शिवराज और तोमर दिल्ली रवाना, कहा- जल्द होगी प्रत्याशियों की घोषणा

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के उप चुनाव को लेकर कांग्रेस बीजेपी खुलकर चुनावी मैदान में कूद पड़े हैं. ऐसे में कांग्रेस प्रत्याशियों की घोषणा करने के मामले में आगे हैं. वहीं आज केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और सीएम शिवराज सिंह चौहान दिल्ली जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि दिल्ली में हाईकमान के पास उपचुनाव वाली सीटों को लेकर अंतिम रूप दिया जाना है.

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बीजेपी की प्रत्याशियों की लिस्ट को लेकर बयान दिया है. नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी कोई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी नहीं है, पार्टी के लोग विचार कर रहे हैं और जल्द ही प्रत्याशियों की घोषणा हो जाएगी.

कांग्रेस की लिस्ट पर कहा कि कांग्रेस भी अपने पूरे प्रत्याशी घोषित नहीं कर पाई है अभी भी प्रत्याशी ढूंढ रही है और उधार ले रही है, लेकिन भाजपा विचार कर चुकी है, केवल घोषित करना बाकी है. कांग्रेस के बारे में बात करना नहीं चाहता. बीजेपी अपने कैंडिडेट घोषित करेगी और सब कार्यकर्ता मिलकर काम करेंगे.

ग्वालियर में महिला की डंडों से पीटकर हत्या

ग्वालियर के बहोड़ापुर कुशवाहा मोहल्ला में पटाखे चलाने से रोकने पर एक महिला को कुछ लोगों ने शनिवार को पीट दिया था। घटना के बाद वह दो दिन से अस्पताल में कोमा में थी, मंगलवार सुबह उसने दम तोड़ दिया। घटना में आरोपित राजू, रवि और काली कुशवाह फरार हैं।

दरवाजे पर बैठी बहू को टोकना सास को महंगा पड़ गया। बहू ने झगड़ा किया और समझाने पर चाकू लहरा दिया। चाकू सास को लगा है। घटना शनिवार शाम गोला का मंदिर नारायण विहार कॉलोनी की है। पुलिस ने घायल सास का मेडिकल कराने के बाद बहू पर मामला दर्ज कर लिया है।

गोला का मंदिर थानाक्षत्र स्थित नारायण विहार कॉलोनी निवासी 60 वर्षीय बैकुंठी बाई पत्नी रामजीलाल प्रजापित शनिवार दोपहर बाजार गई थी। दोपहर बाद जब वह घर लौटी तो देखा कि बहू योगिता दरवाजे पर बैठी हुई थी। यह देखकर बैकुंठी बाई नाराज हुई और बहू को टोका। इस पर बहू अपने आपे से बाहर हो गई और विवाद करने लगी। जब सास ने समझाने का प्रयास किया तो बहू ने पास रखा चाकू उठाकर हवा में लहरा दिया। चाकू सास के हाथ के अंगूठे पर लगा और वह घायल हो गईं। घटना की शिकायत मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। घायल सास का मेडिकल कराने के बाद हू पर मामला दर्ज कर लिया है।

उपचुनावों की घोषणा:मुख्यमंत्री ने एक घंटे पहले तक सौगातें बांटीं; कृषक कल्याण योजना और मध्यप्रदेश में पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी

मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव की अधिसूचना के एक घंटे पहले तक सौगातें बांटती दिखी। आज शिवराज कैबिनेट ने कृषक कल्याण योजना और मध्यप्रदेश में पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। आयोग में एक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और तीन सदस्य होंगे। आयोग के पास अधिकारियों को बुलाने का अधिकार रहेगा। कैबिनेट की बैठक में बड़ामलहरा और जौरा की सिंचाई परियोजनाओं को भी मंजूरी दे दी गई है।

शिवराज कैबिनेट के निर्णय की जानकारी देते हुए गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि कैबिनेट ने कृषक कल्याण योजना को अपनी मंजूरी दे दी है। इस योजना के मंजूर होने के बाद अब किसानों के खाते में 10 हजार रुपए की राशि आएगी। पहले केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री सम्मान निधि के द्वार प्रदेश के 77 लाख किसानों को 6000 रुपए की राशि मिलती थी, लेकिन मुख्यमंत्री कृषक कल्याण योजना के तहत प्रदेश सरकार 3000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि दो-दो हजार रुपए की किश्त के रूप में किसानों के खाते में डालेगी।

कैबिनेट के बड़े फैसले

कैबिनेट की बैठक में साइंस और टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट में भूमिगत पाइप लाइन डालने की अनुमति दी है। राजस्व विभाग में कंप्यूटराइजेशन के लिए अब प्रदेश के 17 हजार पटवारियों को लैपटॉप दिया जाएगा। इस निर्णय पर कैबिनेट ने अपनी मुहर लगा दी है। मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की उन्नयन और स्थापना को लेकर प्रदेश के करीब एक दर्जन स्वास्थ्य केंद्रों का उन्नयन पर कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

इसके तहत गोहद जिला भिंड, बरेली, गैरतगंज, बदनावर, सुसनेर, आगर मालवा, इछावर, सिलवानी, बेगमगंज, रायसेन के सांची में स्वास्थ्य केंद्रों का उन्नयन किया जाएगा। साथ ही कुछ नए स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना होगी। सिलवानी में नए स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की जाएगी। सभी अस्पतालों के लिए कैबिनेट ने पद भी स्वीकृत कर दिए हैं।

मुरैना में चंबल पेयजल आवर्धन योजना को स्वीकृति

मुरैना में चंबल के पानी से पेयजल की सप्लाई को लेकर लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए कैबिनेट ने पेयजल आवर्धन योजना को स्वीकृति दे दी है। इससे मुरैना के आसपास के निकायों को भी फायदा मिलेगा। प्रदेश में संचालित यात्री बस सेवाओं में एकमुश्त टैक्स भुगतान की अवधि को 31 मार्च 2020 से बढ़ाकर 31 मार्च 2021 तक कर दी गई है। लॉकडाउन के दौरान यात्री बसों का टैक्स भी माफ करने का सरकार ने निर्णय लिया है।

राज्य परिवहन निगम के कर्मचारियों को वेतन दिया जाएगा

जबलपुर स्टेट मध्य प्रदेश धर्मशास्त्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के भवन के निर्माण के लिए कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। मुरैना के जौरा विकासखंड में आसान बैराज में सिंचाई योजना को कैबिनेट ने अपनी मंजूरी दे दी, लंबे समय से ये मांग चली आ रही थी। इसमें 392 करोड़ रुपए की लागत आएगी। कांठल बृहद सिंचाई परियोजना बड़ा मलहरा की परियोजना को प्रशासनिक मंजूरी दी गई, इससे 15 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। मध्य प्रदेश राज्य परिवहन निगम के कर्मचारियों को पिछले 15 महीने से तनख्वाह नहीं मिली थी। ऐसे 15 महीनों के लंबित वेतन को भुगतान करने के प्रस्ताव को कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किया गया है।

डीजी पुरुषोत्तम शर्मा की पत्नी और बेटे के खिलाफ महिला एंकर ने दर्ज कराई शिकायत, कहा- मेरी प्रतिष्ठा और नौकरी दांव पर

सोमवार को भोपाल के डीजी स्तर के अधिकारी पुरुषोत्तम शर्मा की दो वीडियो वायरल हुई थी. एक में वो अपनी पत्नी को पीट रहे हैं जबकि दूसरे वीडियो में वो एक महिला के साथ बैठे हैं. वीडियो में दिख रही महिला एक पत्रकार है जिसने अब उनकी पत्नी और बेटे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है.

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार को डीजी स्तर के अधिकारी पुरुषोत्तम शर्मा का अपनी पत्नी को पीटते हुए वीडियो वायरल हुआ. इसके साथ ही एक अन्य वीडियो भी वायरल हुआ जिसमें वो एक महिला के साथ उसके घर पर बैठे हुए हैं. जहां उनकी पत्नी पहुंच जाती है. इसके बाद पुरुषोत्तम शर्मा को पदमुक्त कर दिया गया है. लेकिन अब उक्त महिला जो एक पत्रकार है और निजी चैनल में एंकर है ने शर्मा की पत्नी और बेटे के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. पुलिस ने इसकी जानकारी दी.

भारतीय पुलिस सेवा के 1986 बैच के एक अधिकारी का दो वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद प्रदेश सरकार ने उनका तबादला करते हुए उन्हें कार्यमुक्त कर दिया था. दरअसल, एक वीडियो में वह पत्नी के साथ मारपीट करते दिख रहे हैं वहीं उनकी पत्नी द्वारा रिकार्ड किये गये दूसरे वीडियो में शर्मा महिला एंकर के घर में बैठे हुए दिखाई पड़ रहे हैं.

वीडियो में दिख रहा है कि पत्नी के वहां पहुचने के बाद शर्मा वहां से निकल जाते हैं और शर्मा की पत्नी एंकर के घर का मुआयना करते और पूछताछ करती दिखाई दे रही हैं. एंकर ने शर्मा की पत्नी और बेटे के खिलाफ शाहपुरा पुलिस थाने में शिकायत की है और दावा किया है कि भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी शर्मा उसके लिये पितातुल्य हैं और शर्मा उन्हें बेटा कहते हैं.

शाहपुरा पुलिस थाने के प्रभारी निरीक्षक जितेन्द्र पटेल ने कहा, ‘शिकायत में एंकर ने कहा है कि समाज में उसकी निजता और छवि का बहुत नुकसान हुआ है और उसकी बदनामी हुई है.’ एंकर ने मांग की है, ‘पुलिस इस मामले में उचित कार्रवाई कर मुझे मानसिक प्रताड़ना से निजात दिलाने की कृपा करे.’ एंकर ने कहा, ‘चूंकि पत्रकारिता से जुड़े होने के कारण मेरा मिलना-जुलना कई बार अधिकारियों और राजनेताओं से होता रहता है. मेरे साथ मेरा 11 साल का बेटा भी रहता है और मैं ग्वालियर के एक प्रतिष्ठित और संभ्रांत परिवार से हूं.’

उसने आगे लिखा, ‘रविवार 27 सितंबर 2020 को शाम करीब सात बजे डीजी पुरुषोत्तम शर्मा जी का फोन मेरे पास आया कि वह मेरे घर से पास ही हैं तो मैंने उन्हें चाय पर आमंत्रित कर दिया.’ एंकर ने कहा, ‘डीजी साहब के आने के बाद थोड़ी देर बाद उनकी पत्नी भी आ गई. उन्होंने (पत्नी) घंटी बजाई हालांकि मैं उन्हें नहीं जानती थी लेकिन मैंने दरवाजा खोला तो वह (शर्मा की पत्नी) जबरन अचानक मेरे घर में घुस आई. डीजी साहब ने बताया कि वह उनकी पत्नी हैं, तब मैंने उन्हें भी बैठने और चाय के लिये पूछा. लेकिन मेरे सामने ही उनकी और शर्मा जी की कहा सुनी शुरु हो गई. दोनों की बीच बहस हुई और डीजी साहब वहां से चले गए.’ उसने बताया कि बाद में शर्मा की पत्नी ने उसके घर पर रुककर उससे अनावश्यक सवाल पूछे और उसके बेडरुम की रिकार्डिग भी की. इस वीडियो को शर्मा के बेटे पार्थ शर्मा द्वारा सोशल मीडिया पर वायरल कर अनर्गल आरोप लगाये जा रहे हैं.

एंकर ने कहा कि जैसा उसे प्रस्तुत किया जा रहा है वस्तुत: ऐसा कुछ भी नहीं है. डीजी साहब मेरे लिये पितातुल्य हैं और वह मुझे बेटा कहकर ही बात करते हैं. मेरे घर पर उनका चाय पीने आना इतना बड़ा घटनाक्रम बन जाएगा, इसका मुझे अंदाजा नहीं था. उसने कहा, ‘मेरे उस वीडियो को सोशल मीडिया में गलत तरीके से प्रस्तुत और प्रचारित किया जा रहा है. जिससे मेरे मान-सम्मान और निजता का हनन हो रहा है. मेरे संस्थान जिसमें मैं प्रथम दिन से कार्यरत हूं उसने भी मुझसे सफाई मांगी है और मेरा करियर, मेरी नौकरी दांव पर है. मेरे परिवार और मेरी निजी जिंदगी भी इस एक वीडियो से मानसिक अवसाद में आ गई है.

थाना प्रभारी ने कहा, ‘चूंकि यह किसी की छवि खराब करने का मामला है इसलिये इसकी केवल अदालत में शिकायत दर्ज की जा सकती है.’ मध्यप्रदेश के गृह विभाग के अवर सचिव अन्नू भलावी ने सोमवार को पुरुषोत्तम शर्मा को संचालक, लोक अभियोजन के पद से तत्काल कार्यमुक्त कर बिना पद के सचिवालय में स्थानांतरित करने का आदेश जारी किया.

भलावी ने सोमवार को शर्मा को जारी नोटिस में कहा, ‘सोशल मीडिया पर आपसे संबंधित दो वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें आपके द्वारा अनैतिक आचरण एवं पत्नी के साथ घरेलू हिंसा किया जाना प्रथम दृष्टया परिलक्षित हो रहा है. वीडियो की सॉफ्ट कॉपी संलग्न है.’ नोटिस में आगे कहा गया है, ‘आपके द्वारा किये गये उक्त कृत्य ने आपको अखिल भारतीय सेवा नियम के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्यवाही का दायी बना दिया है.

वीडियोज में परिलक्षित आचरण के लिये क्यों न आपके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए. उक्त संदर्भ में अपना प्रत्युतर दिनांक 29 सितंबर 2020 को शाम 5:30 बजे तक प्रस्तुत करें.’ नोटिस में कहा गया कि उत्तर देने में विफल रहने पर यह माना जाएगा कि इस संबंध में आपके द्वारा कोई प्रतिवाद नहीं है तथा प्रकरण में नियमानुसार एकतरफ़ा कार्यवाही की जाएगी.

शर्मा के पुत्र तथा आयकर विभाग में उपायुक्त पार्थ (32) ने प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और वरिष्ठ अधिकारियों को यह वीडियो भेजकर उनसे अनुरोध किया कि उनके पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज की जाए. शर्मा ने कहा कि 32 साल का मेरा वैवाहिक जीवन है यह एक पारिवारिक मामला है, अपराध का नहीं. मैं अपराधी नहीं हूं. मैं जहां जाता हूं मेरी पत्नी मेरी निगराकरती है. मैं इससे निपट रहा हूं. उन्होंने कहा कि एक परिवार में लड़ाई के लिए कोई स्थान नहीं है.

इस बीच, सोमवार देर शाम को मध्यप्रदेश महिला आयोग ने शर्मा को नोटिस जारी कर उन्हें पांच अक्टूबर को आयोग के कार्यालय में तलब किया है. इसके साथ ही आयोग ने शर्मा की पत्नी को सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं.

बाबरी विध्वंस केस: क्यों बड़ा है फैसला, आडवाणी-जोशी, उमा भारती पर क्या हैं आरोप?

लखनऊ
अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को हुए विवादित ढांचा विध्वंस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत (अयोध्या प्रकरण) 28 साल बाद 30 सितंबरको अपना फैसला सुनाएगी। फैसला देने से पहले कोर्ट के सामने सीबीआई के विशेष जज सुरेंद्र कुमार यादव के सामने 351 गवाहों को पेश किया। वहीं करीब 600 दस्तावेज भी साक्ष्य के रूप में पेश किए।

इस फैसले के आने से पहले ही सीबीआई की ओर से आरोपपत्र में अभियुक्त बनाए गए 49 लोगों में से 17 की मौत हो चुकी है। इस केस में अभियुक्तों और सीबीआई ने कई बार हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने 19 अप्रैल 2017 को सीबीआई की विशेष अदालत को तय समय में सुनवाई पूरा करने के निर्देश दिए। एक सितंबर को इस मामले में बचाव और अभियोजन की बहस पूरी हुई थी। दो सितंबर 2020 से कोर्ट ने अपना फैसला लिखना शुरू कर दिया था।

कुल 49 एफआईआर दर्ज हुई थीं

ढांचा ढहाए जाने के मामले में कुल 49 एफआईआर दर्ज हुई थी। एक एफआईआर फैजाबाद के थाना रामजन्म भूमि में एसओ प्रियंवदा नाथ शुक्ला जबकि दूसरी एसआई गंगा प्रसाद तिवारी ने दर्ज करवाई थी। बाकी 47 एफआईआर अलग-अलग तारीखों पर पत्रकारों और फोटोग्राफरों ने दर्ज करवाई थीं।

5 अक्टूबर 1993 को सीबीआई ने जांच के बाद मामले में कुल 49 अभियुक्तों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। इसमें 13 अभियुक्तों को विशेष अदालत ने आरोप के स्तर से ही डिस्चार्ज कर दिया था। सीबीआई की ओर से इस आदेश को पहले हाई कोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

फैजाबाद के तत्कालीन डीएम भी आरोपियों की लिस्ट में

विशेष अदालत (अयोध्या प्रकरण) में फैजाबाद के तत्कालीन डीएम आरएन श्रीवास्तव समेत 28 अभियुक्तों के मुकदमे की सुनवाई हुई जबकि आडवाणी समेत 8 अभियुक्तों के मामले की कार्यवाही रायबरेली की विशेष अदालत में चली।

आडवाणी-जोशी के खिलाफ आपराधिक साजिश का केस

2017 में सुप्रीम कोर्ट ने आडवाणी, जोशी और उमा भारती समेत सभी नेताओं पर आईपीसी की धारा 120 बी के तहत आपराधिक साजिश के आरोप को बहाल किया और दोनों केस को क्लब कर दिया। रायबरेली की विशेष अदालत में चल रही कार्यवाही को लखनऊ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत (अयोध्या प्रकरण) में ट्रांसफर कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने उन सभी 13 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया जिन्हें हाई कोर्ट ने पहले डिस्चार्ज कर दिया था। कोर्ट ने रायबरेली में ट्रायल झेल रहे आरोपियों के खिलाफ भी आपराधिक साजिश का केस दर्ज करने का आदेश दिया। 2017 में ही लखनऊ कोर्ट ने आडवाणी समेत सभी पर बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में आपराधिक साजिश के आरोप तय करने का आदेश दिया।

तब कल्याण सिंह पर तलब नहीं किए गए थे

आरोपियों में यूपी के तत्कालीन सीएम कल्याण सिंह भी थे जिनके खिलाफ 2017 में केस नहीं दर्ज हो सका था क्योंकि वह उस वक्त राजस्थान के गर्वनर थे। लिहाजा उन्हें तलब नहीं किया गया था। पिछले साल सितंबर में गवर्नर कार्यकाल खत्म होते ही उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ। वह जमानत पर बाहर हैं।

सीबीआई ने 49 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। हालांकि 17 की मौत की वजह से 32 लोगों के मुकदमे की कार्यवाही शुरू की गई थी। आरोपियों में श्री रामजन्मभूमि तीर्थ स्थान ट्रस्ट में शामिल वीएचपी नेता चंपत राय और महंत नृत्य गोपाल दास भी शामिल हैं। पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने केस की सुनवाई पूरी करने की डेडलाइन बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी थी। अब 30 सितंबर को इस पर फैसला आएगा।

आडवाणी, जोशी और कल्याण सिंह पर क्या हैं आरोप?
अब सवाल उठता है कि आखिर इन नेताओं के खिलाफ केस क्यों दर्ज हुआ। दरअसल बीजेपी और वीएचपी ने मिलकर 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के पास कारसेवा की घोषणा की थी। जहां ढांचा गिराया गया था उस जगह से 100-200 मीटर दूर ही एक रामकथा कुंज का मंच तैयार किया गया था। इस जहां से लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, अशोक सिंघल और विनय कटियार समेत कई लोग भाषण दे रहे थे। सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में इन नेताओं पर भड़काऊ भाषण देने और जनता को उकसाने के आरोप लगाए थे।

मामले में ये हैं अभियुक्त

लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, विनय कटियार, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा, रामविलास वेदांती, चंपत राय, महंत धर्मदास, महंत नृत्य गोपाल दास, पवन कुमार पांडेय, ब्रज भूषण सिंह, जय भगवान गोयल, स्वामी साक्षी महाराज, रामचंद्र खत्री, सुधीर कक्कड़, अमन नाथ गोयल, संतोष दुबे, प्रकाश वर्मा, जयभान सिंह पवैया, धर्मेंद्र सिंह गुर्जर, रामजी गुप्ता, लल्लू सिंह,ओमप्रकाश पांडेय, विनय कुमार राय, कमलेश त्रिपाठी उर्फ सती दुबे, गांधी यादव,
विजय बहादुर सिंह, नवीन भाई शुक्ला, आचार्य धर्मेंद्र देव, आरएन श्रीवास्तव, सतीश प्रधान।

इनकी हो चुकी है मृत्यु
विनोद कुमार वत्स, राम नारायण दास, लक्ष्मी नारायण दास महात्यागी, हरगोविंद सिंह, रमेश प्रताप सिंह, डीबी राय, अशोक सिंहल, गिरिराज किशोर, विष्णु हरि डालमिया, मोरेश्वर सावे, महंत अवैद्यनाथ, महामंडलेश्वर जगदीश मुनि महाराज, बैकुंठ लाल शर्मा, परमहंस रामचंद्र दास, डॉक्टर सतीश कुमार नागर,
बालासाहेब ठाकरे, विजयराजे सिंधिया।

देश में कोरोना का कहर :मुंबई चौथा जिला, जहां मरीज 2 लाख के पार, भोपाल में हर 100 में से 18 लोग ऐसे हैं, जिन्हें संक्रमित होने का पता नहीं चला; देश में अब तक 61.43 लाख केस

देश में कोरोना मरीजों की संख्या 61 लाख 43 हजार 19 हो चुकी है। पिछले 24 घंटे में 69 हजार 668 मरीज बढ़े। वहीं, 85 हजार 194 लोग स्वस्थ भी हो गए। ये आंकड़े covid19india.org के मुताबिक हैं।

इस बीच, भोपाल में हुए सीरो सर्वे में कोरोना को लेकर हैरान करने वाली बात पता चली है। यहां हर 100 लोगों में से 18 व्यक्ति ऐसे हैं, जो कोरोना संक्रमित होने के बाद स्वस्थ हो चुके हैं। उन्हें स्वयं के संक्रमित होने का पता भी नहीं चला।

मुंबई जिले में मरीजों की संख्या 2 लाख से ज्यादा हो गई है। सोमवार को 2044 मरीज मिले। इसके साथ मुंबई जिला देश का ऐसा चौथा जिला बन गया है, जहां मरीजों की संख्या 2 लाख से ज्यादा है। मृत्यु दर भी सबसे ज्यादा 4.4% है।

मुंबई में सबसे ज्यादा मौतें

शहरकुल मौतेंमृत्यु दरमुंबई8,8344.4%पुणे5,6892.0%दिल्ली5,2721.9%बेंगलुरु2,8451.3%

कोरोना अपडेट्स

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार सुबह अपने आंकड़े जारी किए। इसके मुताबिक, पिछले 24 घंटे में 70 हजार 589 नए मरीज मिले और 776 लोगों की मौत हो गई। इसके साथ देश में कुल संक्रमितों की संख्या 61 लाख 45 हजार 292 हो गई है। वहीं, 9 लाख 47 हजार 576 एक्टिव केस और 51 लाख एक हजार 398 मरीज ठीक हो चुके हैं। अब तक 96 हजार 318 लोग दम तोड़ चुके हैं।इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने बताया कि सोमवार को देश में 7 लाख 31 हजार 10 सैंपल की जांच की गई। इसके साथ देश में अब तक 11 करोड़ 42 लाख 811 सैंपल की जांच की जा चुकी है।

पांच राज्यों का हाल

. मध्यप्रदेश

प्रदेश में 19 दिन बाद कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा दो हजार के नीचे आया है। सोमवार को 1957 कुल संक्रमित निकले इसके पहले 9 सितंबर को नए संक्रमितों की संख्या 1869 रही थी।

भोपाल में हर 100 लोगों में से 18 व्यक्ति ऐसे हैं, जो कोरोना संक्रमित होने के बाद स्वस्थ हो चुके हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि उन्हें स्वयं के संक्रमित होने का पता भी नहीं चला। यह खुलासा भोपाल में पिछले दिनों हुए सीरो सर्वे की रिपोर्ट में हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भोपाल के 85 वार्ड में रहने वाले 7976 लोगों के ब्लड सैंपल का कोविड एंटी बॉडी टेस्ट किया गया, जिनमें से 18% (1451) में कोविड एंटी बॉडी जांच के दौरान मिली हैं।

राजस्थान

राज्य सरकार कोरोनावायरस से खुद को और दूसरों को बचाने के लिए 2 अक्टूबर यानी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्मदिवस से जन आंदोलन की शुरुआत करेगी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बैठक में यह फैसला लिया। गहलोत ने कहा कि सभी मास्क पहनने के जन आंदोलन को सफल बनाएं और संक्रमण से सुरक्षित रहें। सोशल डिस्टेंसिंग रखें, भीड़ से बचें।

बिहार

राज्य में कोरोना के मामले में गिरावट आ रही है। हालांकि, टेस्टिंग की संख्या एक लाख से ज्यादा है। सोमवार को 1.2 लाख लोगों के सैंपल की जांच की गई। इसके साथ राज्य में अब तक 69.7 लाख टेस्ट किए जा चुके हैं। पॉजिटिविटी रेट 2.6% हो गया है।

महाराष्ट्र

राज्य में कोरोना को लेकर अच्छी खबर आ रही है। पिछले चार दिन की बात करें तो रविवार को छोड़कर बाकी दिन नए मरीजों की तुलना में ठीक हुए मरीजों की संख्या ज्यादा रही। सोमवार को महाराष्ट्र में 11 हजार 921 मरीज बढ़े और 19 हजार 932 लोग स्वस्थ भी हो गए। उधर, मृत्यु दर 2.65% पर पहुंच गई। राज्य में फिलहाल 19 लाख 75 हजार 923 लोग होम क्वारैंटाइन में हैं। वहीं, 29 हजार 922 लोगों को इंस्टीट्यूशनल क्वारैंटाइन में रखा गया है।

उधर, पिछले 24 घंटों में 189 पुलिसकर्मी पॉजिटिव मिले। इसके बाद संक्रमितों की संख्या बढ़कर 22 हजार 818 हो गई। इस दौरान चार और पुलिसकर्मियों की मौत होने से मृतकों की संख्या बढ़कर 245 हो गई।

उत्तरप्रदेश

उत्तर प्रदेश में कोरोना के मरीज तेजी से ठीक हो रहे हैं। अब तक 3.31 लाख से ज्यादा संक्रमित ठीक हो चुके हैं। अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि प्रदेश में इस समय 53 हजार 953 एक्टिव केस हैं। रिकवरी रेट 84.75% पर पहुंच गया है।

पवैया ने कहा, सलाखों के बाहर रहूं या भीतर, करुंगा रामलला का कार्य

ग्वालियर । 6 दिसंबर को बाबरी ढांचा विध्वंस के मामले में बहुप्रतिक्षित फैसला 30 सितंबर को आना है। इसके पहले बजरंगदल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व भाजपा के वरिष्ठ नेता जयभान सिंह पवैया उन्होंने गीत गाते हुए कहा कि तन समर्पित, मन समर्पित और यह जीवन समर्पित। चाहता हूं देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं। रामकाज करने का सौभाग्य जीवन में कभी-कभी और किसी-किसी को ही मिलता है। मैं 29 सितंबर की सुबह लोटा, लंगोटी साथ लेकर लखनऊ जा रहा हूं। जेल के भीतर रहे तो रामजी का काम करूंगा, सलाखों के बाहर रहा तो बचा हुआ जीवन राम और राष्ट्र के नाम है। यह मेरे लिए लज्जा का नहीं गौरव की बात है। कितने जीवन न्यौछावर हुए, कितनों ने खून तो कितनों ने पसीना बहाया है तब मंदिर निर्माण होते आंखों से देख पा रहा हूं।

आंतकी कर सकते हैं हरकत

पवैया ने कहा कि राममंदिर विरोधी कुछ ताकतें और आंतकवादी गुटों की निगाहें इस फैसले पर लगी हैं। गुप्तचर विभाग को इन लोगों की बौखलाहट और हरकत करने की तैयारियों के संकेत मिल रहे हैं। प्रमुख नेताओं और संतों को पूरी तरह सुरक्षा कवच देने की तैयारियां सरकार ने की है। उप्र पुलिस मुख्यालय ऐसे संवेदनशील नेताओं व संतों के पहुंचने के मांर्गो की जानकारी जुटा रहा है।

याद किए पुराने दिन

बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी ढांचा का विध्वंस हुआ था। इसके बाद 36 लोगों पर प्रकरण दर्ज किया गया। उमाभारती, लालकृष्ण आडवाणी, अशेाक सिंघल व मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, विनय कटियार को ढांचा विध्वंस के तत्काल बाद हिरासत में ले लिया गया था। इसके बाद 7 दिसंबर 1993 को हम लोगों ने यह सारा प्रकरण कांग्रेस सरकार के इशारे पर कूटरचित तरीके से दर्ज किए जाने के विरोध में जमानत लेने से इंकार कर दिया था। इसके बाद हमें लखनऊ जेल भेज दिया गया। 8 दिसंबर को अचानक मुलायम सिंह का राजकीय विमान आया और हमें लेकर माताटीला में अस्थाई जेल में भेजा गया। यह समाचार मिलने पर बुंदेलखंड व ग्वालियर में कार्यकर्ताओं में सरगर्मी तेज हो गई। इसकी सूचना मिलते ही दो दिन बाद विमान से हमें वाराणसी ले जाया गया। वहां से मुझे गिर्राज किशोर, सतीश प्रधान को मिर्जापुर के चुनार किले में जेल बनाकर रखा गया। वहां पर मैंने व आचार्य गिर्राज किशोर ने अनशन किया था।

घर से नहीं मिली थी ईंट, भाषणों की कैसेट ले गए

जयभान सिंह पवैया ने कहा कि इस कार्य के लिए पार्टी व संघ ने कानूनी मोर्चे पर लड़ने के लिए तात्कालीन भाजपा नेता प्रमोद महाजन को जिम्मेदारी सौंपी थी। कांग्रेस सरकार ने आरएसएस पर उस समय प्रतिबंध लगा दिया था। इसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया था। इस दौरान अनेक नेताओं सहित मेरे घर भी छापा डाला गया। वहां से सीबीआइ को बाबरी ढांचे की ईंट बरामद नहीं हुई थी, लेकिन वे मेरे भाषणों की कैसेट व दस्तावेज जब्त कर ले गए थे।

कृष्ण जन्मभूमि विवाद पर 30 सितंबर को होगी कोर्ट में सुनवाई, याचिका में ईदगाह हटाने की मांग

नई दिल्ली
मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह मामले की सुनवाई को कोर्ट तैयार हो गया है। मथुरा की एक अदालत हिंदू समूह की याचिका की 30 सितंबर को सुनवाई करेगी। याचिका में मंदिर (Krishna Janmabhoomi Case) के पास बनी ईदगाह को हटाने की मांग की गई है।

हिंदू समूह ने की है ईदगाह हटाने की मांग

करीब आधा दर्जन भक्तों ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और शाही ईदगाह प्रबंध समिति के बीच पांच दशक पूर्व हुए समझौते को अवैध बताते हुए उसे निरस्त करने और मस्जिद को हटाकर पूरी जमीन मंदिर ट्रस्ट (Krishna Janmabhoomi Idgah Case) को सौंपने की मांग की है। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने शुक्रवार को मथुरा की अदालत में दायर की गई याचिका में कहा गया था कि 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और शाही ईदगाह प्रबंध समिति के बीच हुआ समझौता पूरी तरह से गलत है और भगवान कृष्ण एवं उनके भक्तों की इच्छा के विपरीत है। इसलिए उसे निरस्त किया जाए और मंदिर परिसर में स्थित ईदगाह को हटाकर वह भूमि मंदिर ट्रस्ट को सौंप दी जाए।

इन्होंने दायर की है याचिका

शुक्रवार को लखनऊ की रहने वाली रंजना अग्निहोत्री और त्रिपुरारी त्रिपाठी, सिद्धार्थ नगर के राजेश मणि त्रिपाठी और दिल्ली निवासी प्रवेश कुमार, करुणेश कुमार शुक्ला और शिवाजी सिंह ने मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में बनी शाही ईदगाह मस्जिद को जमीन देने को गलत बताते हुए सिविल जज सीनियर डिवीजन छाया शर्मा की कोर्ट में दावा पेश किया है।

याचिका में किया ये दावा

श्रीकृष्ण विराजमान, स्थान श्रीकृष्ण जन्मभूमि और उक्त लोगों की ओर से पेश किए दावे में कहा गया है कि 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ (जो अब श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के नाम से जाना जाता है) और शाही ईदगाह मस्जिद के बीच जमीन को लेकर समझौता हुआ था। इसमें तय हुआ था कि मस्जिद जितनी जमीन में बनी है, बनी रहेगी।

ड्राइविंग लाइसेंस और RC रखने की टेंशन खत्‍म! 1 अक्‍टूबर से बदल रहे नियम, जानें सबकुछ 

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वीइकल रूल्‍स 1989 में किए गए संशोधनों की अधिसूचना जारी कर दी है, जो 1 अक्‍टूबर से लागू हो जाएंगे.

New Motor Vehicle Rules: गाड़ी चलाते समय साथ में RC और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे डॉक्‍युमेंट की हार्ड कॉपी रखने की टेंशन अब खत्‍म होने वाली है. अब आप वीइकल से जुड़े इन डॉक्‍युमेंट्स की सिर्फ वैलिड सॉफ्ट कॉपी लेकर भी गाड़ी चला सकते हैं. जांच के दौरान ये पूरी तरह मान्‍य होंगे, यानी हार्ड कॉपी दिखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. साथ ही ड्राइविंग के दौरान रूट देखने के लिए अब मोबाइल का भी इस्‍तेमाल कर पाएंगे. दरअसल, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन नियम 1989 में किए गए ऐसे विभिन्न संशोधनों की अधिसूचना जारी कर दी है, जो 1 अक्‍टूबर से लागू हो जाएंगे.

सरकार ने कहा है कि 1 अक्टूबर 2020 से ड्राइविंग लाइसेंस और ई-चालान सहित वाहन से जुड़े तमाम दस्तावेज का रखरखाव (maintenance of vehicular documents) एक आईटी पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा. जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से वैध पाए गए वीइकल डॉक्युमेंट्स के बदले फिजिकल डॉक्युमेंट्स (हार्ड कॉपी) की मांग नहीं की जाएगी. साथ ही कहा गया है कि लाइसेंसिंग अथॉरिटी द्वारा अयोग्य या निरस्त किए गए ड्राइविंग लाइसेंस की डीटेल्‍स पोर्टल पर रिकॉर्ड की जाएगी और इसे अपडेट भी किया जाएगा.

नए नियमों में इस बात का भी प्रावधान किया गया है कि गाड़ी चलाते समय सिर्फ रूट नेविगेशन (रास्‍ता देखने के लिए) के लिए हाथ में मोबाइल या इसके जैसे डिवाइस का इस्‍तेमाल किया जा सकता है, लेकिन यह भी सुनिश्‍चित करना होगा कि ड्राइवर का ध्‍यान न भटके. हालांकि, ड्राइविंग के दौरान फोन पर बात करने की छूट नहीं है, यानी पहले की तरह 1 अक्‍टूबर से भी ड्राइविंग करते समय मोबाइल से बात करने पर एक हजार से पांच हजार रुपये तक जुर्माना लग सकता है. 

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) ने बयान में कहा, ‘सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वीइकल रूल्‍स 1989 में किए गए विभिन्न संशोधनों के बारे में अधिसूचना जारी की है, जिसमें मोटर वीइकल रूल्‍स की बेहतर निगरानी और क्रियान्वयन के लिए 1 अक्टूबर 2020 से पोर्टल के माध्यम से वाहन संबंधी दस्तावेज और ई-चालान का रखरखाव किया जा सकेगा.’

खत्‍म होगा वाहन चालकों का उत्पीड़न
मंत्रालय ने कहा है कि आईटी सर्विस और इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग के उपयोग से देश में यातायात नियमों को बेहतर ढंग से लागू किया जा सकेगा. साथ ही इससे वाहन चालकों का उत्पीड़न दूर होगा और लोगों को सुविधा होगी.

पोर्टल पर सब होगा रिकॉर्ड
पोर्टल पर फिजिकल और इलेक्ट्रॉनिक रूप से सर्टिफिकेट पाने व उपलब्ध कराने की प्रक्रिया के प्रावधान किए गए हैं. इस तरह के दस्तावेज की वैलिडिटी, उसे जारी किया जाना, उसकी जांच किए जाने की डेट-टाइम की मुहर और अधिकारी की पहचान इस पोर्टल पर रिकॉर्ड की जाएगी. इससे वाहनों की अनावश्यक दोबारा जांच रोकने में मदद मिलेगी, जिससे ड्राइवरों का उत्‍पीड़न बंद होगा.

नए नियमों में यह प्रावधान किया गया है कि यदि इनफोर्समेंट ऑफिसर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दस्तावेज के विवरण को वैध पाता है, तो जांच के लिए उन दस्‍तावेज को फिजिकल फॉर्म (हार्ड कॉपी) में नहीं मांगा जाएगा. इसमें ऐसे मामले भी शामिल हैं, जिनमें किसी अपराध की वजह से दस्तावेज को जब्‍त किया जाना है.