गिलगित-बाल्टिस्तान पर भारत की दो टूक- हमारे आंतरिक मामले में दखल न दे PAK

चुनाव को लेकर भारत और पाक में गतिरोध बढ़ाभारत बोला- गिलगित बाल्टिस्तान हमारा अभिन्न हिस्सा

गिलगित-बाल्टिस्तान के मुद्दे पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि गिलगित-बाल्टिस्तान की स्थिति में पाकिस्तान कोई बदलाव नहीं कर सकता. यह पूरा क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है और पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामले में बोलने का कोई हक नहीं है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा इलाका भारत का अभिन्न हिस्सा है, इस पर पाकिस्तान को बोलने का कोई अधिकार नहीं.

बता दें, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के गिलगित-बाल्टिस्तान इलाके को लेकर भारत-पाकिस्तान में गतिरोध बढ़ गया है. पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान की केंद्र सरकार को चुनाव कराने की अनुमति दी है. इस पर भारत सरकार ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और पाकिस्तान इसकी स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं कर सकता है.

पाकिस्तान की नीति आतंकवाद

दूसरी ओर, सार्क और सीआईसीए की बैठक में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाने पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऐसे किसी देश से क्या उम्मीद कर सकते हैं जो सीमा पार आतंकवाद में शामिल है और आतंकवाद ही जिसकी राष्ट्रीय नीति है. गुरुवार को सार्क विदेश मंत्रियों की वर्चुअल बैठक में विदेश मंत्री जयशंकर ने सीमा पार से जारी आतंकवाद का मुद्दा उठाया. साथ ही उन्होंने सार्क के सामने तीन बड़ी चुनौतियों का जिक्र भी किया. सार्क विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने पाकिस्तान के सामने आतंकवाद का मुद्दा उठाया. साथ ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि सार्क के सामने तीन सबसे बड़ी चुनौतियां सीमापार से आतंकवाद, व्यापार में बाधा, कनेक्टिविटी में रुकावट हैं जिनका समाधान किया जाना चाहिए.

चीन के साथ बातचीत जारी

भारत-चीन सीमा विवाद निपटाने को लेकर अभी हाल में दोनों देशों के बीच सीनियर कमांडर्स की बैठक हुई. इस बैठक के बारे में विदेश मंत्रालय ने कहा, यह बैठक 4 सितंबर को भारत-चीन के रक्षा मंत्रियों की मुलाकात के बाद हुई. दोनों देशों के विदेश मंत्री भी 10 सितंबर को मिले और वार्ता की. दोनों पक्ष इस बात पर राजी हुए कि शांति बनाए रखने के लिए दोनों तरफ से वार्ता जारी रहेगी और जो भी तनाव के बिंदु हैं, उस पर बराबर संवाद किया जाएगा और उसे सुलझाया जाएगा. दोनों देश इस बात के लिए तैयार हुए कि जितनी जल्द हो सके फिर से कमांडर स्तर की वार्ता होगी. इसके अलावा डब्ल्यूएमसीसी की बैठक भी जल्द होने की संभावना है.

बिहार में 3 फेज में चुनाव:28 अक्टूबर, 3 नवंबर और 7 नवंबर को वोटिंग,मप्र में चुनाव की तारीखों की घोषणा 29 सितंबर से पहले नहीं

चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया। 3 चरणों में चुनाव होंगे। पहले फेज में 28 अक्टूबर को 71 सीटों पर चुनाव होंगे। इसमें 16 जिले, 31 हजार पोलिंग बूथ होंगे। दूसरे फेज में 3 नवंबर को 94 सीटों पर मतदान होगा। इसमें 17 जिले, 42 हजार पोलिंग बूथ होंगे। तीसरे फेज में 7 नवंबर को 78 सीटों पर वोटिंग होगी। इसमें 15 जिले, 33.5 हजार पोलिंग बूथ होंगे। 10 नवंबर को नतीजे आएंगे।मध्य प्रदेश में 28 सीटों पर उपचुनाव के लिए तारीखों की घोषणा 29 सितंबर से पहले नहीं होगी। मध्यप्रदेश में पहली बार इतनी ज्यादा सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं। इन चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है।भाजपा की अपनी सत्ता बचाने और कमलनाथ की छह महीने पहले खोई सत्ता वापस पाने की लड़ाई है। साथ ही, इस उपचुनाव में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया की साख भी दांव पर लगी है। क्योंकि, जिन 28 सीटों पर उपचुनाव हो रहा है उनमें 16 सीटें सिंधिया के प्रभाव वाले ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की है। उधर, आयोग अगर चुनाव की घोषणा करता है तो फिर 19 जिलों में आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लग जाएगी।

कोरोना दौर का सबसे बड़ा चुनाव

70 देशों ने चुनाव टाल दिए, लेकिन जैसे-जैसे दिन गुजरते गए न्यू नॉर्मल होता हो गया क्योंकि कोरोना के जल्दी खत्म होने के संकेत नहीं मिले। हम चाहते थे कि लोगों का लोकतांत्रिक अधिकार बना रहे। उनके स्वास्थ्य की भी हमें चिंता करनी थी। आज हम यहां बिहार चुनाव की घोषणा करने आए हैं। यह कोरोना के दौर में देश का ही नहीं, बल्कि दुनिया का पहला सबसे बड़ा चुनाव होने जा रहा है।’

बिहार में 243 सीटें हैं। 38 सीटें आरक्षित हैं। हमने एक पोलिंग बूथ पर वोटरों की संख्या 1500 की जगह 1000 रखने का फैसला किया था। 2015 में पिछले विधानसभा चुनाव के वक्त 6.7 करोड़ वोटर थे। अब 7.29 करोड़ वोटर हैं।

मास्क-ग्लव्ज दिए जाएंगे, वोटिंग का समय भी बढ़ा

1.73 लाख वीवीपैट का इस्तेमाल होगा। 46 लाख मास्क, 7.6 लाख फेस शील्ड, 23 लाख जोड़े हैंड ग्लव्स और 6 लाख पीपीई किट्स का इस्तेमाल होगा। वोटिंग का समय एक घंटा बढ़ा दिया गया है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर सामान्य इलाकों में सुबह 7 से शाम 5 की बजाय सुबह 7 से शाम 6 के बीच वोटिंग होगी।

नामांकन के लिए नियम तय

इस दौरान उम्मीदवार 5 की जगह 2 ही गाड़ियां साथ ले जा सकेंगे। कोरोना के जो मरीज क्वारैंटाइन हैं, वे वोटिंग के दिन आखिरी घंटे में ही मतदान कर पाएंगे।

चीन ने सीमा पर लगाई केडी-63 क्रूज मिसाइल, भारत ने पृथ्वी 2 मिसाइल के परीक्षण से इशारों में दिया जवाब

नई दिल्ली
भारत ने परमाणु क्षमता संपन्न पृथ्वी 2 बैलिस्टिक मिसाइल का एक बार फिर से सफल परीक्षण कर टेढ़ी नजर रखने वाले पड़ोसियों को साफ संदेश दिया है। भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा तैयार शॉर्ट रेंज बलिस्टिक मिसाइल (Prithvi short-range ballistic missile) का स्ट्रैटजिक फोर्स कमांड (SFC) ने परीक्षण किया है। संभवतः यह चीन के लिए संदेश है जिसने हाल ही में डोकलाम में परमाणु बॉम्बर तैनात कर दिया।

दुश्मनों पर काल बन बरपेगी पृथ्वी 2 मिसाइल

ओडिशा के बालासोर तट से छोड़े गए इस पृथ्वी 2 मिसाइल ने उन सभी लक्ष्यों को भेदे जो परीक्षण के लिए चुने गए थे। सतह से सतह पर मार करने वाली यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। करीब आधा टन वजनी परमाणु बम ढोने में सक्षम यह मिसाइल 150 से 600 किमी तक वार कर सकती है। पृथ्वी सीरिज की तीन मिसाइलें हैं- पृथ्वी I, II और III। इनकी मारक क्षमता क्रमशः 150 किमी, 350 किमी और 600 किमी तक है।

एयरफोर्स और आर्मी, दोनों के बेड़ों में शामिल

चूंकि चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण केंद्र (ITR) से जिस अत्याधुनिक मिसाइल को अंधेरे में दागा गया, वह पृथ्वी 2 है, इसलिए वह 350 किमी तक के रेंज में लक्ष्यों को ध्वस्त कर सकता है। खास बात यह है कि पृथ्वी श्रेणी की मिसाइलें भारतीय वायुसेना और थल सेना, दोनों ही अपने बेड़ों में शामिल कर चुकी हैं।

चीन की कुटील चाल को करारा जवाब
ध्यान रहे कि लद्दाख में हजारों सैनिकों की तैनाती करने वाला चीन अब भारत के पूर्वी हिस्‍से में तनाव का नया मोर्चा खोल रहा है। चीन ने भूटान से लगे डोकलाम के पास में अपने H-6 परमाणु बॉम्‍बर और क्रूज मिसाइल को तैनात किया है। चीन इन विनाशकारी हथियारों की तैनाती अपने गोलमुड एयरबेस पर कर रहा है। यह एयरबेस भारतीय सीमा से मात्र 1,150 किलोमीटर दूर है।

परमाणु बॉम्बर H-6 को ठिकाने लगाएगा पृथ्वी 2

इससे पहले चीन ने इस घातक बॉम्‍बर की तैनाती अक्‍साई चिन के काशगर एयरबेस पर की थी। ओपन सोर्स इंटेलिजेंस एनॉलिस्ट Detresfa की ओर से जारी सैटलाइट तस्‍वीर में इस बॉम्‍बर के साथ केडी-63 लैंड अटैक क्रूज मिसाइल भी नजर आ रही है। इस मिसाइल की मारक क्षमता करीब 200 किलोमीटर है। हालांकि पृथ्वी 2 मिसाइल की क्षमता 350 किमी तक के रेंज में लक्ष्य को साधने की है।

चीनी एच -6 के बॉम्बर को लंबी दूरी पर स्थित टारगेट को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह विमान परमाणु हमला करने में भी सक्षम है। चीन ने इस विमान को विशेष रूप से अमेरिका के गुआम बेस को निशाना बनाने के लिए शामिल किया है। इसके पिछले मॉडल में मिसाइल की क्षमता सीमित थी लेकिन इसे अपग्रेड कर अब और उन्नत बनाया गया है।

घर में दौड़ते घोड़ों की तस्वीर प्रगति का सूचक

नई दिल्ली: दौड़ते हुए घोड़े सफलता, प्रगति और ताकत के प्रतीक होते हैं, खासकर 7 दौड़ते हुए घोड़े व्यवसाय की प्रगति का सूचक माने गए हैं, क्योंकि शास्त्रों के अनुसार 7 अंक सार्वभौमिक है, प्राकृतिक है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि आप अपने घर या दफ्तर में दौड़ते हुए घोड़े की तस्वीर लगाते हैं, तो यह आपके कार्य में गति प्रदान करता है। इस तस्वीर को लगाते हुए इस बात का ध्यान रखें कि घोड़ों का मुंह ऑफिस के अंदर की ओर आते हुए होना चाहिए और दक्षिण दीवार पर तस्वीर लगानी चाहिए।

सफलता में सहायक
दौड़ते हुए घोड़े प्रगति के प्रतीक होते हैं। ये कार्य में गति प्रदान करते हैं और जो भी व्यक्ति बार– बार इन दौड़ते हुए घोड़ों को देखता है, इसका प्रभाव व्यक्ति की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। अतः ये घोड़े आपके कार्य में गति प्रदान कर सफलता दिलाने में प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होंगे।

लगाएं ये तस्वीर
7 घोड़ों की तस्वीर घर में लगाने से जीवन में धन संबंधी उतार-चढ़ाव नहीं होता अधिकतम स्थिरता रहती है। स्थाई रूप से घर में लक्ष्मी का निवास होता है। इसके लिए घर के मुख्य हॉल के दक्षिणी दीवार पर, घर के अंदर आते हुए मुख वाले घोड़े की तस्वीर लगाना चाहिए। घोड़े की तस्वीर लेते समय इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि घोड़े का चेहरा प्रसन्नचित मुद्रा में हो, ना कि क्रोधित हो।

शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक
ध्यान रखें की घोड़े शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक हैं और विशेषकर सफेद घोड़े सकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक होते हैं। इसलिए घर और ऑफिस की नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा को लाने के लिए सफेद 7 घोड़े की तस्वीर लगानी चाहिए। अगर आप कर्ज से परेशान हैं तो घर या अपने कार्यालय के उत्तर–पश्चिमी दिशा में आर्टिफिशियल घोड़े का जोड़ा रखें। यह आपको किसी भी गिफ्ट शॉप पर आसानी से मिल जाएंगा।

ना लगाएं ऐसी तस्वीर
विशेष ध्यान रखने वाली बात यह है कि कभी भी टूटी फूटी तस्वीर घर में ना रखें या धुंधली तस्वीर भी ना रखें। जिस तस्वीर में अलग-अलग दिशा में घोड़े दौड़ते नजर आए वह तस्वीर भी ना लगाएं। इन घोड़ों से घर में सुख–समृद्धि और लक्ष्मी का वास होता है और घर में प्रसंता का माहौल बना रहता है।

चुनाव आयोग आज कर सकता मध्यप्रदेश विधानसभा उपचुनाव और बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान

आखिरकार शुक्रवार को बिहार विधानसभा चुनावों की तारीख आ जाएगी. चुनाव आयोग आज दोपहर 12.30 बजे करेगा चुनाव की तारीखों का ऐलान करेगा.

नई दिल्ली: आखिरकार शुक्रवार को बिहार विधानसभा चुनावों की तारीख आ जाएगी. चुनाव आयोग (Election Commission) आज दोपहर 12.30 बजे करेगा चुनाव की तारीखों का ऐलान करेगा. देश में कोरोनावायरस महामारी के दौर में यह पहला बड़ा चुनाव होगा. महामारी की वजह से कई विपक्षी पार्टियां चुनाव टालने की बात कह रही थीं. बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की सहयोगी पार्टी ने जुलाई में चुनाव आयोग को टालने का आग्रह किया था. पार्टी ने कहा था कि कोविड-19 के संक्रमण के डर के दौरान इतने बड़े पैमाने पर चुनाव कराना खतरे भरा हो सकता है.

बता दें कि 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा का कार्यकाल 29 नवंबर को समाप्त हो रहा है. संभावना जताई जा रही है कि चुनाव अक्टूबर के मध्य में कराए जाएंगे. वहीं, इस बात की भी संभावना है कि चुनाव कई चरण में होंगे. चुनाव आयोग ने इसके पहले 4 सितंबर को घोषणा करके बताया था कि उसने बिहार विधानसभा चुनाव के लगभग साथ ही 65 लंबित उपचुनावों को भी कराने का फैसला किया है. ऐसे में हो सकता है कि आज ही उपचुनावों की तारीखों का भी ऐलान हो.

इसके पहले बिहार में चुनाव कराने का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुका है. हालांकि, शीर्ष अदालत ने मामले में दाखिल की गई याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि ‘कोविड के आधार पर चुनावों पर रोक और चुनाव आयोग की शक्तियों में दखल नहीं दिया जा सकता’. सुनवाई कर रही बेंच ने कहा था कि ‘कोविड के आधार पर चुनावों को टाला नहीं जा सकता, खासकर तब जब चुनाव आयोग की ओर से कोई अधिसूचना ही जारी नहीं की गई है. यह अदालत चुनाव आयुक्त को नहीं बता सकती कि उन्हें क्या करना है, वो खुद इन मामलों पर विचार करेंगे.’

अयोध्या में ढांचा विध्वंस मामले में 28 साल बाद अब अगले हफ्ते 30 सितंबर या उससे पहले फैसला आएगा

नई दिल्ली अरसे से अटके राम जन्मभूमि मुद्दा का हल निकल आया और भव्य मंदिर का शिलान्यास हो चुका है। लेकिन अयोध्या में ढांचा विध्वंस मामले में 28 साल बाद अब अगले हफ्ते 30 सितंबर या उससे पहले फैसला आएगा। यह मुकदमें के निपटारे और फैसला सुनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की तय समयसीमा की अंतिम तारीख है। इस लंबे खिचे मुकदमें ने वास्तविक रफ्तार तब पकड़ी जब सुप्रीम कोर्ट ने इसे निबटाने की समयसीमा तय की। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2017 में दो साल के भीतर मुकदमा निपटा कर फैसला सुनाने का आदेश दिया था। इसके बाद तीन बार समय बढ़ाया और अंतिम तिथि 30 सितंबर 2020 तय की थी। इसी तारीख पर फैसला आएगा जिसमें अब कुछ ही दिन बचे हैं।

मुकदमें पर अगर निगाह डालें तो घटना की पहली प्राथमिकी उसी दिन 6 दिसंबर 1992 को श्रीराम जन्मभूमि सदर फैजाबाद पुलिस थाने के थानाध्यक्ष प्रियंबदा नाथ शुक्ल ने दर्ज कराई थी। दूसरी प्राथमिकी भी राम जन्मभूमि पुलिस चौकी के प्रभारी गंगा प्रसाद तिवारी की थी। मामले में विभिन्न तारीखों पर कुल 49 प्राथमिकी दर्ज कराई गईं। केस की जांच बाद में सीबीआइ को सौंप दी गई। सीबीआइ ने जांच करके 4 अक्टूबर 1993 को 40 अभियुक्तों के खिलाफ पहला आरोपपत्र दाखिल किया और 9 अन्य अभियुक्तों के खिलाफ 10 जनवरी 1996 को एक और आरोपपत्र दाखिल किया। सीबीआइ ने कुल 49 अभियुक्तों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। 28 साल में 17 अभियुक्तों की मृत्यु हो गई अब सिर्फ 32 अभियुक्त बचे हैं जिनका फैसला आना है।

2001 में हाईकोर्ट का आया फैसला

केस के लंबे समय तक लंबित रहने के पीछे भी वही कारण थे जो हर हाईप्रोफाइल केस में होते हैं। अभियुक्तों ने हर स्तर पर निचली अदालत के आदेशों और सरकारी अधिसूचनाओं को उच्च अदालत में चुनौती दी जिसके कारण मुख्य केस की सुनवाई में देरी होती रही। अभियुक्त मोरेसर सावे ने हईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मामला सीबीआइ को सौंपने की अधिसूचना को चुनौती दी। कई साल याचिका लंबित रहने के बाद 2001 में हाईकोर्ट का फैसला आया जिसमें अधिसूचना को सही ठहराया गया। इस बीच अभियुक्तों ने आरोपतय करने से लेकर कई मुद्दों पर हाइकोर्ट के दरवाजे खटखटाए जिससे देरी हुई।

सीबीआइ को लड़नी पड़ी लंबी कानूनी लड़ाई

पहले यह मुकदमा दो जगह चल रहा था। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी सहित आठ अभियुक्तों के खिलाफ रायबरेली की अदालत में और बाकी लोगों के खिलाफ लखनऊ की विशेष अदालत में। रायबरेली में जिन आठ नेताओं का मुकदमा था उनके खिलाफ साजिश के आरोप नहीं थे। उन पर साजिश में मुकदमा चलाने के लिए सीबीआइ को लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी और अंत में सुप्रीम कोर्ट के 19 अप्रैल 2017 के आदेश के बाद 30 मई 2017 को अयोध्या की विशेष अदालत ने उन पर भी साजिश के आरोप तय किये और सारे अभियुक्तों पर एक साथ संयुक्त आरोपपत्र के मुताबिक एक जगह लखनऊ की विशेष अदालत में ट्रायल शुरू हुआ।

इस वजह से मुकदमे ने पकड़ी रफ्तार

अप्रैल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने आठ नेताओं के खिलाफ ढांचा ढहने की साजिश में मुकदमा चलाने को हरी झंडी देते समय और रायबरेली का मुकदमा लखनऊ स्थानांतरित करते वक्त ही केस में हो चुकी अत्यधिक देरी पर क्षोभ व्यक्त करते हुए साफ कर दिया था कि नये सिरे से ट्रायल शुरू नहीं होगा जितनी गवाहियां रायबरेली में हो चुकी हैं उसके आगे की गवाहियां लखनऊ में होंगी। मामले में रोजाना सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट का यह वही आदेश था जिससे इस मुकदमें ने रफ्तार पकड़ी। कोर्ट ने कहा था कि बेवजह का स्थगन नहीं दिया जाएगा और सुनवाई पूरी होने तक जज का स्थानांतरण नहीं होगा। इस आदेश के बाद मुकदमे की रोजाना सुनवाई शुरू हुई जिससे केस ने रफ्तार पकड़ी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पहले जिस आदेश ने लगभग ठहरी सुनवाई को गति दी थी वह था इलाहाबाद हाईकोर्ट का 8 दिसंबर 2011 का आदेश जिसमें हाईकोर्ट ने रायबरेली के मकुदमें की साप्ताहिक सुनवाई का आदेश दिया था। लेकिन असली रफ्तार सुप्रीम कोर्ट के रोजाना सुनवाई के आदेश से आयी। इसके बावजूद मुकदमा दो साल में नहीं निबटा और सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई कर रहे जज के आग्रह पर तीन बार समय सीमा बढ़ाई। 19 जुलाई 2019 को 9 महीने और 8 मई 2020 को चार महीने बढ़ा कर 31 अगस्त तक का समय दिया और अंत में तीसरी बार 19 अगस्त 2020 को एक महीने का समय और बढ़ाते हुए 30 सितंबर तक फैसला सुनाने की तारीख तय की थी।

एसबीआई दे रहा बिना किसी डाक्यूमेंट के 50000 का लोन, वह भी सिर्फ 3 मिनट में

नई दिल्ली

देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया छोटे कारोबारियों के लिए 50000 तक लोन केवल 3 मिनट में दे रहा है। एसबीआई के किसी भी ब्रांच में गए बगैर ई-मुद्रा लोन आपको घर बैठे मिलेगा वह भी बिना किसी डाक्यूमेंट के। आई जानें क्या है ई-मुद्रा लोन और इसमें आवेदन का तरीका…

ई-मुद्रा की विशेषताएं  

लघु (माइक्रो) उद्यमी होना चाहिए।एसबीआई का कम से कम 6 माह पुराना चालू/बचत खाताधारक होना चाहिए।अधिकतम ऋण पात्रता राशि – रुपये 1.00 लाख।अधिकतम ऋण अवधि – 5 वर्ष।बैंक के पात्रता मानदंडों के अनुसार रुपये 50,000/- तक ऋण की तुरंत उपलब्धता।रुपये 50,000/- से अधिक ऋण राशि के लिए औपचारिकताएं पूरी करने ग्राहक को शाखा में आना पड़ेगा।

PMFBY: इसलिए किसानों की जगह कंपनियों को मिल रहा पीएम फसल बीमा योजना का लाभ

किसान हितैषी बताने वाले सात राज्यों आंध्र प्रदेश, असम, गुजरात, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं तेलंगाना ने नहीं दिया फसल बीमा योजना में अपने हिस्से का प्रीमियम, पैसा देने के बावजूद भारी नुकसान में किसान

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) का प्रीमियम जमा करने के बाद भी कई राज्यों में किसानों को प्राकृतिक आपदा से खराब हुई फसल के मुआवजे के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है. अव्वल तो कई इंश्योरेंस कंपनियां मुआवजा पूरा नहीं देतीं लेकिन वो भी जब समय पर नहीं मिलता तो किसान कर्ज लेकर खेती करने के लिए मजबूर होते हैं. इसकी बड़ी वजह राज्यों की कार्यशैली है. देश के सात बड़े सूबों ने 2018 से लेकर अब तक कई सीजन में अपने हिस्से का प्रीमियम जमा नहीं किया है. जिसकी वजह से किसान संकट में हैं. केंद्र के पैसे का नुकसान हो रहा है जबकि इंश्योरेंस कंपनियों को डबल फायदा मिल रहा. ऐसा कारनामा करने वाले कांग्रेस (Congress) और बीजेपी (BJP) दोनों के शासन वाले राज्य शामिल हैं, जो इन दिनों अपने आपको सबसे बड़ा किसान हितैषी बताने की कोशिश में जुटे हुए हैं.

केंद्रीय कृषि मंत्रालय (Ministry of Agriculture) के सचिव रहे सिराज हुसैन ने मीडिया  से बातचीत में कहा, “किसी भी बीमा योजना में जब कंपनी के पास पूरा प्रीमियम नहीं जमा होगा तो वो कैसे क्लेम दे सकता है. इसका सिर्फ और सिर्फ किसानों को नुकसान है. वे अपने हिस्से का प्रीमियम जमा करने के बावजूद फसल खराब होने पर क्लेम नहीं ले पाते. होना तो ये चाहिए कि जब किसान अपना प्रीमियम दे तभी राज्य सरकार भी अपना हिस्सा दे दे, ताकि ऐसी समस्या न आए. हालांकि, जब केंद्र सरकार जीएसटी (GST) में राज्यों की हिस्सेदारी तक नहीं दे रही है तो राज्यों की भी अपनी कुछ फाइनेंशियल मजबूरी हो सकती है.

किसका कितना प्रीमियम

पीएम फसल बीमा योजना (PMFBY) में प्रीमियम के तीन पार्ट किसान, केंद्र और राज्य होते हैं. किसानों को खरीफ फसलों के लिए कुल प्रीमियम का अधिकतम 2 फीसदी, रबी की खाद्य एवं तिलहन फसलों के लिए 1.5 फीसदी एवं कॅमर्शियल व बागवानी फसलों के लिए 5 फीसदी भुगतान करना होता है. प्रीमियम की शेष रकम ‘प्रीमियम सब्सिडी’ के रूप में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर देती हैं. मैदानी राज्यों में यह हिस्सा 50-50 फीसदी का होता है. पूर्वोत्तर राज्यों में प्रीमियम सब्सिडी का 90 फीसदी हिस्सा केंद्र और 10 फीसदी स्टेट को देना होता है.

किन राज्यों ने नहीं दी प्रीमियम सब्सिडी

फसल बीमा योजना (Crop Insurance) में जिन राज्यों की  सब्सिडी (Premium Subsidy) का राज्य शेयर लंबित है उनमें आंध्र प्रदेश, असम, गुजरात, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं तेलंगाना शामिल हैं. इन राज्यों को अपने हिस्से का 41 सौ करोड़ रुपये से अधिक बीमा कंपनियों को देना है. तब इनके किसानों को संबंधित सीजन में फसल नुकसान का क्लेम मिल पाएगा.

राज्यों की इस कार्यशैली से कंपनियों को सीधा फायदा

किसान शक्ति संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह कहते हैं कि अगर राज्य अपनी हिस्सेदारी नहीं देना चाहते तो वो इस स्कीम से अपने को बाहर कर लें और अपने हिसाब से फसल खराब होने पर मुआवजा दें. केंद्र और किसानों (Farmers) का अपना शेयर जमा होने के बाद भी कंपनी मुआवजा नहीं देगी. इस तरह कंपनी फायदे में रहेगी और किसान नुकसान में. केंद्र सरकार का दिया पैसा भी बेकार जाएगा.

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन में मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष राहुल राज कहते हैं कि कई राज्यों के हिस्से का पैसा तो 2018 से बाकी है. तब तो कोराना संकट भी नहीं था कि उसकी वजह से कोई फाइनेंशियल संकट का बहाना हो. दरअसल, यह सब एंटी फार्मर माइंडसेट की वजह से होता है और इसका सीधा फायदा बीमा कंपनियों को मिलता है. सभी पक्षों से प्रीमियम आने पर ही उन्हें किसान को मुआवजा देना पड़ता है. कोई एक पक्ष प्रीमियम न जमा करे तो कंपनी का तो फायदा ही फायदा है.

फसल बीमा का असली फायदा इंश्योरेंस कंपनियों को मिल रहा

राज्यों को देना ही होगा अपने हिस्से का पैसा

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव वी. विजय साई रेड्डी ने केंद्र सरकार से पूछा है कि राज्यों के हालात को देखते हुए क्या कृषि मंत्रालय प्रीमियम की पूरी धनराशि के भुगतान का दायित्य उठाने पर विचार कर रहा है? जवाब में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि इस तरह का कोई प्रस्ताव नहीं है. इस योजना के तहत फसलों और क्षेत्रों के चयन, जोखिम और कार्यान्वयन में राज्य सरकारों की प्रमुख भूमिका है. इसका मतलब साफ है कि राज्यों को अपना हिस्सा देना होगा. हालांकि, रेड्डी का कहना है कि कभी-कभी फसल बीमा योजना में राज्यों का हिस्सा उनके पूरे कृषि बजट का 50 फीसदी होता है.

चमचमाने लगेंगे आपके गंदे दांत, बस करना हे ये छोटा सा काम

हर व्‍यक्ति के चेहरे की खुबसूरती में चार चांद लगाती है उसकी मुस्‍कान वहीं व्‍यक्ति के खुबसूरती के साथ साथ उसके चेहरे पर चमकते हुए दांत भी बहुत अहम भूमिका निभाते हैं। सफ़ेद और चमकते दांत भला कौन नहीं चाहता है हर किसी की ख्‍वाहिश होती है कि वो उसके दांत चमकते हुए और सफ़ेद हो। दांत इंसान की हंसी में चार चाँद लगा देते हैं। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो दिखते तो बेहद ही सुंदर हैं लेकिन जैसे ही उनका मुहं खोलते ही उनकी खुबसूरती बेकार हो जाती है क्‍योंकि उनके पीले दांत उनकी खुबसूरती में खलल बन जाते हैं।

मोतियों जैसे चमकते सफेद दांत आपकी सुंदरता और व्यक्तित्व में चार चांद लगा देते हैं। दिन में दो बार ब्रश और उचित साफ-सफाई से दांत मोतियों से चमकदार और मजबूत बने रहते हैं। गुटका, पान, तंबाकू, सिगरेट, शराब आदि दांतों की चमक तो समाप्त कर ही देते हैं, इनकी जड़ों को भी कमजोर करते हैं। हमारे दांत सिर्फ खाना खाने में ही मददगार नहीं होते बल्कि इससे हमारी पर्सनैलिटी कोभी नई पहचान मिलती है लेकिन बहुत सारे लोगों के दांत पीले होते हैं, जिसकी बहुत सारी वजहें हो सकती हैं। पानी में मौजूद कैमिकल्स,तंबाकू और कलर्ड फूड्स के ज्यादा इस्तेमाल से दांतों में पीलापन आ जाता है।

दांतों का पहला रोग उन पर पीली परत के रूप में जमता कचरा ही होता है। ये पीलापन ब्रश करने से ठीक नहीं होता। यह टार्टर कीटाणुओं के घर की तरह होता है। दांतों की सफाई में पेस्ट या मंजन का कोई खास रोल नहीं होता। केवल ब्रश से भी दांतों की अच्छी तरह सफाई की जा सकती है। दांतों की सफाई सॉफ्ट ब्रश से आराम-आराम से करें, आपके दांत साफ रहेंगे।

आज हम आपको कुछ घरेलू नुस्खे बता रहे हैं जिसके प्रयोग से आप अपने पीले दांतों को मोतियों सा चमका सकते हैं और खुल कर हंस सकते हैं। दांत पर जमी गंदगी को साफ़ करने के घरेलू नुस्खें-

इसके लिए आपको नीम्बू, मिंट ऑयल और पानी का मिश्रण तैयार करके उसे एक एक बूंद करके धीरे धीरे दांतों पर लगाएं। ऐसा करने से दांत पर जमी गंदगी जल्दी ही साफ़ हो जाएगी।

आप नारियल तेल से भी ये आसानी से खत्‍म कर सकते हैं इसके लिए आपकेा नारियल के तेल को दातों पर लगाना होगा, इससे दांतों पर जमी मैल और कालेपन को खत्म किया जा सकता है।

ग्लिसरीन, बैकिंग सोडा, एलोवेरा जेल और लेमन को पानी मिलाकर पेस्ट बनाकर लगाने से या फिर इससे दांत साफ़ करने से दांतों का पीलापन दूर हो जाता है।

संतरे में एंटी ऑक्सीडेंट पाया जाता है जो दांतों को साफ़ करने में मददगार होता है। संतरे के रस को कुछ देर मुंह में रखें और उसके बाद बाहर निकाल दो।

दातों पर जमी गंदगी को दूर करने के लिए कम से कम एक हफ्ते में एक बार तिल चबाये ऐसा करने से सारा जमा हुआ मैल खत्‍म हो जाएगा।

हल्के गर्म पानी में बेकिंग सोडा मिलाकर ब्रश करने पर दांतों पर जमी मैल जल्द खत्म होती है।

नीम की टहनी को तोड़कर उससे ब्रश करें ये सबसे बेहतर और प्राचीन नुस्‍खा है क्‍येांकि नीम बैक्टीरिया को दूर करता है।