देश में चल रहा 21 दिनों का लॉकडाउन अब नहीं बढ़ाया जाएगा आगे, पटरी पर लौटेगी जिंदगी

दिल्ली
केंद्र सरकार ने साफ किया है कि कोरोना वायरस के कारण पूरे देश में जारी 21 दिनों का लॉकडाउन आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। बता दें कि ऐसी चर्चा थी कि लॉकडाउन को आगे भी बढ़ाया जा सकता है। सरकार ने साफ किया कि उसकी ऐसी कोई योजना नहीं है।
कैबिनेट सेक्रटरी राजीव गौबा ने आज साफ किया कि सरकार की लॉकडाउन बढ़ाने की योजना नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मैं लॉकडाउन बढ़ाने की रिपोर्ट देखकर चौंक रहा हूं। सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है।’
भारत में कोरोना के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ऐसी रिपोर्ट आ रही थीं कि सरकार लॉकडाउन बढ़ाने पर विचार कर सकती है। हालांकि सरकार के स्पष्टीकरण के बाद लॉकडाउन पर संशय खत्म हो चुका है। भारत में कोरोना के अब तक 1,024 मरीज सामने आए हैं जबकि 27 लोगों की इस घातक बीमारी से मौत हुई है।
पीएम मोदी ने किया था लॉकडाउन का ऐलान
‌देश में कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने देश में 21 दिनों के लॉकडाउन का ऐलान किया था। पीएम ने लोगों से इस बीमारी से बचने के लिए अपने घर के आगे लक्ष्मण रेखा खींचने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि सोशल डिस्टेंसिंग से ही यह बीमारी रुकेगी। केंद्र सरकार ने लॉकडाउन को सख्ती से लागू करने के लिए राज्यों को आदेश दिया है।

ग्वालियर एसपी नवनीत भसीन की रणनीति से सब्जी मंडी में भीड़ छंटी

ग्वालियर। लॉक डाउन के दौरान जिला प्रशासन ने सब्जी ,राशन ,दूध  जैसी आवश्यक सामान  की आपूर्ति सुनिचित करने के इनके विक्रय की छूट दे राखी है लेकिन इसका फ़ायदा उठाने के कारण सरकार के कम्युनिटी डिस्टेंस की मंशा धूमिल हो रही थी। सब्जी मंडी में उमड़ने वाली भीड़ में कमी लाने के लिए एसपी नवनीत भसीन के प्रयास आज रंग लाये और मंडियों में भीड़ आज काफी कम नज़र आयी।

दरअसल सब्जी खरीदने और बेचने के लिए छूट के चक्कर में लक्ष्मी गंज सहित सभी सब्जी मंडियों में हजारों की संख्या में  इकट्ठी हो रही थी जिससे लॉक डाउन का मकसद ही गड़बड़ा रहा था।  हालाँकि लोग रोजमर्रा के सामाना से महरूम न रहे इस मानवीय दृष्टिकोण अपनाया गया था लेकिन इसका दुरूपयोग होने से कोरोना रोकने के प्रयासों में दिक्कत आने की आशंका हो रही थी।  सब्जी मंडी के भीड़ भरे फोटो मिडिया में आने के बाद कल ही एसपी नवनीत भसीन ने समीक्षा कर नए निर्देश जारी किये जिसमे उन्होंने कहा  था कि मंडियों में सिर्फ थोक में सब्जी बिकेगी और घरों में इसकी आपूर्ति ठेले वाले द्वार – द्वार जाकर ही कर सकेंगे। इस सम्बन्ध में उन्होंने मंडी के व्यापारियों को भी अवगत कराया और पुलिस को भी।

आज इस व्यवस्था के काफी अनुकूल असर देखने को मिले। आज लक्ष्मीगंज ,छतरी मंडी और मुरार सब्जी मंडी में अनावशयक भीड़ नज़र नहीं आयी।  इन स्थानों से खेरीज विक्रेता ठेले वालों ने ही सब्जियां खरीदी।  एसपी के इस प्रयास की सर्वत्र प्रशंसा हो रही है।

इंदौर में लॉकडाउन-कर्फ्यू सख्ती से लागू होगा

इंदौर कलेक्टर ने कहा- लॉकडाउन-कर्फ्यू सख्ती से लागू होगा, कुछ दिन दाल, रोटी, चावल से काम चलाएं ऑड-ईवन आदेश भी निरस्त
जो जहां है वहीं रहे, रानीपुरा समेत अन्य संक्रमित क्षेत्र को प्रशासन करेगा टेकओवर
हॉस्टल में रहने वाले छात्र वहीं रहेंगे, खाने की व्यवस्था हॉस्टल संचालक करें
इंदौर. कोरोनावायरस के संक्रमण से बचाव के लिए कलेक्टर मनीष सिंह ने सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। रविवार को कलेक्टर ने कहा कि आज और कल शहर में संपूर्ण लॉक डाउन रहेगा। आगे भी इसकी अवधि बढ़ाई जाएगी। संकेत दिए कि सप्ताहभर से 15 दिन के बीच का यह लॉकडाउन होगा। कलेक्टर ने कहा कि कुछ दिन सूखे अनाज और आलू-प्याज से लोग काम चलाएं, हरी सब्जियों के पीछे ना भागें। कई हाथों से गुजर कर यह सब्जी आप तक पहुंचती है इसीलिए कुछ दिन थोड़ी परेशानी भी उठाएंगे, तभी स्थिति नियंत्रण में आएगी। वर्तमान में इंदौर कोरोनावायरस संक्रमण के अपर स्टेज पर पहुंच चुका है। वाहनों से संबंधित ऑड-ईवन आदेश भी निरस्त कर दिया गया है।
जो जहां है वहीं रहे…हॉस्टल संचालक उपलब्ध कराएं भोजन
कलेक्टर ने कहा कि जो जहां है वही रहेगा, किसी को भी बाहर आने जाने की मंजूरी जारी नहीं होगी। जो छात्र हॉस्टल में हैं वहां हॉस्टल संचालक भोजन उपलब्ध कराएं, जहां भी दिक्कत आ रही है वहां सामान हम पहुंचाएंगे। फूड पैकेट बांटने वाली सभी गैर सरकारी संगठन को जो मंजूरी दी है वह समाप्त की जाती है। फूड पैकेट बांटने का काम प्रशासन करेगा। यदि इस काम में कुछ समस्या आई तो गैर सरकारी संगठनों का सहयोग लिया जाएगा।
10-15 दिन शांति रखें
कलेक्टर ने कहा कि यह लॉकडाउन एक-दो दिन नहीं, थोड़ा लंबा चलेगा। इसलिए 10 से 15 दिन शांति रखें। घर में जो अनाज है वह खाएं। सब्जियों के पीछे नहीं भागें। सब्जी खाना ज्यादा जरूरी नहीं है, आलू-प्याज, दाल, रोटी, चावल से काम चलाएं। लॉकडाउन के दौरान किराना दुकान और सब्जी की दुकान भी बंद रहेंगी। जहां जरूरत होगी वहां होम डिलीवरी से चीजें पहुंचेंगी।
कोरोना से संक्रमित क्षेत्र टेकओवर
कलेक्टर ने कहा कि कोरोनावायरस से संक्रमित जो भी क्षेत्र इंदौर में हैं उसे प्रशासन पूरी तरह से टेकओवर कर रहा है। रविवार से रानीपुरा को टेकओवर किया जा रहा है। यहां आने और जाने की मंजूरी किसी को भी नहीं है। सारा सामान वितरण शासन करेगा, दवाइयों का वितरण हम करेंगे। अस्पताल चिन्हित किए जा रहे हैं वहीं पर मरीजों का उपचार चलेगा, लेकिन निजी अस्पताल किसी के भी उपचार के लिए मना नहीं कर सकेंगे, जिसमें कोरोना के लक्षण पाए जाएंगे, उनका अलग विशेष अस्पतालों में इलाज होगा। संभागायुक्त आकश त्रिपाठी और आईजी विवेक शर्मा रविवार दोपहर रानीपुरा पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
टाटपट्टी बाखल को संक्रामित घोषित किया गया
सिलावटपूरा क्षेत्र से लगे टाटपट्‌टी बाखल क्षेत्र को संक्रमित घोषित कर दिया गया है। यहां कोरोना वायरस का मरीज पाया गया था। शनिवार देर रात छत्रीपुरा पुलिस द्वारा रविदासपूरा,सिलावटपुरा,कागदीपुरा,टाटपट्टी बाखल में स्टीकर लगाकर क्षेत्र के लोगों को घर से बाहर नहीं निकलने की सख्त हिदायद दी गई।

▪जगदीश देवड़ा हो सकते हैं विधानसभा अध्यक्ष.


➖डा.भूपेन्द्र विकल➖

इन्दोर।मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार के हटने बाद मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष एन.पी .प्रजापति ने भी इस्तीफा दे दिया है।

इसके साथ मप्र विधानसभा के नए अध्यक्ष के लिए भाजपा विधायकों के नाम पर चिंतन-मंथन शुरू हो गया है ।
अध्यक्ष के लिए वरिष्ठ भाजपा विधायक जगदीश देवड़ा प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं ।
हालांकि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा भी दोबारा अध्यक्ष के दावेदार माने जा रहे हैं।
खबर है कि जातीय एवं क्षेत्रीय संतुलन को साधने के लिए भाजपा देवड़ा को अध्यक्ष बना सकती है।
देवड़ा भाजपा शासन काल में मंत्री रह चुके हैं।इसके अलावा भाजपा पिछले साल देवड़ा को विधानसभा के उफ अध्यक्षस का चुनाव लड़वा चुकी है।
उस समय देवड़ा भाजपा विधायकों का सदन में संख्या बल कम होने से उप अध्यक्ष का चुनाव हार गए थे ।
ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा देवड़ा को अध्यक्ष बना सकती है।
देवड़ा को अध्यक्ष बनाने के पीछे भाजपा का अपना गणित है।क्योंकि अभी हाल ही में भाजपा ने वी.डी .शर्मा को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है।जो कि ब्राह्मण वर्ग से हैं।इसके अलावा छह संगठन मंत्रियों में से तीन ब्राह्मण हैं।
कहते हैं ऐसे में भाजपा देवड़ा को अध्यक्ष बनवाकर प्रदेश के अनुसूचित जाति के वोट बैंक को साधना चाहती है।
यदि ऐसा नहीं हुआ और सीताशरण शर्मा को स्पीकर बनाया गया तो अनुसूचित जाति का वोट बैंक भाजपा के हाथों से खिसक सकता है।
सूत्रों की. खबर यह भी है कि यदि देवड़ा विधानसभा अध्यक्ष नहीं बनते हैं ।तो उनका शिवराज सरकार में कैबिनेट मंत्री बनना तय है।अब देखिए देवड़ा अध्यक्ष बनते हैं या मंत्री।
राज्यपाल ने इन्हे कार्यवाहक विधानसभा अध्यक्ष बनाया है।
🔹जगदीश देवड़ा.
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देवडा का जन्म एक जुलाई 1957 को मंदसौर जिले के रामपुरा गांव में हुआ। गेंदालाल देवड़ा के पुत्र जगदीश देवड़ा एम.ए., एल.एल.बी. तक शिक्षित हैं। पेशे से वकील देवड़ा को हिन्दी और अंग्रेजी भाषा का ज्ञान है तथा खेलकूद, विशेषकर एथलेटिक्स, जिम्नास्टिक और कबड्डी में विशेष रूचि है।

देवड़ा की विद्यार्थी जीवन से ही सामाजिक कार्यों में गहरी रूचि रही है। वे हायर सेकेण्डरी स्कूल एवं रामपुरा महाविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष, विश्वविद्यालय उज्जैन की सीनेट के सदस्य, भारतीय जनता युवा मोर्चा मनासा के मण्डल अध्यक्ष, जिला महामंत्री एवं जिला अध्यक्ष रहे।
देवड़ा मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधि तथा अनुसूचित जाति मोर्चा के जिला संयोजक भी रहे।

जगदीश देवड़ा 1990 में पहली बार विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुये तथा पटल पर रखे गये पत्रों के परीक्षण संबंधी समिति के सदस्य रहे।
वे 1993 में दूसरी बार विधानसभा सदस्य चुने गये। देवड़ा अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग विषयक सभा समिति के सदस्य रहे।
देवड़ा तीसरी बार सन 2003 में सुवासरा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुये। आपको 28 जून 2004 को सुश्री उमा भारती मंत्रिमण्डल में राज्य मंत्री के रूप में शामिल किया गया तथा गृह विभाग का दायित्व सौंपा गया।

देवड़ा को 27 अगस्त 2004 को बाबूलाल गौर के मंत्रिमण्डल में राज्य मंत्री के रूप में पुन: शामिल किया गया है।

देवड़ा को 4 दिसम्बर, 2005 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमण्डल में मंत्री के रूप में शामिल किया गया।

जगदीश देवड़ा 2008 में सम्पन्न विधानसभा निर्वाचन में पुन: निर्वाचित हुए। देवड़ा को 20 दिसंबर 2008 को मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में मंत्री बने थे।
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सिन्धिया समर्थक नेताओं का घोर विरोधियों से सामंजस्य मुश्किल.

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➖डा.भूपेन्द्र विकल➖
इन्दौर ।आगामी होने वाले विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का समर्थन लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक 22 बागियों को चुनाव लड़ना होगा ।
प्रत्येक विधानसभा सीट पर यह नेता इनके घोर विरोधी रहे है।
इन भाजपा नेताओं ओर कार्यकर्ताओ से सामंजस्य बैठाना बहुत मुश्किल हो रहा है ओर होगा।
सामंजस्य की मुश्किलें अभी से सामने आने लगी है।सोशल मीडिया पर स्पष्ट तोर पर प्रत्येक विधानसभा मे विरोध की पोस्टे पढने देखने मिल रही है।
कारण साफ है इन विधानसभा के भाजपा नेता व कार्यकर्ता इन्हें कैसे स्बीकार करेंगे ।अनेक नेताओं ने इनसे चुनाव मैदान मे टक्कर ली है ओर बहुत कम मतो से ही वह हारे है।

जैसे कि -सावेर विधानसभा से तुलसी सिलावट ने राजेश सोनकर को 3हजार मतो से ही हराया था।सूवासरा विधानसभा से हरदीप डंग ने भाजपा के राधेश्याम पाटीदार को 350 मतो से हराया था।अनूपपुर मे बिसाहूलाल सिंह ने 10हजार मतो से भाजपा के रामलाल रौतेले को हराया था।
बदनाबर विधानसभा से राज्यवद्धन सिह दतीगाँव ने भाजपा के भंवरसिंह शेखावत को 40हजार मतो से हराया।हाट पिपल्या विधानसभा से मनोज चोधरी ने भाजपा के दीपक जोशी को 10हजार से ज्यादा मतो से हराया।सान्ची विधानसभा से प्रभुराम चोधरी ने भाजपा के मुदित शेजवार को 10हजार मतो से हराया था।
सुरखी विधानसभा से गोविंद राजपूत ने भाजपा के सुधीर यादव को 20हजार मतो से हराया था।
यह तो मालवा, बुन्देलखण्ड ओर मध्य भारत की विधानसभा का है इसी तरह से ग्वालियर-चंबल की 16विधानसभा सीटो की जीत का अतंर भी बहुत कम है।इन सीटो पर भी अभी से विरोध के स्वर दिखाई दे रहे है।
22बागीयो को अब अपनी वर्तमान पार्टी मे अपनो से ही विरोध का सामना करना पड सकता है।
काग्रेंस के वरिष्ठ नेता जो कि अब इनके विरोध मे चुनाव लडेंगे जोकि इनके समर्थन मे थे ।

कोरोना संकट में क्या संकटमोचक बनेंगे शिवराज सिंह ताबड़तोड़ ले रहे फैसले

भोपाल. मध्यप्रदेश में कोरोना संक्रमित का आकड़ा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार सक्रिय हैं और लोगों को किसी भी तरह की परेशानी ना हो इसलिए ताबड़तोड़ फैसले भी ले रहे हैं। इसके साथ ही शिवराज सिंह चौहान उन लोगों की हौंसला अफजाई भी कर रहे हैं जो संकट की घड़ी में लगातार अपना काम ईमानदारी के साथ कर रहे हैं।

लॉकडाउन का लिया जायजा
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को शहर में कोरोना के कारण लागू लॉकडाउन में आमजन को मिल रही सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने शहर के कुछ हिस्सों में अकेले पहुंचकर प्रशासन द्वारा की गई विभिन्न व्यवस्थाएं देखीं। चौहान ने सोशल डिस्टेंसिंग तथा लॉक डाउन के दौरान रखी जाने वाली सारी सावधानियों को रखते हुए तथा नियमों का पालन करते हुए यह भ्रमण किया। सफाई व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक चीजों की आपूर्ति करने वालों को धन्यवाद देते हुए उनसे रोग से बचाव के उपाय अपनाने की जानकारी ली। उन्होंने संक्रामक रोग से बचाव के लिए आमजन द्वारा मास्क के उपयोग, परस्पर दूरी बनाकर रखने और अपनाई जा रही अन्य सावधानियों का भी जायजा लिया।
नागरिकों की सजगता को सराहा
मुख्यमंत्री ने भोपाल के नागरिकों की सजग भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने इस दौरान शहर के विभिन्न क्षेत्रों में ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों, नागरिक सुविधाएं प्रदान करने वाले व्यक्तियों और कुछ नागरिकों से भी उनका हालचाल पूछा। मुख्यमंत्री ने डयूटी पर तैनात पुलिस स्टाफ की हौसला अफजाई की और उन्हें परिवार छोड़कर दायित्व निर्वहन के लिए धन्यवाद दिया।

विभिन्न क्षेत्रों में अकेले पहुंचे मुख्यमंत्री
शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल के बिट्टन मार्केट, शाहपुरा, सर्व धर्म नगर, मंदाकिनी तिराहा, नयापुरा तिराहे और बैरागढ़ चीचली क्षेत्र में बगैर सुरक्षा व्यवस्था पहुंचकर नागरिकों को मिल रही सुविधाओं को देखा। इस दौरान उन्होंने पेट्रोल पंप, मेडिकल स्टोर, किराना शॉप पर अत्यावश्यक नागरिक सुविधाओं के प्रदाय की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कोलार रोड पर एक निजी मेडिकल अस्पताल का भी अवलोकन किया और वहां उपलब्ध उपचार सुविधाएं देखीं।

खाद्यान्न प्राप्ति के लिए हेल्प लाइन नंबर जारी
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जिन गरीब लोगों के पास राशन कार्ड नहीं है। उन भी सभी को राशन का गेहूँ और चावल मुफ्त में प्राप्त हो। प्रदेश में गरीब एवं बेसहारा लोगों के लिए खाद्यान्न की समुचित व्यवस्था की जा रही है। आटा मिलों को उचित मूल्य पर गेहूं कलेक्टर्स के माध्यम से दिलवाया जा रहा है। इससे कि आटे की कमी न रहे। केन्द्र सरकार की घोषणा अनुसार दाल भी दिलवाई जाएगी। खाद्यान्न प्राप्ति में गरीबों को कोई परेशानी ना हो, इसके लिए एक हेल्पडेस्क बनाई गई है, जिसका नंबर 1800 2332 797 है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब जनता को राशन दिलवाने में जो व्यक्ति एवं सामाजिक संगठन मदद करना चाहते हैं, वे किस प्रकार मदद करें, इसके लिए भी समुचित व्यवस्था बनाई जाए।

Shivraj Singh Chouhan

@ChouhanShivraj
· Mar 28, 2020
Replying to @ChouhanShivraj
कई स्वयंसेवी संस्थाओं के साथी और व्यक्तिगत रूप से सेवा के कार्यों में लगे नागरिकों का भी मैं अभिनंदन करता हूँ।

उनका यह ऋण हम कभी नहीं चुका पाएंगे, उनके जज़्बे को प्रणाम!

एक राहत भरी खबर यह है कि जबलपुर व ग्वालियर के #COVID19 मरीजों के स्वास्थ्य में निरंतर सुधार हो रहा है।

Shivraj Singh Chouhan

@ChouhanShivraj
मैं और मेरी सरकार आप सबके साथ खड़ी है।

चिंता न करें, घबराएँ नहीं।

घर पर रहें, शासन-प्रशासन का सहयोग करें और सुरक्षित रहें। #StayAtHomeAndStaySafe
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10:46 PM – Mar 28, 2020
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अधिक दाम पर वस्तुएं बेचने पर सख्त कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कहीं भी खाद्य सामग्री की कालाबाजारी ना हो तथा अधिक दामों पर इसे न बेचा जाए, नहीं तो आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत संबंधित के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि वस्तुओं के वाहनों को न रोका जाए, जिससे सप्लाई चैन प्रभावित ना हो।
ऑन लाइन ई-पास की व्यवस्था
लॉक डाउन के दौरान नागरिकों की सुविधा के लिए ऑनलाइन पास जारी करने का सिस्टम पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। इसके माध्यम से जिला प्रशासन ऑनलाइन पास जारी करेगा जो आवेदक को उसके मोबाइल पर ही प्राप्त हो जाएगा। मुख्यमंत्री चौहान ने निर्देश दिए कि कोरोना संबंधी स्वास्थ्य सुविधाओं एवं अन्य मदद के लिए मोबाइल एप तुरंत चालू कराएं। कॉल सेंटर नियमित रूप से कार्य करें तथा प्राप्त शिकायतों का त्वरित निराकरण किया जाए।

10वीं – 12वीं बोर्ड परीक्षाएं आगे बढ़ाईं
मुख्यमंत्री ने बताया कि संपत्ति कर, वृत्ति कर, किसान क्रेडिट कार्ड भुगतान तथा स्कूल कॉलेजों की फीस भरने की तिथि भी 30 अप्रैल तक बढ़ाई गई है। कलेक्टर गाईड लाइन की तिथि 30 मार्च के स्थान पर 30 अप्रैल की गई है। इसी प्रकार मध्यप्रदेश बोर्ड की 10वीं एवं 12वीं कक्षा की परीक्षा आगे बढ़ाई जाएंगी तथा शेष कक्षाओं में जनरल प्रमोशन दिया जाएगा।

मध्‍य प्रदेश में चार अप्रैल तक जारी रहेगा बारिश का दौर, यलो अलर्ट जारी

भोपाल राजधानी भोपाल समेत प्रदेश में दो दिनों से जारी बारिश का दौर शनिवार को थमा। आगामी दो दिनों तक प्रदेश के कुछ जिलों में छोड़कर शेष जिलों का मौसम शुष्क बना रहेगा। 30 मार्च को एक पश्चिमी विक्षोभ बन रहा है और अरब सागर और हिंद महासागर में प्रति चक्रवात बन रहा है, जो एक बार फिर पूरे प्रदेश में बारिश करवाएगा। बारिश का यह क्रम 4 अप्रैल तक जारी रहेगा।
इसके बाद मौसम शुष्क होने की संभावना है। इधर, मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि आगामी 24 घंटे के दौरान बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, अनूपपुर जिले में गरज चमक के साथ बारिश होने की उम्मीद है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा भी चलेगी।
इसके लिए मौसम विभाग ने यलो अलर्ट जारी किया है। बुरहानपुर और खंडवा में गरज चमक के साथ बौछारें पड़ सकती है। शेष मप्र में में मौसम आगामी दो दिनों तक शुष्क रहेगा। यहां हुई एक सेमी से ज्यादा बारिश पिछले 24 घंटे के दौरान भोपाल, सागर, शहडोल सहित अन्य संभाग के जिलों में बारिश हुई है।
इसमें गंजबासौदा में दो सेंटीमीटर, बरेली भोपाल ठीकरी, सिवनी मालवा, कोलारस, सागर व खुरई में एक सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। भोपाल इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर संभाग के जिलों में अधिकतम तापमान गिरे है। वहीं होशंगाबाद संभाग के जिलों में अधिकतम तापमान में काफी गिरावट दर्ज की गई है। रीवा, जबलपुर, इंदौर संभाग के जिलों में सामान्य से काफी कम रहे।
प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस खरगौन में दर्ज किया गया। वहीं न्यूनतम तापमान में भी गिरावट दर्ज हुई है। प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस धार में दर्ज किया गया। आज से होगी तापमान में वृद्धि इधर, राजधानी में रविवार को मौसम साफ रहेगा।
दिन और रात के तापमान में वृद्धि होने की संभावना है। वहीं 14 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवा चलेगी। राजधानी में शनिवार को न्यूनतम तापमान 17.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो कि सामान्य से 2 डिग्री कम रहा। पिछले 24 घंटे के दौरान न्यूनतम तापमान में एक डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं अधिकत तापमान में 8 डिग्री की बढ़ोत्तरी हुई। अधिकतम तापमान 30.4 डिग्री सेल्सियस के आसपास रिकॉर्ड किया गया जो कि सामान्य से पांच डिग्री सेल्सियस कम रहा।

ATM खाली, गरीबों को डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर के जरिए राहत देने में आएंगी मुश्किलें!


मुंबई कोरोना महामारी से निपटने के लिए घोषित लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधियों के ठप पड़ने के बीच गरीबों के लिए घोषित सरकारी राहत योजना पर अमल की राह आसान नहीं दिख रही है। मुश्किलें करीब-करीब वैसी ही दिख रही हैं, जो नोटबंदी के दौरान थीं। ऐसे में गरीबों के खातों में सामाजिक कल्याण योजनाओं का पैसा सीधे भेजने में परेशानी हो सकती है।

कई चुनौतियों से होगी मुश्किल

डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर में बैंक, एटीएम ऑपरेटर, बैंक मित्र और फाइनैंशल टेक्नॉलजी कंपनियों सहित कई पक्ष काम करते हैं। इन सभी का कहना है कि रिलीफ फंड गरीबों को उपलब्ध कराने में कई चुनौतियां दिख रही हैं। फाइनैंस मिनिस्ट्री ने पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज की विभिन्न योजनाओं के तहत देश के ‘सर्वाधिक गरीब 80 करोड़ लोगों’ के लिए 1.75 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की थी। यह पैकेज पहली अप्रैल से तीन महीनों के लिए है।

पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर का मसला

एटीएम में पर्याप्त कैश न होने के अलावा यह चिंता भी जताई जा रही है कि आधार पे मॉडल का पहले कभी इतने बड़े पैमाने पर उपयोग नहीं किया गया है और यह पता नहीं है कि यह कितना कारगर हो सकेगा। साथ ही, डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने का इन्फ्रास्ट्रक्चर भी कुछ खास मजबूत नहीं है और ग्रामीण इलाकों में एटीएम की संख्या भी कम है। वहीं काफी लोगों के पास बैंक खाते भी नहीं हैं। आने वाले हफ्तों में सरकार को इन मोर्चों पर ध्यान देना होगा।

कैश की तंगी से एटीएम ठप
हिताची पेमेंट सर्विसेज के एमडी और सीईओ (कैश बिजनेस) रुस्तम ईरानी ने कहा, ‘वॉइट लेबल एटीएम के लिए कैश प्राय: स्थानीय बैंक शाखाओं से लिया जाता है, लेकिन कॉमर्स एक्टिविटी घटने के कारण ग्रामीण इलाकों में बैंकों की शाखाओं में कैश कम आ रहा है। ऐसे में हमारे सामने कैश की तंगी की स्थिति है और कई एटीएम काम नहीं कर रहे हैं।’

मच सकती है विदड्रॉल की मारामारी
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, देश में 2.3 लाख एटीएम हैं। इनमें से केवल 45,000 एटीएम ग्रामीण इलाकों में हैं। एक अन्य स्टेकहोल्डर ने कहा कि कैश सप्लाई घटने से नोटबंदी के दिनों की तरह विदड्रॉल्स की मारामारी मच सकती है, क्योंकि ग्रामीण और शहरी, दोनों इलाके मिलाकर देश में रिटेल खर्च का 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा कैश में है।

एटीएम मेंटनेंस बड़ी चुनौती
मूवमेंट पर लगी पाबंदियों के कारण एटीएम का मेंटेनेंस भी एक चुनौती है। बैंकों को एटीएम सेवा देने वाली एजीएस ट्रांजैक्ट के चेयरमैन रवि गोयल ने कहा, ‘संबंधित स्टाफ के आवागमन से जुड़ी मुश्किलों के कारण यह एक बड़ी चुनौती है।’

डिजिटल तरीकों से लेनदेन का रास्ता
ग्रामीण इलाकों में डिजिटल ट्रांजैक्शंस के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी और जागरुकता का अभाव भी एक बाधा है। ईटी के सवालों के जवाब में एसबीआई चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा, ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी चुनौती ग्रामीण इलाकों में है। हालांकि यह जागरुकता और आदत का मामला भी है। हम सभी कस्टमर्स से यथासंभव डिजिटल तरीकों से लेनदेन करने के लिए कह रहे हैं।’

30% बैंक मित्र ही कर रहे काम
इस स्थिति में करीब 10 लाख बैंक मित्रों पर रिलीफ फंड के कन्वर्जन की जिम्मेदारी होगी। हालांकि, फाइनैंशल इंक्लूजन सर्विस एफआईए टेक्नॉलजी की सीईओ सीमा प्रेम ने कहा, ‘लोकल अथॉरिटीज की ओर से यात्रा पर लगी पाबंदियों के कारण हमारे केवल 30 प्रतिशत बैंक मित्र ही काम कर पा रहे हैं। यह हाल तब है, जब सरकार ने उनकी सेवाओं को आवश्यक घोषित किया है।’

अनाज की खरीदी एक तारीख से करने कलेक्टर, कमिश्नरों ने जाहिर की असमर्थता

भोपाल। समर्थन मूल्य पर अनाज की खरीदी 1 अप्रैल से शुरू करने के लिए सरकार ने हरी झंडी दी है। लेकिन खरीदी का पूरा दारोमदार जिन समितियों के पास है, वे खरीदी के लिए अभी तैयार नहीं हो रही हंै। इसके पीछे उनका तर्क है कि उनके पास न तो बारदाना सिलाई के लिए धागे की व्यवस्था है और न ही बारदानों में समितियों के स्टीकर बनाने तथा उसे लगाने के लिए तैयार हो रहा है।
इसके साथ ही लेबरों की समस्या सबसे बड़ी है, क्योंकि दस दिन पहले ही लेबर जिलों से पलायन कर चुके हैं। इसके चलते अनाज की खरीदी फिलहाल टाल दिया जाए तो ज्यादा बेहतर होगा। इसके चलते भोपाल कमिश्नर, देवास कलेक्टर सहित अन्य कलेक्टर और कमिश्नरों ने एक फिलहाल अनाज खरीदी करने से असमर्थता जाहिर की है।
कोराना वायरस के चक्कर में सरकार की पूरी व्यवस्था तहस-नहस हो गई है। इसका सबसे ज्यादा सफर किसान और मजदूरों को करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में बेमौसम बारिश ने किसानों को और हलाकान में डाल दिया है। किसानों ने अनाज की गहाई करा कर खेत और खलिहानों में आनाज रख दिया है। समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू हो और वे अनाज बेचे, लेकिन खरीदी की तरीख फाइनल नहीं हो पा रही है। ऐसे स्थिति में खलिहान और खेत में बारिश और मबेशियों से अनाज बचाना किसानों के लिए मुश्किल हो रहा है। इधर कोरोना के चक्कर में समितियां अनाज खरीदी के लिए तैयार नहीं हो रही रही है।
समितियों का तर्क है कि एक खरीदी केन्द्र पर कम से कम 50 मजदूर, कंम्प्यूटर आपरेटर और कर्मचारियों की जरूरत होती है। इसकी तादात में अनाज बेचने के लिए किसान और उनका सहयोग करने भी मजदूर आएंगे। ऐसी स्थिति में खरीदी केन्द्रों पर लोगों की संख्या सौ से दो सौ के पार हो जाएगी, समितियों के लिए भीड़ संभालना मुश्किल हो जाएगा।

बारदाने की आएगी समस्या
खरीदी केन्द्रों पर बारदाने की समस्या आएगी। कोरोना के चक्कर में समितियों में पर्याप्त मात्रा में बारदाना नहीं पहुंच पाया है। वैसे भी प्रदेश में सौ लाख टन गेहूं खरीदी के लिए लक्ष्य रखा है, लेकिन बारदाना मात्र 60 लाख टन अनाज रखने के लिए ही पहुंच पाया है। कोरोना के चक्कर में प्रदेश में कोलकाता से ही बारदान नहीं जिलों तक पहुंच पाया है, क्योंकि पिछले 15 दिन से पूरे देश में परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो चुकी है।

त्रिपाल लगाने को तैयार नहीं व्यापारी
बारिश से अनाज को बचाने के लिए खरीदी केन्द्रों पर टेंट, पन्नी और त्रिपाल लगाना है। कोरोना वायरस का खौफ लोगों में इतना ज्यादा भर हुआ है वे काम पर जाने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। उनके मन में भय है कि वे काम के दौरान अन्य लोगों की संगत में आ कर कहीं से कोराना वायरस से संक्रमित न हो जाए। ऐसे में कारोबारी टेंट लगाने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं, क्योंकि इसकी भी व्यवस्था लेबरों पर ही टिकी हुई है और लेबर उन्हें भी नहीं मिल रहे हैं।