किसान विधेयक क्या है आखिर क्यों हो रहा है विरोध

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसानों को इन विधेयकों के माध्यम से अपनी मर्जी से फसल बेचने की आजादी मिलेगी. न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बरकरार रखा जाएगा.

नई दिल्ली .लोकसभा में पारित कृषि से जुड़े तीन अहम विधेयकों का पंजाब से लेकर महाराष्ट्र तक विरोध हो रहा है. इन विधेयकों के विरोध में शिरोमणि अकाली दल से मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने मंत्री पद से इस्तीफा तक दे दिया. बीजेपी इन विधेयकों को किसानों के लिए क्रांतिकारी बता रही है, वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इन विधेयकों को किसानों के लिए नुकसानदह बता रहे हैं. आइए, हम आपको बताते हैं विधेयक में क्या खास है और क्यों इनका विरोध हो रहा है.

लोकसभा में पारित हुए तीन कृषि विधेयक

कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2020
मूल्य आश्वासन पर किसान (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सेवा विधेयक 2020
आवश्यक वस्तु संशोधन बिल

पहले विधेयक के तहत- किसान मनचाही जगह पर फसल बेच सकते हैं. बिना किसी रुकावट दूसरे राज्यों में भी कारोबार कर सकते हैं. APMC के दायरे से बाहर भी खरीद-बिक्री संभव है. ऑनलाइन बिक्री इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग से होगी, जिससे मार्केटिंग लागत बचेगी और बेहतर दाम मिलेंगे. फसल की बिक्री पर कोई टैक्स नहीं लगेगा.

दूसरे विधेयक के तहत- राष्ट्रीय स्तर पर कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग की व्यवस्था बनेगी. रिस्क किसानों का नहीं, एग्रीमेंट करने वालों पर होगा. किसान कंपनियों को अपनी कीमत पर फसल बेचेंगे. किसानों की आय बढ़ेगी, बिचौलिया राज खत्म होगा. तय समय सीमा में विवाद निपटारे की व्यवस्था होगी.

तीसरे विधेयक के तहत- अनाज, दलहन, खाद्य तेल, आलू-प्याज आवश्यक वस्तु नहीं होंगे. उत्पादन, स्टोरेज, डिस्ट्रीब्यूशन पर सरकारी नियंत्रण खत्म होगा. फूड सप्लाई चेन के आधुनिकीकरण में मदद मिलेगी. उपभोक्ताओं के लिए भी कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी. सब्जियों की कीमतें दोगुनी होने पर स्टॉक लिमिट लागू होगी.

आखिर क्यों हो रहा है इन बिल का विरोध
दरअसल, किसान और व्यापारियों को इन विधेयकों से एपीएमसी मंडियां खत्म होने की आशंका है. कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2020 में कहा गया है कि किसान अब एपीएमसी मंडियों के बाहर किसी को भी अपनी उपज बेच सकता है, जिस पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, जबकि एपीएमसी मंडियों में कृषि उत्पादों की खरीद पर विभिन्न राज्यों में अलग-अलग मंडी शुल्क व अन्य उपकर हैं. पंजाब में यह शुल्क करीब 4.5 फीसदी है.

लिहाजा, आढ़तियों और मंडी के कारोबारियों को डर है कि जब मंडी के बाहर बिना शुल्क का कारोबार होगा तो कोई मंडी आना नहीं चाहेगा. वहीं, पंजाब और हरियाणा में एमएसपी पर गेहूं और धान की सरकारी खरीद की जाती है. किसानों को डर है नए कानून के बाद एमएसपी पर खरीद नहीं होगी क्योंकि विधेयक में इस संबंध में कोई व्याख्या नहीं है कि मंडी के बाहर जो खरीद होगी वह एमएसपी से नीचे के भाव पर नहीं होगी.

पंजाब में सत्ताधारी कांग्रेस पहले से ही विधेयक का विरोध कर रही है. किसानों, आढ़तियों और कारोबारियों की आशंका को लेकर कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा ने कहते हैं कि जब मंडी के बाहर बिना शुल्क का कारोबार होगा तो फिर मंडी में कोई शुल्क देना क्यों चाहेगा.

सरकार का क्या कहना है
नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने लोकसभा में कृषि क्षेत्र से संबंधित दो विधेयकों के पारित होने का स्वागत करते हुए कहा कि ये किसानों को सशक्त बनाएंगे और कृषि के भविष्य पर इनका व्यापक प्रभाव पड़ेगा.

उन्होंने कहा कि ये कानून न केवल किसानों को सशक्त बनाएंगे बल्कि ये किसानों और व्यापारियों के लिए एक समान पारिस्थिति का निर्माण करेंगे, जिससे अनुकूल प्रतिस्पर्धा की भावना को बढ़ावा मिलेगा और व्यापार पारदर्शिता में सुधार होगा. किसान पहली बार अपने खेतों से सीधे बिक्री कर सकते हैं.

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