलाफ कार्रवाई की योजना बनाते हैं। दो सेनाएं संयुक्त रूप से काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, ”सेना जोकि चीनी सैनिकों के साथ आमने-सामने की स्थिति में तैनात है, भी नियमित रूप से भारतीय वायु सेना को अपनी डोमेन जागरूकता बढ़ाने के लिए जमीन पर वास्तविक स्थिति के बारे में अपडेट दे रही है और उन्होंने हालात के बिगड़ने की स्थिति में संयुक्त रूप से कुछ ऑपरेशंस की योजना बनाई है।” सेनाओं के इन प्रयासों को जमीन पर देखा जा सकता है, क्योंकि सेनाएं चीन और पाकिस्तान दोनों से लद्दाख सेक्टर में निपटने की तैयारी कर रही हैं।

लद्दाख में दिख रहे चिनूक हेलीकॉप्टर

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा की ओर लेह से सड़क पर, चीन और बेहद कठोर सर्दियों से जूझ रहे सेना के जवानों को आपूर्ति प्रदान करने के लिए सिंधु नदी के ऊपर चिनूक को उड़ते हुए देखा जा सकता है। वहीं, एलएसी के पास वायुसेना के चिनूक और Mi-17V5s हेलीकॉप्टरों को एक उन्नत लैंडिंग ग्राउंड (ALG) की ओर उड़ते हुए देखा जा सकता है। यहां वे सर्दियों से निपटने के लिए जवानों के लिए शेल्टर्स के पैनल समेत बाकी जरूरी चीजें उपलब्ध करा रहे हैं।

चीन से तनाव में अहम भूमिका निभा रहे ये हेलीकॉप्टर्स

लद्दाख में किसी भी स्थिति से निपटने के लिए मौजूद भारतीय वायुसेना का हर विमान यूं तो जवानों की मदद कर रहा है, लेकिन नए खरीदे गए चिनूक और अपाचे हेलीकॉप्टर्स से काफी मदद मिल रही है। ये दोनों ही चीन के साथ जारी तनाव में अहम भूमिका निभा रहे हैं। 14 कोर के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अरविंद कपूर कहते हैं, ”हमारे हेलीकॉप्टर की भार उठाने की क्षमता काफी है, हम बहुत ही कम समय के नोटिस पर कंटेनरों को उठाने और उसे जरूरत वाली जगह पर पहुंचाने के लिए तैयार हैं।” अधिकारियों ने कहा कि चिनूक रोजाना जवानों के आने-जाने और सीमावर्ती क्षेत्रों में सामग्री की आपूर्ति कर रहे हैं, जबकि अपाचे की भूमिका तब बहुत बड़ी हो जाएगी, जब दोनों पक्षों का टैंकों के जरिए से आमना-सामना होगा।

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