विधानसभा अध्यक्ष और मंत्री के सामने खुले मंच में छलका कांग्रेस विधायक का दर्द

नरसिंहपुर। जिले के प्रसिद्ध बरमान मेले का उद्घाटन में शामिल होने पहुंची कांग्रेस की गाडरवारा विधायक सुनीता पटेल का दर्द झलक गया। मंच पर मौजूद विधानसभा अध्यक्ष, सामाजिक न्याय मंत्री लखन घनघोरिया और जिले प्रशासनिक अमले के सामने ही मंच से ही विधायक सुनीता पटेल ने जिला प्रशासन और पार्टी को जमकर कोसा। विधायक सुनीता पटेल ने कहा की उन्हें उनकी पार्टी, जिला प्रशासन और अपने लोगों ने धोखा दिया है। अवैध उत्खनन के मामले में विधायक सुनीता पटेल ने कहा कि पुलिस प्रशासन बैग में रखी नोटों को ढूंढ लेती है। मगर उसे थाने के सामने से निकल रही रेत की गाड़ियां नहीं दिखती हैं। विधायक ने कहा कि मुझे नर्मदा जी की कसम है, मैंने जो घोषणा पत्र दिया था उसे अगर पूरा नहीं किया तो मैं अपना त्यागपत्र नर्मदा जी को सौंप दूंगी। मैंने टिकट अपने दम पर और मेहनत से पाई थी। विधायक ने आगे यह भी चेताया कि जिले में 22 तारीख को कोई बड़ी कार्यवाही होगी। तथा मंच से ही पत्रकारों से सहयोग मांगा और कहा कि बताएं कहां अवैध उत्खनन हो रहा है? मंच से जब विधायक का दर्द झलका तब विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति विधायक तेंदूखेड़ा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे

ईरान का सबसे खतरनाक हथियार जिससे दहशत में है अमेरिका

बीते साल 20 जून को ईरान ने एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया था। इसके बाद अमेरिका ने ईरान को इसके नतीजे भुगतने की चेतावनी भी दी थी। माना जा रहा है कि इसके बाद अमेरिकी साइबर हैकर्स की टीम ने ईरान की मिसाइल प्रक्षेपण में इस्तेमाल होने वाले कम्प्यूटर्स पर हमला कर दिया था।

धीरे-धीरे यह खबर मीडिया के जरिये बाहर आने लग गई थी। अब एक सवाल यह है कि क्या अमेरिका भी ईरान के साइबर हमले से डरता है? हालांकि इस विषय पर अमेरिका के रक्षा अधिकारियों ने किसी भी समाचार पत्र की रिपोर्ट की पुष्टि नहीं की है।

अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट की एक खबर के मुताबिक, ‘ईरान के हमले से ऐसे कंप्यूटरों को नुकसान पहुंचा है जिन्हें रॉकेट और मिसाइल प्रक्षेपण में इस्तेमाल किया जाता है। खबर में ये भी लिखा है कि अमेरिका के रक्षा अधिकारियों ने समाचार पत्र की रिपोर्ट की पुष्टि नहीं की है। अमेरिकी मीडिया ने खबरों के माध्यम से इस बात का दावा भी किया कि, अमेरिका ने ईरान में अपने निगरानी ड्रोन मार गिराये जाने के बाद ईरान की मिसाइल नियंत्रण प्रणाली और उनके एक जासूसी नेटवर्क पर साइबर हमले किये थे।

बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या ये कदम अमेरिका ने ईरान के डर से उठाया या फिर उसकी कोई सोची-समझी रणनीति है। इस खबर पर बीबीसी ने भी ट्वीट किया और लिखा “ईरान की मिसाइल नियंत्रण प्रणाली पर अमेरिका का साइबर अटैक” रॉकेट और मिसाइल लांचर चलाने वाले कम्प्यूटरों को निशाना बनाया गया।

‘हमारे दैनिक जीवन में सूचना तंत्र और साइबरस्पेस के महत्व को देखते हुए, यह भी विचारणीय है कि अमेरिका – ईरान विवाद न सिर्फ भौतिक दुनिया की चीज रहेगी बल्कि यह साइबर हमलों का रूप भी ले सकती है। इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं, खासकर जब ईरान ने पिछले दशक में, 2010 में, अपने यूरेनियम संवर्धन सुविधाओं पर अमेरिका द्वारा स्टक्सनेट वाइरस द्वारा  किए गए आक्रमण के बाद अपनी साइबर क्षमताओं कि वृद्धि का प्रदर्शन किया था।’ – हरीश चौधरी, साइबर एक्सपर्ट और इंटरनेट गवर्नेंस एक्सपर्ट 

याहू ने दो पूर्व खुफिया अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर नजर रखने वाले एक जासूसी जहाज को निशाना बनाया। अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने इसी जगह हाल में ही में दो बार उसके तेल टैंकरों पर हमले किये थे। ईरान के परमाणु सौदे से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद से दोनों देशों के बीच बढ़ा हुआ है।

ईरान का दावा है कि ड्रोन ने उसके हवाई क्षेत्र का जबर्दस्त उल्लंघन किया था। ड्रोन हमले के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर हमला करने के बात कही थी। बाद में बात पलट गई और उन्होंने हमले की सोच त्यागकर ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अगले सप्ताह ईरान पर बड़े प्रतिबंध जरूर लगाएगा।

‘अक्तूबर 2019 में अमेरिकी अधिकारी ने रायटर्स को कहा कि अमेरिका ने ईरान के इस प्रोपेगैंडा के खिलाफ कि ईरानी ड्रोन एवं मिसाइल ने अरेबियन तेल सुविधाओं पर हमला किया है, अमेरिका ने इसके खिलाफ एक गुप्त साइबर अभियान शुरू किया है। दूसरी तरफ, 2013 में यह पता लगा कि ईरानी हैकर्स, जो कथित रूप से ईरान सरकार के लिए काम करते थे, ने  न्यूयॉर्क शहर के उत्तर के एक छोटे डैम के कम्प्युटर के नियंत्रण का भेदन कर दिया है।

बुर्ज खलीफा पर गिरी बिजली, इसका 7 साल से इंतजार कर रहा था शख्स

दुबई में हाल ही में भयानक तूफान आया. झूम कर बारिश हुई. पूरे दुबई में जगह-जगह पानी भर गया. लेकिन इस बीच कुछ ऐसा हुआ जिसका इंतजार एक फोटोग्राफर को पिछले सात साल से था. ये नजारा था बुर्ज खलीफा पर बिजली गिरने का. इस फोटोग्राफर ने इस नजारे को अपने कैमरे में कैप्चर करने के लिए पूरी रात एक रेगिस्तान में हो रही बारिश के बीच एक कैंप गुजारी ताकि परफेक्ट शॉट मिल सके. आखिरकार सब्र का फल मीठा होता है. उस फोटोग्राफर को तस्वीर मिली. 

इस फोटोग्राफर का नाम है जोहेब अंजुम. जोहेब ने शुक्रवार की रात आए तूफान के दौरान दुनिया की सबसे ऊंची इमारत पर गिरती हुई बिजली की तस्वीर ली. जोहेब पूरी रात एक रेगिस्तान में बारिश के बीच एक छोटे से कैंप में थे ताकि उन्हें बेहतरीन तस्वीर मिल सके.

फोटो लेने के बाद जोहेब ने बताया कि इस तस्वीर ने उनके लिए साल 2020 की अच्छी शुरुआत की है. मेरे लिए वो क्षण बहुत कीमती था जब 2720 फीट ऊंचे बुर्ज खलीफा के सबसे ऊपरी हिस्सा पर बिजली टकराई. 

आयातित प्याज को भाव ही नहीं दे रहे राज्य, केंद्र को सता रहा स्टॉक सड़ने का डर

नयी दिल्ली : प्याज कीमतों में उछाल पर अंकुश लगाने के लिए इस सब्जी का आयात करने को बाध्य होने के बाद अब केंद्र सरकार को यह डर सता है कि प्याज कहीं गोदामों में पड़ा-पड़ा सड़ न जाए. इसका कारण यह है कि केंद्र द्वारा परिवहन लागत की पेशकश के बावजूद राज्यों ने इन्हें खरीदने में बहुत कम दिलचस्पी दिखायी है. उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि केंद्र राज्यों को 55 रुपये प्रति किलोग्राम की बंदरगाह पर बैठने वाली दर से प्याज की पेशकश कर रहा है और वह इन प्याजों के परिवहन की लागत भी वहन करने को तैयार है. केंद्र ही अकेले प्याज का आयात कर सकता है और उसके बाद यह राज्यों का जिम्मा बनता है कि वे उपभोक्ताओं को इसकी खुदरा बिक्री कर पहुंचाएं. खुदरा प्याज की कीमतें सितंबर के अंत से बढ़ने लगीं और दिसंबर में 170 रुपये प्रति किलो की ऊंचाई पर जा पहुंची. इसके बाद केंद्र सरकार को तुर्की और मिस्र जैसे देशों से प्याज आयात करने के लिए मजबूर होना पड़ा. बाद के हफ्तों में बाजार में नयी खरीफ की फसल के आगमन के साथ दरें नरम होने लगीं. पासवान ने कहा कि अभी तक हमने 36,000 टन प्याज का आयात किया है. इसमें से 18,500 टन शिपमेंट भारत में पहुंच गया है, लेकिन राज्यों ने केवल 2,000 टन लिया है. वे भी बहुत मान-मनौव्वल के बाद. हम इन्हें खपाने को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि यह खराब होने वाली वस्तु है. उन्होंने कहा कि कल कोई अदालत न चला जाए और यह कहे कि आयातित प्याज सड़ रहे थे. पासवान ने कहा कि केंद्र आयातित प्याज को 55 रुपये प्रति किलो की औसत दर पर दे रहा है और पूरा परिवहन खर्च भी उठा रहा है. इसके बावजूद राज्य सरकारें प्याज खरीदने के लिए आगे नहीं आ रही हैं. यह पूछे जाने पर कि आयात के बावजूद कीमतें अभी भी अधिक क्यों हैं, पासवान ने कहा कि आयात प्याज का घरेलू आपूर्ति में सुधार लाने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा है. यदि राज्य सरकारें आयातित प्याज लेने को तैयार नहीं हैं, तो हम क्या कर सकते हैं? उन्होंने कहा कि अब तक आंध्र प्रदेश, केरल, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सरकार ने आयातित प्याज लिए हैं. कई राज्यों ने अपनी मांग वापस ले ली है. सूत्रों ने कहा कि आयातित प्याज का स्वाद घरेलू प्याज से अलग है और घरेलू प्याज के समान दर पर उपलब्ध होने के कारण उपभोक्ता आयातित प्याज नहीं खरीद रहे हैं. सरकार अपनी एजेंसी एमएमटीसी के माध्यम से प्याज आयात कर रही है. तुर्की, अफगानिस्तान और मिस्र से प्याज का आयात किया जा रहा है. खरीफ उत्पादन में 25 फीसदी की गिरावट के कारण प्याज की कीमतों में वृद्धि हुई है. पासवान ने यह भी कहा कि मंत्रालय अन्य वस्तुओं, विशेष रूप से खाद्य तेलों और दालों की कीमतों पर कड़ी नजर रख रहा है. सरकार उचित समय पर कार्रवाई करेगी.

आर्मी डे / जनरल नरवणे बोले- सेना चुनौतियों से निपटने में सक्षम; पहली बार महिला अफसर ने परेड में पुरुष टुकड़ी की अगुआई की

नई दिल्ली. देश आज72वां सेना दिवस मना रहा है। सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंदनरवणे ने बुधवार को कहा कि हमारी सेनाभविष्य की चुनौतियों सेनिपटने में सक्षम है।आतंक के प्रति हमारीनीति हमेशा से जीरो टॉलरेंस की रही है। आतंक का जवाब देने के लिए हमारे पास अनेक विकल्प हैं। सेना दिवस के मौके पर दिल्ली के करियप्पा परेड ग्राउंड में हुई परेड में पहली बार महिला अधिकारी कैप्टन तानिया शेरगिलपुरुष बटालियनकी परेड का नेतृत्व किया।

देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत, नौसेना प्रमुख करमबीर सिंह समेत कई अधिकारियोंने यहांजवानों को श्रद्धांजलि दी। सेना प्रमुख नरवणे ने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि सेना प्रमुख होने के नाते मुझे अपने जवानों की योग्यता पर नाज है। हमारे सैनिक भले भी मुश्किल इलाकों में तैनात हैं, लेकिन वे हमेशा देशवासियों के दिल में रहते हैं। पिछले हफ्ते मैं सियाचिन गया था। वहां के मुश्किल हालात में तैनात जवानों का मनोबल देखकर बेहद खुशी हुई। भारतीय सेना ने प्रॉक्सी वॉर के साथ-साथ नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा सुनिश्चित किया।

अनुच्छेद 370 को हटाना एक ऐतिहासिक कदम: नरवणे

उन्होंने कहा- नियंत्रण रेखा की स्थिति जम्मू-कश्मीर के हालात से जुड़ी है। अनुच्छेद 370 को हटाना एक ऐतिहासिक कदम है। यह जम्मू-कश्मीर को मुख्य धारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण साबित होगा। आतंक के प्रति हमारा पॉलिसी हमेशा से जीरो टॉलेरेंस की रही है। आतंक का जवाब देने के लिए हमारे पास अनेक विकल्प हैं। वहीं, हथियारों की फास्टट्रैक खरीद से हमारी ताकत बढ़ी है। हमारी सेना आज के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों से निपटने में सक्षम है। सेना प्रमुख ने देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों को भी याद किया। साथ ही पुरस्कार विजेताओं को मुबारकबाद दी।

तानिया के पिता, दादा और परदादा भी सेना में सेवा दे चुके हैं

तानिया 2017 में चेन्नै की ऑफिसर ट्रेनिंग अकादमी में शामिल हुई थीं।उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार में बी-टेक किया है। उनके पिता, दादा और परदादा भी सेना में सेवा दे चुके हैं। वह चौथी पीढ़ी की पहली महिला अधिकारी हैं, जो पुरुषों के परेड का नेतृत्व करेंगी। पिछले साल कैप्टन भावना कस्तूरी ने गणतंत्र दिवस पर पुरुष बटालियन की अगुआई की थी।

जवानों की जरूरतें हर कीमत पर पूरा करेंगे’

सेना दिवस की पूर्व संध्या पर जवानों को संबोधित करते हुए जनरल नरवणे ने कहा कि भारतीय सेना केवल एक लड़ाकू संगठन या राष्ट्रशक्ति का साधनभर नहीं है। इसका देश में इसका एक विशेष स्थान है। चीन-पाकिस्तान सीमा पर तैनात सैनिकों और कश्मीर में ‘छद्म युद्ध’ लड़ने वालों को सतर्क रहना चाहिए। जवानों की सभी जरूरतों को किसी भी कीमत पर पूरा किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- हमारी सेना अपनी वीरता और व्यावसायिकता के लिए जानी जाती है। यह अपनी मानवीय भावना के लिए भी सम्मानित है। जब भी लोगों को मदद की जरूरत हुई, हमारी सेना मौके पर पहुंचकर हर संभव मदद की है।

सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ थे करियप्पा

फील्ड मार्शल केएम करियप्पा के सम्मान में हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है। करियप्पा भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ थे।उन्होंने 1947 के भारत-पाक युद्ध के दौरान पश्चिमी सीमा पर भारतीय सेना का नेतृत्व किया था। करियप्पा ने15 जनवरी 1949 को सर फ्रांसिस बुचर से प्रभार लिया था। वे 1986 में फील्ड मार्शल का खिताब प्राप्त करने वाले दूसरे अफसर थे। पहले फील्ड मार्शल जनरल एसएफजे मानेकशॉ थे, जिन्हें 1973 में यह खिताब मिला था।

आर्मी डे / जनरल नरवणे बोले- सेना चुनौतियों से निपटने में सक्षम; पहली बार महिला अफसर ने परेड में पुरुष टुकड़ी की अगुआई की

नई दिल्ली. देश आज72वां सेना दिवस मना रहा है। सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंदनरवणे ने बुधवार को कहा कि हमारी सेनाभविष्य की चुनौतियों सेनिपटने में सक्षम है।आतंक के प्रति हमारीनीति हमेशा से जीरो टॉलरेंस की रही है। आतंक का जवाब देने के लिए हमारे पास अनेक विकल्प हैं। सेना दिवस के मौके पर दिल्ली के करियप्पा परेड ग्राउंड में हुई परेड में पहली बार महिला अधिकारी कैप्टन तानिया शेरगिलपुरुष बटालियनकी परेड का नेतृत्व किया।

देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत, नौसेना प्रमुख करमबीर सिंह समेत कई अधिकारियोंने यहांजवानों को श्रद्धांजलि दी। सेना प्रमुख नरवणे ने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि सेना प्रमुख होने के नाते मुझे अपने जवानों की योग्यता पर नाज है। हमारे सैनिक भले भी मुश्किल इलाकों में तैनात हैं, लेकिन वे हमेशा देशवासियों के दिल में रहते हैं। पिछले हफ्ते मैं सियाचिन गया था। वहां के मुश्किल हालात में तैनात जवानों का मनोबल देखकर बेहद खुशी हुई। भारतीय सेना ने प्रॉक्सी वॉर के साथ-साथ नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा सुनिश्चित किया।

अनुच्छेद 370 को हटाना एक ऐतिहासिक कदम: नरवणे

उन्होंने कहा- नियंत्रण रेखा की स्थिति जम्मू-कश्मीर के हालात से जुड़ी है। अनुच्छेद 370 को हटाना एक ऐतिहासिक कदम है। यह जम्मू-कश्मीर को मुख्य धारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण साबित होगा। आतंक के प्रति हमारा पॉलिसी हमेशा से जीरो टॉलेरेंस की रही है। आतंक का जवाब देने के लिए हमारे पास अनेक विकल्प हैं। वहीं, हथियारों की फास्टट्रैक खरीद से हमारी ताकत बढ़ी है। हमारी सेना आज के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों से निपटने में सक्षम है। सेना प्रमुख ने देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों को भी याद किया। साथ ही पुरस्कार विजेताओं को मुबारकबाद दी।

तानिया के पिता, दादा और परदादा भी सेना में सेवा दे चुके हैं

तानिया 2017 में चेन्नै की ऑफिसर ट्रेनिंग अकादमी में शामिल हुई थीं।उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार में बी-टेक किया है। उनके पिता, दादा और परदादा भी सेना में सेवा दे चुके हैं। वह चौथी पीढ़ी की पहली महिला अधिकारी हैं, जो पुरुषों के परेड का नेतृत्व करेंगी। पिछले साल कैप्टन भावना कस्तूरी ने गणतंत्र दिवस पर पुरुष बटालियन की अगुआई की थी।

जवानों की जरूरतें हर कीमत पर पूरा करेंगे’

सेना दिवस की पूर्व संध्या पर जवानों को संबोधित करते हुए जनरल नरवणे ने कहा कि भारतीय सेना केवल एक लड़ाकू संगठन या राष्ट्रशक्ति का साधनभर नहीं है। इसका देश में इसका एक विशेष स्थान है। चीन-पाकिस्तान सीमा पर तैनात सैनिकों और कश्मीर में ‘छद्म युद्ध’ लड़ने वालों को सतर्क रहना चाहिए। जवानों की सभी जरूरतों को किसी भी कीमत पर पूरा किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- हमारी सेना अपनी वीरता और व्यावसायिकता के लिए जानी जाती है। यह अपनी मानवीय भावना के लिए भी सम्मानित है। जब भी लोगों को मदद की जरूरत हुई, हमारी सेना मौके पर पहुंचकर हर संभव मदद की है।

सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ थे करियप्पा

फील्ड मार्शल केएम करियप्पा के सम्मान में हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है। करियप्पा भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ थे।उन्होंने 1947 के भारत-पाक युद्ध के दौरान पश्चिमी सीमा पर भारतीय सेना का नेतृत्व किया था। करियप्पा ने15 जनवरी 1949 को सर फ्रांसिस बुचर से प्रभार लिया था। वे 1986 में फील्ड मार्शल का खिताब प्राप्त करने वाले दूसरे अफसर थे। पहले फील्ड मार्शल जनरल एसएफजे मानेकशॉ थे, जिन्हें 1973 में यह खिताब मिला था।

सैफ-करीना को तैमूर की तरफ से 1.5 करोड़ पहली कमाई बतौर मिले

दिसंबर में करीना की गुड न्यूज़ रिलीज़ हुई थी, फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर खूब धूम मचाई। अब 10 जनवरी को ‘तानाजी’ रिलीज़ हुई जिसमें सैफ ने उदयभान का खतरनाक एवं डार्क कैरेक्टर निभाया है।
सैफ की परफॉरमेंस की खूब प्रशंसा हो रही है। बॉलीवुड के ये पति-पत्नी हर साल शानदार कमाई कर रहे हैं और अपने बैंक में करोड़ों रूपए भर रहे हैं। लेकिन अब खान परिवार में एक और कमाने वाला शख्स आ गया है।
हम 3 साल के तैमूर अली खान की बात कर रहे हैं। ये तो निश्चित है कि तैमूर अपनी किस्मत फिल्म इंडस्ट्री में ही बनाएँगे परंतु क्या आपको पता है कि छोटे नवाब की वजह से अभी से ही सैफ और करीना को करोड़ों का फायदा होने लगा है?

आपको पता होगा कि तैमूर हद से ज़्यादा पॉपुलर है। ऐसे में बड़ी-बड़ी कंपनियां सैफ-करीना को बेबी प्रोडक्ट्स से जुड़े इश्तिहारों में लेने लगे हैं। असल में सैफ-करीना बच्चों से जुड़ी हर चीज़ को प्रमोट करने के लिए परफेक्ट कपल बन गए हैं। हाल ही में सैफ, करीना और तैमूर स्विट्ज़रलैंड दौरे पर गये थे.
‘डीएनए इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार अगले ही दिन वह दोनों एक इवेंट में गए जो बेबी प्रोडक्ट्स की प्रमोशन से संबधित था। दोनों ने वहाँ पर सिर्फ 3 घंटे बिताए और इसके उन्हें 1.5 करोड़ रूपए मिले, ये काफी भारीभरकम रकम है।
सिर्फ-और-सिर्फ तैमूर की वजह से ही उन्हें ये कमाई हो पाई वरना वह कंपनी किसी और सेलिब्रिटी कपल को चुन सकती थी। ये कहना गलत नहीं होगा कि ये पहली मोटी कमाई है जो सैफ-करीना को तैमूर की तरफ से मिली है।
अगर तैमूर के कारण अभी से ही खान परिवार का इतना फायदा होने लगा है तो वो दिन दूर नहीं जब तैमूर अपने मम्मी-पापा से भी ज़्यादा सफलता हासिल कर लेगा।

जस्टिस धींगरा ने 1984 के सिख विरोधी दंगों की रिपोर्ट सुप़ीम कोर्ट में दाखिल की


1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में जस्टिस धींगरा ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट दाखिल कर दी है. जस्टिस ढींगरा ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राज्य सरकार, अभियोजन पक्ष और पुलिस ने सही समय पर अपनी रिपोर्ट अपील अदालत में दाखिल नही की. जिसकी वजह से मुकदमों के रिकॉर्ड नष्ट हो गए. जस्टिस ढींगरा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 10 मामलों में राज्य सरकारें अपील दाखिल करे. ये 10 वो FIR है जिसमें सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया था. जस्टिस ढींगरा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दंगों के दौरान तत्कालीन SHO कल्याणपुरी ने दंगाइयों की मदद की थी.

1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में जस्टिस धींगरा ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट दाखिल कर दी है. जस्टिस ढींगरा ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राज्य सरकार, अभियोजन पक्ष और पुलिस ने सही समय पर अपनी रिपोर्ट अपील अदालत में दाखिल नही की. जिसकी वजह से मुकदमों के रिकॉर्ड नष्ट हो गए. जस्टिस ढींगरा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 10 मामलों में राज्य सरकारें अपील दाखिल करे. ये 10 वो FIR है जिसमें सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया था. जस्टिस ढींगरा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दंगों के दौरान तत्कालीन SHO कल्याणपुरी ने दंगाइयों की मदद की थी.

अभिताभ बच्चन की बेटी श्वेता बच्चन की सास थीं राजकपूर की बड़ी बेटी रितुनंदा

श्वेता बच्चन की सास और राज कपूर की बड़ी बेटी रितु नंदा का आज निधन हो गया है 71 साल की उम्र में रितु ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया श्वेता के पिता यानी अमिताभ बच्चन ने अपनी समधन के निधन की जानकारी अपने ब्लॉग पर भी दी है अमिताभ ने अपने ब्लॉग में लिखा, ‘मेरी समधन रितु नंदा, श्वेता बच्चन की सास का रात 1:15 बजे अचानक निधन हो गया’ |

रितु नंदा बॉलीवुड एक्टर ऋषि कपूर और रणधीर कपूर की बहन थीं। एक मीडिया पोर्टल से बात करते हुए रणधीर ने कहा, ‘देर रात रितु नंदा ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया वो लंबे समय से कैंसर से जूझ रही थीं हम दिल्ली में हैं, और उनका अंतिम संस्कार भी आज ही किया जाएगा’ |

रितु नंदा बॉलीवड एक्टर रणबीर कपूर और रिद्धिमा कपूर की बुआ थीं। उनके अचानक निधन की खबर से रिद्धिमा कपूर शॉक्ड हैं उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर कर बुआ को श्रद्धांजलि दी है रिद्धिमा ने बुआ की फोटो पोस्ट करते हुए लिखा, ‘मैं आपसे ज्यादा दयालु और अच्छे इंसान से नहीं मिली भगवान आपकी आत्मा को शांति दे बुआ’।रिद्धिमा को पोस्ट पर एकता कपूर ने भी कमेंट कर रितु नंदा को श्रद्धांजलि दी है |

ऋषि कपूर की पत्नी बॉलीवुड एक्ट्रेस नीतू सिंह ने अभी अपने इंस्टाग्राम पर रितु के साथ एक फोटो शेयर करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है नीतू ने लिखा, ‘मेरी सबसे प्यारी, भगवान आपकी आत्मा को शांति दे’ |

आपको बता दें कि श्वेता के ससुर के निधन को भी अभी बहुद ज्यादा वक्त नहीं हुआ है अगस्त 2018 में श्वेता के ससुर राजन नंदा का निधन हुआ था रिद्धिमा कपूर ने ही अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के जरिए राजन नंदा की निधन की जानकारी दी थी |
श्वेता बच्चन की शादी रितु नंदा के बेटे निखिल नंदा से हुई है वो मशहूर इंजीनियरिंग कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं, जिसका नाम एस्कॉर्ट्स लिमिटेड है रितु खुद एक एंट्रप्रेन्योर थीं और एक लाइफ इन्श्योरेंस बिजनेस से जुड़ी हुई थीं |