करोड़ों डूबे शिवपुरी के निवेशकों के सहारा इंडिया चिटफंड कंपनी में , FIR दर्ज कराने कोतवाली पहुंचे निवेशक. 

शिवपुरी
जिले में सहारा इंडिया कंपनी में लोगों के 100 से 150 करोड़ रुपए फंसे होने की बात कही जा रही है। जिसमें अकेले शिवपुरी ब्लॉक में करीब 70 करोड़ रुपए हैं। 151 नाम के साथ एसपी को लिस्ट सौंपी है जिसमें सहारा इंडिया के सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय, उप प्रबंधक ओपी श्रीवास्तव, टेरेटरी हेड बीके श्रीवास्तव, एरिया मैनेजर इंदौर रतन कुमार श्रीवास्तव, जूनियर मैनेजर देवेंद्र सक्सेना, रीजनल मैनेजर ग्वालियर माधव सिंह और शाखा प्रबंधक शिवपुरी नदीम अहमद के खिलाफ पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराने की मांग रखी है।

आठ करोड़ रुपए बंटने को आए, लेकिन जहां केस दर्ज हो रहे, उन्हीं जगह पैसा बांट रहे
शिवपुरी के नीरज शर्मा का कहना है कि उनके सहारा इंडिया कंपनी में 15 लाख रुपए फंसे हैं। एजेंट के तौर पर दूसरे लोगों का भी पैसा जमा है। कंपनी ने 8 करोड़ रुपए रीजनल स्तर पर भेजे हैं जहां पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर दबाव बनाया है, वहीं पैसा बांटा जा रहा है। यदि शिवपुरी में भी केस दर्ज हो जाएं तो पैसा जल्द मिल सकता है।

डेढ़ माह में भी जानकारी एकत्रित नहीं हुई, नए कलेक्टर मामले से अनभिज्ञ
अपनी खून पसीने की कमाई के लिए लोग चक्कर काट रहे हैं। 24 जुलाई को आवेदन दिलवाने से लोगों को उम्मीद जागी थी। डेढ़ माह बीतने के बाद भी प्रशासन ने पांचों एसडीएम दफ्तरों से जानकारी एकत्रित नहीं की है।

चिटफंड कंपनियों में लोगों ने अपनी मेहनत का पैसा लगाया, लेकिन अब यह कंपनियां निवेशकों का पैसा तक नहीं लौटा रही हैं। निवेशक कंपनी के कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। बुधवार को सहारा इंडिया कंपनी में अपना पैसा निवेश करने वाले निवेशकों ने सिटी कोतवाली पहुंचकर आवेदन सौंपा और मांग की कि सहारा के प्रमुख सुब्रत राय सहित 5 अन्य लोगों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया जाए। लोगों का कहना है कि अपना पेट काटकर किसी तरह से पैसा इकट्ठा किया था, लेकिन समय अवधि पूरी होने के बाद भी कंपनी हमारे पैसे का भुगतान नहीं कर रही है। कोरोना के दौरान हमें पैसों की जरूरत है। काम धंधे चौपट हो गए, घर का गुजारा करना तक मुश्किल हो गया है। ऐसे में कंपनी पैसों का भुगतान नहीं कर रही है। हम चक्कर लगाकर परेशान हैं।

सहारा कंपनी में निवेश करने वाले निवेशकों का कहना है कि वह कुछ दिन पहले एसपी से भी मिले थे। इसके बाद एसपी ने उन्हें आश्वासन दिया था कि वह कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करेंगे, लेकिन 20 दिन गुजरने के बाद भी अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है, जिससे लोगों ने कोतवाली में आकर डेरा डाल दिया और कहा जब तक एफआईआर दर्ज नहीं करोगे, तब तक वह नहीं जाएंगे। कोतवाली टीआई बादाम सिंह ने किसी तरह से लोगों को समझाया और कहा कि वह जल्द ही इस मामले में कार्रवाई करेंगे।

इन लोगों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज कराने पहुंचे थे निवेशक

ज्ञापन के माध्यम से निवेशकों ने सहारा प्रमुख सुब्रत राय, बीके श्रीवास्तव टेरीटरी हेड, रतनकुमार श्रीवास्तव एरिया मैनेजर, देवेन्द्र सक्सेना जूनियर मैनेजर, माधवसिंह रीजनल मैनेजर, नदीम अहमद शाखा प्रबंधक पर धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज करने की मांग रखी।

कोरोना में रोजगार ठप, कैसे चलाएं घर, जमा पूंजी खा गई सहारा

कोतवाली पहुंचे निवेशकों में से रवि शर्मा, नीरज शर्मा, एसबी रस्तोगी का कहना है कि कोरोना के चलते रोजगार पूरी तरह से ठप हैं। ऐसे में लोग बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं, जो जमा पूंजी थी, वह सहारा में जमा कर दी थी। इसके बाद अब हमें पैसा नहीं मिल रहा है। कंपनी हमारी जमा पूंजी खा गई। ऐसे में हम कैसे अपना व परिवार का भरण पोषण करें, समझ नहीं आ रहा। लाखों रुपये की पूंजी सहारा खा गई।

बच्चों का और अपना पेट काटकर जमा की थी पूंजी अब लगा रहे चक्कर

कोतवाली पर खड़े बलराम माहौर, दीपक जैन, जावेद खांन, अफसर खान का कहना है कि हमने बच्चों का और अपना पेट काटकर किसी तरह से पैसा एकत्रित कर सहारा में निवेश किया जिससे हमें वक्त पर पैसा मिल सके, लेकिन हमारा जमा पूंजी ही कंपनी वापस नहीं कर रही है। हम कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। अब तक पैसा नहीं दिया अब क्या करें।

व्यापार से जोड़ा था पैसा, अब व्यापार में लगाने को ही नहीं मिल रहा

व्यापारी संतोष, योगेन्द्र अग्रवाल का कहना है कि व्यापार कर छोटी छोटी राशि जमा कर सहारा में 5 लाख रुपये जमा कराए थे, लेकिन अब अपने ही पैसों के लिए चक्कर काट रहे हैं। हमनें यह सोचकर पैसा जमा किया था कि जब भी व्यापार को आवश्यकता होगी तो पैसा निकाल लेंगे, लेकिन कोरोना में कारोबार चौपट है। ऐसे में पैसा लेने गए तो 4 माह से चक्कर काट रहे हैं, लेकिन पैसा नहीं मिल रहा है।

सहारा, पीएसीएल में लोगों का करोड़ों डूबा

सहारा और पीएसीएल कंपनी में जिले भर के लाखों लोगों का करोड़ों रुपया डूबा हुआ है। इसके अलावा अन्य चिटफंड कंपनियों में भी लोगों का पैसा डूबा हुआ है। ऐसे में निवेशकों का सब्र का बांध टूट रहा है। उनका पैसा कई साल बाद भी उन्हें अब तक नहीं मिला है। उनका कहना है कि निवेशकों से धोखाधड़ी करने वाले इन चिटफंड कंपनियों के कर्ताधर्ताओं पर केस दर्ज किया जाए।


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