नाथ की ग्वालियर एंट्री से सिंधिया समर्थक हुये मायुस.


ग्वालियर ग्वालियर में कमलनाथ के भारीभरकम स्वागत से जहां कांग्रेस के कार्यकर्तीओं में जोश है वहीं महाराज के समर्थक फिलहाल तो रेस में पीछे खिसक गये हैं वहीं सूत्रों से खबर मिली है नाथ के इस प्रदर्शन से भाजपा के पूर्व कद्दावर नेताओं के खेमे में संतोष की लहर है क्योंकि सिंधिया भाजपा ने तो उनके अस्तित्व पर ही ग्रहण लगा दिया है. मध्यप्रदेश में उपचुनाव को लेकर राजनीतिक जंग जारी है.कल पूर्व मुख्यमंत्री एवं पीसीसी चीफ कमलनाथ ग्वालियर पहुंचे. ग्वालियर वह क्षेत्र है जहां पर पूर्व से ही सिंधिया परिवार का कब्जा रहा है. पर अब ज्योतिरादित्य सिंधिया के मैदान में कमलनाथ ने एंट्री ले ली है. ग्वालियर चंबल ज्योतिरादित्य सिंधिया का गृह क्षेत्र है. और इस उपचुनाव में सबसे ज्यादा सीट ग्वालियर चंबल क्षेत्र से हैं. यहां पर 16 सीटें है जिस पर उपचुनाव होने हैं. दोनों ही पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत चुनाव प्रचार प्रसार के दौरान छूट दी है.

 इसी बीच कमलनाथ ने अपना मास्टर स्ट्रोक दिखाया है. कमलनाथ में राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट से आग्रह किया है कि वह चुनाव के दौरान मध्यप्रदेश में कांग्रेस पार्टी की तरफ से प्रचार प्रसार करें

 जिसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने सहमति जता दी है. सचिन पायलट ने कहा है कि कांग्रेस का सिपाही होने के नाते पार्टी के लिए जो भी बन पड़ेगा वह सब कुछ करेंगे.. अब सचिन पायलट के चुनावी जंग में उतरने के बाद सिंधिया समर्थक लोगों को भारी मुश्किलों का सामना उठाना पड़ सकता है. कांग्रेस ने अपने 15 सीटों पर उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है जल्द ही दूसरी सूची भी जारी की जाएगी.  वहीं इस कोरोना महामारी के बीच दोनों ही पार्टी अपने अपने राजनैतिक कार्यक्रम में व्यस्त हैं.

ग्वालियर में दौरे ना करने को लेकर पूर्व सीएम कमलनाथ ने कहा कि  मैंने कभी ग्वालियर-चम्बल के विकास और राजनीति में दखल नहीं दिया.पहले माधवराव और अब ज्योतिरादित्य सिंधिया यहां राजनीति कर रहे हैं, अगर मैं यहां आता तो उन्हें दिक्कत होती. इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री ने यह बात भी कही की मुझे दुख है कि ग्वालियर की जनता ने उन्हें नहीं पहचाना, अन्य शहरों की तुलना में ग्वालियर-चम्बल क्षेत्र का विकास नहीं हो सका, अब यहां के विकास पर मेरा फोकस है… 

जनता भी अब ऐसे फैंसले लेने लगी है परिणाम चमत्कारिक आते हैं जिसके बारे में कोई सोच नहीं सकता है.

अभी तो शिवराज का सिंहासन हिलता नजर आ रहा है.  हां हो सकता है वह चुनाव में वही हथकंडे आजमायें जो उनकी मंत्री इमरती देवी ने सार्वजनिक मंच से बोला है.
अगर सचिन पॉयलट मोर्चा संभालते हैं तो निश्चित ही महाराज खेमे की मुशकिलें बढ़ेंगी.

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