कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री एवम पूर्व जिलाध्यक्ष कद्दावर नेता अशोक शर्मा ने ली भाजपा की सदस्यता।

ग्वालियर।

मध्य प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री व पूर्व ग्वालियर कांग्रेस जिला अध्यक्ष अशोक शर्मा, पूर्व पार्षद माझी समाज के प्रदेश अध्यक्ष केशव माझी प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश सचिव बसंत शर्मा ने कांग्रेस के सभी पदों से प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर आज मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी डी शर्मा राजसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय प्रदेश संगठन महामंत्री सुभाष भगत व अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य आर्य के समक्ष आज भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की

 मध्यप्रदेश उपचुनाव जैसे-जैसे नजदीक आर रहा है, वैसे ही बीजेपी और कांग्रेस में नेताओं की नाराजगी सामने आती जा रही है. यही वजह है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और स्वर्गीय माधवराव सिंधिया के बेहद करीबी रहे अशोक शर्मा कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए हैं अशोक शर्मा कांग्रेस पार्टी से वर्तमान में प्रदेश महासचिव के पद पर थे, लेकिन उन्होंने अब इस पद को छोड़ दिया है और पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया है.

कांग्रेस के प्रदेश सचिव बसंत शर्मा (खेमरिया) ने भी दिया स्तीफा।

अशोक शर्मा की बेहद नजदीकी एवं कांग्रेस के प्रदेश सचिव बसंत शर्मा ने कांग्रेस की नीतियों के विरोध में अपने पद से व कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है

माझी समाज के प्रदेश अध्यक्ष केशव मांझी ने भी दिया कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा

कांग्रेस की नीतियों के विरोध में अपने पद से व कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है
कांग्रेस में अपनी उपेक्षा व अशोक शर्मा को ग्वालियर विधानसभा में प्रत्याशी ना बनाने से दुखी होकर कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है

बता दें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक शर्मा लंबे समय से ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र से टिकट की मांग कर रहे थे. लेकिन कांग्रेस पार्टी ने उपचुनाव के लिए ग्वालियर विधानसभा से सुनील शर्मा को टिकट दिया है, इसलिए लगातार पार्टी से नाराज चल रहे हैं. गौरतलब है कि अशोक शर्मा कांग्रेस पार्टी से वर्तमान में प्रदेश महासचिव के पद पर थे लेकिन उन्होंने अब इस पद को छोड़ दिया है और अपना इस्तीफा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कमनाथ को भेज दिया है.

ब्राह्मण समाज में एक बड़ा नाम है अशोक शर्मा

ग्वालियर विधानसभा में वोट बैंक छत्रिय बहुल है दूसरे नंबर पर ब्राह्मण बोट बैंक है यहां से अशोक शर्मा ब्राह्मण समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं बताया जाता है कि कांग्रेस के नेता सुनील शर्मा भी ब्राह्मण समाज से हैं लेकिन वे राजस्थानी पृष्ठभूमि से हैं जिसके चलते उनकी रिश्तेदारी लोकल में ज्यादा नहीं है जबकि अशोक शर्मा स्थानीय पृष्ठभूमि से आते है ब्राह्मण समाज के हर वर्ग में अपनी पहुंच रखते हैं

HIGH COURT ने ग्वालियर सहित 5 जिलों के कलेक्टर-एसपी तलब किए –

ग्वालियर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने ग्वालियर सहित भिंड, मुरैना, शिवपुरी एवं दतिया जिला के कलेक्टर-एसपी को तलब किया है। 30 सितंबर को सभी जिलों के कलेक्टर-एसपी हाईकोर्ट की युगल पीठ के सामने अपना जवाब पेश करेंगे। मामला उप चुनाव प्रचार के दौरान कोविड-19 प्रोटोकॉल के खुले उल्लंघन का है।

24 से 28 सितंबर तक राजनीतिक कार्यक्रमों में भारी भीड़ रही

अधिवक्ता आशीष प्रताप सिंह ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि 24 सितंबर से 28 सितंबर के बीच जो राजनीतिक कार्यक्रम हुए हैं, उनकी स्थिति आपने देख ही ली है। कार्यक्रमों में भारी भीड़ हो रही है, न मास्क लगा रहे हैं न सुरक्षित शारीरिक दूरी का पालन किया जा रहा है।

न्याय मित्र की रिपोर्ट में कहीं भी 100 से ज्यादा लोग नहीं बताए

सभा में बच्चों को भी बुलाया जा रहा है। राजनीतिक कार्यक्रम में एक एसडीएम भी संक्रमित हुए थे। एसडीएम की संक्रमण के कारण मौत भी हो चुकी है, फिर भी राजनेता सबक नहीं ले रहे हैं। गाइड लाइन का उल्लंघन कर रहे हैं। आम आदमी के जीवन को खतरे में डाल दिया है। अतिरिक्त महाधिवक्ता अंकुर मोदी ने तर्क दिया कि न्यायमित्र की रिपोर्ट में ऐसा कोई तथ्य नहीं है, जिसमें कहीं भी 100 से ज्यादा लोग बताए हैं।

न्याय मित्र ने अखबार की कटिंग के आधार पर रिपोर्ट तैयार की, स्वयं उपस्थित होकर साक्ष्य एकत्रित नहीं किए

अखबार की कटिंग के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है। इसलिए गाइड लाइन का उल्लंघन नहीं माना जा सकता है। न्यायमित्र संजय द्विवेदी, राजू शर्मा, विजय दत्त शर्मा ने भी अपनी रिपोर्ट पेश की। 24 से 28 सितंबर के बीच हुए राजनीतिक कार्यक्रमों की फोटो कोर्ट के समक्ष पेश की गई। न्यायमित्रों की ओर से बताया गया कि गाइड लाइन का उल्लंघन हो रहा है।

न्यायमित्रों ने इन स्थानों के फोटो पेश किए

जीवाजी विश्वविद्यालय में मल्टी आर्ट कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन के समय केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की गाड़ी के चारों ओर भारी भीड़ खड़ी हुई थी। इस दौरान

गाइड लाइन का उल्लंघन हो रहा था।

पिछोर में आयोजित मुख्यमंत्री की सभा के फोटो भी पेश किए गए। सीएम की सभा में गाइड लाइन का उल्लंघन बताया गया है। मंच व नीचे बैठे लोगों के फोटो कोर्ट के समक्ष पेश किए गए।

याचिकाकर्ता ने भूमि पूजन व सभाओं के फोटो पेश किए

याचिकाकर्ता भी शहर में आयोजित सभा व भूमि पूजन कार्यक्रमों के फोटो खींचने पहुंच रहे हैं। उन्होंने ग्वालियर पूर्व व ग्वालियर विधानसभा में हुए भूमि पूजन कार्यक्रम, जनसंपर्क व सभाओं के फोटो पेश किए हैं। जिसमें भारी भीड़ नजर आ रही है।

बाबरी विध्वंस केस जज सुरेंद्र यादव आज शाम 5 बजे रिटायर हो जायेंगे.

बाबरी विध्वंस 1992 में हुआ था. इससे दो साल पहले 8 जून 1990 को ही सुरेंद्र कुमार यादव ने बतौर मुनसिफ अपनी न्यायिक सेवा की शुरुआत की थी. सुरेंद्र कुमार यादव की पहली नियुक्ति अयोध्या में हुई थी और 1993 तक वो यहां रहे थे. यानी अयोध्या में जब बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया गया था, उस वक्त सुरेंद्र कुमार यादव की पोस्टिंग वहीं थी और आज वो मौका आया है जब उन्होंने इस बड़े केस पर बतौर सीबीआई विशेष कोर्ट जज फैसला सुनाया है.

लखनऊ

जज सुरेंद्र यादव का आज रिटायरमेंट का भी दिनफैसले सुनाने के लिए मिला था एक साल का विस्तारअयोध्या में ही मिली थी सुरेंद्र यादव को पहली ज्वाइनिंग

लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. ये फैसला बाबरी मस्जिद विध्वंस केस से जुड़ा है जिसे 6 दिसंबर 1992 को गिराया गया था. सीबीआई कोर्ट के जज सुरेंद्र कुमार यादव ने 28 साल पुराने इस केस में फैसला सुनाया है और सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया है.

इस केस के 32 आरोपियों पर फैसला लिखने के साथ ही सुरेंद्र कुमार यादव अपने कार्यकाल से भी मुक्त हो गए हैं. आज यानी 30 सितंबर ही सुरेंद्र कुमार यादव के रिटायरमेंट का दिन है. उनके पास शाम 5 बजे तक का ही वक्त है.

हालांकि, सुरेंद्र यादव का कार्यकाल एक साल पहले ही पूरा हो गया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी विध्वंस केस की सुनवाई पूरी करने और इस पर फैसला सुनाने के मकसद से उन्हें एक साल का विस्तार दे दिया था. उनके रिटायरमेंट की तारीख 30 सितंबर 2019 थी.

एक और खास बात ये है कि सुरेंद्र कुमार यादव का अयोध्या कनेक्शन काफी पुराना रहा है. उनकी पहली तैनाती अयोध्या में ही हुई थी. साथ ही उनका जन्म भी जौनपुर जिले में हुआ था.

बाबरी विध्वंस 1992 में हुआ था. इससे दो साल पहले 8 जून 1990 को ही सुरेंद्र कुमार यादव ने बतौर मुनसिफ अपनी न्यायिक सेवा की शुरुआत की थी. सुरेंद्र कुमार यादव की पहली नियुक्ति अयोध्या में हुई थी और 1993 तक वो यहां रहे थे.

यानी अयोध्या में जब कारसेवकों और बीजेपी के बड़े नेताओं की मौजूदगी में बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया गया था, उस वक्त सुरेंद्र कुमार यादव की पोस्टिंग भी अयोध्या में ही थी और आज वो मौका आया है जब उन्होंने इस बड़े केस पर बतौर सीबीआई विशेष कोर्ट जज फैसला सुनाया है.

बाबरी मस्जिद विध्वंश केस :आडवाणी-जोशी और उमा समेत सभी 32 आरोपी बरी

इस मामले में कुल 49 आरोपी थे, जिनमें 17 आरोपियों की मौत हो चुकी है. ऐसे में कोर्ट ने मामले में बाक़ी बचे सभी 32 मुख्य आरोपियों पर फ़ैसला सुनाया.

लखनऊ

बाबरी विध्वंस मामले में लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, सतीश प्रधान, महंत गोपालदास और उमा भारती समेत सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया है.

जज एसके यादव ने कहा है कि विवादित ढांचा गिराने की घटना पूर्व नियोजित नहीं थी. ये घटना अचानक हुई थी.

कोर्टरूम में लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, सतीश प्रधान, महंत गोपालदास और उमा भारती मौजूद नहीं है. ये सभी लोग अपने अपने कारणों से गैरहाजिर थे.

कोर्टरूम में सिर्फ आरोपी और वकील ही अंदर थे. कोर्टरूम में मौजूद 26 आरोपियों की हाजिरी लग चुकी थी . लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत 6 आरोपी कोर्ट से गैरहाजिर रहे.

उपचुनाव की तारीख तय, मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह क्या बाजी जीत पायेंगे.

मध्य प्रदेश की राजनीति भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के कुछ बड़े चेहरों के इर्द गिर्द ही घूमती है और इस उपचुनाव के नतीजों पर ही उनका भविष्य काफी हद तक निर्भर करेगा.

भोपाल

मध्य प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है. 3 नवंबर को मध्य प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होगा और 10 नवंबर को काउंटिंग होगी. इसके साथ ही अब मध्य प्रदेश के बड़े नेताओं की साख का काउंटडाउन भी शुरू हो गया है क्योंकि ये मामूली उपचुनाव न होकर एक तरह से ‘मिनी विधानसभा चुनाव’ ही है जो ये बताएगा कि बीजेपी सरकार रहेगी या मार्च में सत्ता गंवाने वाली कांग्रेस वापसी करेगी.

दरअसल, मध्य प्रदेश की राजनीति भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के कुछ बड़े चेहरों के इर्द गिर्द ही घूमती है और इस उपचुनाव के नतीजों पर ही उनका भविष्य काफी हद तक निर्भर करेगा.

शिवराज सिंह चौहान इसमें सबसे ऊपर नाम आता है मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का. शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश में से ज्यादा समय तक मुख्यमंत्री पद पर रहने वाले नेता तो हैं ही, साथ ही जनता के बीच काफी लोकप्रिय भी हैं. मुख्यमंत्री से ज्यादा वो ‘मामा’ नाम से जाने जाते हैं. उपचुनाव में भी प्रचार के दौरान बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा शिवराज सिंह चौहान ही रहेंगे.

आचार संहिता लगने से पहले करोड़ों रुपये की योजनाओं की शुरुआत कर शिवराज ने बड़ा दांव तो चला है लेकिन ये कितना सफल हुआ ये उपचुनाव के नतीजे तय करेंगे. अगर उपचुनाव में बीजेपी ज्यादा सीटें जीत जाती है तो शिवराज की मुख्यमंत्री की कुर्सी तो सुरक्षित रहेगी ही, साथ ही राजनीतिक कद भी बढ़ जाएगा. वहीं बीजेपी अगर उपचुनाव हारी तो मुख्यमंत्री पद के साथ-साथ शिवराज का राजनीतिक कद घटना तय है क्योंकि 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद लगातार दूसरे चुनाव में वो असफल माने जाएंगे.

कमलनाथ 2018 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और महज 15 महीनों बाद पूर्व मुख्यमंत्री होने वाले कमलनाथ का राजनीतिक कद भी इस उपचुनाव से तय हो जाएगा. कमलनाथ राजनीति के पुराने और माहिर नेता माने जाते हैं. पार्टी उनके चेहरे पर ही ये पूरा उपचुनाव लड़ने जा रही है. पूर्व मुख्यमंत्री होने के साथ ही कमलनाथ मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं. ऐसे में उन पर दोहरी जिम्मेदारी है. अगर कांग्रेस ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब होती है और सरकार बनाती है तो कमलनाथ दोबारा मुख्यमंत्री बनेंगे और उनका कद भी बढ़ जाएगा. लेकिन कांग्रेस यहां सरकार बनाने में नाकाम रहती है या बीजेपी से कम सीटें लाती है तो अगले विधानसभा चुनाव में कमलनाथ के लिए ज्यादा गुंजाइश नहीं बचेगी. 

ज्योतिरादित्य सिंधिया हाल ही कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया का राजनीतिक भविष्य तो पूरी तरह से इस उपचुनाव के नतीजों पर टिका है. सिंधिया की वजह से ही कमलनाथ सरकार गिरी थी और मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनी थी. बीजेपी में आने के बाद सिंधिया अब राज्यसभा सांसद हैं. कांग्रेस पूरे चुनाव प्रचार में उन्हें गद्दार बुला रही है. उपचुनाव में सबसे ज्यादा 16 सीट ग्वालियर-चंबल संभाग में हैं जहां सिंधिया का दबदबा माना जाता है. अगर यहां बीजेपी ज्यादा सीट जीती तो माना जाएगा कि जनता सिंधिया के साथ है. इससे केंद्र और राज्य में सिंधिया का कद बढ़ेगा. लेकिन बीजेपी अगर यहां कम सीट जीतती है तो माना जाएगा कि कांग्रेस छोड़ने के उनके फैसले से उनकी इलाके की जनता ही सहमत नहीं है और कम से कम मध्य प्रदेश में फिर सिंधिया का जादू कम होना माना जा रहा.

दिग्विजय सिंह 10 सालों तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के लिए अगर इस उपचुनाव में देखा जाए तो ज्यादा कुछ है नहीं. राज्यसभा के लिए वो पहले ही चुने जा चुके हैं लेकिन उपचुनाव में कांग्रेस की जीत या हार दिग्विजय के लिए उनके बेटे जयवर्धन सिंह को देखते हुए ज्यादा मायने रखती है. अगर कांग्रेस जीती तो दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह दोबारा मंत्री बनेंगे और अगर बीजेपी जीती तो बेटे के मंत्री बनाने का इंतजार थोड़ा लंबा हो जाएगा. 

दिग्विजय सिंह

वीडी शर्मा बतौर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष, वीडी शर्मा के लिए ये पहला चुनाव होने जा रहा है जिसमे उन्हें साबित करना है कि संगठन चलाने और उन्हें साथ रखने में वो कितना कामयाब होते हैं. उनके प्रदेश अध्यक्ष रहते कमलनाथ सरकार का तख्तापलट तो हुआ लेकिन सरकार गिरने और चुनाव में संगठन के काम करने में अंतर होता है. चुनाव में नेताओं, कार्यकर्ताओं, प्रत्याशियों, नाराज नेताओं और भीतरघात से निपटने में संगठन की भूमिका अहम होती है. ऐसे में बीजेपी सांसद और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के लिए भी ये उपचुनाव पहली बड़ी चुनौती साबित होने जा रहा है. 

वीडी शर्मा

एसपी-बीएसपी-निर्दलीय 2018 में कमलनाथ सरकार बनने में एक बड़ा योगदान एसपी, बीएसपी और निर्दलीय विधायकों का रहा था. कुल 7 ऐसे विधायकों ने कांग्रेस को समर्थन दिया था लेकिन जैसे ही सत्ता पलटी ये सभी बीजेपी के साथ खड़े दिखे. जाहिर है कांग्रेस हो या बीजेपी, दोनों ही राजनीतिक दलों के लिए ये सात विधायक बेहद अहम हैं क्योंकि यदि सीटें बहुमत नहीं दे पाएगी तो देखना अहम होगा कि ये सात विधायक किसका साथ देते हैं. इतना जरूर तय है कि जिस भी राजनीतिक दलों को इन सात विधायकों का साथ मिलेगा, उसकी स्थिति विधानसभा में मजबूत ही रहेगी.

दलबदलू नेता इन सबके अलावा दलबदलू नेताओं का भविष्य भी इस उपचुनाव से ही तय होगा. कांग्रेस छोड़ बीजेपी में जाने वाले नेता हों या बीजेपी से कांग्रेस में शामिल होने वाले नेता हों, अगर ये चुनाव हारते हैं तो इनका राजनीतिक भविष्य खत्म हो जाएगा लेकिन ये चुनाव जीते तो इनका कद पार्टी में बढ़ना तय है.

क्यों हो रहे हैं उपचुनाव मार्च में कमलनाथ सरकार की रवानगी के साथ ही कांग्रेस छोड़ बीजेपी में गए विधायकों की सदस्यता खत्म हो गई थी क्योंकि उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से पहले इस्तीफा दिया था. ऐसा करने वाले विधायकों की संख्या 22 है. इसके बाद 3 और विधायकों ने विधायकी से इस्तीफा दिया और कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया. इसके अलावा तीन विधायकों के निधन से 3 सीटें खाली हुईं, जिनपर भी उपचुनाव होने जा रहा है. इस तरह मध्य प्रदेश में कुल 28 सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे हैं. 

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में आज आएगा फैसला, जेल जाने को तैयार हैं `आरोपी`

बाबरी मस्जिद के विवादित ढांचे को गिराने के मामले में अदालत आज फैसला सुनाएगी. सवाल ये है कि क्या लालकृष्ण आडवाणी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार, मुरली मनोहर, साक्षी महाराज को जेल जाना पड़ेगा?

लखनऊ: अयोध्या में भले ही राम भक्तों की जीत हुई, लेकिन अभी एक और अहम फैसला आना बाकी है. बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में 28 साल बाद 30 सितंबर, बुधवार को लखनऊ CBI की विशेष अदालत अपना फैसला सुनाएगी. जिसपर पूरे देश की नजर रहेगी.

49 में से 32 आरोपी ज़िंदा हैं

लखनऊ सीबीआई की विशेष कोर्ट आज अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विवादित ढांचे को गिराने का मामले में फैसला सुनाएगा. लेकिन दिलचस्प बात तो ये है कि विवादित ढांचा तोड़ने के इस मामले में कुल 49 लोगों को आरोपी बनाया गया था और FIR दर्ज हुई थी, जिनमें से 32 आरोपी ही अभी ज़िंदा हैं.

केस में कई बड़े नाम शामिल

इस केस में आरोपियों की सूची में कई बड़े नाम शामिल हैं. इसमें सबसे बड़ा नाम पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी का है, इसके अलावा उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी इस केस में आरोपी है. पूर्व केंद्रीय मुरली मनोहर जोशी, मंत्री उमा भारती, सांसद साक्षी महाराज और विनय कटियार जैसे 32 आरोपी हैं.

2 से 5 साल तक की सजा हो सकती है

आपको बता दें, इस मामले में अदालत ये तय करेगी कि अयोध्या में स्थित बाबरी मस्जिद विवादित ढांचे को क्या साजिशन गिराया गया था या फिर आक्रोशित कारसेवकों ने इसे गुस्से में तोड़ दिया था. यहां आपका ये जानना जरूरी है कि यदि भाजपा नेताओं पर लगे ये आरोप साबित हो जाते हैं, तो उन्हें 2 साल से लेकर 5 साल की सजा हो सकती है.

प्रत्यक्ष रूप से कोर्ट में पेश होने के आदेश

जानकारी के अनुसार इस मामले में बुधवार यानी 30 सितंबर की सुबह 10:30 से दोपहर 12 बजे के बीच फैसला आएगा. सभी आरोपियों को कोर्ट में प्रत्यक्ष रूप से पेश होने का आदेश जारी किया गया है.

किसके उपर कौन सी धारा?

आपको बता दें, इन आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश रचने का आरोप), 147, 149, 153ए, 153बी और 505 (1) के तहत मुकदमा चला.

लालकृष्ण आडवाणी

मुरली मनोहर जोशी

विनय कटियार

साध्वी ऋतंभरा

उमा भारती

विष्णु हरि डालमिया 

अशोक सिंघल

इसके अलावा इन-इन लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 149, 153ए, 153बी, 295, 295ए व 505 (1) बी के साथ ही धारा 120 बी के तहत आरोप हैं.

महंत नृत्य गोपाल दास

महंत राम विलास वेदांती

बैकुंठ लाल शर्मा उर्फ प्रेमजी

चंपत राय बंसल

धर्मदास

डॉ. सतीश प्रधान

कल्याण सिंह

पहली FIR में क्या था?

जानकारी के मुताबिक इस मामले में कारसेवकों के खिलाफ पहली FIR दर्ज की गई थी, जिसका नंबर 197/1992 था. बता दें, इस FIR में कारसेवकों पर ये आरोप लगाया गया कि ये डकैती, लूटपाट, मारपीट करना, चोट पहुंचाना, सार्वजनिक इबादत गाह को क्षतिग्रस्त करने और धार्मिक वैमनस्यता भड़काने के मामले में संलिप्त हैं.

दूसरी FIR में क्या था?

वहीं यदि दूसरी FIR की बात करें, जिसकी संख्या 198/1992 है. उसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP), विश्व हिंदू परिषद (VHP), बजरंग दल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े कुल 8 नेताओं और पदाधिकारियों को आरोपी बनाया गया था. इन सभी नेताओं पर भड़काऊ भाषण के जरिए लोगों को उकसाने का आरोप लगाया गया.

बता दें, इस FIR में VHP के तत्कालीन महासचिव अशोक सिंघल के अलावा विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, उमा भारती, विष्णु हरि डालमिया, BJP नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, गिरिराज किशोर के नाम शामिल थे. आपको बता दें, यदि अदालत इन सभी को दोषी मानते हुए सजा सुनाती है तो इन्हें हाई कोर्ट का रुख करना होगा.

‘जेल जाने को तैयार, जमानत नहीं लूंगी’

भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने साफ-साफ कह दिया है कि सजा हुई तो जेल जाने को तैयार हूं, जमानत नहीं लूंगी. वहीं साक्षी महाराज ने कहा है कि विवादित ढांचा माथे पर कलंक जैसा था, जेल जाना पड़ा तो हंसते हुए जाऊंगा, काशी-मथुरा के लिए नए योद्धा आएंगे.

इसके अलावा बीजेपी के वरिष्ठ नेता विवादित ढांचा विध्वंस मामले में आरोपी विनय कटियार ने मीडिया से कहा कि कोर्ट से न्याय की उम्मीद है. बाकी कोर्ट का जो भी फैसला होगा, वो स्वीकार होगा. ये मुकदमा कांग्रेस की साज़िश थी, कांग्रेस का पर्दाफाश होगा. कांग्रेस हमारी सरकार गिराकर अपनी राजनीतिक ज़मीन तैयार करने में जुटी हुई थी.

दूध फट जाये तो पानी में हैं पौष्टिक गुण फैंकने के बजाय इसतरह उपयोग कर सकते…

कई बार दूध फट जाता है तो लोग उसका पनीर बना लेते हैं. लेकिन बचे हुए पानी को फेंक देते हैं. पर क्या आप जानते हैं कि फटे दूध का पानी प्रोटीन और पौष्टिकता से भरपूर होता है. यह आपकी सेहत को बहुत लाभ पहुंचाता है. इससे आपको हृदय संबंधी बीमारियों से लेकर पेट संबंधी बीमारियों और मोटापे से भी छुटकारा मिल सकता है.

आटा गूंदने के लिए करें इस्तेमाल

अगर कभी दूध फट जाए तो आप उसके बचे हुए पानी का इस्तेमाल आटा गूंदने में कर सकते हैं. इससे रोटियां नरम बनती हैं और रोटी में पौष्टिकता भी भर जाती है.

सब्जी की ग्रेवी को बनाए हेल्दी

आप चाहे तो फटे दूध के पानी को सब्जी की ग्रेवी बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे सब्जी का स्वाद बढ़ जाएगा और यह आपकी सेहत को बहुत लाभ भी पहुंचाएगा.

यह रेसिपी कर सकते हैं प्रयोग

फटे दूध के पानी का आप सूप बनाकर सेवन भी कर सकते हैं. अगर आप चावल या पास्ता बना रहे हैं तो भी फटे दूध के पानी को उपयोग में ला सकते हैं.

त्वचा पर आएगा निखार

अगर आप फटे दूध के पानी को नहाने के पानी में मिलाकर स्नान करते हैं तो इससे आपकी त्वचा सॉफ्ट होती है. यह आपकी त्वचा के पीएच को मेंटेन करता है और त्वचा को हेल्दी बनाता है.

कंडीशनर की तरह करें इस्तेमाल

आप शैंपू करने के बाद इस पानी से अपने बालों को धोएं और 10 मिनट बाद बालों को सादा पानी से धो लें. इससे आपके बाल मुलायम और सॉफ्ट होते हैं.

किसान आंदोलन के बाद अब फसल बीमा योजना को लेकर कई राज्य उठाने वाले हैं बड़ा कदम

पीएम फसल बीमा योजना को 7 राज्यों ने किया रिजेक्ट, अब मध्य प्रदेश भी तैयारी में, प्रीमियम से कम ही मिलता है मुआवजा, साथ में सियासी नुकसान भी. पढ़िए किसानों और राज्यों की परेशानी

नई दिल्ली. किसानों की भलाई के नाम पर शुरू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY- Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) की असली फसल इंश्योरेंस कंपनियां काट रही हैं. वो लगातार प्रॉफिट में हैं और किसानों को पैसा जमा करने के बाद भी क्लेम के लिए भटकना पड़ रहा है. कई राज्यों को इन कंपनियों की चालबाजी साफ दिखने लगी है इसलिए वो इससे बाहर निकलने को बेताब हैं. कृषि मंत्रालय की ही एक रिपोर्ट के मुताबिक कुछ राज्यों ने इस योजना से बाहर होने को चुना है. बिहार, पश्चिम बंगाल, मणिपुर, मेघालय, जम्मू-कश्मीर, आंध्र प्रदेश में (रबी 2019-20) योजना का कार्यान्वयन नहीं किया गया. इसकी बड़ी वजह ये है कि कंपनियों से फसल बीमा करवाना घाटे का सौदा बनता जा रहा है. राज्यों का कहना है कि वो क्यों न खुद ही मुआवजा बांटें. पंजाब ने तो इस योजना को पहले ही रिजेक्ट कर दिया था.

इस साल गुजरात, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश सरकार ने अब तक फसल बीमा योजना में अपना शेयर यानी प्रीमियम सब्सिडी नहीं दी है. बीजेपी शासित राज्य मध्य प्रदेश की सरकार भी इस योजना से बाहर निकलना चाहती है. वो राज्य का खजाना बचाने और किसानों का असंतोष कम करने के लिए फसल खराब होने पर खुद ही मुआवजा देना चाहती है. पीएम फसल बीमा योजना से सीएम शिवराज सिंह चौहान परेशान हैं. मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत करते हुए उन्होंने अपना यह दर्द साझा किया.

सफेद मोतियों की तरह दिखने वाला छोटे आकार का साबूदाना किसी अमृत से कम नहीं, यह फायदे जान आप भी रह जायेंगे दंग

सफेद मोतियों की तरह दिखने वाला छोटे आकार का साबूदाना व्रत में प्रमुख रूप से खाया जाता है। इसे खाने से शरीर को भरपूर ऊर्जा मिलती है। इसे कई प्रकार से बनाया जाता है। मीठा, नमकीन, खिचड़ी आदि रूपों में साबुदाना को खाना पसंद किया जाता है। कई प्रान्‍तों में तो इसका उपमा और सूप भी बनता है। खाने को बनाने में ग्रेवी को गाढ़ा करने में भी इसके रस का उपयोग किया जाता है। आज हम आपको इसी के कुछ फायदे बताने जा रहे हैं। खाने में हल्का और स्वादिस्ट होता है। इससे शरीर को भी फायदा होता है। यह शरीर की गर्मी को दूर करता है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है। तो आइये जानते हैं इसके और भी अनेक फायदे।

1. साबूदाने में कैल्शियम, आयरन, विटामिन-के भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाए रखने और अवश्यक लचीलेपन के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

2. व्रत के दिनों में अक्सर शरीर में गर्मी पड़ जाती है। ऐसे में साबूदाने की खिचड़ी बनाकर खाने से गर्मी दूर होती है और यह शरीर को तरोताजा भी करता है। इसके आलावा चावल के साथ साबूदाना का कांबिनेशन शरीर की गर्मी को कम करने और ठंडक पहुंचाने में मदद करता है।

3. साबूदाना खाने में काफी हल्का होता है और यह पेट की काफी समस्याएं दूर करता है। साबूदाना का सेवन करने से पेट की पाचन शक्ति ठीक होती है जिससे गैस और अपच जैसी परेशानी से राहत मिलती है।

4. अगर आप भी वजन बढ़ाना चाहते हैं तो साबूदाना आपके लिए बेस्ट ऑप्शन हैं। इसमें फैट व कैलोरी की अच्छा मात्रा होती है, जिससे बिना बैली फेट के वजन बढ़ाने में मदद मिलती हैं।इसे खाने से वजन जल्‍दी बढ़ता है।