उपचुनाव: शिवराज सिंह से आगे निकल रहे जनता के बीच कमलनाथ, फसल बीमा से किसान नाराज

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ ने किसान कर्जमाफी पर घेरा तो शिवराज सरकार ने दबाव में आकर कई लोक लुभावन घोषणाएं कर दीं। किसान सम्मान निधि में प्रदेश के किसानों को हर साल 10 हजार रुपये मिलेंगे। सहकारी बैंकों को कर्जमाफी की बकाया राशि भी दी जाएगी।

ग्वालियर जब से कमलनाथ ने ग्वालियर में में कांग्रेस संगठन का दबदबा कायम किया है, तब से कांग्रेस की स्थिति उपचुनाव के लिये बेहतर लगने लगी है । फिर ऐसा सुनने में आ रहा प्रियंका गांधी भी इस क्षेत्र में जनसंपर्क करने आ रहीं हैं । तबसे कांग्रेस का कार्यकर्ता उत्साहित है ।
कांग्रेस ने ठीक 2018 के मप्र विधानसभा चुनाव की तर्ज पर उपचुनाव के लिए भी चक्रव्यूह रुचना शुरू कर दी है। इस बार भी तोड़ निकालने के बजाय भाजपा सरकार इसमें फंसती नजर आ रही है। भाजपा सरकार की मुश्किल यह है कि वह मनोवैज्ञानिक दबाव में तात्कालिक निर्णय कर बैठती है। वहीं हवा का रुख मोड़ने के लिए उपलब्धियों को सामने रखने में चूक जाती है। किसान कर्जमाफी और ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) को 27 फीसद आरक्षण सहित कोरोनाकाल की मुश्किलों को लेकर कांग्रेस लगातार उसे घेर रही है।

फसल बीमा की राशि किसानों के साथ मजाक बनकर रह गई है । कहीं न के बराबर तो कहीं बिलकुल नहीं मिली है । किसानों में इससे असंतोष है ।

 दूसरी तरफ , प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ ने किसान कर्जमाफी पर घेरा तो शिवराज सरकार ने दबाव में आकर कई लोक लुभावन घोषणाएं कर दीं। किसान सम्मान निधि में प्रदेश के किसानों को हर साल 10 हजार रुपये मिलेंगे। सहकारी बैंकों को कर्जमाफी की बकाया राशि भी दी जाएगी। 2018 के चुनाव से पहले शिवराज सिंह चौहान किसानों के लिए भावांतर भुगतान योजना लाए थे, जो कांग्रेस के कर्जमाफी के वादे के आगे टिक न सकी। किसानों का बड़ा वर्ग प्राकृतिक आपदा में शिवराज सरकार के अधिक से अधिक मुआवजे को भी भूल गया था। दरअसल, कमल नाथ के चक्रव्यूह में सरकार किसानों के एक वर्ग को खुश करने में लगी हुई है, जिससे दूसरे वर्ग की नाराजगी का खतरा है। ऐसे में किसान दो खेमों में बंटेंगे तो शिवराज सरकार की मुश्किलें बढ़ेंगी ही।

मप्र मंत्रिमंडल ने शहरी क्षेत्रों की सरकारी जमीन पर 31 दिसंबर 2014 तक काबिज लोगों को मालिकाना हक देते हुए 30 साल का पट्टा देने का निर्णय भी किया गया है। चुनावी माहौल में तो ये निर्णय लोक लुभावन है, लेकिन बाद में गैर लाभार्थियों के बड़े वर्ग में असंतोष की वजह बन जाएगा। 

इधर, मप्र की कांग्रेस नेत्री विभा पटेल ने विभिन्न ओबीसी संगठनों के साथ 27 फीसद आरक्षण की मांग बुलंद कर दी है। अब मुश्किल ये है कि जवाब में शिवराज सरकार कोई घोषणा करती है तो शेष वर्ग की नाराजगी का सामना करना पड़ेगा। अनसुना किया तो कांग्रेस ओबीसी की नाराजगी को तूल देगी। 

शिवराज सरकार के खाते में लाड़ली लक्ष्मी योजना, मेधावी विद्यार्थी योजना, शहरी विकास, औद्योगिकरण, गांव तक सड़कों के जाल सहित समाज कल्याण की कई योजनाएं और उपलब्धियां हैं। अपने चौथे कार्यकाल में शिवराज नई सोच के साथ आए हैं, जिसका असर औद्योगिक क्षेत्रों में दिख रहा है, लेकिन इन उपलब्धियों का जिक्र न होना भाजपा की कमजोरी तो कांग्रेस की ताकत बना हुआ है। 

मध्‍य प्रदेश भाजपा के प्रवक्‍ता रजनीश अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस नकारात्मक और समाज को तोड़ने वाली राजनीति कर रही है। ऐसा कर 2018 में जरूर थोड़ा-सा लाभ उसे मिला था, लेकिन भाजपा पूरी तरह से कांग्रेस और उनकी छिपी हुई षड्यंत्रकारी शक्तियों को पराजित करेगी। 
फिर एक वर्ग भाजपा के अंदर भी है, जिसका भविष्य सिंधिया की नई भाजपा की टीम के कारण खतरे में है । अंदर ही अंदर वह भीतरघात कर रहा है । आखिरी फैंसला जनता करती है और जनता की नब्ज कोई नहीं जानता है । सब आगे का समय तय करेगा ।

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