बाबरी विध्वंस केस: क्यों बड़ा है फैसला, आडवाणी-जोशी, उमा भारती पर क्या हैं आरोप?

लखनऊ
अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को हुए विवादित ढांचा विध्वंस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत (अयोध्या प्रकरण) 28 साल बाद 30 सितंबरको अपना फैसला सुनाएगी। फैसला देने से पहले कोर्ट के सामने सीबीआई के विशेष जज सुरेंद्र कुमार यादव के सामने 351 गवाहों को पेश किया। वहीं करीब 600 दस्तावेज भी साक्ष्य के रूप में पेश किए।

इस फैसले के आने से पहले ही सीबीआई की ओर से आरोपपत्र में अभियुक्त बनाए गए 49 लोगों में से 17 की मौत हो चुकी है। इस केस में अभियुक्तों और सीबीआई ने कई बार हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने 19 अप्रैल 2017 को सीबीआई की विशेष अदालत को तय समय में सुनवाई पूरा करने के निर्देश दिए। एक सितंबर को इस मामले में बचाव और अभियोजन की बहस पूरी हुई थी। दो सितंबर 2020 से कोर्ट ने अपना फैसला लिखना शुरू कर दिया था।

कुल 49 एफआईआर दर्ज हुई थीं

ढांचा ढहाए जाने के मामले में कुल 49 एफआईआर दर्ज हुई थी। एक एफआईआर फैजाबाद के थाना रामजन्म भूमि में एसओ प्रियंवदा नाथ शुक्ला जबकि दूसरी एसआई गंगा प्रसाद तिवारी ने दर्ज करवाई थी। बाकी 47 एफआईआर अलग-अलग तारीखों पर पत्रकारों और फोटोग्राफरों ने दर्ज करवाई थीं।

5 अक्टूबर 1993 को सीबीआई ने जांच के बाद मामले में कुल 49 अभियुक्तों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। इसमें 13 अभियुक्तों को विशेष अदालत ने आरोप के स्तर से ही डिस्चार्ज कर दिया था। सीबीआई की ओर से इस आदेश को पहले हाई कोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

फैजाबाद के तत्कालीन डीएम भी आरोपियों की लिस्ट में

विशेष अदालत (अयोध्या प्रकरण) में फैजाबाद के तत्कालीन डीएम आरएन श्रीवास्तव समेत 28 अभियुक्तों के मुकदमे की सुनवाई हुई जबकि आडवाणी समेत 8 अभियुक्तों के मामले की कार्यवाही रायबरेली की विशेष अदालत में चली।

आडवाणी-जोशी के खिलाफ आपराधिक साजिश का केस

2017 में सुप्रीम कोर्ट ने आडवाणी, जोशी और उमा भारती समेत सभी नेताओं पर आईपीसी की धारा 120 बी के तहत आपराधिक साजिश के आरोप को बहाल किया और दोनों केस को क्लब कर दिया। रायबरेली की विशेष अदालत में चल रही कार्यवाही को लखनऊ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत (अयोध्या प्रकरण) में ट्रांसफर कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने उन सभी 13 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया जिन्हें हाई कोर्ट ने पहले डिस्चार्ज कर दिया था। कोर्ट ने रायबरेली में ट्रायल झेल रहे आरोपियों के खिलाफ भी आपराधिक साजिश का केस दर्ज करने का आदेश दिया। 2017 में ही लखनऊ कोर्ट ने आडवाणी समेत सभी पर बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में आपराधिक साजिश के आरोप तय करने का आदेश दिया।

तब कल्याण सिंह पर तलब नहीं किए गए थे

आरोपियों में यूपी के तत्कालीन सीएम कल्याण सिंह भी थे जिनके खिलाफ 2017 में केस नहीं दर्ज हो सका था क्योंकि वह उस वक्त राजस्थान के गर्वनर थे। लिहाजा उन्हें तलब नहीं किया गया था। पिछले साल सितंबर में गवर्नर कार्यकाल खत्म होते ही उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ। वह जमानत पर बाहर हैं।

सीबीआई ने 49 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। हालांकि 17 की मौत की वजह से 32 लोगों के मुकदमे की कार्यवाही शुरू की गई थी। आरोपियों में श्री रामजन्मभूमि तीर्थ स्थान ट्रस्ट में शामिल वीएचपी नेता चंपत राय और महंत नृत्य गोपाल दास भी शामिल हैं। पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने केस की सुनवाई पूरी करने की डेडलाइन बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी थी। अब 30 सितंबर को इस पर फैसला आएगा।

आडवाणी, जोशी और कल्याण सिंह पर क्या हैं आरोप?
अब सवाल उठता है कि आखिर इन नेताओं के खिलाफ केस क्यों दर्ज हुआ। दरअसल बीजेपी और वीएचपी ने मिलकर 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के पास कारसेवा की घोषणा की थी। जहां ढांचा गिराया गया था उस जगह से 100-200 मीटर दूर ही एक रामकथा कुंज का मंच तैयार किया गया था। इस जहां से लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, अशोक सिंघल और विनय कटियार समेत कई लोग भाषण दे रहे थे। सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में इन नेताओं पर भड़काऊ भाषण देने और जनता को उकसाने के आरोप लगाए थे।

मामले में ये हैं अभियुक्त

लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, विनय कटियार, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा, रामविलास वेदांती, चंपत राय, महंत धर्मदास, महंत नृत्य गोपाल दास, पवन कुमार पांडेय, ब्रज भूषण सिंह, जय भगवान गोयल, स्वामी साक्षी महाराज, रामचंद्र खत्री, सुधीर कक्कड़, अमन नाथ गोयल, संतोष दुबे, प्रकाश वर्मा, जयभान सिंह पवैया, धर्मेंद्र सिंह गुर्जर, रामजी गुप्ता, लल्लू सिंह,ओमप्रकाश पांडेय, विनय कुमार राय, कमलेश त्रिपाठी उर्फ सती दुबे, गांधी यादव,
विजय बहादुर सिंह, नवीन भाई शुक्ला, आचार्य धर्मेंद्र देव, आरएन श्रीवास्तव, सतीश प्रधान।

इनकी हो चुकी है मृत्यु
विनोद कुमार वत्स, राम नारायण दास, लक्ष्मी नारायण दास महात्यागी, हरगोविंद सिंह, रमेश प्रताप सिंह, डीबी राय, अशोक सिंहल, गिरिराज किशोर, विष्णु हरि डालमिया, मोरेश्वर सावे, महंत अवैद्यनाथ, महामंडलेश्वर जगदीश मुनि महाराज, बैकुंठ लाल शर्मा, परमहंस रामचंद्र दास, डॉक्टर सतीश कुमार नागर,
बालासाहेब ठाकरे, विजयराजे सिंधिया।

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