पाकिस्तानी सेना की गीदड़भभकी, 5 हों या फिर 500 राफेल फाइटर जेट, हम हैं तैयार

इस्‍लामाबाद
पाकिस्‍तान के स्‍वतंत्रता दिवस पर गुरुवार पाकिस्‍तानी सेना ने गीदड़भभकी दी कि भारत चाहे 5 राफेल खरीदे या 500 हम पूरी तरह से तैयार हैं। पाकिस्‍तानी सेना के प्रवक्‍ता मेजर जनरल बाबर इफ्तिखार ने कहा कि भारत ने फ्रांस से राफेल फाइटर जेट खरीदे हैं लेकिन हम भारतीय सेना के किसी भी आक्रामक कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। जनरल बाबर ने यह भी दावा किया कि भारत के S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम से भी निपटने के लिए पाकिस्‍तानी सेना तैयार है।

पाकिस्‍तानी सेना के प्रवक्‍ता ने दावा किया कि भारत का सेना पर खर्च दुनिया में सबसे ज्‍यादा है और वह हथियारों की होड़ में शामिल है। उन्‍होंने कहा, ‘जिस तरह से फ्रांस से भारत तक की राफेल की यात्रा को कवर किया गया, वह उनके असुरक्षा के स्‍तर को दर्शाता है। फिर भी चाहे वे 5 राफेल खरीदें या 500 हम तैयार हैं। हम पूरी तरह से तैयार हैं और हमें अपनी क्षमता पर कोई संदेह नहीं है। हमने यह साबित किया है और यह राफेल जेट कोई खास फर्क नहीं पैदा करने जा रहा है।’

राफेल फाइटर लाएं या एस-400, हम तैयार हैं’

जनरल बाबर ने कहा, ‘लेकिन हां, हमारी तुलना में भारत का रक्षा बजट और उनका बजट क्षेत्र में परंपरागत संतुलन को प्रभावित कर रहा है। और जब यह होगा तो चीजें अन्‍य हिस्‍सों में चली जाएंगी और अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय को इस पर ध्‍यान देना चाहिए।’ पाकिस्‍तान के बढ़ते रक्षा बजट पर देश में हो रही आलोचनाओं पर जनरल बाबर ने सफाई दी। उन्‍होंने दावा किया कि पाकिस्‍तानी सेना का रक्षा बजट लगातार कम हो रहा है।

पाकिस्‍तानी सेना के प्रवक्‍ता ने कहा, ‘चाहे (भारतीय) राफेल लाएं या S-400 म‍िसाइल डिफेंस सिस्‍टम, उन्‍हें लाने दीजिए। हमारी अपनी तैयारी है और हर चीज के लिए हमारे पास जवाब है।’ उन्‍होंने आरोप लगाया कि कश्‍मीर में भारत पूरी साजिश के तहत जनसंख्‍या को बदलना चाहता है। कश्‍मीर में आम नागरिकों पर गोले बरसानी वाली पाकिस्‍तानी सेना के प्रवक्‍ता ने भारत पर सीजफायर उल्‍लंघन का आरोप लगाया। बता दें कि राफेल विमान विमान आने के बाद पहली बार पाकिस्‍तानी सेना ने अपनी प्रतिक्रिया जताई है।

एक राफेल जेट को रोकने क‍ि लिए दो एफ-16 की जरूरत

बता दें कि पाकिस्‍तानी सेना की यह बेचैनी बेहद वाजिब है। राफेल के आने से अब पाकिस्तान में घुसकर एयर स्ट्राइक करने वाली भारतीय वायुसेना की ताकत और बढ़ गई है। इराक और लीबिया में अपने युद्ध कौशल का शानदार प्रदर्शन करने वाले राफेल लड़ाकू विमानों की सीधी टक्‍कर पाकिस्‍तान के अमेरिका निर्मित एफ-16 फाइटर जेट से होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, राफेल जंग में ‘गेमचेंजर’ साबित होगा और इसके आने पर पाकिस्‍तानी एयरफोर्स पर दबाव काफी बढ़ जाएगा।

यही नहीं पाकिस्‍तानी एयरफोर्स को अब एक राफेल फाइटर जेट को रोकने क‍ि लिए अपने दो एफ-16 लड़ाकू विमान लगाने पड़ेंगे। अभी तक स्थिति यह है कि भारत को एक एफ-16 रोकने के लिए दो सुखोई-30एमकेआई विमान तैनात करने पड़ते हैं। इंडियन एयरफोर्स के पूर्व चीफ एवाई टिपणिस का मानना है कि यदि एयरफोर्स के पास फरवरी में बालाकोट हमले के दौरान राफेल होता तो भारत पाकिस्‍तान के कम से कम 12 एफ-16 विमानों को मार गिराता। यही नहीं भारत को बालाकोट में एयर स्‍ट्राइक करने के लिए पाकिस्‍तानी हवाई क्षेत्र में नहीं घुसना पड़ता।

इंदौर में एन-95 वाल्व मास्क तथा वाल्व युक्त अन्य मास्क का उपयोग प्रतिबंधित

इंदौर। इंदौर जिले में जन स्वास्थ्य की दृष्टि से एन-95 वाल्व मास्क (Particular With Valved Respirator) एवं अन्य एन-95 से भिन्न किसी भी वाल्व युक्त मास्क का उपयोग आमजन के लिये तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया गया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी मनीष सिंह ने इस संबंध में दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा-144 के तहत आदेश जारी किया है।

जारी आदेशानुसार यह प्रतिबंध स्वास्थ्य कर्मियों को छोड़कर लागू रहेगा। उल्लंघन स्वरुप (अर्थात एन-95 वाल्व मास्क एवं अन्य किसी भी वाल्व युक्त मास्क पहनने पर) सौ रुपये प्रति व्यक्ति का स्पॉट फाइन लगेगा। इंदौर शहर में नगर निगम के अधिकृत अधिकारी तथा ग्रामीण क्षेत्र में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत द्वारा नामांकित अधिकारी स्पॉट फाइन कर सकेंगे।

आदेश का उल्लघंन भारतीय दण्ड विधान की धारा-188 के अंतर्गत दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आयेगा। शेष आदेश एवं उसमें समय-समय पर दी गई छूट/प्रतिबंध पूर्ववत लागू रहेंगे।
बता दें कि पिछले महीने केंद्र ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र लिखकर लोगों के छिद्रयुक्त श्वासयंत्र लगे एन-95 मास्क पहनने के खिलाफ चेतावनी जारी कर कहा था कि इससे वायरस का प्रसार नहीं रुकता और यह कोविड-19 महामारी को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के ‘‘विपरीत” है. 

स्वास्थ्य मंत्रालय में स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक राजीव गर्ग ने राज्यों के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मामलों के प्रधान सचिवों को पत्र लिखकर कहा था कि सामने आया है कि प्राधिकृत स्वास्थ्य कर्मियों की जगह लोग एन-95 मास्क का ‘‘अनुचित इस्तेमाल” कर रहे हैं, खासकर उनका जिनमें छिद्रयुक्त श्वसनयंत्र लगा है. आपके संज्ञान में लाया जाता है कि छिद्रयुक्त श्वसनयंत्र लगा एन-95 मास्क कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए अपनाए गए कदमों के विपरीत है क्योंकि यह वायरस को मास्क के बाहर आने से नहीं रोकता. 

विधानसभा में बदली सीटिंग अरेंजमेंट, अब सीएम गहलोत के बगल में नहीं बैठेंगे पायलट, जानिए वजह

जयपुर
राजस्थान में अपनी सरकार के खिलाफ बगावती तेवर अख्तियार करने वाले सचिन पायलट (Sachin Pilot) अब मान गए हैं। उनके मानने के बाद पिछले कई दिनों से जारी सियासी उठापटक का दौर अब थमता नजर आ रहा है। इस बीच आज से राजस्थान विधानसभा का विशेष सत्र (Rajasthan Assembly Session) शुरू हो रहा है। सत्र के पहले ही दिन विधानसभा में विश्वास मत प्रस्ताव लाया जा सकता है। इस बीच खबर है कि सचिन पायलट की सीटिंग अरेंजमेंट में बदलाव किया गया है। अब पायलट सीएम अशोक गहलोत के बगल में नहीं बैठेंगे। उन्हें सीट नंबर 127 मिली है और वो निर्दलीय विधायक के साथ बैठेंगे।

विधानसभा में बदल गई सचिन पायलट की सीट
जानकारी के मुताबिक, सचिन पायलट की सीट में बदलाव इसलिए करना पड़ा है क्योंकि अब वो प्रदेश सरकार में मंत्री नहीं है। अपनी सरकार के खिलाफ बगावत की वजह से पिछले दिनों पार्टी ने कार्रवाई करते हुए उन्हें डिप्टी सीएम और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाने का फैसला लिया था। पायलट के उपमुख्यमंत्री नहीं रहने की वजह से विधानसभा में उनकी सीट में बदलाव किया गया है। अब उन्हें सीएम गहलोत के बगल वाली सीट भी नहीं मिलेगी। उन्हें निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा के बगल वाली सीट मिली है।

निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा के साथ बैठेंगे पायलट

स्पीकर सीपी जोशी ने पिछले दिनों हुए घटनाक्रम के बाद विधानसभा में विधायकों के बैठने को लेकर नए नियम जारी किए हैं। जानकारी के मुताबिक, इसमें सचिन पायलट की जगह संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल मुख्यमंत्री गहलोत के बगल वाली सीट पर बैठे नजर आएंगे। सचिन पायलट अभी मंत्री नहीं हैं ऐसे में उन्हें पीछे की ओर 127 नंबर की सीट दी गई है। ये सीट निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा के बगल में स्थित है।

दो और मंत्रियों की सीट में किया गया है बदलाव

सचिन पायलट की ही सीट में बदलाव नहीं किया गया है। प्रदेश सरकार के दो और मंत्री विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा को भी मंत्री पद से हटाया गया था, ऐसे में उनकी भी सीट बदल गई है। विश्वेंद्र सिंह अब 14वें नंबर की सीट पर बैठेंगे, वहीं रमेश मीणा को पांचवी लाइन की 54 नंबर सीट दी गई है।

यूएई और इस्राइल में हुए समझौते पर बुरी तरह भड़के पाकिस्तानी, यूं जमकर निकाली भड़ास

इस्लामाबाद: पश्चिम एशिया के 2 सबसे ताकतवर देशों, इस्राइल और संयुक्त अरब अमीरात, के बीच बीते कई दशकों से चली आ रही दुश्मनी का खात्मा हो गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रयासों के चलते इस्राइल और यूएई ने एक समझौते पर दस्तखत किए हैं जिसके मुताबिक दोनों अब अपने संबंधों को सामान्य बनाने पर जोर देंगे। इस डील के बाद अब इस्राइल वेस्ट बैंक के कुछ इलाके पर कब्जा करने की अपनी योजना फिलहाल टाल देगा। हालांकि यूएई और इस्राइल के बीच हुई इस नई डील से पाकिस्तानियों को मिर्ची लग गई है, और वे सोशल मीडिया पर जमकर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं।

इस्राइल को अपना दुश्मन मानते हैं पाकिस्तानी
दरअसल, एक तरफ अधिकांश पाकिस्तानी जहां अपने आपको अरब सभ्यता से जोड़ते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ वे इस्राइल को यहूदियों के प्रभाव वाला देश होने के नाते अपना जानी दुश्मन मानते हैं। यहां तक कि पाकिस्तान के पासपोर्ट पर भी लिखा होता है कि ‘यह इस्राइल को छोड़कर दुनिया के सभी देशों के लिए मान्य है।’ ऐसे में संयुक्त अरब अमीरात और इस्राइल के बीच हुआ यह समझौता पाकिस्तानियों को रास नहीं आया है और वे सोशल मीडिया पर जमकर बवाल काटे हुए हैं। हालांकि पाकिस्तान के हुक्मरानों के सामने इस मामले में चुप्पी साधना ही बेहतर है, क्योंकि खराब आर्थिक हालात के चलते वे विरोध करने की हालत में भी नहीं हैं।

इस समझौते पर क्या कहा पाकिस्तानियों ने?
पाकिस्तानी इस डील पर किस हद तक भड़के हुए हैं इसका अंदाजा उनके ट्वीट्स को देखकर लगाया जा सकता है। @fat_a8 नाम के एक ट्विटर हैंडल से इस डील को लानत भेजने की बात कही गई है, तो @irizmemon नाम के हैंडल ने तुर्की को पाकिस्तानियो का सच्चा दोस्त बताया है। बता दें कि हाल ही में तुर्की ने कश्मीर के मसले पर पाकिस्तान का खुलकर साथ दिया है और ऐसा करने वाले दुनिया के चंद देशो में वह भी शामिल है। पहले मलेशिया ने भी कश्मीर के मसले पर पाकिस्तान का साथ दिया था, लेकिन भारत की नाराजगी के बाद उपजे हालातों से उसने अपने कदम पीछे खींच लिए।

अरबों की बजाय अब तुर्कों पर फिदा पाकिस्तानी
सऊदी अरब और अन्य अरब देशों द्वारा हाल में लिए गए कुछ फैसलों ने पाकिस्तानियों को बुरी तरह झिंझोड़ कर रख दिया है। पाकिस्तान ने कश्मीर मसले को OIC में उठाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन सऊदी अरब के प्रभाव वाले इस संगठन ने उसकी मांग को भाव ही नहीं दिया। इसके बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी सऊदी अरब पर ही भड़क गए। सऊदी को कुरैशी का बड़बोलापन पसंद नहीं आया और उसने पाकिस्तान को दिए गए कर्ज में से एक अरब डॉलर वापस मांग लिए। बस, इसी के बाद से कभी अरबों को अपना पूर्वज बताने वाले पाकिस्तानी आजकल तुर्की पर फिदा हैं।

एसएएफ के डिप्टी कमांडेंट विजय सोनी का घर में कुर्सी पर खून से लथपथ शव मिला


गुना
मध्यप्रदेश के गुना में विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) के डिप्टी कमांडेंट विजय सोनी का खून से लथपथ शव सुबह-सुबह घर में कुर्सी पर मिला है। जांच के बाद पुलिस को आशंका है कि अधिकारी ने खुद को अपनी ही सर्विस पिस्तौल से गोली मार ली है। हालांकि, कोई सुसाइड नोट नहीं मिलने से आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है।

विजय सोनी 26 वी बटालियन गुना में पदस्थ थे। वे यहां अकेले ही शासकीय आवास में रहते थे। सुबह-सुबह उनका शव मिलने की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने मौके पर फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम को भी बुला लिया था। विजय का 18 महीने बाद रिटायरमेंट होना था। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। अब तक परिजन के बयान भी नहीं हो पाएं हैं। ऐसे में पुलिस इसे आत्महत्या करने की आशंका जरूर जता रही है, लेकिन सभी बिंदुओं की जांच करने की बात कह रही है।

सुबह 7 बजे की बताई जा रही घटना

पुलिस के अनुसार घटना सुबह करीब 7 बजे की है। पास में ही 9 एमएम की सर्विस पिस्तौल मिली है। उनके कान के बाजू से गोली लगी है। पहली नजर में एफएसएल अधिकारी इसे खुदकुशी का मामला बता रही।

पत्नी की करीब 6 महीने पहले मौत हो चुकी
लोगों ने बताया कि यहां पर विजय अकेले रहते थे। उनकी पत्नी की करीब 6 महीने पहले मौत हो चुकी है। उनके दो बच्चे बताए जाते हैं। बेटा मुंबई और बेटी बेंगलोर में रहती है। पुलिस परिवार के अन्य सदस्यों की जानकारी एकत्रित कर रही है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

चीन के बहकावे में क्यों रिश्ते खराब कर रहा काठमांडू? पर्यटन के लिए तो भारतीयों पर ही भरोसा करता है नेपाल

कोविड-19 के कारण आई आर्थिक मंदी और भारत से तल्ख संबंधों के बावजूद भारत के पर्यटक नेपाल के पर्यटन उद्योग के लिए मुख्य आधार बने हुए हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड (एनटीबी) के अधिकारियों के अनुसार नेपाल को चालू वित्त वर्ष में दो लाख विदेशी पर्यटकों के आने की उम्मीद है। एनटीबी का वर्तमान वित्तीय वर्ष जुलाई 2021 के मध्य में समाप्त होने वाला है।

एनटीबी के सदस्य दीपक महावत ने कहा, हमारे पास अभी इस वित्त वर्ष के 10 महीने बचे हैं और सितंबर से पहले उड़ानें फिर से शुरू नहीं हो सकती हैं। हमने अनुमान लगाया है कि इस दौरान 2,00,000 से अधिक पर्यटक आएंगे। हमने अपनी नीति और कार्यक्रमों को भी अंतिम रूप दिया है। उन्होंने कहा, निर्धारित लक्ष्य में से हम बहुसंख्यक भारतीय पर्यटकों के आने की उम्मीद करते हैं। पहले के वर्षों में भारतीयों की संख्या अधिक रही है और हमें विश्वास है कि यह वैसा ही रहेगा। एक बार यहां की स्थिति में सुधार होगा, तो संख्या बढ़ेगी। 

नेपाल में 2019 में 11.7 लाख विदेशी पर्यटक आए जो 2018 में थोड़ा कम था। 2008 में 15.2 लाख पर्यटक नेपाल गए। इनमें से 2,09,611 भारतीयों ने इस हिमालयी राष्ट्र में पर्यटन किया। दूसरे स्थान पर चीन के पर्यटक रहे जिनकी संख्या 1,69,543 थी।

नेपाल के राजस्व का प्रमुख स्रोत पर्यटन रहा  है जो कोविद -19 महामारी के कारण एक अरब से अधिक नेपाली रुपये का नुकसान उठा चुका है। चालू वित्त वर्ष में पर्यटकों की संख्या कम होने से एनटीबी को लगभग 20 करोड़ नेपाली रुपये आने की उम्मीद है।

नेपाल पहुंचने वाले अधिकांश भारतीय पर्यटक पशुपतिनाथ, लुम्बिनी, पोखरा और अन्य धार्मिक स्थलों की यात्रा करते हैं। बड़ी संख्या में भारतीय तीर्थयात्री नेपालगंज आते हैं और हमला के सिमिकोत के लिए वहां से उड़ान भरते हैं। यहां से वे कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए हिलसा तक के लिए चार्टर्ड हेलीकॉप्टर लेते हैं।

जायडस ने भारत में लॉन्च की कोविड-19 की दवा रेमडेसिवीर, ये होगी कीमत

पूरी दुनिया में कोरोना वैक्सीन और दवाई बनाने को लेकर काम चल रहा है. इस बीच भारतीय बाजार में दवा कंपनी जायडस कैडिला ने गुरुवार को रेमडेक ब्रांड के नाम से रेमडेसिवीर इंजेक्शन लॉन्च किया है. कंपनी के मुताबिक रेमडेसिवीर, कोरोना इलाज के लिए सबसे सस्ता इंजेक्शन है. 100 मिलीग्राम की शीशी की कीमत 2,800 रुपये रखी गई है, जो भारत में उपलब्ध रेमडेसिवीर का सबसे सस्ता ब्रांड है

जायडस कैडिला ने गुरुवार को इसकी लॉन्चिंग के दौरान कहा कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए उपयोगी दवा रेमडेसिवीर को रेमडेक ब्रांड के नाम से भारतीय बाजारों में पेश किया गया है. रेमडेक की 100 मिलीग्राम की शीशी की कीमत 2,800 रुपये है.

जायडस कैडिला ने बताया कि यह दवा पूरे देश में वितरण नेटवर्क के जरिए जल्द ही उपलब्ध होगी. यह दवा सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में मिलेगी. कैडिला हेल्थकेयर के प्रबंध निदेशक डॉ. शरविल पटेल ने कहा, ”रेमडेक सबसे सस्ती दवा है, क्योंकि हम चाहते हैं कि कोविड-19 के इलाज में अधिक से अधिक मरीजों तक यह दवा पहुंच सके.”

जायडस कैडिला कोविड-19 की वैक्सीन बनाने की कोशिश भी कर रही है और जायकोव-डी नाम की यह वैक्सीन क्लिनिकल परीक्षण के दूसरे चरण में है. जायडस ने रेमडेसिवीर के उत्पादन और उसे बेचने के लिए जून 2020 में अमेरिका की गिलेड सायन्सिस इंक के साथ नॉनएक्सक्लूसिव समझौता किया है. इस दवाई को अमेरिकन अथॉरिटी यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा कोरोना के इलाज के लिए प्राथमिकता दी गई है.

वहीं कोरोना वैक्सीन के लिए ग्लोबल हेल्थकेयर कंपनी जायडस के जरिए कहा गया है कि प्लाजमिड DNA वैक्सीन जायकोव-डी (ZyCov-D) के प्रथम चरण का क्लिनिकल ट्रायल खत्म हो चुका है. नतीजे में देखा गया है कि ये दवाई सुरक्षित है और बीमारी का इलाज कर सकती है. कंपनी ने 15 जुलाई से कोरोना वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल भी शुरू कर दिया है.

कंपनी के मुताबिक पहले चरण में सफल होने के बाद अब दूसरे दौर का क्लिनिकल ट्रायल 6 अगस्त से शुरू होगा, जिसे देश के अलग-अलग हिस्सों में 1000 लोगों पर ट्राय किया जाएगा.

PM मोदी ने तोड़ा वाजपेयी का रिकॉर्ड, 15 अगस्त को रचेंगे एक और इतिहास

स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. आज पीएम मोदी भारतीय इतिहास में चौथे सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री बन गए हैं. इससे पहले जिन तीन प्रधानमंत्रियों का नाम इस लिस्ट में शामिल है वे सभी कांग्रेस के थे. पीएम मोदी ऐसा रिकॉर्ड बनाने वाले पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं.

आपको बता दें कि पीएम मोदी ने गैर-कांग्रेसी सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले भारतीय प्रधानमंत्री का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है. बता दें कि पीएम मोदी के बाद इस लिस्ट में अटल बिहारी वाजपेयी का स्थान है जिन्होंने अपनी सभी कार्यकालों को मिलाकर 2268 दिनों तक देश की सेवा की थी. आज पीएम मोदी उस कार्यकाल से आगे निकल गए हैं.

यहां आपको यह भी बता दें कि इससे पहले सबसे ज्यादा लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्रियों में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह का नाम शामिल है. अब पीएम मोदी चौथे सबसे ज्यादा दिन तक देश की बागडोर संभालने वाले प्रधानमंत्री बन गए हैं.

15 अगस्त को भी पीएम मोदी बनाएंगे एक रिकॉर्ड

बता दें कि पीएम मोदी इस साल 15 अगस्त को जब लाल किले की प्राचीर से तिरंगा लहराएंगे तो भी एक नया रिकॉर्ड बनेगा. 15 अगस्त को पीएम मोदी सातवीं बार लाल किले से तिरंगा लहराएंगे. इसी के साथ ऐसा सबसे ज्यादा बार करने वाले प्रधानमंत्रियों की सूची में वे चौथे नंबर पर आ जाएंगे.

गौरतलब है कि लाल किले पर सबसे ज्यादा बार तिरंगा फहराने का रिकॉर्ड देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के नाम है. इसके बाद दूसरे नंबर पर इंदिरा गांधी आती हैं और इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर मनमोहन सिंह का नाम है. आपको बता दें कि पंडित नेहरू ने 17 बार लगातार लाल किले से तिरंगा फहराया था, जबकि इंदिरा गांधी ने ऐसा 11 बार किया था. जबकि मनमोहन सिंह ने लगातार 10 बार लाल किले से तिरंगा लहराया था.

सुप्रीम कोर्ट ने वकील प्रशांत भूषण को अवमानना का दोषी माना , 20 अगस्त को तय होगी सजा

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने देश के सुप्रीम कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबड़े के खिलाफ ट्वीट किया था, जिस पर स्वत: संज्ञान लेकर कोर्ट ने ये कार्यवाही की है. इस मामले पर आज तीन जजों की बेंच ने ये फैसला सुनाया है.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने वकील प्रशांत भूषण को अवमानना का दोषी माना है. भूषण के खिलाफ यह मामला उनके 2 विवादित ट्वीट से जुड़ा है. एक ट्वीट में उन्होंने पिछले 4 चीफ जस्टिस पर लोकतंत्र को तबाह करने में भूमिका निभाने का आरोप लगाया था. दूसरे ट्वीट में उन्होंने बाइक पर बैठे मौजूदा चीफ जस्टिस की तस्वीर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी.

मौजूदा CJI पर टिप्पणी

28 जून को चीफ जस्टिस एस ए बोबड़े की एक तस्वीर सामने आई थी. इसमें वो महंगी बाइक पर बैठे नज़र आ रहे थे. इस तस्वीर पर प्रशांत भूषण ने टिप्पणी की थी कि CJI ने सुप्रीम कोर्ट को आम लोगों के लिए बंद कर दिया है और खुद बीजेपी नेता की 50 लाख रुपए की बाइक चला रहे हैं.

तस्वीर की सच्चाई यह थी कि मोटर बाइक के बेहद शौकीन जस्टिस बोबड़े अपने गृह नगर नागपुर में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान, वहां खड़ी एक महंगी बाइक पर बहुत थोड़े समय के लिए बैठे थे. रिटायरमेंट के बाद अच्छी बाइक खरीदने की उनकी इच्छा की जानकारी मिलने पर एक स्थानीय डीलर ने उन्हें दिखाने के लिए वह बाइक भेजी थी.

वकील माहेक माहेश्वरी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी याचिका
मध्य प्रदेश के गुना के रहने वाले एक वकील माहेक माहेश्वरी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस ट्वीट की जानकारी दी थी. उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के बंद होने का दावा झूठा है. चीफ जस्टिस पर किसी पार्टी के नेता से बाइक लेने का आरोप भी गलत है. प्रशांत भूषण ने जानबूझकर तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया और लोगों की नज़र में न्यायपालिका की छवि खराब करने की कोशिश की. इसके लिए उन्हें कोर्ट की अवमानना का दंड मिलना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने खुद लिया संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट में अवमानना का मुकदमा शुरू करने से पहले याचिकाकर्ता को एटॉर्नी जनरल से सहमति लेनी होती है. माहेक माहेश्वरी ने ऐसा नहीं किया था. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस पर कहा था, “हमने याचिका में बताए गए तथ्यों को देखने के बाद खुद ही इस मसले पर संज्ञान लेने का फैसला लिया है. ऐसे में अब एटॉर्नी जनरल की मंजूरी नहीं है. हम अवमानना की कार्रवाई शुरू कर रहे हैं.“

4 पूर्व CJI पर भी किया ट्वीट

जजों ने प्रशांत भूषण के एक और ट्वीट पर भी संज्ञान लिया था. 27 जून के इस ट्वीट में भूषण ने यह लिखा था कि पिछले कुछ सालों में देश में लोकतंत्र को तबाह कर दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट के पिछले 4 चीफ जस्टिस की भी इसमें भूमिका रही है.“ सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि पहली नजर में भूषण के दोनों ट्वीट अवमाननापूर्ण लगते हैं. यह ट्वीट लोगों की निगाह में न्यायपालिका खासतौर पर चीफ जस्टिस के पद की गरिमा को गिराने वाले हैं.

भूषण का जवाब

कोर्ट ने प्रशांत भूषण को अवमानना का नोटिस जारी कर जवाब देने कहा था. उनकी तरफ से पेश वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे पेश हुए. उन्होंने दलील दी कि जजों की आलोचना को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना नहीं माना जा सकता. यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हनन होगा. दवे ने यह माना था कि मौजूदा चीफ जस्टिस की तस्वीर पर की गई टिप्पणी तथ्यों के बारे में पूरी जानकारी लिए बिना की गई थी. लेकिन उनका कहना था कि यह आम आदमी के प्रति भूषण की चिंता को दिखाता है. इसका मकसद सुप्रीम कोर्ट की अवमानना नहीं था. 4 पूर्व चीफ जस्टिस पर की गई टिप्पणी के बारे में दवे की दलील थी कि उनके कार्यकाल में कई बार सुप्रीम कोर्ट में जनहित के मुद्दों पर उस तरह से कदम नहीं उठाए, जैसी उम्मीद की जाती है.

दुष्यंत दवे ने कोर्ट में से यह भी कहा था कि न्यायिक क्षेत्र में प्रशांत भूषण के महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए उन्हें माफ कर दिया जाना चाहिए. दवे ने कहा था, “हमें तो यह उम्मीद थी कि प्रशांत भूषण का नाम पद्म पुरस्कार के लिए भेजा जाएगा. लेकिन उन्हें अवमानना का नोटिस दे दिया गया.”

दलील से कोर्ट संतुष्ट नहीं

साफ तौर पर यह दलीलें सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच को संतोषजनक नहीं लगीं. इसलिए उन्होंने भूषण को अवमानना का दोषी करार दिया. कोर्ट ने कहां है कि सजा को लेकर 20 अगस्त को बहस होगी. गौरतलब है कि अवमानना के मामलों में अधिकतम 6 महीने तक की सजा हो सकती है. कोर्ट भूषण को जेल भेजने जैसी कड़ी सजा देगा या फिर उन्हें कोई सांकेतिक सजा मिलेगी, यह 20 अगस्त को तय होगा.

एक और मामला लंबित

प्रशांत भूषण ने माना है कि उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार न किया जाना निराशाजनक है. अभी इससे ज़्यादा प्रतिक्रिया वो नहीं देना चाहते. भूषण के खिलाफ अवमानना का एक और मामला लंबित है. 11 साल पहले उन्होंने पिछले 16 में से आधे चीफ जस्टिस को भ्रष्ट कहा था. इस मामले में भी उनके स्पष्टीकरण को कोर्ट ने संतोषजनक नहीं माना है. इस पर 16 अगस्त को सुनवाई है.