एक साल बीतने को है अब तो कर्ज माफी का वचन निभाए सरकार: उमाशंकर गुप्ता

ग्वालियर। आज हम देखते हैं कि मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार सभी मोर्चों पर फेल हुई है, कांग्रेस अपने वचन पत्र का एक भी वचन पूरा करने में नाकारा सरकार साबित हुई है। मध्य प्रदेश चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने अपने वचन पत्र में जनता से जो वायदे किए थे कि कांग्रेस की सरकार बनेगी तो, उनको पूरा करेंगे लेकिन नहीं किया। किसानों की बात करें तो कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने भोपाल में कहा था कांग्रेस की सरकार बनते ही 10 दिन में किसानों का कर्जा माफ किया जाएगा नहीं तो 10 दिन में मुख्यमंत्री साफ किए जाएगा, आज वह खुद साफ हो गए। उक्त बात सोमवार को पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता एवं पूर्व साडा अध्यक्ष जयसिंह कुशवाह ने होटल रमाया में आयोजित भारतीय जनता पार्टी की प्रेसवार्ता में कही।
इस अवसर पर जिला अध्यक्ष देवेश शर्मा, जिला महामंत्री महेश उमरैया, जिला उपाध्यक्ष रामेश्वर भदौरिया, संभागीय मीडिया प्रभारी पवनकुमार सेन उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में कहा था, सभी किसानों का 2.00 लाख तक का कर्ज माफ करेंगे। जिसमें सहकारी बैंक एवं राष्ट्रीयकृत बैंकों का चालू एवं कालातीत कर्ज शामिल रहेगा। कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने वादा किया था कि सरकार बनते ही 10 दिन में कर्ज माफ कर देंगे, नहीं तो मुख्यमंत्री बदल देंगे। 17 दिसंबर 2018 को शपथ लेने के 11 माह बाद भी किसानों का पूरा कर्ज माफ नहीं हुआ और ना ही मुख्यमंत्री ही बदले गए। मप्र की कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार 25 प्रतिशत किसानों की भी कर्ज माफी नहीं कर पायी है। इस कारण किसान भरोसे में फसल बीमा सहित अन्य सुविधाओं से भी वंचित रह गया। कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में जीरो प्रतिशत ब्याज योजना का वास्तविक लाभ देने का वचन दिया था। खरीफ ऋण की डयू-डेट 31 दिसंबर तय करेंगे का वादा दिया था, लेकिन ऐसा अभी तक नहीं किया। मप्र के किसान को कालातीत घोषित कर दंड ब्याज सहित कर्ज की वसूली की जा रही है तथा किसानों का सहकारी एवं राष्ट्रीकृत बैंकों से पुर्न ऋण वितरण भी नहीं हो पा रहा है। वित पोषण नहीं होने से किसानों का काम प्रभावित हो रहा है।कांग्रेस को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाएिह कि जब विधानसभा चुनाव में दो लाख की कर्ज माफी का वदा किया था तो उसके लिए धन का प्रावधान क्यों नहीं किया गया था। बात-बात पर केंद्र सरकार को कोसने वाली मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार ने सीधे-सीधे किसानों को धोखा दिया है।
आपदा प्रबंधन और बाद मुआवजा व राहत राशि देने में नाकाम कांग्रेस सरकार
इस वर्ष प्रदेश के 52 जिलों में से 32 जिलों में अतिवर्षा से आई बाढ में हजारों घर बह गए, मवेशी, गाय, भैंस आदि हजारों की संख्या में बहकर मर गए। किसानों के घरों में रखी सोयाबीन, गेंहूं, सरसों, लहसुन, चना आदि फसलें नष्ट हो गई। घरों की तबाही ऐसी हुई कि सर छुपाने की जगह नहीं बची। मुख्यमंत्री, मंत्री प्रभावित गांवों में समय पर नहीं पहुंचें। सरकार आपदा प्रबंधन में पूर्ण रूप से नाकाम रही है। मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार अति वृष्टि से क्षतिग्रस्त फसलों का निर्धारित मापदंडों के अनुसार विधिवत आंकलन कर आज दिनांक तक कोई रिपोर्ट जमा नहीं कि गई अनुमानित आंकडों के बल पर ही मात्र शिगुफेबाजी करने का कार्य हुआ है। वहीं दूसरी ओर केंद्र की मा. नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने मध्यप्रदेश के किसानों के प्रति अपना संवेदनशील रवैया रखते हुए किसानों को राहत देने के लिए 1000 करोड की राशि प्रदेश सरकार को दी है। अब प्रदेश की कांग्रेस सरकार बताए की यह राशि कितने किसानों को वितरित की गई।
कमलनाथ सरकार के पास इस बात का क्या जवाब है कि जब हमारी सरकार ने गेहूं पर 200 रूपए प्रति क्विंटल अतिरिक्त देने के साथ-साथ सालभर में लगभग 33 हजारा करोड रूपया मध्यप्रदेश के किसानों को बिना केंद्र की मदद के दिया था। तो फिर कमलनाथ सरकार किसानों की फसल की सामान्य खरीदी करने में भी धान का रोना क्यों रो रही है।
यूरिया का संकट निकम्मी और संवेदनहीन कांग्रेस सरकार की उपज
केंद्र में कांग्रेस की नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौर में देशभर में यूरिया की कालाबाजारी जोरों पर थी। किसानों को यूरिया के संकट से जूझना पडता था, यूरिया मांगने वाले किसानों पर लाठी चार्ज की घटनाएं आम थी। केंद्र में मा. नरेंद्र मोदी जी की सरकार आने के बाद देश में यूरिया की उपलब्धता किसानों तक करने के लिए सार्थक प्रयास किए गए। संकट समाप्त किए गए, कालाबाजारी और अन्य उपयोग रोकने के लिए नीम कोटेड यूरिया का उत्पादन कराया गया। मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार रहते हुए किसानों को यूरिया की उपलब्धता समय से पहले सुनिश्चित करा ली जाती थी। अब मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार में फिर वही दौर लौटकर आ गया। यूरिया मांगने वाले किसानों की लंबी लाइनें दिखाई देने लगी, किसान परेशान है, लेकिन लगातार तबादलों में तत्लीन, रेत और शराब के कारोबार में व्यप्त कांग्रेस की सरकार किसानों के प्रति संवेदनशील बनी रहीं। रबी की फसल प्रदेश में कितने हेक्टेयर में बोई गई इसका आंकलन सरकार करने में नाकाम सिद्ध हुई, बल्कि ऐसा करने का सरकार की और से विधिवत कोई कार्य भी नहीं हुआ, जिस कारण किसानों की मांग के अनुसार खाद विशेषकर यूरिया का संकट पैदा हो गया। कांग्रेस सरकार करप्शन, कालाबाजारी और कुशासन का प्रतीक बनकर किसानों के संकट का कारण बन गई है। केंद्र की मोदी सरकार मांग के अनुसार यूरिया उपलब्ध कराने को लगातार तत्पर रही है और आपूर्ति में केंद्र सरकार की ओर से कोई बाधा नहीं है।
धान की समर्थन मूल्य पर खरीदी की ना व्यवस्था और ना ही मंशा
खरीब की फसल विशेषकर धान की समर्थन मूल्य पर खरीदी करने का प्रबंधन आज दिनांक तक प्रदेश सरकार द्वारा नहीं किया गया है। दो दो बार खरीदी करने की तारीखें बढाई गई है। आज भी खरीदी करने के लिए आवश्यक संसाधान नहीं जुटाए गए है और ना ही व्यवस्थागत तैयारियां की गई है। मजबूरन समर्थन मूल्य से नीचे अपनी उपज बेचने पर किसान मजबूर है।
खेती के लिए किसानों को 12 घंटे बिजली दे सरकार
कांग्रेस ने वचन पत्र में कहा था, किसानों को थ्री-फेस की बिजली प्रतिदिन 12 घंटे देना सुनिश्चित करेंगे, सिजमें कम से कम 8 घंटे दिन का समय रहेगा। सरकार नियमित रूप से खेती के लिए दिन में 12 घंटे बिजली देने का वचन पूरा करें और ग्रामीण क्षेत्रों में अविलंब कटौती बंद कर नियमित रूप से दिन में 24 घंटे घरेलू बिजली आपूर्ति करे।
पिछले साल गेहूं के समर्थन मूल्य में 160 रूपया प्रति क्विंटल अतिरिक्त राशि किसानों को देने का वादा कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने किया था और इसे बकायदा विधानसभा को आश्वस्त किया था, लेकिन किसानों के साथ धोखेबाज सरकार ने वह राशि आज दिनांक तक किसानों को नहीं दी। इससे यह स्पष्ट होता है कि न केवल कांग्रेस सरकार की कथनी और करनी में अंतर है, बल्कि गुमराह करना, धोखा देना इनकी आदत है।

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