दुकान- दुकान जाकर डस्टबिन लगवाने निकले निगम आयुक्त

ग्वालियर। नगर निगम आयुक्त श्री शिवम वर्मा ने आज ग्रामीण क्षेत्र के अंतर्गत स्थित वार्ड 63 एवं 64 में सफाई व्यवस्था का निरीक्षण किया तथा ग्रामीणों से भी चर्चा की और नालियों में गोबर व सड़क पर गंदगी न फैलाने का आग्रह किया।
जलालपुर क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान निगमायुक्त श्री वर्मा ने विभिन्न ग्रामों की साफ सफाई व्यवस्था को देखा तथा ग्रामीणों से चर्चा की एवं शहर की सफाई व्यवस्था में सहयोग के लिए अपील की निगमायुक्त ने कहा कि जो लोग नालियों में गोबर फेंकते हैं या सड़क पर गंदगी फैलाते हैं ।उससे शहर की छवि खराब होती है। कृपया ऐसा ना करें कचरा डस्टबिन में ही रखें।
इसके साथ ही दुकानदारों व ठेले वालों से भी चर्चा की तथा अपनी दुकान के बाहर दो-दो डस्टबिन अनिवार्य रूप से रखने के निर्देश दिए उन्होंने कहा कि जो भी दुकानदार डस्टबिन नहीं रखे उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जावे। वही पूरे क्षेत्र में साफ सफाई के लिए संबंधित क्षेत्र अधिकारी को निर्देशित किया।
इसके साथ ही वार्ड 64 के क्षेत्रीय कार्यालय का भी निरीक्षण किया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए एवं कार्यालय में भी साफ सफाई के लिए निर्देशित किया।
वहीं क्षेत्र में स्थित बस स्टैंड को भी साफ स्वच्छ व व्यवस्थित करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए इसके साथ ही पुरानी छावनी स्थित सुलभ शौचालय का भी निरीक्षण किया तथा साफ सफाई का विशेष ध्यान रखने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।
निरीक्षण के दौरान अपर आयुक्त श्री नरोत्तम भार्गव , श्री राजेश श्रीवास्तव, मुख्य समन्वयक अधिकारी श्री प्रेम पचौरी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

पलक झपकते ही बदल देते थे नंबर प्लेट , ट्रेफिक पुलिस ने बहोडपुर से पकडी बिना नंबर की कार

ग्वालियर। यातायात पुलिस द्वारा वाहनों की नंबर प्लेट की जगह नाम या जातिसूचक बातें लिखकर वाहन चलाने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है इसी कार्रवाई के तहत सुबह पुलिस ने बहोडापुर इलाके से एक के्रटा गाडी का पीछा कर उसे पकडा है बताया गया है कि इसकी नंबर प्लेट की जगह जाति खिखकर वाहन चलाया जा रहा था और नंबर प्लेट इस तरह से तैयार की गई थी कि उसे पलक झपकते ही बदला जा सकता था ट्रेफिक डीएसपी नरेश अन्नोटिया के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई इसके साथ ही उन्होने संभावना जताई है कि जिस तरह इसकी नंबर प्लेट बदली गई है उसे देखकर कयास लगाया जा रहा है कि इसका इस्तैमाल किसी आपराधिक वारदात में किया गया है।
इससे पहले यातायात पुलिस ने देर रात एक गाडी को नाका चंद्रवदनी से भी पकड़ा था दरअसल इंटरनेट मीड़िया पर ट्रैफिक पुलिस को सूचना मिली कि माधव नगर गेट से एक बगैर नंबर की कार निकली है। इस कार के कांच पर गुर्जर लिखा हुआ है। इस सूचना पर डीएसपी ने कार का पीछा किया। नाका चंद्रबदनी पर कार को पकड़ लिया। कार को सिरौल निवासी सचिन गुर्जर ड्राइव कर रहा था। गाड़ी के कागज चेक करने पर पता चला कि गाड़ी बगैर रजिस्ट्रेशन के आठ साल से सड़क पर दौड़ रही है। गाड़ी का बीमा भी नहीं है। कार ड्राइव कर रहे युवक का कहना है कि यह कार उसके चाचा की है। अब तक सिर्फ एक बार राजस्थान में पकड़ी गई थी। कोर्ट में पांच हजार का जुर्माना भरकर छूट गई थी

राहतभरी खबर… मप्र में दो फीसद से नीचे आई कोरोना संक्रमण की दर

भोपाल । कोरॉना की वैक्सीन प्रदेश में आने के साथ ही एक और अच्छी खबर है कि राज्य में अब कोरोना संक्रमण का प्रकोप भी तेजी से कम हो रहा है। प्रदेश में कोरोना की संक्रमण दर बुधवार को 1.7 फीसद पर आ गई। यानी जितने लोग कोरोना की जांच करा रहे हैं, उनमें दो फीसद से कम ही संक्रमित मिल रहे हैं। 16 सितंबर 2020 को यह दर 16.1 फीसद थी। इस लिहाज से देखें तो प्रदेश में कोरोना का फैलाव काफी कम हो रहा है। मरीजों की संख्या भी लगातार घट रही है। अब पूरे प्रदेश में 24 घंटे के भीतर हर दिन 500 से कम मरीज मिल रहे हैं।

गुरुवार को जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार प्रदेश भर में बुधवार को 485 मरीज मिले, जबकि इस अवधि में सात मरीजों की मौत हुई। इतना ही नहीं, सक्रिय मरीजों की संख्या भी लगातार कम हो रही है। अब प्रदेश में सिर्फ 7651 सक्रिय मरीज हैं। इनमें भी 65 फीसद मरीज होम आइसोलेशन में हैं। भोपाल में सक्रिय मरीजों का आंकड़ा 1981 हैं, जिनमें करीब 800 होम आइसोलेशन में हैं।

कोरोना से हर दिन होने वाली मौतों की संख्या भी 10 से नीचे आ गई है। हालांकि जांचो की संख्या भी पिछले महीने के मुकाबले कम हुई है। पहले रोज प्रदेश भर में करीब 27 हजार से 30 हजार तक जांचें हो रही थीं। अब हर दिन करीब 23 हजार जांचें हो रही हैं। स्वास्‍थ्‍य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जांच की पर्याप्त सुविधाएं हैं, लेकिन फिलहाल कोरोना का संक्रमण कम है। इस वजह से मरीज भी ज्यादा नहीं आ रहे हैं।

मनमोहन की वह बात जिसे प्रणब ने इसलिए मान ली थी


ये बात किसी से छिपी नहीं है कि दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee) यूपीए-1 के दौरान पीएम पद की दौड़ में सबसे आगे थे लेकिन सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने मनमोहन सिंह (Former PM Manmohan Singh) को पीएम बनाया। मुखर्जी ने मनमोहन के कार्यकाल में विदेश मंत्री से लेकर वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली।

बाद में प्रणब मुखर्जी को यूपीए की तरफ से देश के राष्ट्रपति के उम्मीदवार के रूप में सामने लगाया गया और वह 2012 में देश के 13 वें राष्ट्रपति बने। जब प्रणब राष्ट्रपति बने तब यूपीए-2 की सरकार थी। दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति ने अपनी किताब ‘द प्रेजिडेंशल ईयर्स 2012-2017’ में मनमोहन सिंह के एक आग्रह का जिक्र किया है जिसे उन्होंने बड़ी ही विनम्रता से मान ली थी।

मनमोहन की वो बात जिसे प्रणब ने मान ली

प्रणब ने अपनी किताब ‘द प्रेजिडेंशल ईयर्स 2012-2017’ में लिखा है कि संसद की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति का संबोधन सरकार की नीति, उसकी मंशा और उसके दूरगामी विजन की तस्वीर पेश करती रही है। मेरे पांच सालों के कार्यकाल में एक भी ऐसा मौका नहीं आया जब सरकार को मेरे भाषण से शर्मिंदा होना पड़ा हो या इससे कोई अनचाहा विवाद पैदा हुआ हो। लेकिन मैं ईमानदारीपूर्वक स्वीकार करूंगा कि एक मौका आया था जब मैंने अपने लिखित भाषण में खुद से संशोधन किया। यह खुद पीएम मनमोहन सिंह की ओर से दिया संशोधन था। 2013 में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन के लिए मैंने दिल दहलाने वाली निर्भया रेप-मर्डर केस पर विस्तार से अपनी बात रखने की योजना बनाई थी लेकिन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने इस घटना पर विस्तार से बात नहीं करने का विनम्रतापूर्ण आग्रह किया। तबके हालात को देखते हुए मुझे उनका सुझाव सही लगा। मैंने उनकी बात को सुना और निर्भया पर विस्तार से बात करने से खुद को रोक लिया। यह इस तरह का अकेला मामला था। इसके अलावा यूपीए सरकार से 2012 से लेकर 2014 के बीच कभी कोई ऐसा मुद्दा नहीं आया जब मेरे किसी भाषण पर कोई मसला हुआ हो। हालांकि निर्भया मामले पर मैं एक बात जरूर कहना चाहूंगा कि कई तबके के लोग मुझसे संवाद करना चाहते थे। लोग चाहते थे कि मैं सक्रिय होकर संवाद करूं। कई संगठन मुझसे मिलना भी चाहते थे। लेकिन मैंने उन तमाम लोगों से मिलने से इनकार कर दिया था। मेरा मानना था कि गृह मंत्रालय चूंकि इस मामले को संभाल रहा है, इसलिए लोगों को उनसे ही मिलना चाहिए।

पत्नी की मौत के बाद भी डेलिगेशन से मिला

मैं बने विधान के अनुसार काम करने का बहुत बड़ा पक्षधर रहा हूं। इसके पीछे मेरी क्या सोच थी, इसे एक मिसाल से बताता हूं। मेरी पत्नी का निधन अगस्त 2015 में हो गया था। उनके अंतिम संस्कार से ठीक तीन घंटे पहले मुझे एक डेलीगेशन से मिलना था। मुलाकात का समय सात दिन पहले तय किया गया था। व्यक्तिगत त्रासदी के कारण मैं यह मुलाकात टाल सकता था लेकिन चूंकि विधान है कि जब तक राष्ट्रपति शारीरिक रूप से खुद बीमार न हों, आप सामान्य कार्य को रोक नहीं सकते, मैंने तय समय पर सबसे मुलाकात की।

2014 के चुनाव परिणाम बाद प्रणब ने यह सोचा था

2014 के आम चुनाव से पहले आर्थिक रूप से अस्थिर दौर था। इसके साथ पड़ोसी मुल्कों में भी उठापठक चल रही थी। इसी माहौल में मुख्य चुनाव आयुक्त मेरे पास आम चुनाव का कार्यक्रम लेकर आए। इसके तुरंत बाद आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो गई। मैंने भी चुनाव घोषणा के बाद खुद को सियासी परिदृश्य से हटा लिया। मैंने आम चुनाव में वोट डालने से भी खुद को अलग रखा क्योंकि मुझे कई दलों ने मिलकर सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए चुना था। ऐसे में किसी एक दल के लिए वोट करना उचित नहीं होता। मैंने पूर्व कानून सचिव और लोकसभा के सेक्रेटरी जनरल टीके विश्वनाथ को सलाहकार के रूप में नियुक्त किया जो लोकसभा चुनाव के बाद के हालात पर मुझे उचित सलाह देते। चूंकि लोकसभा चुनाव में परिणाम मिलने के बाद नया प्रधानमंत्री नियुक्त करने की जिम्मेदारी राष्ट्रपति की होती है, इसलिए मैं पहले से ही खुद को पूरी तरह तैयार रखना चाहता था। जो भी सियासी तस्वीर उभरे, उस अनुरूप उचित और वक्त रहते फैसला ले सकूं इसके लिए मैंने अपना होमवर्क कर रखा था। मैंने तमाम देशों में आम चुनाव के बाद सत्ता हस्तातंरण की प्रक्रिया को गौर से पढ़ा। ईमानदारी से कहूं तो मेरा अनुमान था कि 2014 आम चुनाव में त्रिशंकु संसद की तस्वीर सामने आएगी जिसमें बीजेपी 195-200 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरेगी। अगर ऐसी तस्वीर सामने आती तो मेरा संवैधानिक दायित्व होता कि एक स्थिर सरकार का रास्ता प्रशस्त करूं। अगर कांग्रेस बेहतर सीट लाती लेकिन सहयोगियों के साथ स्थिर सरकार का भरोसा दिलाती तो मैं उसे ही सरकार गठन के लिए बुलाता। इसके पीछे गठबंधन सरकार चलाने के अनुभव का हवाला देता। यह पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा की ओर से स्थापित परंपरा के विपरीत होता जिसमें उन्होंने सबसे बड़े दल को सरकार गठन का पहला मौका देने का चलन शुरू किया था। 1996 में त्रिशंकु संसद में अटल बिहारी वाजपेयी को सबसे पहले बुलाया गया था। मैंने यह तय कर लिया था कि स्थिरता और अस्थिरता के बीच बहुत ही गंभीरता से चुनाव करूंगा।

आतंकियों की दया याचिका इसलिए की खारिज

मुझसे पहले दो पूर्व राष्ट्रपति -एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने दया याचिकाओं पर कोई फैसला नहीं किया जिससे लंबित मामलों की तादाद बढ़ती चली गई थी। इसके साथ ही मेरे समय यह बहस भी जोर पकड़ रही थी कि मौत की सजा का प्रावधान होना चाहिए या नहीं। इस बारे में मेरी व्यक्तिगत राय यही रही है कि समाज में कानून का इकबाल बनाए रखने के लिए अपवाद माने जाने वाले खौफनाक मामलों में मौत की सजा का प्रावधान रहना चाहिए। मेरे सामने कई दया याचिकाएं थीं जिनमें अजमल कसाब जैसे आतंकी की भी याचिका थी जिसने 26/11 मुंबई नरसंहार को अंजाम दिया था। जब मैंने उसकी याचिका को खारिज किया तो आतंकी वारदात की तस्वीर मेरे जेहन में थी जिसने सैकड़ों बेगुनाह जिंदगी को अपनी सनक के लिए समाप्त कर दिया। पाकिस्तान सरकार खुद अपने आतंकी नागरिक को स्वीकार नहीं कर रही थी। मैंने तब पाकिस्तान के प्रेजिडेंट आसिफ अली जरदारी से कहा कि कसाब किसी दूसरे ग्रह से नहीं बल्कि पाकिस्तान से ही आया था। इसी तरह मैंने याकूब मेमन और अफजल गुरु की दया याचिका को खारिज किया जो पिछले कई सालों से लंबित था। मैंने तमाम मामलों को खारिज करने से पहले कानून की हर प्रक्रिया का पालन किया। तब के गृह मंत्रियों से मंत्रणा ली। कसाब के केस में मुझे किसी तरह का संदेह नहीं था लेकिन याकूब मेमन और अफजल गुरु के मामलों में कुछ स्तर पर संदेह था जिसे मैंने पूरी गहराई के साथ दूर किया।

Xiaomi समेत ये 9 चीनी कंपनियां अमेरिका में हुई ब्लैक लिस्ट, ये रही वजह

नई दिल्ली, । डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन चीन के खिलाफ बड़ा फैसला लिया है। ट्रंप ने Xiaomi समेत कुल 9 चीनी कंपनियों को ब्लैक लिस्ट कर दिया है। इन कंपनियों पर चीनी सेना के साथ साठगांठ का आरोप लगाया गया है। ट्रंप प्रशासन पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना मिलिट्री-सिविल फ्यूजन डिवलपमेंट स्ट्रैटजी को प्रमुखता से हाइलाइट किया है, जो कि पीपल्स लिबरेशन ऑर्मी (PLA) को मॉडर्न कर रहा है। इससे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और डेवलपमेंट की जरूरत को पूरा किया जा सकेगा। 

इन कंपनियों को किया गया है बैन

ट्रंप प्रशासनकी तरफ से जिन कंपनियों पर बैन लगाया गया है, उनमें चीनी स्मार्टफोन कंपनी Xiaomi और तेल उत्पादक कंपनी Cnooc का नाम प्रमुखता से सामने आता है। ब्लैक लिस्टेड कंपनियों में ज्यादातर कंपनियां एविएशन, एयरोस्पेस, टेलिकम्यूनिकेशन, कंस्ट्रक्शन क्षेत्र से जुड़ी हैं। ट्रंप प्रशासन की तरफ से ब्लैक लिस्ट की गयी कंपनियां अमेरिका में निवेश नहीं कर सकेंगी। साथ ही इन कंपनियों को अपने पहले के निवेश को 11 नवंबर 2021 तक कम करना होगा। इसके अलावा स्टेट ओन्ड प्लेनमेकर कॉमर्शियल एयरक्रॉफ्ट कॉरपोरेशन ऑफ चीन लिमिटेड है। ट्रंप प्रशासन की तरफ से टेलिकॉम सेक्टर से जुड़ी Huawei और ZTE जैसी कंपनियों को पहले ही बैन किया जा चुका है। सरकार ने Xiaomi कंपनी को कम्यूनिस्ट चाइनीज मिलिट्री कंपनी के तौर पर लेबल किया है.

इन ऐप्स को किया गया है बैन 

चीनी प्लेन निर्माता कंपनी नैरो बॉडी वाले उम्दा प्लेन बनाती है। इसका मुकाबला अमेरिकी प्लेन निर्माता कंपनी बोइंग और एयरबस से माना जाता है। वहीं Xiaomi का सीधा मुकाबला अमेरिकी मशहूर कंपनी Apple Inc को पीछे छोड़ दिया है। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग के अनुसार चीनी Cnooc कंपनी गहरे सागर में तेल की खोज करती है। ट्रंप प्रशासन की तरफ से इससे पहले 6 जनवरी को एक्जीक्यूटिव आर्डर पास करके WeChat Pay, Alipay जैसे 9 ऐप्स को बैन कर दिया गया था। इससे पहले ट्रंप प्रशासन की तरफ से  कैम स्कैनर, QQ वॉलेट, SHAREit, Tencent QQ, VMate, WeChat Pay और  WPS ऑफिस शामिल है। 

बैल लड़े या किसान राहुल गांधी का देख तमाशा अभियान

नई दिल्ली: कांग्रेस (Congress) के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी को देश के किसानों की चिंता ऐसे सता रही है कि वो मजबूरी में नए साल का जश्न मनाने इटली के मिलान शहर पहुंच गए. मिलान पहुंचने के बाद भी वो नए साल का जश्न कायदे से कहां मना पाए. राहुल गांधी कड़कड़ाती ठंड में ठिठुर रहे किसानों का हौसला बढ़ाने के लिए मिलान से ही ट्वीट पर ट्वीट करते रहे. अब जब नए साल की छुट्टी मनाकर इटली से वापस लौटे हैं तो बजाए किसानों के बीच सिंघु बॉर्डर जाने के सीधे मदुरई पहुंच गए. जल्लीकट्टू का लुत्फ उठाने के लिए, लेकिन जल्लीकट्टू के मजमे के बीच भी आंदोलनकारी किसानों को राहुल नहीं भूले.

मदुरै से ही दिल्ली की सीमाओं (Delhi Borders) पर बैठे किसानों का हौसला बढ़ाया. केंद्र सरकार को खरी खोटी सुनाई. लेकिन राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की इस किसानगीरी के बीच विरोधी सवाल पूछ रहे हैं कि दिल्ली के आपके सरकारी आवास से सिंघु बॉर्डर लगभग 30-40 किमी की दूरी पर है, लेकिन आप विदेश से लौटने के बाद उनके पास नहीं गए और दिल्ली से 2500 किलोमीटर दूर तमिलनाडु के मदुरै पहुंच गए.. ऐसा क्यों?

जल्लीकट्टू पर राहुल का शार्प यू-टर्न

बहरहाल मदुरै (Maduai) पहुंचकर राहुल ने एक शानदार यू-टर्न मारा. साल 2016 में कांग्रेस पार्टी ने अपने मेनिफेस्टो में जल्लीकट्टू (Jallikattu) को पशु हिंसा बताते हुए इसे बैन करने का वादा किया था, लेकिन साल 2021 आते-आते कांग्रेस (Congress) के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को आत्मज्ञान हो चुका है कि जल्लीकट्टू सांडों या बैलों के लिए बिल्कुल खतरनाक नहीं है और राहुल को ये आत्मज्ञान हुआ मदुरै पहुंचकर साक्षात जल्लीकट्टू का लुत्फ उठाने के बाद..

जल्लीकट्टू का मौके पर लुत्फ उठाने के बाद राहुल गांधी ने मीडिया से बात करते हुए कहा- “ऐसी मान्यता थी और बहुत से लोगों ने मुझे बताया भी कि जल्लीकट्टू सांडों के लिए खतरनाक है. आज मैंने खुद इसे देखा और देखने के बाद मैं जरूर कहूंगा कि जल्लीकट्टू में सांडों के जख्मी होने का कोई खतरा है ही नहीं”

इसे कहते हैं शानदार वाला यू टर्न लेकिन बीजेपी महासचिव सी टी रवि (TC Ravi) ने ट्वीट कर उससे भी ज्यादा शानदार तरीके से राहुल के यू टर्न को उजागर भी कर दिया. सी टी रवि ने ट्वीट कर लिखा- “प्रिय राहुल गांधी, आपकी सरकार ने साल 2011 में जल्लीकट्टू को क्रूर और बर्बर बताया था. आपकी पार्टी के मेनिफेस्टो में जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई थी. आज आप उसी जल्लीकट्टू का लाइव लुत्फ उठाने के लिए तमिलनाडु में हैं. क्या आप अपने पाखंड के जरिए अतुल्य तमिल सभ्यता-संस्कृति का अपमान नहीं कर रहे हैं?”

जल्लीकट्टू के बाद आई किसानों की याद

जल्लीकट्टू पर राहुल गांधी ने बेशक यू टर्न मार दिया लेकिन किसानों के मुद्दे पर राहुल गांधी के विचार चट्टान की तरह अडिग हैं. मिलान जाने से पहले उनके जो विचार थे वो मिलान पहुंचकर नहीं बदले और मिलान से नए साल का जश्न मनाकर लौटने के बाद भी किसानों को लेकर राहुल गांधी के इरादे वैसे ही चट्टानी हैं.

जल्लीकट्टू के साक्षात दर्शन के बाद मिले आत्मज्ञान के आवेश से जब राहुल बाहर निकले तो उन्हें किसानों की चिंता हो आई. मीडिया से बात करते हुए राहुल ने कहा- “किसान जो कर रहे हैं उसे लेकर मुझे बहुत ज्यादा गर्व है और मैं किसानों के समर्थन में पूरी तरीके से खड़ा हूं. मैं आगे भी उनके साथ खड़ा रहूंगा. मैंने अपनी पंजाब यात्रा के दौरान इस मुद्दे को उठाया था और मैं इसे आगे भी छोड़ने वाला नहीं हूं. मेरे शब्दों को नोट कर लीजिए तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए सरकार को मजबूर होना पड़ेगा. याद रखना जो मैंने कहा है.”

राहुल गांधी की महानता देखिए. पंजाब दौरे के दौरान किसानों के मुद्दे को उठाना तो उन्हें याद रहा लेकिन इटली पहुंचकर किसानों का हौसला बढ़ाने वाले ट्वीट्स का क्रेडिट उन्होंने बिल्कुल भी नहीं लिया. राहुल ने मदुरै में उन ट्वीट्स का जिक्र तक नहीं किया जो उन्होंने किसानों का हौसला बढ़ाने के लिए इटली से दागे थे. बहरहाल राहुल गांधी ने मिलान के बाद मदुरै में एंट्री मारी तो सियासी गरियारे में नई हलचल शुरू हो गई.

किसान से लेकर जल्लीकट्टू तक हर मुद्दे को उनकी वजह से हवा मिल गई. ये अलग बात है कि दिल्ली की सीमा पर बैठे किसान राहुल के लिए पलक पावड़े बिछाकर बैठे हुए हैं, ये सोचते हुए कि 50 से ज्यादा दिन हो चुके हैं बंदा एक ना एक दिन हमारे बीच आएगा जरूर.

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी, Farmers Protest खत्म करने के लिए दिए 2 सुझाव

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू (Markandey Katju) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को चिट्ठी लिखी है. चिट्ठी में जस्टिस काटजू ने पीएम मोदी से कहा कि किसानों की ओर से कोर्ट की कमेटी को ठुकराने के बाद सरकार को तुरंत कानून वापस लेना चाहिए और साथ ही हाई पावर किसान कमीशन का गठन करना चाहिए.

गतिरोध पर पहुंच गई हैं समस्याएं: काटजू

मार्कंडेय काटजू ने लिखा, ‘भारत में किसान आंदोलन और इससे जुड़ी समस्याएं एक गतिरोध पर पहुंच गई हैं. किसान संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त 4 सदस्य समिति की सुनवाई में भाग लेने से इंकार कर दिया है और स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक उन 3 कानूनों को रद्द नहीं किया जाता है, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा.

26 जनवरी को हो सकती है हिंसा’

जस्टिस काटजू ने आगे लिखा, ‘भारी संख्या में किसान दिल्ली की सीमा पर कैंप किए हुए हैं, लेकिन 26 जनवरी को दिल्ली में प्रवेश करने और अपने ट्रैक्टरों के साथ गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं. यह स्पष्ट है कि सरकार द्वारा अनुमति नहीं दी जाएगी और परिणामस्वरूप पुलिस व अर्धसैनिक बल लाठीचार्ज और गोलीबारी करेंगे, जिसके बाद हिंसा हो सकती है.’ उन्होंने आगे लिखा, ‘मुझे यकीन है कि आप इससे बचना चाहेंगे. मेरे दिमाग में गतिरोध को हल करने के लिए यह उपाय हैं.’

मार्कंडेय काटजू ने पीएम मोदी को दिए 2 सुझाव

1) सरकार को 3 कानूनों को तुरंत रद्द करते हुए अध्यादेश जारी करना चाहिए. यदि आप ऐसा करते हैं तो सभी आपकी तारीफ करेंगे. यदि कोई पूछता है कि कानून क्यों बनाए गए, तो आप कह सकते हैं कि हमने गलती की है, हमें अपनी गलती का एहसास है और इसे सही कर रहे हैं. सभी इंसान गलती करते हैं. ऐसा करने से आलोचना से ज्यादा आपकी सराहना होगी.

2) इसके साथ ही, सरकार को प्रमुख किसान संगठनों, सरकार के प्रतिनिधियों और कृषि विशेषज्ञों के सदस्यों की एक उच्च शक्ति वाली किसान आयोग की नियुक्ति करनी चाहिए, जो किसानों की समस्याओं के सभी पहलुओं पर विचार कर कर्तव्य के साथ काम करे. किसानों को उनकी उपज के लिए पर्याप्त पारिश्रमिक नहीं मिल रही है, जिस कारण 3 से 4 लाख किसान पहले ही आत्महत्या कर चुके हैं. इस किसान आयोग द्वारा कई महीनों तक चर्चा करनी चाहिए और फिर जो आम सहमति बने, उस पर एक व्यापक कानून के बनाया जाना चाहिए.

कौन बनेगा करोड़पति में अब नहीं दिखेंगे अमिताभ! बोले- थक गया हूं, रिटायर हो रहा हूं 

क्या अमिताभ बच्चन कौन बनेगा करोड़पति से अलग हो रहे हैं? उनकी एक ब्लॉग पोस्ट से तो यही अनुमान लगाया जा रहा है। दरअसल कौन बनेगा करोड़पति का फिलहाल 12वां सीजन चल रहा है और बुधवार को इसकी शूटिंग का आखिरी दिन था। इस मौके पर अमिताभ बच्चन ने एक ब्लॉग पोस्ट लिखकर यह जानकारी दी है।


अमिताभ ने लिखा है, ‘… मैं थक चुका हूं और रिटायर हो रहा हूं… मैं माफी चाहता हूं… केबीसी की शूटिंग का यह आखिरी दिन काफी लंबा था… कल तक ठीक हो जाऊंगा…। लेकिन यह याद रखें कि काम तो काम ही होता है। किसी एक व्यक्ति के हटने के बाद भी उसे पूरी गंभीरता के साथ किया जाना चाहिए।

उन्होंने आगे जोड़ते हुए लिखा कि आप सबका स्नेह और प्यार ने शूटिंग के आखिरी दिन को एक विदाई जैसा बना देता है। वहां सभी लोग एक साथ इकट्ठा होते हैं।इच्छा तो कभी नहीं रुकने की नहीं होती है। मुझे उम्मीद है कि यह जल्द ही फिर से होगा। पूरी टीम बहुत ही प्यारी, केयरिंग और मेहनती थी। यह सब हमारे सेट से दूर जाने को मुश्किल कर देता है। अंत में पूरी टीम एक साथ बिताए गए महीनों के समय और एक-एक कोशिशों को याद करने के में जुट गई थी।

उन्होंने अंत में लिखा, “पूरी टीम को इतने प्यार, केयर और अच्छे व्यवहार के लिए मेरी ओर बहुत-बहुत शुक्रिया। यह खत्म हो रहा है…और सब भावुक भी हो रहे हैं लेकिन आगे एक और दिन आने वाला है।” 

आपको बता दें कि पिछले साल अगस्त में कोविड -19 से उबरने के बाद बिग बी ने केबीसी सीजन 12 की शूटिंग शुरू की थी। उन्होंने बेटे अभिषेक बच्चन, बहू ऐश्वर्या राय बच्चन और पोती आराध्या के साथ नानावती अस्पताल में इलाज कराया।

ट्रंप को बैन करना सही लेकिन ख़तरनाक: ट्विटर बॉस जैक डोर्सी


ट्विटर के मालिक जैक डोर्सी ने कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप को प्रतिबंधित करना एक सही फ़ैसला था. हालाँकि उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि असाधारण और अपरिहार्य हालात के कारण ट्रंप के ट्विटर अकाउंट को स्थायी रूप से निलंबित करना पड़ा.

डोर्सी ने ये भी कहा कि प्रतिबंध लगाना ट्विटर की नाकामी है क्योंकि इसे लेकर एक जो स्वस्थ संवाद होना चाहिए था, वो नहीं हो पाया.

ट्रंप के अकाउंट बंद करने को लेकर ट्विटर की आलोचना और प्रशंसा दोनों हो रही है. जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल और मेक्सिको के राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुएल लोपेज़ ओब्रैडोर ने ट्रंप को बैन करने की आलोचना की थी.

दोनों नेता ट्रंप के कोई क़रीबी नहीं रहे हैं. ट्विटर प्रमुख जैक डोर्सी ने इस मामले में एक साथ कई ट्वीट कर सफ़ाई दी है. उन्होंने कहा है कि वो ट्रंप पर प्रतिबंध लगाकर कोई उत्सव नहीं मना रहे हैं और न ही इसे लेकर उन्हें गर्व है. ट्विटर ने वाशिंगटन में ट्रंप समर्थकों के हमले के बाद ट्विटर पर बैन लगा दिया था.

जैक ने कहा, ”ट्रंप को पहले भी चेतावनी दी गई थी. इसके बाद ही उनके अकाउंट को निलंबित किया गया. हमलोगों के पास सुरक्षा को लेकर ख़तरे की पुख्ता सूचना थी और इसी आधार पर यह फ़ैसला लिया गया.”