शिवराज कैबिनेट में सिंधिया गुट का होगा दबदबा, बीजेपी क्या अपनों को करेगी नाराज?

आनंदीबेन पटेल को मध्य प्रदेश के राज्यपाल की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिलने के बाद शिवराज कैबिनेट के विस्तार की चर्चा तेज हो गई है. मंगलवार को संभावित शिवराज मंत्रिमंडल के विस्तार में ज्योतिरादित्य सिंधिया का पूरी तरह से दबदबा है. माना जा रहा है कि शिवराज कैबिनेट में कम से कम 9 से 10 सिंधिया समर्थकों को मंत्री बनाया जा सकता है. हालांकि, इसके लिए बीजेपी को अपने कई दिग्गज नेताओं को नजरअंदाज करना होगा. ऐसे में देखना होगा कि बीजेपी कैसे जोखिम भरा कदम उठाती है.

बता दें कि कमलनाथ और पूर्व सीएम दिग्‍विजय सिंह से अनबन होने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था. इसके बाद सिंधिया के 22 समर्थक विधायकों ने भी कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था, जिसमें 6 कैबिनेट मंत्री भी शामिल थे. इसी के बाद शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में बीजेपी की मध्य प्रदेश की सत्ता में वापसी हो सकी है, जिसमें सिंधिया समर्थकों की अहम भूमिका रही है.

सिंधिया खेमे का कैबिनेट में रहेगा दखल

कमलनाथ की कैबिनेट में भी ज्योतिरादित्य सिंधिया के 6 लोग शामिल थे. बीजेपी में वह 22 पूर्व विधायकों के साथ आए हैं. इनमें से सिंधिया के गुट के 2 लोग तुलसीराम सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत पहले से कैबिनेट में शामिल है बाकी सात से आठ लोग और भी मंत्री बनाए जा सकते हैं. इनमें इमरती देवी, प्रद्युमन सिंह तोमर, महेंद्र सिंह सिसोदिया और प्रभुराम चौधरी के नाम तय हैं, क्योंकि ये लोग कैबिनेट मंत्री का पद छोड़कर बीजेपी में आए हैं.

इसके अलावा सिंधिया समर्थकों में बिसाहूलाल सिंह, हरदीप सिंह डंग, एंदल सिंह कंसाना, राजवर्धन सिंह दत्तीगांव और रणवीर जाटव भी कैबिनेट मंत्री के प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं. डंग और बिसाहूलाल सिंह मंत्री न बनने की वजह से ही कांग्रेस में नाराज थे और इसी के चलते विधायक पद से इस्तीफा दिया था. शिवराज कैबिनेट में इतने लोगों की एंट्री के बाद सिंधिया खेमे का दखल काफी बढ़ जाएगा. हालांकि, उपचुनाव को देखते हुए बीजेपी को समीकरण साधने के लिए इन्हें कैबिनेट में जगह देना मजबूरी बन गया है.

वहीं, बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता मंत्रिमंडल में शामिल होने की बाट जोह रहे है. इसी को लेकर शिवराज सिंह चौहान खासे पसोपेश में नजर आ रहे हैं. मध्य प्रदेश में मंत्री पद सीमित है और कई वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल में समायोजित करना है यह ढेड़ी खीर बनता जा रहा है. दरअसल विधायकों की कुल संख्या के आधार पर शिवराज कैबिनेट में ज्यादा से ज्यादा 35 विधायक मंत्री बन सकते हैं. ऐसे में अगर सिंधिया समर्थक गुट के 9 से 10 नेताओं का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है. इस तरह से करीब 25 फीसदी कैबिनेट पर सिंधिया का कब्जा होगा.

वहीं, बीजेपी के लिए सबसे ज्यादा समस्या आ रही है बुंदेलखंड क्षेत्र से जहां गोपाल भार्गव जैसे दिग्गज और वरिष्ठ नेता हैं तो वहीं शिवराज के करीब पूर्व गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह भी मौजूद हैं. इस क्षेत्र से पहले ही सिंधिया खेमें से गोविंद सिंह राजपूत को मंत्री बनाया जा चुका है. एक ही जिले से तीन मंत्री बनाना शायद संभव नहीं हो पा रहा. साथ ही कई ऐसे विधायक भी मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए बेताब हैं, जो बीजेपी के टिकट से लगातार जीतते आ रहे हैं. इनमें शैलेंद्र जैन और प्रदीप लारिया का नाम सबसे आगे हैं. ऐसे ही माथा पच्ची विंध्य और मेवाड़-निमाड़ इलाके में है.

ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों के दम पर बीजेपी ने मध्य प्रदेश में सरकार तो बना ली है. लेकिन क्या बीजेपी सिंधिया समर्थकों के आगे अपने ही कद्दावर और वरिष्ठ नेताओं को नाराज और नजरअंदाज करने का जोखिम भरा कदम उठा पाएगी?

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