कोरोना के बीच मध्यप्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में 6 महीने बाद स्कूल खुलेंगे, लेकिन 90% पेरेंट्स अब भी बच्चों को नहीं भेजना चाहते

अनलॉक-4 में केंद्र सरकार ने करीब 6 महीने बाद 9वीं से 12वीं तक के बच्चों के स्कूल खोलने की इजाजत दी है। सरकार ने कहा कि बच्चे गाइडेंस के लिए 21 सितंबर से स्कूल जा सकते हैं। इसके बाद राज्य सरकारों को स्कूल खोलने पर फैसला लेना था, लेकिन अभी तक मध्यप्रदेश, राजस्थान और हरियाणा ही स्कूल खोलने को राजी हुए हैं। लेकिन, सर्वे में पता चला है कि 70% से 90% पैरेंट्स अब भी बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते।

स्कूलों और पैरेंट्स के मन की बात जानने के लिए 9 राज्यों से ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की है-मध्यप्रदेश : सरकारी और प्राइवेट स्कूल 21 सितंबर से आंशिक रूप से खुलेंगे। कक्षाएं नहीं लगाई जाएंगी। 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के पेरेंट्स की परमिशन से थोड़े समय के लिए स्कूल जा सकेंगे।

भोपाल में सागर पब्लिक स्कूल की चेयरमैन जयश्री कंवर ने कहा, “हम स्कूल खोलने के लिए तैयार हैं, लेकिन यह तय नहीं है कि 21 सितंबर से ही खोलेंगे। पहले पेरेंट्स की काउंसलिंग और ओरिएंटेशन करेंगे। इसके बाद उनकी सहमति लेंगे। यह पूरी तरह से पेरेंट्स पर निर्भर करेगा कि वे बच्चों को स्कूल भेजें या नहीं।”भोपाल के आईपीएस की प्रिंसिपल चित्रा अय्यर ने कहा कि हमारे यहां कोरोना से बचाव के अरेंजमेंट हो गए हैं, पूरी तैयारी है। पहले पेरेंट्स से एक सहमति पत्र भरवाया जाएगा। उसके बाद ही बच्चों को स्कूल बुलाएंगे।इंदौर के एनी बेसेंट स्कूल के संचालक मोहित यादव ने बताया कि स्कूल खोलने को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। ऑनलाइन क्लास अच्छी चल रही हैं, ऐसे में जिन बच्चों को कहीं कुछ समझ नहीं आ रहा है वे ही स्कूल आएंगे। यदि पेरेंट्स अपने बच्चों को भेजना चाहते हैं तो ये उनकी जिम्मेदारी होगी। उन्हें पहले हमें लिखित में अपनी सहमति देनी होगी।दो बच्चों की मां प्रेरणा शर्मा कहती हैं कि इतने महीने इंतजार किया है तो अब वैक्सीन लगने के बाद ही बच्चों को स्कूल भेजेंगे।

छत्तीसगढ़ : यहां पर स्कूलों में तैयारियां हो रही थीं, लेकिन इससे पहले ही शनिवार को रायपुर समेत 6 शहरों में लॉकडाउन लग गया। ऐसे में फिलहाल स्कूल खोलने की कोई गुंजाइश नहीं है। दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में है।

रायपुर के बड़े स्कूल मौजूदा हालात में बच्चों को बुलाने के विरोध में हैं। ज्यादातर स्कूलों में 28 सितंबर तक परीक्षाएं शुरू हो जाएंगी। वहीं स्कूल एसोसिएशन का कहना है कि एग्जाम ऑनलाइन ही कराएंगे, लेकिन सरकार स्कूल खोल देगी तो परीक्षा के लिए छात्रों को बुला सकते हैं।डीपीएस के प्रिसिंपल रघुनाथ मुखर्जी कहते हैं कि इस बात की कोई गारंटी नहीं कि स्कूल में बच्चों को संक्रमण नहीं होगा। केपीएस की प्रिसिंपल प्रियंका त्रिपाठी का कहना है कि स्कूल खुले तो सरकार की गाइडलाइन के हिसाब से तैयारी की जाएगी।रायपुर में रहने वाली डॉली साहू का बेटा 11वीं में पढ़ता है। डॉली कहती हैं कि बेटे की जान जोखिम में नहीं डाल सकते। दो बेटियां के पिता पीयूष खरे कहते हैं कि वैक्सीन आने के बाद देखेंगे, अभी स्कूल भेजने का सवाल ही नहीं उठता।

राजस्थान: बच्चे सिर्फ पेरेंट्स की लिखित परमिशन से गाइडेंस के लिए स्कूल जा सकेंगे। केंद्र सरकार की एसओपी के बाद राज्य सरकार ने भी साफ निर्देश जारी कर दिए हैं।

जयपुर के सुबोध पब्लिक स्कूल के प्रवक्ता संजय सारस्वत का कहना है कि ऑनलाइन परीक्षाओं के चलते स्कूल नहीं खोलने का फैसला लिया है। 5 अक्टूबर तक नई गाइडलाइन जारी होंगी। इसके बाद स्कूल खोलने पड़े तो पूरी तैयारी है। बच्चों को रोटेशन के आधार पर बुलाएंगे और एक क्लास में 12 से ज्यादा बच्चों को नहीं बैठाया जाएगा।अमेरिकन इंटरनेशनल स्कूल के डायरेक्टर अनिल शर्मा ने बताया कि 21 सितंबर से बच्चे स्कूल गाइडेंस के लिए खोले जाएंगे। इसे फिलहाल हम ट्रायल के तौर पर देख रहे हैं। रोजाना पांच सब्जेक्ट के टीचर की व्यवस्था की गई है। कर्मचारियों को सैनिटाइजेशन की ट्रेनिंग दी गई है। स्टूडेंट की थर्मल स्क्रीनिंग करने की ट्रेनिंग क्लास टीचर को दी गई है।निजी स्कूलों की सबसे बड़ी संस्था स्कूल शिक्षा परिवार के प्रदेश अध्यक्ष शर्मा के मुताबिक शहरी क्षेत्रों में करीब 30 प्रतिशत पेरेंट्स चाहते हैं कि बच्चों को स्कूल भेजना चाहिए। वहीं, ग्रामीणों इलाकों में करीब 70 प्रतिशत पेरेंट्स अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार हैं।गुजरात: राज्य में 16 मार्च से स्कूल बंद है। इस बीच राज्य सरकार ने कहा है कि दिवाली तक स्कूल बंद रखे जाएंगे ​​​और आगे हालात को देखते हुए फैसला लिया जाएगा।

गुजरात में केंद्र की गाइडलाइन के बावजूद 21 सितंबर से कक्षा 9 से 12 तक के स्कूल भी नहीं खुलेंगे। राज्य के शिक्षा मंत्री भूपेंद्र सिंह चूड़ासमा ने कहा कि फिलहाल दिवाली तक स्कूल नहीं खुलेंगे, उसके बाद रिव्यू किया जाएगा।स्कूल एसोसिएशन का कहना है कि मौजूदा स्थिति में स्कूलों पर भी खतरा है, इसलिए राज्य सरकार ने स्कूलों को खोलने का फैसला नहीं किया है। स्थिति में सुधार होने पर फैसला लिया जाएगा। तब तक ऑनलाइन पढ़ाई जारी रहेगी।

बिहार : स्कूल खोले जाने पर अभी न तो स्कूलों ने सहमति दी है और न ही पेरेंट्स तैयार हैं। कहा जा रहा है कि चुनाव और छठ पूजा के बाद सोचा जाएगा। राज्य सरकार की तरफ से भी कोई साफ निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। ऐसे में सोमवार से स्कूल नहीं खुल रहे हैं।

पटना हाई स्कूल के प्रिंसिपल रवि रंजन ने कहा कि स्कूल खोलने को लेकर कोई निर्देश नहीं मिला है। ऑनलाइन क्लास के साथ एग्जाम भी ऑनलाइन हो रही हैं।कृष्णा निकेतन स्कूल के सचिव डॉ. कुमार अरुणोदय का कहना है कि प्रशासन को पहले स्कूलों और पेरेंट्स के साथ बैठक कर स्ट्रैटजी बनानी चाहिए, क्योंकि मामला बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा है।9वीं क्लास की छात्रा सृष्टि के पिता विकास मेजरवार ने कहा कि जब हम ऑफिस में ही डरकर काम कर रहे हैं तो बच्चों को स्कूल कैसे भेज सकते हैं?झारखंड : यहां राज्य सरकार ने 30 सितंबर तक स्कूल नहीं खोलने का निर्देश दिया है। पैरेंट्स के साथ टीचर्स इस बात के पक्ष में नहीं हैं कि बच्चों को अभी स्कूल बुलाया जाए।

रांची के दिल्ली पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल राम सिंह ने बताया कि राज्य सरकार की गाइडलाइन का इंतजार कर रहे हैं। स्कूल में सैनिटाइजेशन, थर्मल स्क्रीनिंग, हैंड वॉश की व्यवस्था हो चुकी है। बहुत ज्यादा बच्चों के आने की संभावना नहीं है। फिर भी जो भी बच्चे डाउट क्लीयरिंग के लिए आएंगे उनके लिए सेपरेट क्लास रखी जाएगी।एक बच्चे की मां ने कहा कि अभी बच्चे को स्कूल नहीं भेजेंगी, क्योंकि ऑनलाइन स्टडी का सिस्टम इम्प्रूव हो गया है। जो समस्याएं थीं, वे दूर कर ली गई हैं।

हरियाणा: यहां 21 सिंतबर से स्कूल आंशिक तौर पर केंद्र की गाइडलाइन के मुताबिक खोले जाएंगे।

पानीपत के एसडी विद्या मंदिर की प्रिंसिपल सविता चौधरी ने बताया कि फिलहाल 22 सितंबर से 30 सितंबर तक उनके स्कूल में कंपार्टमेंट के एग्जाम हैं। हर दिन स्कूल सैनिटाइज हो रहा है। थर्मल स्कैनर से जांच हो रही है। अभी हाफ ईयरली एग्जाम भी बाकी हैं। इसके बाद हालात को देखते हुए स्कूल खोले जाएंगे।यहां के सरकारी और प्राइवेट विद्यालयों के टीचर्स के लिए आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड करना और कोविड टेस्ट करवाना भी जरूरी है।चंडीगढ़ : प्रशासन की तरफ से कराए गए सर्वे में सामने आया है कि 75% से ज्यादा पेरेंट्स बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार नहीं हैं। यहां स्कूल खोलने को लेकर कोई साफ निर्देश प्रशासन की तरफ से नहीं दिया गया है। ऐसे में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

स्ट्रॉबेरी फील्ड्स हाई स्कूल सेक्टर-26 के डायरेक्टर अतुल खन्ना का कहना है कि सभी तैयारियां कर ली हैं। 75% पेरेंट्स बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते, इसलिए बाकी 25% के लिए प्लान तैयार कर रहे हैं। टीचर्स को भी सिर्फ तभी बुलाएंगे अगर उनकी जरूरत है। हाफ ईयरली एग्जाम नहीं ले रहे।विवेक हाई स्कूल सेक्टर-38 की प्रिंसिपल रेनु पुरी कहती हैं कि स्कूल खोलने को लेकर एक सर्वे किया था, जिसमें सामने आया कि 90% पैरेंट्स बच्चों नहीं भेजना चाहते। स्कूल में रोज सैनिटाइजेशन किया जा रहा है। टीचर्स और स्टाफ तो ऑनलाइन सिस्टम से कंफर्टेबल हैं, हम अभी उन्हें नहीं बुलाएंगे।

उत्तर प्रदेश : केंद्र सरकार की गाइडलाइन पर योगी सरकार ने अभी तक कोई भी फैसला नहीं लिया। 15 सितंबर को बैठक होनी थी, वह भी नहीं हुई। राज्य के बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा है कि अभी कोरोना के केस बढ़ रहे हैं, इसलिए स्कूल 21 सिंतबर से नहीं खोले जाएंगे।

लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल के प्रबंधक जगदीश गांधी का कहना है कि अभी तक तो स्कूल में सभी क्लासेस ऑनलाइन चल रही हैं। हमारे सभी स्कूल की ब्रांच में कोविड-19 को लेकर तैयारियां पूरी की गई हैं। ऑनलाइन टेस्ट और पढ़ाई जारी है।पेरेंट्स से अभी कोई बातचीत नहीं हुई है। ऑनलाइन ही क्लास और टेस्ट लिए जा रहे हैं। हाफ ईयरली एग्जाम भी ऑनलाइन ही कराए जाएंगे।सिटी मॉन्टेसरी स्कूल के प्रवक्ता ऋषि कपूर बताते हैं कि फिलहाल स्कूल खोलने को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। सभी टीचर्स को ऑनलाइन पढ़ाई कराने के संबंध में गाइडलाइन और मोबाइल ऐप्स की जानकारियां दी गई हैं। टीचर और बाकी स्टाफ वर्क फ्रॉम होम हैं।महाराष्ट्र: राज्य में 30 सितंबर तक सभी स्कूल बंद रहेंगे। अनलॉक-5 यानी 1 अक्टूबर के बाद राज्य सरकार तय करेगी। पैरेंट्स के रिएक्शन जानने के लिए सर्वे भी कराए जा रहे हैं।

मुंबई, पुणे समेत देश के 14 शहरों में चलने वाले ‘विबग्योर ग्रुप ऑफ स्कूल्स’ के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर पेशवा आचार्य ने बताया कि स्कूलों को फिर से खोलने का रोडमैप और एसओपी तैयारी कर ली गई है। हालांकि, ज्यादातर पेरेंट्स चाहते हैं कि जब तक कोरोना की दवा बाजार में नहीं आ जाती तब तक पढ़ाई ऑनलाइन ही होनी चाहिए।आचार्य ने बताया कि ज्यादातर पेरेंट्स स्कूल की तरफ से शुरू किए गए ‘वर्चुअल लर्निंग सिस्टम’ से संतुष्ट हैं। हम कक्षा 1 से 8वीं तक का इन्फॉर्मल रिव्यू कर रहे हैं। 9 से 12वीं तक ऑनलाइन एग्जाम करवा रहे हैं। ( सौजन्य से एजेंसी)

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