किसान आंदोलन के बाद अब फसल बीमा योजना को लेकर कई राज्य उठाने वाले हैं बड़ा कदम

पीएम फसल बीमा योजना को 7 राज्यों ने किया रिजेक्ट, अब मध्य प्रदेश भी तैयारी में, प्रीमियम से कम ही मिलता है मुआवजा, साथ में सियासी नुकसान भी. पढ़िए किसानों और राज्यों की परेशानी

नई दिल्ली. किसानों की भलाई के नाम पर शुरू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY- Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) की असली फसल इंश्योरेंस कंपनियां काट रही हैं. वो लगातार प्रॉफिट में हैं और किसानों को पैसा जमा करने के बाद भी क्लेम के लिए भटकना पड़ रहा है. कई राज्यों को इन कंपनियों की चालबाजी साफ दिखने लगी है इसलिए वो इससे बाहर निकलने को बेताब हैं. कृषि मंत्रालय की ही एक रिपोर्ट के मुताबिक कुछ राज्यों ने इस योजना से बाहर होने को चुना है. बिहार, पश्चिम बंगाल, मणिपुर, मेघालय, जम्मू-कश्मीर, आंध्र प्रदेश में (रबी 2019-20) योजना का कार्यान्वयन नहीं किया गया. इसकी बड़ी वजह ये है कि कंपनियों से फसल बीमा करवाना घाटे का सौदा बनता जा रहा है. राज्यों का कहना है कि वो क्यों न खुद ही मुआवजा बांटें. पंजाब ने तो इस योजना को पहले ही रिजेक्ट कर दिया था.

इस साल गुजरात, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश सरकार ने अब तक फसल बीमा योजना में अपना शेयर यानी प्रीमियम सब्सिडी नहीं दी है. बीजेपी शासित राज्य मध्य प्रदेश की सरकार भी इस योजना से बाहर निकलना चाहती है. वो राज्य का खजाना बचाने और किसानों का असंतोष कम करने के लिए फसल खराब होने पर खुद ही मुआवजा देना चाहती है. पीएम फसल बीमा योजना से सीएम शिवराज सिंह चौहान परेशान हैं. मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत करते हुए उन्होंने अपना यह दर्द साझा किया.

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