राजस्थान और मध्यप्रदेश में सोयाबीन की फसल पर खतरे की घण्टी

कोटा हाड़ौती में टिड्डी दल के हमले से सबसे ज्यादा नुकसान खरीफ में सोयाबीन की फसल पर माना जा रहा है। सोयाबयीन की फसल पत्तेदार होती है। इसके पत्ते मुलायम होते हैं, जिसे टिड्डियां आसानी से चट कर जाएंगी। इस कारण कृषि विशेषज्ञों की सोयाबीन की फसल को लेकर चिंता है। देश में मध्यप्रदेश और राजस्थान में सोयाबीन की बुवाई अधिक होती है। टिड्डियों का हमला हाड़ौती से होता हुआ मध्यप्रदेश तक जाता है। इस कारण दोनों राज्यों में टिड्डी के हमले के चलते अलर्ट जारी किया गया है। कृषि विभाग कोटा खण्ड की ओर से सोमवार को संभागीय कार्यशाला उम्मेदगंज कृषि अनुसंधान केन्द्र पर आयोजित की गई। इसमें विशेषज्ञों और कृषि वैज्ञानिकों ने टिड्डी नियंत्रण के बारे में सुझाव रखे। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक रामावतार शर्मा ने बताया कि कृषि आयुक्त के निर्देशों की पालना में यह कार्यशाला रखी गई है। संभाग में टिडडी प्रकोप के नियंत्रण के सभी जिलाधिकारियों से कार्य योजना पर चर्चा की तथा निर्देशित किया कि संभाग में फसलों को टिडडी प्रकोप से बचाने के लिए सभी तरह के प्रयास किए जाएं। इसमें कृषि के साथ साथ उद्यान विभाग के स्टाफ को शामिल किया जाए तथा आवश्यक संशाधन व पौध सरंक्षण रसायनों की अग्रिम व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जून माह में संभाग में टिड्डी दल नियंत्रण के बारे में जिलेवार चर्चा की गई। इसके साथ ही अनुदानित सोयाबीन बीज का लक्ष्यानुसार पारदर्शिता से वितरण करने के निर्देश दिए। उर्वरक व अन्य आदानों के लक्ष्यानुसार नमूने लेने के निर्देश दिए। कृषि अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा आगामी माह में बोई जाने वाली फ सलों के साथ कीट रोग नियंत्रण की जानकारी दी गई। कार्यशाला में उद्यान विभाग के संयुक्त निदेशक पी.के. गुप्ता, सीएडी कृषि खण्ड के परियोजना निदेशक बलवंतसिंह, चारों जिलों के उप निदेशक कृषि, सहायक निदेशक कृषि, जिला विस्तार अधिकारी एवं कृषि अधिकारियों ने भाग लिया।

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