देवशयनी एकादशी : सोने जा रहे देव.. चार माह तक मांगलिक कार्यों पर लगेगा विराम

देवशयनी एकादशी
लॉकडाउन की वजह से शादी-ब्याह के आयोजनों में व्यवधान रहा। अब देवशयनी एकादशी के चलते अगले चार माह तक मांगलिक कार्यों के आयोजन पर विराम लग जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, एक जुलाई से भगवान विष्णु चार माह तक पाताल लोक में निवास करेंगे। हरि के शयन करने से इस बीच कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जा सकेगा, क्योंकि ईष्ट के शयन करने से मनोकामना पूरी नहीं होती और आयोजन निष्फल रहता है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार के मुताबिक, एक जुलाई को भगवान विष्णु चार महीने शयन के लिए पाताल लोक में चले जाएंगे। पंचांग के अनुसार इस दिन एकादशी की तिथि है। इसकी वजह से इसे देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी को आषाढ़ी एकादशी, हरिशयनी एकादशी और वंदना एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करते हुए व्रत का अनुष्ठान करना बेहद फलदायी होता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार देवशयनी एकादशी का व्रत विधि पूर्वक करने से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं। धन-धान्य की कोई कमी नहीं रहती है। व्रत के दौरान भगवान विष्णु और पीपल के वृक्ष की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है। महाभारत के समय भगवान श्रीकृष्ण ने खुद एकादशी व्रत का महत्व बताया था। चार माह गुजरने के बाद सूर्य देव जब तुला राशि में प्रवेश करते है, उस दिन भगवान विष्णु का शयन समाप्त होता है। इसे देवोत्थान एकादशी कहते हैं। इस दिन से फिर सभी मांगलिक आयोजन शुरू हो जाते हैं।
29 जून को भड़ली नवमी की अबूझ तिथि
भड़ली नवमी को अबूझ तिथि कहा जाता है। इसे भड़ल्या, भड़रिया और भडै़या नवमी भी कहते हैं। इस बार भड़ली नवमी का संयोग 29 जून को है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, इस दिन कोई भी शुभ कार्य करने के लिए पंचांग शोधन या मुहूर्त का मान नहीं देखा जाता है। इस दिन शादी-ब्याह के आयोजन खूब होते हैं।
देवशयन के बाद यह कार्य होते हैं निषिद्ध

देवशयन के बाद मांगलिक ही नहीं कुछ और कार्य भी निषिद्ध होते हैं। मान्यता के अनुसार चतुर्मास व्रत में पलंग पर सोना, भार्या का संसर्ग, झूठ बोलना, मांस खाना, शहद, मूली और बैंगन का सेवन वर्जित होता है। शुभता के लिए एकादशी के दिन सूर्योदय के साथ ही जगना चाहिए और साफ-सुथरे कपड़े पहनकर ही भगवान की आराधना की जानी चाहिए। पूजन सामग्री में पीले फूलों का प्रयोग करें।
देवशयन से बढ़ जाएगी पिया मिलन से दूरी
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, इस साल महज 18 विवाह लग्न ही शेष हैं। एक जुलाई को हरिशयनी एकादशी के बाद 25 नवंबर को देवोत्थानी एकादशी को मुहूर्त है। इस दिन भगवान शयन से जागेंगे। इसके बीच कोई भी विवाह लग्न नहीं मिलेगी। 14 दिसंबर से 14 जनवरी 2021 तक खरमास के कारण विवाह मुहूर्त नहीं रहेंगे। 16 जनवरी, 2021 से 12 फरवरी तक गुरु अस्त रहेंगे। इस दौरान भी मुहूर्त नहीं है। 17 फरवरी, 2021 से ढाई माह के लिए शुक्र अस्त हो जाएंगे। 14 मार्च से 14 अप्रैल तक खरमास चलेगा।
अगले छह माह में विवाह के लग्न

ज्योतिष गणना के अनुसार जून माह के समाप्त होने में महज आठ दिन शेष हैं। इस बीच 25, 27, 28 और 30 जून ही विवाह लग्न बची हैं। इसके बाद चतुर्मास शुरू हो जाएगा। देवोत्थान के दिन यानी 25 नवंबर को फिर से मांगलिक आयोजन शुरू होंगे। हालांकि, नवंबर में महज दो ही दिन यानी 25 और 30 नवंबर को विवाह का शुभ लग्न है। दिसंबर में आठ यानी 1, 2, 6, 7, 8, 9, 11 और 13 को विवाह योग्य शुभ लग्न का मान है। इसके बाद खरमास शुरू होने से सभी मांगलिक आयोजन वर्जित रहेंगे।
एकादशी तिथि मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारंभ- 30 जून शाम 7:49 बजे
एकादशी तिथि समाप्त – एक जुलाई शाम 5:29 बजे
व्रत अनुष्ठान – उदयातिथि का मान होने से एक जुलाई को व्रत धारण किया जाएगा।
व्रत परायण – दो जुलाई सुबह 5:27 बजे से 8:14 बजे के बीच।

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