भय्यूजी महाराज ने खुद को गोली मारकर की खुदकुशी, जानें 5 बातें

भय्यूजी महाराज ने खुद को गोली मारकर की खुदकुशी, जानें 5 बातें

आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज ने खुद को गोली मारकर खुदकुशी कर ली है. उन्होंने सिर में गोली मारी थी. उन्हें इंदौर के बॉम्बे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

इंदौर: आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज ने खुद को गोली मारकर खुदकुशी कर ली है. उन्होंने सिर में गोली मारी थी. उन्हें इंदौर के बॉम्बे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. भय्यूजी महाराज उस वक्त सुर्खियों में आए थे जब इन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे का अनशन तुड़वाने में अहम रोल निभाया था. भय्यूजी महाराज का जीवन परिचय बेहद दिलचस्प है. इनका वास्तविक नाम उदय सिंह शेखावत है, लेकिन मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में इन्हें लोग भय्यूजी महाराज के नाम से जानते हैं. भय्यूजी महाराज एक ऐसे आध्यात्मिक गुरु थे जो गृहस्थ जीवन जीते थे. उनकी एक बेटी कुहू है. हाल ही में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दिया था, जिसे इन्होंने लेने से इनकार कर दिया था.
आइए भय्यूजी महाराज से जुड़ी 5 बातें जानते हैं. -:

1. भैय्यूजी महाराज मॉडल रह चुके हैं. मॉडलिंग का करियर छोड़कर उन्होंने आध्यात्म का रास्ता चुना था . वे सियाराम शूटिंग के मॉडल रह चुके हैं.

कभी खेतों की जुताई करते देखे जाते, तो कभी क्रिकेट खेलते हुए. घुड़सवारी और तलवारबाजी में भी वे पारंगत थे. 

3. 29 अप्रैल 1968 में मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के शुजालपुर में जन्मे भय्यूजी के चहेतों के बीच धारणा है कि उन्हें भगवान दत्तात्रेय का आशीर्वाद हासिल है. महाराष्ट्र में उन्हें राष्ट्र संत का दर्जा मिला हुआ थे. वह सूर्य की उपासना करते थे. घंटों जल समाधि करने का उनका अनुभव थे. 

4. भैय्यूजी महाराज के ससुर महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे हैं. केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख से उनके करीबी संबंध थे. बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी से लेकर संघ प्रमुख मोहन भागवत भी उनके भक्तों की सूची में हैं. महाराष्ट्र की राजनीति में उन्हें संकटमोचक के तौर पर देखा जाता था. 

5. भय्यूजी महाराज ग्लोबल वॉर्मिंग से भी चिंतित थे, इसीलिए गुरु दक्षिणा के नाम पर एक पेड़ लगवाते थे. 18 लाख पेड़ उन्होंने लगवाए थे. आदिवासी जिलों देवास और धार में उन्होंने करीब एक हजार तालाब खुदवाए थे. वह नारियल, शॉल, फूलमाला भी नहीं स्वीकारते.

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