उदयपुर पांच सितारा होटल लक्ष्मीविलास के विनिवेश के मामले में सीबीआई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए विनिवेश को रद्द किया है. 

नई दिल्ली

सीबीआई कोर्ट ने होटल पर कब्जा लेने का दिया था आदेशप्रशासन से 3 दिन में रिपोर्ट फाइल करने का निर्देश दियाहोटल के कर्मचारी ने विनिवेश के खिलाफ 18 साल लड़ा केस

जोधपुर सीबीआई कोर्ट के आदेश पर उदयपुर जिला प्रशासन ने लक्ष्मी विलास होटल को ललित होटल ग्रुप से अपने कब्जे में ले लिया है और वहां पर राज्य सरकार का बोर्ड लगा दिया है. सीबीआई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि होटल पर कब्जा लेकर 3 दिन में कोर्ट के अंदर रिपोर्ट फाइल करें. कोर्ट के आदेश के बाद आज सुबह राज्य सरकार के अधिकारी पहुंचे और होटल को अपने कब्जे में लिया.

पांच सितारा होटल लक्ष्मीविलास के विनिवेश के मामले में सीबीआई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए विनिवेश को रद्द किया है. 18 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आए इस ऐतिहासिक फैसले के बाद लोगों में खुशी का माहौल है. 

अंबालाल की जुनून से होटल वापस मिला.  इस विनिवेश को रद्द कराने के पीछे अंबालाल नायक का जुनून भी काफी काम आया है. दरअसल, उदयपुर के कालका माता इलाके में रहने वाले अंबालाल नायक होटल के विनिवेश के समय लक्ष्मी विलास के कर्मचारी थे.

विनिवेश के फैसले को गलत बताते हुए उन्होंने इसके खिलाफ कोर्ट में चैलेंज कर दिया था . नायक ने इस विनिवेश को बाद में घोटाला और भ्रष्टाचार बताते हुए इस मामले को कोर्ट में घसीट दिया. नायक ने कहा कि सरकारी संपति लक्ष्मी विलास की वैल्यू को कम आंक कर इसे ललित ग्रुप को बेच दिया गया.

हालांकि इन सब के बीच नायक ने हार नहीं मानी और अपने जुनून के मार्फत इस विनिवेश के विरोध में कोर्ट में लड़ाई लड़ते रहे. अंबालाल नायक द्वारा 18 साल से किए जा रहे इस संघर्ष को अब जाकर न्याय मिला है और सरकार ने लक्ष्मीविलास को अपने कब्जे में लिया है.

जिला प्रशासन द्वारा होटल के बाहर सरकारी संपति का बोर्ड लगा दिया गया है. साथ ही प्रॉपर्टी के वेरिफिकेशन की कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा है. नायक को अपने जुनून के मार्फत मिली इस जीत के बाद उनके परिवार में भी खुशी का माहौल है.

पर्दे के पीछे की कहानी

2002 में होटल ललित ग्रुप को दे दिया गया लेकिन यूपीए सरकार आने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के इस फैसले पर कभी अंगुली नहीं उठाई गई. 2014 में केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद इस मसले पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने सरकार पर लगातार हमले शुरू कर दिए.

इन हमलों के बीच सीबीआई को नायक की शिकायत मिली और सीबीआई ने जांच शुरू कर दी. बाद में सीबीआई ने दो बार इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट लगाने चाहे, लेकिन सीबीआई कोर्ट जोधपुर ने इसकी इजाजत नहीं दी और सीबीआई कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि आप जांच पूरी कर इस मामले में जांच रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखें.

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