शरद पवार ने बताया कि अजित पवार को क्यों रखा गया शपथ से दूर

नई दिल्ली। शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी के गठबंधन की महाराष्ट्र में सरकार बनने के बाद एनसीपी चीफ शरद पवार ने पहली बार पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर बात की। पीएम मोदी के साथ हुई मुलाकात से लेकर, सोनिया गांधी से मुलाकात और यहां तक कि अजित पवार के बगावती तेवर पर भी उन्होंने बात की। एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में शरद पवार ने अजित पवार के बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने के मुद्दे पर भी बात की।

अजित ने माना कि बीजेपी के साथ जाकर गलती की थी

इस दौरान शरद पवार ने कहा कि अजित पवार ने माना कि बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाना उनकी गलती थी। शरद पवार ने कहा कि उनको 23 नवंबर की सुबह जब अजित के बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने की बात मालूम हुई तो वे हैरान थे। तब उन्होंने ये तय किया कि पहले ये सब ठीक करना होगा। इसके बाद उद्धव ठाकरे के साथ उन्होंने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की। दूसरी तरफ अजित पवार के साथ राजभवन जाने वाले सारे विधायक उनके खेमे में वापस लौट आए थे।

पार्टी ने कहा- अजित को शपथ ग्रहण से दूर रखना चाहिए’

शरद पवार बोले, ‘बीजेपी के साथ जाने से पहले तक अजित को पार्टी में नंबर 2 के रूप में माना जाता था। अजित ने 22 नवंबर को एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना के बीच लंबी बातचीत के बीच बीजेपी के साथ जाने का फैसला लिया था। उनको बताया गया था कि शपथ ग्रहण तुरंत होना है। बाद में अजित ने मुझसे कहा कि उन्होंने गलती की है।’ शरद पवार ने ये बातें उद्धव ठाकरे के विश्वास मत जीतने के तीन दिन बाद कही।

मुझे पार्टी के भीतर सबकुछ ठीक करना था- पवार

अजित पवार को लेकर शरद पवार ने कहा कि पार्टी में आम राय बनी थी कि शपथ ग्रहण से उनको दूर रहना चाहिए, ये फैसला सोच-समझकर लिया गया था। इसके बाद जयंत पाटिल और भुजबल को शपथ दिलाई गई। पार्टी ने एक संदेश दिया कि ऐसे वक्त में जो पार्टी के साथ खड़े रहते हैं, पार्टी उनका ध्यान रखती है। उन्होंने कहा कि परिवार के सभी लोगों का मानना था कि अजित ने जो किया वह बहुत गलत था। वहीं, अजित का साथ देने वालों को जब मालूम हुआ कि इसके पीछे मैं नहीं हूं, तब साथ गए विधायकों पर भी दवाब बढ़ गया और वे वापस आ गए। हालांकि, शरद पवार ने ये भी संकेत दिया कि पार्टी के अधिकांश नेता चाहते थे कि अजित वापस आएं और उनके बीच रहें।

रामा काॅम्पलेक्स ने लील ली दो जिंदगियां और प्रशासन मौन, चेंबर नेता अज्ञातवास पर

ग्वालियर। गणेश काॅलोनी में निर्माणाधीन रामा काॅम्पलेक्स की मिटटी धंसकने से दो मजदूरों की हुई मौत के बाद अब तक प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है। निर्माणाधीन काॅम्पलेक्स के मालिक चेंबर नेता अज्ञातवास पर है और काला पीला कर मामला निपटाने की कोशिश में लगे है।
यहां बता दें कि चेंबर के संयुक्त सचिव सुरभी होटल के मालिक बृजेश गोयल का नया बाजार की गणेश कालोनी में रामा काॅम्पलेक्स का निर्माण कार्य चल रहा है। बीती सुबह अचानक मिटटी धंसकने से उसमे तीन मजदूर दब गये। जिसमें दो मजदूरों पिंकी और करण की मौत हो गई थी। जबकि तीसरे मजदूर का इलाज चल रहा है। हादसे के बाद से चेंबर के संयुक्त सचिव मामले को रफादफा करने में लगे है। इसके लिए जेब तक ढीली करने को वह तैयार है। इधर प्रशासन इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी चुप है। निर्माणाधीन कार्य व मालिक के खिलाफ अब तक कोई ऐक्शन लिया गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार पूरा निर्माण कार्य अवैध है। लेकिन निगम प्रशासन के संरक्षण में चल रहा है। जब पैसों का खेल है।

आपसी खींचतान के बीच तीन मंडल अध्यक्षों का ऐलान, कार्यकर्ता नाराज

ग्वालियर। भारतीय जनता पार्टी के तीन मंडल अध्यक्षों की घोषणा गत रोज कर दी गई। लेकिन उससे पहले जमकर खींचतान चली। सिफारिशों का दौर भी हुआ। हालांकि कार्यकताओं का साफ कहना है कि ठाकुरों की लड़ाई में कार्यकारिणी अटकी रही है और जो भी जारी हो रही है उनमे सिर्फ गुटीय नेताओं का बोलबाला है। ऐसे संगठनात्मक चुनाव का कोई फायदा नहीं, जिसमे असल कार्यकर्ता को तबज्जो नहीं दी जा रही। चुनाव सहचुनाव अधिकारी पूर्व सभापति लालजी जादौन की देखरेख में हुये है। भोपाल में संभावित नामों पर विचार करने के बाद ग्वालियर, ग्वालियर पूर्व और ग्वालियर दक्षिण के मंडल अध्यक्षों का ऐलान किया गया है।

एक साल बीतने को है अब तो कर्ज माफी का वचन निभाए सरकार: उमाशंकर गुप्ता

ग्वालियर। आज हम देखते हैं कि मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार सभी मोर्चों पर फेल हुई है, कांग्रेस अपने वचन पत्र का एक भी वचन पूरा करने में नाकारा सरकार साबित हुई है। मध्य प्रदेश चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने अपने वचन पत्र में जनता से जो वायदे किए थे कि कांग्रेस की सरकार बनेगी तो, उनको पूरा करेंगे लेकिन नहीं किया। किसानों की बात करें तो कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने भोपाल में कहा था कांग्रेस की सरकार बनते ही 10 दिन में किसानों का कर्जा माफ किया जाएगा नहीं तो 10 दिन में मुख्यमंत्री साफ किए जाएगा, आज वह खुद साफ हो गए। उक्त बात सोमवार को पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता एवं पूर्व साडा अध्यक्ष जयसिंह कुशवाह ने होटल रमाया में आयोजित भारतीय जनता पार्टी की प्रेसवार्ता में कही।
इस अवसर पर जिला अध्यक्ष देवेश शर्मा, जिला महामंत्री महेश उमरैया, जिला उपाध्यक्ष रामेश्वर भदौरिया, संभागीय मीडिया प्रभारी पवनकुमार सेन उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में कहा था, सभी किसानों का 2.00 लाख तक का कर्ज माफ करेंगे। जिसमें सहकारी बैंक एवं राष्ट्रीयकृत बैंकों का चालू एवं कालातीत कर्ज शामिल रहेगा। कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने वादा किया था कि सरकार बनते ही 10 दिन में कर्ज माफ कर देंगे, नहीं तो मुख्यमंत्री बदल देंगे। 17 दिसंबर 2018 को शपथ लेने के 11 माह बाद भी किसानों का पूरा कर्ज माफ नहीं हुआ और ना ही मुख्यमंत्री ही बदले गए। मप्र की कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार 25 प्रतिशत किसानों की भी कर्ज माफी नहीं कर पायी है। इस कारण किसान भरोसे में फसल बीमा सहित अन्य सुविधाओं से भी वंचित रह गया। कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में जीरो प्रतिशत ब्याज योजना का वास्तविक लाभ देने का वचन दिया था। खरीफ ऋण की डयू-डेट 31 दिसंबर तय करेंगे का वादा दिया था, लेकिन ऐसा अभी तक नहीं किया। मप्र के किसान को कालातीत घोषित कर दंड ब्याज सहित कर्ज की वसूली की जा रही है तथा किसानों का सहकारी एवं राष्ट्रीकृत बैंकों से पुर्न ऋण वितरण भी नहीं हो पा रहा है। वित पोषण नहीं होने से किसानों का काम प्रभावित हो रहा है।कांग्रेस को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाएिह कि जब विधानसभा चुनाव में दो लाख की कर्ज माफी का वदा किया था तो उसके लिए धन का प्रावधान क्यों नहीं किया गया था। बात-बात पर केंद्र सरकार को कोसने वाली मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार ने सीधे-सीधे किसानों को धोखा दिया है।
आपदा प्रबंधन और बाद मुआवजा व राहत राशि देने में नाकाम कांग्रेस सरकार
इस वर्ष प्रदेश के 52 जिलों में से 32 जिलों में अतिवर्षा से आई बाढ में हजारों घर बह गए, मवेशी, गाय, भैंस आदि हजारों की संख्या में बहकर मर गए। किसानों के घरों में रखी सोयाबीन, गेंहूं, सरसों, लहसुन, चना आदि फसलें नष्ट हो गई। घरों की तबाही ऐसी हुई कि सर छुपाने की जगह नहीं बची। मुख्यमंत्री, मंत्री प्रभावित गांवों में समय पर नहीं पहुंचें। सरकार आपदा प्रबंधन में पूर्ण रूप से नाकाम रही है। मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार अति वृष्टि से क्षतिग्रस्त फसलों का निर्धारित मापदंडों के अनुसार विधिवत आंकलन कर आज दिनांक तक कोई रिपोर्ट जमा नहीं कि गई अनुमानित आंकडों के बल पर ही मात्र शिगुफेबाजी करने का कार्य हुआ है। वहीं दूसरी ओर केंद्र की मा. नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने मध्यप्रदेश के किसानों के प्रति अपना संवेदनशील रवैया रखते हुए किसानों को राहत देने के लिए 1000 करोड की राशि प्रदेश सरकार को दी है। अब प्रदेश की कांग्रेस सरकार बताए की यह राशि कितने किसानों को वितरित की गई।
कमलनाथ सरकार के पास इस बात का क्या जवाब है कि जब हमारी सरकार ने गेहूं पर 200 रूपए प्रति क्विंटल अतिरिक्त देने के साथ-साथ सालभर में लगभग 33 हजारा करोड रूपया मध्यप्रदेश के किसानों को बिना केंद्र की मदद के दिया था। तो फिर कमलनाथ सरकार किसानों की फसल की सामान्य खरीदी करने में भी धान का रोना क्यों रो रही है।
यूरिया का संकट निकम्मी और संवेदनहीन कांग्रेस सरकार की उपज
केंद्र में कांग्रेस की नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौर में देशभर में यूरिया की कालाबाजारी जोरों पर थी। किसानों को यूरिया के संकट से जूझना पडता था, यूरिया मांगने वाले किसानों पर लाठी चार्ज की घटनाएं आम थी। केंद्र में मा. नरेंद्र मोदी जी की सरकार आने के बाद देश में यूरिया की उपलब्धता किसानों तक करने के लिए सार्थक प्रयास किए गए। संकट समाप्त किए गए, कालाबाजारी और अन्य उपयोग रोकने के लिए नीम कोटेड यूरिया का उत्पादन कराया गया। मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार रहते हुए किसानों को यूरिया की उपलब्धता समय से पहले सुनिश्चित करा ली जाती थी। अब मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार में फिर वही दौर लौटकर आ गया। यूरिया मांगने वाले किसानों की लंबी लाइनें दिखाई देने लगी, किसान परेशान है, लेकिन लगातार तबादलों में तत्लीन, रेत और शराब के कारोबार में व्यप्त कांग्रेस की सरकार किसानों के प्रति संवेदनशील बनी रहीं। रबी की फसल प्रदेश में कितने हेक्टेयर में बोई गई इसका आंकलन सरकार करने में नाकाम सिद्ध हुई, बल्कि ऐसा करने का सरकार की और से विधिवत कोई कार्य भी नहीं हुआ, जिस कारण किसानों की मांग के अनुसार खाद विशेषकर यूरिया का संकट पैदा हो गया। कांग्रेस सरकार करप्शन, कालाबाजारी और कुशासन का प्रतीक बनकर किसानों के संकट का कारण बन गई है। केंद्र की मोदी सरकार मांग के अनुसार यूरिया उपलब्ध कराने को लगातार तत्पर रही है और आपूर्ति में केंद्र सरकार की ओर से कोई बाधा नहीं है।
धान की समर्थन मूल्य पर खरीदी की ना व्यवस्था और ना ही मंशा
खरीब की फसल विशेषकर धान की समर्थन मूल्य पर खरीदी करने का प्रबंधन आज दिनांक तक प्रदेश सरकार द्वारा नहीं किया गया है। दो दो बार खरीदी करने की तारीखें बढाई गई है। आज भी खरीदी करने के लिए आवश्यक संसाधान नहीं जुटाए गए है और ना ही व्यवस्थागत तैयारियां की गई है। मजबूरन समर्थन मूल्य से नीचे अपनी उपज बेचने पर किसान मजबूर है।
खेती के लिए किसानों को 12 घंटे बिजली दे सरकार
कांग्रेस ने वचन पत्र में कहा था, किसानों को थ्री-फेस की बिजली प्रतिदिन 12 घंटे देना सुनिश्चित करेंगे, सिजमें कम से कम 8 घंटे दिन का समय रहेगा। सरकार नियमित रूप से खेती के लिए दिन में 12 घंटे बिजली देने का वचन पूरा करें और ग्रामीण क्षेत्रों में अविलंब कटौती बंद कर नियमित रूप से दिन में 24 घंटे घरेलू बिजली आपूर्ति करे।
पिछले साल गेहूं के समर्थन मूल्य में 160 रूपया प्रति क्विंटल अतिरिक्त राशि किसानों को देने का वादा कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने किया था और इसे बकायदा विधानसभा को आश्वस्त किया था, लेकिन किसानों के साथ धोखेबाज सरकार ने वह राशि आज दिनांक तक किसानों को नहीं दी। इससे यह स्पष्ट होता है कि न केवल कांग्रेस सरकार की कथनी और करनी में अंतर है, बल्कि गुमराह करना, धोखा देना इनकी आदत है।

डर के मारे मुसाफिरों को याद आ गए भगवान हवा में कांपने लगी चेन्नई से हैदराबाद जा रही फ्लाइट,

प़तीकात्मक फोटो ट्विटर से

डीजीसीए (DGCA) ने इंडिगो को निर्देश दिया था कि सभी पुराने ए320निओ विमानों को अब से प्रयोग में नहीं लाए। डीजीसीए ने यह भी साफ कर दिया था कि इंडिगो ए320निओ के सभी पुराने इंजन को नए इंजन से बदले वरना उसे उड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

चेन्नई से हैदराबाद (Chennai to Hyderabad ) जा रहे इंडिगो के ए320निओ (A320 Neo) विमान के एक प्रैट एंड व्हिटनी (PW) इंजन में कोई गड़बड़ी आने की खबर सामने आई है। यह विमान सोमवार ( 02 दिसंबर) को उड़ान भरी थी। इस घटना की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि विमान में गड़बड़ी उड़ते समय महसूस की गई थी जिसे सुरक्षित हैदराबाद उतर लिया गया था। वहीं इंडिगो ने बताया कि इसके सुरक्षित उतरने के बाद पीडब्ल्यू इंजन में काफी कंपन देखा गया था जिसकी जांच की जा रही है। इससे पहले डीजीसीए ने इंडिगो को निओ विमानों के सभी पुराने इंजन को बदलने को कहा था। इस घटना की खबर मिलते ही विमान में सवार यात्रियों में हड़कंप मच गया था।

क्या कहा इंडिगो नेः इंडिगो (IndiGo) ने एक बयान में कहा, ‘दो दिसंबर को चेन्नई से हैदराबाद जा रही उड़ान संख्या 6ई-6215 (6E-6215) के हैदराबाद में उतरने के बाद विमान चालक ने इंजन में कंपन महसूस किया। विमान को परिचालन से हटा दिया गया है। मरम्मत और जांच संबंधी आवश्यक काम जारी है।’ सूत्र ने बताया कि जिस पीडब्ल्यू इंजन में गड़बड़ी आई है, उसे बदला जाएगा।

डीजीसीए ने सभी पुराने इंजनों को बदलने का दिया निर्देशः बता दें कि 25 नवंबर को डीजीसीए (DGCA) ने इंडिगो को निर्देश दिया था कि सभी पुराने ए320निओ विमानों को अब से प्रयोग में नहीं लाए। उसने यह भी साफ कर दिया था कि इंडिगो ए320निओ के सभी पुराने इंजन को नए इंजन से बदले वरना उसे उड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बता दें कि डीजीसीए ने ऐसा इसलिए कहा था क्योंकि यात्रियों द्वारा फ्लाइट के कैंसिल होने की भी बहुत शिकायतें आ रही थी। डीजीसीए ने इसके लिए इंडिगो को 30 जनवरी 2020 तक का समय दिया था।

इंडिगो है भारती की सस्ती हवाई यात्रा वाली कंपनीः इंडिगो ए320निओ विमान दुनिया की सबसे बड़ी ग्राहक एयरबस A320 नियो परिवार का विमान है। डीजीसीए के इस फैसले से कंपनी पर इसका भारी असर पड़ेगा। बता दें कि इंडिगो घरेलु हवाई यात्रा में सबसे सस्ते दर पर सफर कराने के लिए जाना जाता है। भारत में इंडिगो एक अलग ही पहचान बना चुका है।

भोपाल गैस कांड: मानव इतिहास की सबसे भयावह गैस त्रासदी की सिर्फ बरसी पर ही क्यों आती है याद

भोपाल गैस त्रासदी

भोपाल गैस त्रासदी, मानव इतिहास में अबतक विश्व की सबसे भयावह और दर्दनाक ओद्योगिक त्रासदी में से एक है। त्रासदी के पीड़ितों के लिए ये एक ऐसा जख्म है जो 34 साल बाद आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। 33 साल पहले, 2 दिसंबर, 1984 की रात को भोपाल में यूनियन कार्बाइड की फैक्टरी से निकली कम से कम 30 टन अत्यधिक जहरीले गैस मिथाइल आइसोसाइनेट ने हजारों लोगों की जान ले ली थीं। 

उस सुबह यूनियन कार्बाइड के प्लांट नंबर ‘सी’ में हुए रिसाव से बने गैस के बादल को हवा के झोंके अपने साथ बहाकर ले जा रहे थे और लोग मौत की नींद सोते जा रहे थे। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस दुर्घटना के कुछ ही घंटों के भीतर तीन हजार लोग मारे गए थे। हालांकि, गैरसरकारी स्रोत मानते हैं कि ये संख्या करीब तीन गुना जयादा थी।

त्रासदी के दुष्प्रभाव जारी, आज की पीढ़ी भी है प्रभावित: 

33 साल बाद भी, गैस के संपर्क में आने वाले कई लोगों ने शारीरिक और मानसिक रूप से अक्षम बच्चों को जन्म दिया है। हालांकि लोग तो दशकों से, साइट को साफ करने के लिए भी लड़ रहे हैं, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, 2001 में मिशिगन स्थित डॉव केमिकल के यूनियन कार्बाइड पर कब्जा करने के बाद कार्य धीरे हो गया। 

मानवाधिकार समूह कहते हैं कि हजारों टन खतरनाक अपशिष्ट भूमिगत दफनाया गया है, और यहां तक की  सरकार ने स्वीकार किया है कि क्षेत्र दूषित है। स्वस्थ को लेकर हालात कुछ ऐसे हैं की, भोपाल गैस कांड के बाद सरकार की ओर से बनाए गए गैस राहत विभाग में हर माह दर्जन भर आवेदन ऐसे आते हैं, जिसमें कैंसर के इलाज के लिए आर्थिक सहायता की मांग की जाती है। 

बता दें की इस गैस त्रासदी में पांच लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए थे। हजारों लोग की मौत तो मौके पर ही हो गई थी. जिंदा बचे लोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। कैंसर एक अकेली बीमारी नहीं है, जिससे गैस प्रभावित लोग जूझ रहे हैं, सैकड़ों बीमारियां हैं। घटना के 33 साल बाद भी गैस कांड के दुष्प्रभाव खत्म नहीं हो रहे हैं। 

मुआवजे जो सिर्फ वादे बनकर रह गए: 
 

दुर्भाग्यवश, इतने सालों में घटना को हर बार बरसी के याद कर लिया जाता है, दोषी को सजा दिलाने और अतिरिक्त मुआवजा दिलाने के तमाम वादे किए जाते हैं। लेकिन दिन गुजरते ही वादों को घटना की तरह दफन कर दिया जाता है। 

चूंकि, यूनियन कार्बाइड कारखाने का मालिकाना अधिकार अमेरिका की कंपनी के पास होने के कारण हमेशा यह मांग उठती रही है कि गैस पीड़ितों को मुआवजे की मांग डॉलर के वर्तमान मूल्य पर की जाना चाहिए। हालांकि, इस याचिका में दिए गए निर्देश अभी भी सरकारी फाइलों में ही बंद हैं। 

इसके लिए वर्ष 2010 में एक पिटिशन सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गयी थी। इस पीटिशन में 7728 करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग की गई थी। कंपनी से वर्ष 1989 में जो समझौता हुआ था, उसके तहत 705 करोड़ रुपए मिले हैं। सरकार का तर्क है कि गैस कांड से प्रभावित और मृतकों की संख्या बढ़ी है, इस कारण मुआवजा भी बढ़ाना चाहिए। 

निर्भया की मां ने कहा, ‘राहुल गांधी की वजह से पायलट बन पाया मेरा बेटा’

निर्भया का भाई आसमान छूने को पूरी तरह तैयार है. वह पेशेवर पायलट बन गया है और उसके सपने को पूरा करने में जिस शख्‍स ने मदद की है वह और कोई नहीं बल्‍कि कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी हैं.

निर्भया का भाई पायलट बनकर तैयार हैनिर्भया की मां ने इसका पूरा श्रेय राहुल गांधी को द‍िया हैराहुल गांधी लगातार निर्भया के भाई के संपर्क में थे

नई द‍िल्‍ली : पांच साल पहले 16 दिसंबर 2012 को सामुहिक बलात्‍कार के बाद निर्भया ने 29 दिसंबर को सिंगापुर के अस्पताल में दम तोड़ दिया था . तब से निर्भया का पूरा परिवार शोक में डूबा हुआ था, लेकिन अब उनके घर में भी खुश‍ियों ने दस्‍तक दी है. दरअसल, निर्भया का भाई अब आसमान छूने को पूरी तरह तैयार है. वह पेशेवर पायलट बन गया है और उसके सपने को पूरा करने में जिस शख्‍स ने मदद की है वह और कोई नहीं बल्‍कि राहुल गांधी हैं.

निर्भया की मां आशा देवी ने मीडिया  को बताया है कि राहुल गांधी की बदौलत उनका बेटा पायलट बन पाया. राहुल गांधी ने न सिर्फ पढ़ाई-लिखाई का पूरा खर्चा उठाया बल्‍कि वो लगातार उनके संपर्क में भी रहे. वे उनके बेटे को फोन कर सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करते रहे और ये समझाते रहे कि आसानी से हार नहीं माननी हैं. 

आशा देवी के मुताबिक, ‘वो राहुल गांधी ही हैं जिन्‍होंने उसे परिवार को सहारा देने के खातिर कुछ अच्‍छा करने और लक्ष्‍य हासिल करने के लिए प्रेरित किया. यह जानने के बाद कि वो डिफेंस फोर्स ज्‍वॉइन करना चाहता है राहुल ने उसे स्‍कूल पूरा करने के बाद पायलट की ट्रेनिंग लेने का सुझाव दिया.’ 

उन्‍होंने यह भी बताया कि राहुल उनके बेटे से फोन पर बातें भी किया करते थे और उसे सिखाते थे कि कभी हिम्‍मत नहीं हारनी चाहिए.’ इस वक्‍त निर्भया का भाई गुड़गांव में ट्रेनिंग के आखिरी चरण में है और जल्‍द ही वो कमर्शियल एयर प्‍लेन उड़ाने लगेंगे.

गौरतलब है कि 16 दिसंबर 2012 की रात निर्भया के साथ एक चलती बस में गैंगरेप हुआ था. उसके साथ 6 लोगों ने ऐसी हैवानियत की कि 29 दिसम्बर को उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी. उस वक्‍त निर्भया का भाई 12वीं में पढ़ रहा था. साल 2013 में उसने राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली स्‍थित इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय उड़ान एकेडमी में एडमिशन ले लिया था. निर्भया का सबसे छोटा भाई पुणे से इंजीनियरिंग कर रहा है.

गुरूजियों ने मांगी 1997 से वरिष्ठता, विरोध प्रदर्शन कर दिया ज्ञापन


शिवपुरी:- शिक्षा विभाग में 1997 से बच्चों को पढ़ाकर शिक्षा की अलख जगाने वाले गुरूजी अब अपनी वरिष्ठता को लेकर मुखर होने लगे हैं। गुरूजी से बने प्राथमिक शिक्षकों ने रविवार को अपने प्रदेश व्यापी आंदोलन के क्रम में डिप्टी कलेक्टर मनोज गरवाल को मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाध्यक्ष नंद किशोर पाण्डेय के नेत्रत्व में सौंपा। गुरूजियों की अपनी एक मात्र मांग 1997 से वरिष्ठता को लेकर कहना है कि जव अन्य वर्गों को नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता का लाभ दिया गया तो हमें आज तक इस लाभ से क्यॅॅू वंचित रखा गया।
म.प्र. गुरूजी संविदा अध्यापक संघ के जिलाध्यक्ष नंद किशोर पाण्डेय ने बताया कि यह ज्ञापन संघ के प्रदेशाध्यक्ष गजेन्द्र सिंह गुर्जर के आव्हान पर जिलाधीश के प्रतिनिधि शिवपुरी डिप्टी कलेक्टर मनोज गरवाल को सौंपा है। अगर हमें वरिष्ठता का लाभ नही दिया गया तो संघ आंदोलन करने को वाध्य होगा।
गुरूजियों के इस आंदोलन को कर्मचारी कांगे्रस के जिलाध्यक्ष राजेन्द्र पिपलौदा, प्रांतीय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राज कुमार सरैया, राज्य कर्मचारी संघ के संभागीय उपाध्यक्ष विपिन पचैरी, कर्मचारी कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष अरविन्द सरैया, आजाद अध्यापक संघ के जिलाध्यक्ष सुनील वर्मा, अध्यापक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अमरदीप श्रीवास्तव, पेंशन बहाली संघ के जिलाध्यक्ष जनक सिंह रावत एवं प्रदेश कोर कमेटी के सदस्य मनमोहन रावत ने भी समर्थन किया है।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से जयकुमार शर्मा, प्रवक्ता मनोज शर्मा, अमर सिंह कोटिया, फतेह सिंह गुर्जर, धर्मेन्द यादव, सुनील शर्मा, मनोज शर्मा, नरेश शर्मा, रामकुमार शर्मा, रामखिलोना यादव, राकेश रजक, नरेन्द्र अग्रवाल,महेन्द्र पुरी गोस्वामी, रोशन कुशवाह, अनिल दांगी, जितेन्द्र शर्मा, गजेन्द्र सिकरवार, अनिल बाजपेयी, अशोक श्रीवास्तव, हरगोविन्द रावत, गोविन्द मित्तल, रमाकांत भार्गव, नरेन्द्र शर्मा, श्रीमती कृष्णा गौतम, मंजूलता शर्मा, संगीता भार्गव, आदि शामिल थे।