फरार गैंगस्टर को मुंबई से पकड़कर ला रही यूपी पुलिस की गाड़ी पलटी, आरोपी की मौत

लखनऊ
गैंगस्टर ऐक्ट के फरार आरोपी को मुंबई से पकड़कर ला रही यूपी पुलिस की गाड़ी रविवार दोपहर संदिग्ध हालात में मध्य प्रदेश में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में गैंगस्टर के आरोपी फिरोज की मौत हो गई, जबकि साढू और पुलिसकर्मी चोटिल हो गए। लखनऊ के ठाकुरगंज थाने की पुलिस आरोपी को पकड़ने गई थी।इंस्पेक्टर ठाकुरगंज राजकुमार के अनुसार बहराइच निवासी फिरोज (58\R) के खिलाफ ठाकुरगंज थाने में वर्ष 2014 में यूपी गैंगस्टर ऐक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद से फिरोज फरार चल रहा था।

तलाश में जुटी पुलिस को सर्विलांस की मदद से कुछ दिन पहले फिरोज के मुंबई में होने की सूचना मिली। इसके बाद सब इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद पाण्डेय, कॉन्स्टेबल संजीव सिंह अपने साथ आरोपी के साढ़ू अफजल को लेकर मुंबई गए थे। फिरोज मुंबई के नाला सोपारा की झुग्गी बस्ती में रह रहा था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस टीम शनिवार रात को लखनऊ के लिए रवाना हुई। रविवार की सुबह मध्य प्रदेश के गुना जिले चांचौड़ा थाना क्षेत्र में पाखरिया पुरा टॉल के पास पुलिस का वाहन पलट गया। हादसे में गैंगस्टर के आरोपी फिरोज की मौत हो गई।

वहीं अफजल खान का हाथ फ्रैक्चर हुआ है। इसके साथ ही पुलिसकर्मी संजीव, जगदीश प्रसाद व वाहन चालक सुलभ मिश्रा को भी चोटें आई हैं। दरोगा जगदीश प्रसाद ने गुना के पुलिस अधिकारियों को बताया कि सड़क पर अचानक सामने आई गाय को बचाने में वाहन पलट गया। हालांकि आशंका यह भी जताई जा रही है कि चालक को झपकी आने के कारण हादसा हुआ। गुना पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

प्राइवेट गाड़ी से गई थी पुलिस टीम
पूरे मामले में ठाकुरगंज पुलिस की एक बड़ी लापरवाही भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि फिरोज को पकड़ने के लिए पुलिस टीम एक प्राइवेट इनोवा से गई थी। सवाल उठ रहा है कि जब पुलिस को आरोपी को पकड़ने के लिए जाना था तो सरकारी वाहन का प्रयोग क्यों नहीं किया गया। नियम के मुताबिक अपराधी को पकड़ने के लिए पुलिस को सरकारी वाहन का प्रयोग करना चाहिए था।

170 करोड़ के नए शौचालय अंतरिक्ष में भेजेगा नासा, चंद्रमा और मंगल पर प्रयोग के लिए हो रहा परीक्षण

वाशिंगटन, । अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी नासा 2.3 करोड़ डॉलर (करीब 170 करोड़ रुपये) मूल्य के शौचालय इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में भेजेगा। वहां पर इनके इस्तेमाल के अनुभवों के आधार पर इनके चंद्रमा और मंगल ग्रह पर इस्तेमाल की संभावना तलाशी जाएंगी।

अन्य सामान के साथ ये शौचालय 29 सितंबर को वर्जीनिया के नासा की वैलप्स फ्लाइट फैसिलिटी से अंतरिक्ष यान के जरिये भेजे जाएंगे। भेजे जा रहे स्पेस टॉयलेट को यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम का नाम दिया गया है, ये छोटे और सुविधाजनक हैं। इस समय जो टॉयलेट आइएसएस में स्थापित हैं, उनसे ये 65 प्रतिशत छोटे और 40 प्रतिशत हल्के हैं। इसी टॉयलेट को ओरियन अंतरिक्ष यान में भी इस्तेमाल किया जाएगा, जो अंतरिक्ष यात्रियों के दस दिन के अभियान पर चंद्रमा पर ले जाएगा और वापस लेकर आएगा।

मूत्र को शोधित करने की है व्यवस्था

इस नए टॉयलेट में मल और मूत्र को शोधित करने की भी व्यवस्था है। मूत्र को शोधित कर पुन: इस्तेमाल योग्य पानी में बदला जाएगा, जरूरत पड़ने पर अंतरिक्ष यात्री इसी पी भी सकेंगे। जबकि मल को बाद में फेंक दिया जाएगा।

नासा की अंतरिक्ष यात्री जेसिका मीयर ने बताया है कि हम मूत्र, पसीने और अन्य तरल पदार्थो की 90 प्रतिशत मात्रा तक शोधित कर लेते हैं, जिन्हें हम बाद में इस्तेमाल में ले लेते हैं। धरती पर पानी का शोधन हवा के जरिये होता रहता है लेकिन अंतरिक्ष में ऐसा नहीं हो पाता।

अंतरिक्ष से वोट डालेंगी NASA की अंतरिक्ष यात्री

नासा के अंतरिक्ष यात्री केट रूबिंस ने कहा कि वह अपना अगला वोट अंतरिक्ष से देने की योजना बना रही है। केट रूबिंस ने शुक्रवार को द एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि वह पृथ्वी से 200 मील से अधिक दूर अंतरिक्ष से अपना अगला वोट डालने की योजना बना रही है। रुबिन रूस के स्टार सिटी में मॉस्को के ठीक बाहर है, जो अक्टूबर के मध्य में लॉन्च के लिए दो कॉस्मोनॉट्स के साथ तैयारी कर रहा है।

राज कपूर और दिलीप कुमार के पेशावर के पैतृक घरों को खरीदेगी पाकिस्तान सरकार

खैबर-पख्तूनख्वा में पाकिस्तान की प्रांतीय सरकार ने पेशावर में स्थित भारतीय सिनेमा के महान कलाकारों राज कपूर और दिलीप कुमार के पैतृक घरों को खरीदने का फैसला किया है.

नई दिल्ली खैबर-पख्तूनख्वा में पाकिस्तान की प्रांतीय सरकार ने पेशावर में स्थित भारतीय सिनेमा के महान कलाकारों राज कपूर और दिलीप कुमार के पैतृक घरों (Ancestral Houses of Raj Kapoor and Dilip Kumar) को खरीदने का फैसला किया है. उनके घर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में खड़े हैं और उन्हें ध्वस्त किए जाने की नौबत आ चुकी है, ऐसे में उनका संरक्षण करने के लिए पाकिस्तान सरकार ने उन्हें खरीदने का फैसला किया है. एक अधिकारी ने बताया कि खैबर-पख्तूनख्वा के पुरातत्व विभाग ने इन दो घरों को खरीदने के लिए उचित फंड देने का फैसला किया. इन घरों को पाकिस्तान में राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया गया है.

पुरातत्व विभाग के प्रमुख डॉक्टर अब्दुस समद खान ने बताया कि पेशावर के डिप्टी कमिश्नर को एक चिट्ठी भेजकर इन भवनों की कीमत तय करने को कहा गया है. राज कपूर और दिलीप कुमार का घर पेशावर में हैं और वो विभाजन के पहले यहीं पैदा हुए और पले-बढ़े थे. 

राज कपूर के पैतृक निवास को कपूर हवेली के तौर पर जाना जाता है, यह किस्सा ख्वानी बाज़ार में स्थित है. 1918 और 1922 के बीच में राज कपूर के दादा दीवान बशेश्वरनाथ कपूर ने इसका निर्माण कराया था. इस भवन में राज कपूर और उनके चाचा त्रिलोक कपूर का जन्म हुआ था. यहां की प्रांतीय सरकार ने इसे राष्ट्रीय धरोहर घोषित कर रखा है.

दिलीप कुमार का घर भी इसी इलाके में है. उनका घर भी बिल्कुल जीर्ण अवस्था में पहुंच चुका है. इसे 2014 में तत्कालीन नवाज़ शरीफ सरकार ने राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया था. अब्दुस समद खान ने कहा कि इन भवनों के मालिकों ने बीते वक्त में कई बार इन्हें गिराकर यहां पर कॉमर्शियल प्लाज़ा बनाने की कोशिशें की हैं, क्योंकि ये घर बहुत ही प्राइम लोकेशन पर स्थित हैं, लेकिन पुरातत्व विभाग उनकी ऐतिहासिक महत्ता देखते हुए उनका संरक्षण करना चाहता है, इसलिए उनको रोक दिया गया.

हालांकि, कपूर हवेली के मालिक अली क़दर का कहना है कि वो भवन को गिराना नहीं चाहते हैं और उन्होंने इसके संरक्षण के लिए कई बार पुरातत्व विभाग से संपर्क किया था. उन्होंने भवन बेचने के लिए प्रांतीय सरकार के सामने 200 करोड़ का दाम लगाया है. दिवंगत एक्टर ऋषि कपूर के आग्रह के बाद 2018 में पाकिस्तान सरकार ने कपूर हवेली को एक म्यूज़ियम में बदलने का फैसला किया था, लेकिन फिर इस घोषणा पर आगे कोई कदम नहीं उठाया गया.

बता दें कि पेशावर में ऐसी लगभग 1,800 ऐतिहासिक इमारतें या संरचनाएं जो कम से कम 300 से भी ज्यादा पुरानी हैं.

सिंधिया का भविष्य उपचुनाव के भंवर में……

यहां ये बताना जरुरी है आज के समय में सोशल मीडिया और वेब न्यूज का असर जमीनी स्तर पर काफी प्रभावी हो गया है.कई वेब पोर्टल और सोशल मीडिया पर जो लिखा जा रहा , अगर आंकलन किया जाये तो शिवराज और सिंधिया का राजनीतिक भविष्य अभी तो डवांडोल नजर आ रहा है।
कांग्रेस से बगावत कर भाजपा का दामन थामने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया की साख में 6 माह के अंदर इस कदर गिरावट आई है कि वे राजनीति में अर्श से फर्श पर पहुंच गए हैं। इसका खुलासा सोशल मीडिया, वेबन्यूज और कुछ स्वयंसेवी संगठनों के सर्वे में हुआ है। सर्वे में कहा गया है कि सिंधिया का राजनीतिक भविष्य 28 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के परिणाम से तय होगा। सोशल मीडिया, वेबन्यूज और स्वयंसेवी संगठनों के सर्वे में यह बात सामने आई है कि उपचुनाव वाले क्षेत्रों में सिंधिया और उनके समर्थकों की गद्दारी सबसे बड़ी मुद्दा बनी हुई है। ग्वालियर-चंबल अंचल की सभी 16 सीटों के साथ ही मालवा-निमाड़ की सीटों पर किए गए सर्वे में 58 फीसदी लोगों ने सिंधिया और उनके समर्थकों की कांग्रेस के साथ की गई गद्दारी को नामाफी लायक बताया है। लोगों का कहना है कि जिन्होंने हमारे वोट का अपमान किया है, उन्हें हम सबक जरूर सिखाएंगे।सर्वे में यह भी कहा गया है कि उपचुनाव वाले क्षेत्रों में जनता की सहानुभूति पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ है। सर्वे में 62 फीसदी लोगों ने कहा कि कमलनाथ सरकार अच्छा काम कर रही थी। बिजली बिलों एवं किसानों की कर्जमाफी ने प्रदेश में कमलनाथ को लोकप्रिय बनाया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थकों ने गद्दारी करके चुनी हुई सरकार को गिराया है। इससे जनता नाराज है। सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि मप्र में 15 साल बाद कांग्रेस सत्ता में लौटी थी। इसमें सिंधिया का कोई बड़ा योगदान नहीं था। ग्वालियर-चंबल अंचल की जिन सीटों को जिताने का श्रेय सिंधिया लेते रहे हैं, वे सीटें एट्रोसिटी एक्ट के कारण मतदाताओं की नाराजगी से कांग्रेस को मिली थीं। यही नहीं सिंधिया लोकसभा चुनाव स्वयं हार गए। वहीं यूपी में अपने प्रभार वाले जिलों में भी कांग्रेस को नहीं जिता पाए थे। खुद गुना-शिवपुरी से लोकसभा चुनाव हार जाने और दिल्ली का बंगला केन्द्र सरकार ने खाली कराया इससे सिंधिया घबरा गए। सिंधिया की बगावत के बाद मप्र में कांग्रेस की सरकार गिर गई थी। सिंधिया अपने 22 विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए थे। महाराज के आने के बाद मप्र में फिर से शिवराज सत्ता में आ गए। भाजपा ने बदले में ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा भेज दिया। अब मप्र में 28 सीटों पर उपचुनाव होना है। अपनी साख जमाने के लिए सिंधिया को कम से कम अपने 22 पूर्व विधायकों को उपचुनाव जिताना होगा। लेकिन विभिन्न सर्वे रिपोर्ट में सिंधिया समर्थकों की हालत सबसे खराब बताई गई है। इस कारण सिंधिया का भविष्य उपचुनाव के भंवर में फंस गया है।
जमीनी हकीकत में युवा पीढी जागरुक है और वह किसी भी एकाधिकारी हक जताने वाली शक्ति के चंगुल की गिरफ्त से बाहर निकलना चाहती है ।

किसान कानून के खिलाफ प्रदर्शन की आग दिल्ली पहुंची, संसद भवन के पास टैक्टर में लगा दी आग

दिल्ली में इंडिया गेट और आस पास के वीआईपी इलाकों में धारा 144 लागू है और कोरोना वायरस के मद्देनजर लोगों को इकट्ठा होने की इजाजत नहीं है.

नई दिल्ली  किसान कानून के खिलाफ प्रदर्शन की आग दिल्ली तक पहुंच गई है. दिल्ली के इंडिया गेट में किसानों ने ट्रैक्टर में आग लगा दी है. पंजाब और हरियाणा के बाद किसानों का प्रदर्शन देश की राजधानी में संसद के बिल्कुल पास तक पहुंच गया है. संसद के करीब इंडिया गेट पर किसानों ने टैक्टर में आग लगा दी. हालांकि प्रदर्शनकारियों को इक्कठा होने नहीं दिया गया. दिल्ली में इंडिया गेट और आस पास के वीआईपी इलाकों में धारा 144 लागू है और कोरोना वायरस के मद्देनजर लोगों को इकट्ठा होने की इजाजत नहीं है.

पिछले दो हफ्तों से जिन किसान बिलों को लेकर संसद से सड़क तक लड़ाई छिड़ी थी, वो अब कानून बन गए हैं. लेकिन राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद भी बिल को लेकर बवाल थमा नहीं है. पंजाब में किसानों और सियासी दलों का विरोध और तेज हो रहा है. किसान संगठनों ने पंजाब में रेल रोको प्रदर्शन 29 सितंबर तक बढ़ा दिया है. बिल के खिलाफ अकाली दल जगह-जगह रैली कर रहा है.

शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती के मौके पर आज पंजाब में किसानों का आंदोलन और तेज होगा. मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह भगत सिंह के गांव जाएंगे जहां वो किसान आंदोलन के समर्थन में धरना भी देंगे. बिल को राष्ट्रपति की मंज़ूरी के बाद भी कांग्रेस के तेवर कड़े हैं.

“कृषि बिलों को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलना अति दुर्भाग्यपूर्ण”
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने रविवार को कृषि बिलों को राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद इसे निराशाजनक और काफी दुर्भाग्यपूर्ण बताया. इन बिलों का किसान पंजाब में विरोध कर रहे हैं. यहां जारी एक बयान में, सुखबीर ने कहा कि यह सच में देश के लिए काला दिन है, क्योंकि राष्ट्रपति ने देश की भावना को दरकिनार कर दिया.

उन्होंने कहा, “हम काफी आशांवित हैं कि माननीय राष्ट्रपति इन बिलों को दोबारा विचार करने के लिए संसद में लौटाएंगे. यह मांग अकाली दल और कुछ विपक्षी पार्टियों की है.” इससे पहले अकाली दल का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिला था और कृषि बिल को मंजूरी नहीं देने का आग्रह किया था.

बदल गया है सीम कार्ड से जुडा ये नियम…….. कंपनियों के लिए सिम कार्ड प्राप्त करना और सक्रिय करना

बदल गया है सीम कार्ड से जुडा ये नियम……..
कंपनियों के लिए सिम कार्ड प्राप्त करना और सक्रिय करना और कर्मचारियों को देना आसान हो गया है। दूरसंचार विभाग ने डिजिटल केवाईसी को हरी झंडी दे दी है। कंपनियों को अब सिम कार्ड के लिए अधिक दस्तावेज नहीं देने होंगे। यह भी पता चला है कि सिम कार्ड केवल एक ओटीपी में सक्रिय होगा।

दूरसंचार विभाग ने डिजिटल केवाईसी पर एक नई गाइडलाइन जारी की है, जिससे मोबाइल कंपनी को एप्लिकेशन फॉर्म में ग्राहक के देशांतर अक्षांश को भरना होगा। कंपनी के पंजीकरण को कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा भी जांचना होगा। कंपनियों को इस नई प्रक्रिया को 30 दिनों के भीतर लागू करना होगा। यह कहा गया है कि नए नियम जल्द ही व्यक्तिगत मोबाइल ग्राहकों पर भी लागू हो सकते हैं।

नया नियम लागू

इससे पहले, ट्राई ने टैरिफ पर दिशानिर्देश जारी किए थे। इसमें कंपनियां टैरिफ से जुड़ी कोई भी जानकारी नहीं छिपा सकेंगी। इन दिशानिर्देशों के अनुसार, टैरिफ के बारे में स्पष्ट और सटीक जानकारी प्रदान करना आवश्यक होगा। ट्राई का उद्देश्य उपभोक्ताओं के लिए मोबाइल योजनाओं के बारे में पारदर्शिता लाना और उन्हें सूचित निर्णय लेने में मदद करना है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कंपनियों को इन दिशानिर्देशों को 15 दिनों में लागू करना होगा, जिसमें कंपनियों को एसएमएस, वॉयस कॉल, डेटा सीमा दिखाना आवश्यक होगा। इसके अलावा, कंपनियों को अब बिल की वैधता और समय सीमा के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी होगी। कंपनियों को अपने ग्राहकों को अति प्रयोग के आरोपों के बारे में बताना होगा।

टोटके :किसी की बुरी नज़र हो सकती है आपकी परेशानियों का कारण, अपनाएं ये 7 अचूक उपाय 

यदि किसी के जीवन में सब अच्छा चल रहा हो और अचानक से परेशानियों का ढेर लग जाए तो कहा जाता है कि किसी की बुरी नज़र लग गई है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार किसी का अचानक से बहुत बीमार हो जाना, घर में अचानक बेवजह कलह, कारोबार में नुकसान, अत्यधिक चिड़चिड़ा होना या भूख ना लगना ये सभी नज़र लगने के लक्षण माने जाते हैं। लाल किताब के अनुसार नज़र दोष के कारण एक व्यक्ति की नकारात्मक ऊर्जा दूसरे व्यक्ति में प्रवेश कर जाती हैं। इस  कारण से उसकी साकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है और वह व्यक्ति बीमार महसूस करता है। नज़र दोष के प्रभाव से व्यक्ति को जीवन में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। लाल किताब में नज़र दोष को खत्म करने के कई उपाय बताए गए हैं। आज हम आपको ऐसे ही कुछ आसान उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनसे आप नज़र दोष खत्म कर सकते हैं।   

1. लाल किताब के अनुसार अगर किसी व्यक्त‌ि को नज़र लगी हो तो शनिवार के दिन कच्चा दूध पीड़‌ित व्यक्त‌ि के ऊपर से सात बार घुमाकर कुत्ते को प‌िला दें। ऐसा करने से बुरी नज़र उतर जाती है।

2. अगर किसी व्यक्ति पर नज़र दोष का प्रभाव हो तो उसके ऊपर नमक, काली सरसों, लहसुन, प्याज के सूखे छ‌िलके और लाल म‌िर्च को आग में डालकर उस आग को सात बार घुमाएं। यह उपाय मंगलवार, शन‌िवार या रविवार के दिन करें। 

3. घर के किसी बच्चे या बड़े व्यक्ति नज़र दोष से पीड़ित हो तो यह उपाय मंगलवार या रविवार के दिन करें। अपने बाएं हाथ की मुट्ठी में राई के कुछ दाने, नमक की सात डली और सात साबुत लाल सूखी मिर्च लें और पीड़ित व्यक्ति को लिटा कर सिर से पाँव तक सात बार वार कर चूल्हे में डाल दें। यह उपाय करते समय बोलें नहीं। 

4. यदि आपको लगता है कि घर के किसी सदस्य को नज़र लगी है तो उसके सिर से पाँव तक सात बार नींबू वार कर, उसके चार टुकड़े करके किसी तिराहे पर फेंक दें। नींबू फेंकने के बाद पीछे मुड़ कर ना देखें।

5. लाल किताब में राहु और केतु को नज़र दोष का कारण माना गया है। अगर किसी को नज़र लग जाए तो  राहु ग्रह का मंत्र ‘ओम रां राहवे नमः’ का जप करने से नज़र दोष का प्रभाव खत्म हो जाता है।

6. लाल किताब के अनुसार हनुमान जी का ध्यान करने से नज़र दोष खत्म हो जाता है। यदि नज़र लगी हो तो हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें।

7. लाल किताब में नज़र उतारने का एक टोटका यह भी बताया गया है। एक साफ कपड़े पर हनुमानजी के पांव का सिंदूर, दस ग्राम काला तिल, दस ग्राम काली उड़द, एक लोहे की कील और तीन साबुत लाल मिर्च रखकर कर पोटली बनाएं। इस पोटली को नज़र दोष से पीड़ित व्यक्ति के सिरहाने रख दें और एक दिन बाद इस पोटली को बहते हुए पानी में बहा दें। ऐसा करने से किसी की लगी हुई नज़र हट जाती है।

हैल्थ टिप्स: बदलते मौसम से बढ़ा वायरल का खतरा, ठंड बढ़ाएगी दमा व हार्ट अटैक के मरीज बरतें सावधानी

बदलता मौसम लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। 5 वर्ष से कम उम्र व 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए तो इस मौसम में आफत बढ़ जाती है। ठंड में वायरल, दमा व हार्ट अटैक जैसी बीमारियों के मरीजों की तादाद में काफी इजाफा होता है। हालांकि लोग सावधानी बरतें तो इनसे बचा जा सकता है। बता दे कि मौसम में बदलाव के साथ-साथ ठंड दस्तक दे रही है। ठंड की दस्तक दमा व हार्ट अटैक रोगियों के लिए अधिक नुकसानदायक है। ठंड के कारण दमा के मरीजों के सांस की नली में सूजन आ जाता है। जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है। जबकि हृदय रोग से जुड़े मरीजों को ठंड में परेशानी बढ़ती है। ऐसे में मरीज नियमित दवाई लें व सावधानी बरतें तो स्वस्थ व सुरक्षित रह सकते हैं। वहीं ठंड के कारण वायरल भी बढ़ने की संभावनाएं दिखती है। हालांकि सामान्यत बुखार 7 से 10 दिन में व खांसी-जुकाम करीब सप्ताह में ठीक हो जाता है। इन बीमारियों का रहता है खतरा

बाक्स :

* बुखार

* दमा

* हार्ट अटैक

* खांसी-जुकाम ये बरतें सावधानी :

* ठंडे खाद्य व पेय पदार्थों का सेवन न करें।

* कम ठंड में लापरवाही न बरतें और पूरी बाजू के कपड़े पहने।

* साफ-सफाई का ध्यान रखें।

* खानपान का ध्यान रखें। बाहर का खाना न खाएं।

* हार्ट अटैक के मरीज सुबह मॉर्निंग वाक न करें।

* सीधे ठंडी हवा के संपर्क में न जाएं।

* तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें।

* हलके गर्म पानी का सेवन करें।

* सर्दी की चपेट में आने के लक्षण दिखते ही चिकित्सक से उपचार लें। ये हैं लक्षण

* बुखार होना

* शरीर में दर्द होना

* लगातार खांसी आना

* नाक बहना

* सीने में दर्द होना

* सांस फूलना या सांस लेने में दिक्कत होना ठंड में बढ़ते हैं वायरल के मरीज

अब ठंड ने दस्तक दे दी है। ठंड की चपेट में आने से वायरल व अन्य बीमारियों के मरीजों में बढ़ोतरी होगी। प्रतिदिन करीब 150 से 200 मरीज ठंड की चपेट में आने से उपचार के लिए अस्पताल में पहुंचते हैं।

5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे और 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग जल्दी ठंड की चपेट में आ जाते हैं। इसका मुख्य कारण उनमें रोग प्रतिरोधी क्षमता की कमी होता है। ठंड में बचाव रखा जाए तो स्वस्थ रहा जा सकता है।

फ्रांस ने भारत को सौंपे 5 और राफेल फाइटर जेट.

फ्रांस ने भारत को राफेल लड़ाकू विमानों के अगले बैच को सौंप दिया है। इस बैच में शामिल पांचों विमान अभी फ्रांस की धरती पर ही मौजूद हैं। माना जा रहा है कि अक्टूबर में ये राफेल विमान भारत पहुंचेंगे। इन विमानों को पश्चिम बंगाल में स्थित कलईकुंडा एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात किया जाएगा।

नई दिल्ली.
फ्रांस ने भारत को राफेल लड़ाकू विमानों के अगले बैच को सौंप दिया है। इस बैच में शामिल पांचों विमान अभी फ्रांस की धरती पर ही मौजूद हैं। माना जा रहा है कि अक्टूबर में ये राफेल विमान भारत पहुंचेंगे। इन विमानों को पश्चिम बंगाल में स्थित कलईकुंडा एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात किया जाएगा। जो चीन से लगती पूर्वी सीमा की रखवाली करेंगे। राफेल के पहले बैच में शामिल पांच विमानों को 10 सितंबर को एक औपचारिक कार्यक्रम के दौरान भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था।

फ्रांस ने भारत को सौंपी राफेल की दूसरी बैच
भारत में फ्रांस के राजदूत इमेनुअल लेनिन ने इकनॉमिक टाइम्स के साथ बातचीत में कहा कि राफेल फाइटर जेट के दूसरे बैच को भारत को सौंप दिया गया है। ये विमान अभी फ्रांस में हैं, अब भारतीय वायुसेना पर यह निर्भर है कि वे कब इन विमानों को भारत लाते हैं। उन्होंने भारतीय वायुसेना के पायलटों की तारीफ करते हुए उन्हें उत्कृष्ट करार दिया।

भारत ने राफेल में कराए मोडिफिकेशन
चीन से लगती सीमा में चरम तापमान को देखते हुए इस विमान में भारत ने अपने हिसाब से कुछ मोडिफिकेशन भी करवाएं हैं। जिससे कम तापमान में भी यह विमान आसानी से स्टॉर्ट हो सकता है। पहले बैच में भारत पहुंचे 5 राफेल विमानों के 250 घंटे से भी ज्यादा की उड़ान और फील्ड फायरिंग टेस्ट किए जा चुके हैं। इन विमानों को अंबाला में 17 गोल्डन एरो स्क्वाड्रन में शामिल किया गया है।

चीन के जे-20 पर भारी पड़ेगा राफेल
भारतीय राफेल के मुकाबले में चीन का चेंगदू J-20 और पाकिस्‍तान का JF-17 लड़ाकू विमान हैं। मगर ये दोनों ही राफेल के मुकाबले थोड़ा कमतर हैं। चीनी J-20 का मेन रोल स्‍टील्‍थ फाइटर का है, वहीं राफेल को कई कामों में लगाया जा सकता है। J-20 की बेसिक रेंज 1,200 किलोमीटर है जिसे 2,700 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है। J-20 की लंबाई 20.3 मीटर से 20.5 मीटर के बीच होती है। इसकी ऊंचाई 4.45 मीटर और विंगस्‍पैन 12.88, 13.50 मीटर के बीच है यानी यह राफेल से खासा बड़ा है। पाकिस्‍तान के पास मौजूद JF-17 में चीन ने PF-15 मिसाइलें जोड़ी हैं मगर फिर भी यह राफेल के मुकाबले में कमजोर है।

अगले साल के अंत तक भारत आ जाएंगे सभी राफेल
भारत ने फ्रांस के साथ 36 राफेल विमानों की खरीद के लिए सौदा किया था। 36 राफेल विमानों में से 30 लड़ाकू विमान होंगे और छह प्रशिक्षण विमान। प्रशिक्षण विमानों में दो सीट होंगी और उनमें लड़ाकू विमान वाली लगभग सभी विशेषताएं होंगी। राफेल विमान, रूस से सुखोई विमानों की खरीद के बाद 23 वर्षों में लड़ाकू विमानों की भारत की पहली बड़ी खरीद है।

घातक हथियारों से लैस हैं ये राफेल
भारत में जो राफेल आए हैं, उनके साथ Meteor बियांड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल, MICA मल्‍टी मिशन एयर-टू-एयर मिसाइल और SCALP डीप-स्‍ट्राइक क्रूज मिसाइल्‍स लगी हैं। इससे भारतीय वायुसेना के जांबाजों को हवा और जमीन पर टारगेट्स को उड़ाने की जबर्दस्‍त क्षमता हासिल हो चुकी है। Meteor मिसाइलें नो-एस्‍केप जोन के साथ आती हैं यानी इनसे बचा नहीं जा सकता। यह फिलहाल मौजूद मीडियम रेंज की एयर-टू-एयर मिसाइलों से तीन गुना ज्‍यादा ताकतवर हैं। इस मिसाइल सिस्‍टम के साथ एक खास रॉकेट मोटर लगा है जो इसे 120 किलोमीटर की रेंज देता है।