बयान / संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कश्मीर के हालात पर चिंता जताई, मध्यस्थता की पेशकश की; भारत ने ठुकराई, कहा- असली मुद्दा पीओके

नई दिल्ली. भारत ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का कश्मीर पर मध्यस्थता का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि असली मुद्दा पाकिस्तान की ओर से अवैध तरीके से कब्जाए गए क्षेत्र (पीओके) को खाली कराने का होना चाहिए। दरअसल, गुटेरेस ने रविवार को ही इस्लामाबाद दौरे पर कहा था कि वे कश्मीर की स्थिति को लेकर चिंतित हैं और भारत-पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को सुलझाने में मध्यस्थता कर सकते हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने गुटेरेस का यह प्रस्ताव ठुकराते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है और आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा कि यूएन प्रमुख को पाकिस्तान पर इस बात का दबाव डालना चाहिए कि वह भारत के खिलाफ इस्तेमाल हो रहे आतंकवाद पर विश्वसनीय कार्रवाई करे।

गुटेरेस ने रविवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के साथ बैठक की।

आतंकवाद की वजह से कश्मीरियों का मानवाधिकार खतरे में
विदेश मंत्रालय की ओर से आगे कहा गया, “दोनों देशों के विवाद में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं है। सभी विवादों का हल द्विपक्षीय तरीके से ही हो सकता है, लेकिन असल मुद्दा पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जा किए गए क्षेत्रों को मुक्त कराने का होना चाहिए। हम उम्मीद करते हैं कि यूएन महासचिव सीमापार आतंकवाद को रोकेंगे। इसकी वजह से जम्मू-कश्मीर और बाकी भारत के लोगों के मानवाधिकार पर खतरा पैदा होता है।

यूएन महासचिव ने क्या कहा था?
एंटोनियो गुटेरेस रविवार को ही 4 दिनों के दौरे पर इस्लामाबाद पहुंचे। यहां उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के साथ बैठक की। बैठक के दौरान ही उन्होंने कहा कि वे जम्मू-कश्मीर के हालात और एलओसी पर दोनों देशों के बीच जारी तनाव से काफी चिंतित हैं। उन्होंने कहा था कि भारत और पाकिस्तान के लिए सैन्य रूप से तनाव खत्म करना जरूरी है। उन्हें कश्मीर मुद्दे पर भी एहतियात बरतना होगा। इसी के साथ गुटेरेस ने कहा था कि अगर दोनों देश चाहें तो वे मदद के लिए तैयार हैं।

सीएम-सिंधिया में बढ़ी तल्खियां, दिल्ली छोड़ अचानक ग्वालियर आए ज्योतिरादित्य, कहा- सड़कों पर उतरूंगा.

भोपाल. मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री कमलनाथ के बीच तल्खियां बढ़ती जा रही हैं। सीएम कमलनाथ के बयान के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पलटवार किया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया रविवार को अचानक ग्वालियर पहुंचे। यहां उन्होंने एक बार फिर कमलनाथ सरकार पर हमला करते हुए कहा कि अब सड़कों पर उतरना ही पड़ेगा। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ये भी कहा कि 5 पत्र पांच सालों के लिए है लेकिन वचन पत्र पूरा नहीं हुआ तो अब सड़कों पर उतरना ही पड़ेगा।
पीछे हटने को तैयार नहीं सिंधिया
सीएम कमलनाथ के तल्ख बयान के बाद पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया अचानक ग्वालियर पहुंचे और मीडिया से बात करते हुए कहा कि मैं जनसेवक हूं और जनता के मुद्दों पर लड़ाई करना मेरा धर्म है। लेकिन अभी सब्र रखना एक साल हुआ है। वचन पत्र में जितने भी मुद्दे हैं उन्हें पूरा करना होगा अगर मुद्दे पूरे नहीं हुए तो हमें सड़कों पर तो उतरना ही पड़ेगा।

डैमज कंट्रोल में उतरे मंत्री
सिंधिया-कमलनाथ में बढ़ती तकरार के बीच कमलनाथ कैबिनेट के मंत्री डैमज कंट्रोल पर जुट गए हैं। मंत्री इमरती देवी वे कहा- अगर महाराज सड़क पर उतरे तो उनके साथ पूरी कांग्रेस सड़क पर उतरेगी। उन्होंने यह भी कहा कि महाराजा अकेले नहीं हैं। उनके साथ राहुल गांधी, दिग्विजय सिंह और हमारे मुख्यमंत्री कमलनाथ भी हैं। लेकिन ये नौबत नहीं आई कि महाराज को सड़क पर उतरना पड़े। मंत्री पीसी शर्मा ने कहा- कांग्रेस में सब ऑल इज वेल है।
क्या कहा था सिंधिया ने?
पिछले दिनों मध्यप्रदेश दौरे पर आए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अतिथि शिक्षकों के समर्थन में कहा था कि वचन पत्र में आपकी नियुक्ति की बात थी। थोड़ा धैर्य रखें, अगर आपकी मांगे पूरी नहीं होती है तो फिर हम भी आपके साथ सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे।

कमलनाथ ने दिया जवाब
समन्वय समिति की बैठक खत्म होने के बाद सीएम कमलनाथ बाहर निकले। जब उनसे सिंधिया की धमकी पर सवाल पूछा गया कि वह सड़क पर उतरने की बात कह रहे हैं। इस पर कमलनाथ ने कहा कि तो उतर जाएं। उसके बाद वह ड्राइवर से बोले कि गाड़ी आगे बढ़ाओ। लेकिन उनका बॉडी लैंग्वेज बता रहा था कि वह बहुत नाराज हैं। इससे पहले कमलनाथ ने कहा था कि हमारा वचन पत्र पांच साल के लिए है।

पैरासिटामॉल, जैसी जरूरी दवाओं का सिर्फ फरवरी तक स्टॉक 

चीन में Coronavirus के कहर ने वहां की पूरी व्यवस्था को ठप करके रख दिया है। वहां संचालित होने वाला बिजनेस भी बुरी तरह से इस वायरस की वजह से प्रभावित हुआ है। इसका असर अब भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है। दरअसल कई जरूरी दवाओं के रॉ मटेरियल के साथ ही उनकी सप्लाई भी चीन से होती है। Coronavirus के कहर बरपाने के बाद वहां से आने वाले दवाईयों पर सीधा असर पड़ा है। इसका नतीजा है कि भारत के दवा व्यापारियों के पास Paracetamol, Ibruprofen जैसी कई अन्य जरूरी दवाओं का स्टॉक सिर्फ फरवरी तक का ही बचा है।

अगर Coronavirus की वजह से चीन का कारोबार इसी तरह से प्रभावित होना जारी रहा तो आने वाले दिनों में यह भारत के लिए भी काफी बड़ा संकट पैदा कर सकता है। फेडरेशन ऑफ इंडियन चेंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) के मुताबिक अलग अलग उद्योग क्षेत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार मेडिसीन के साथ ही स्मार्टफोन और सौर उपकरण उत्पादन भी Coronavirus के हमले की वजह से प्रभावित हो सकता है.

FICCI ने स्टडी के बाद कहा कि चीन में दवाओं के रॉ मटेरियल का उत्पादन ऐसे ही बंद रहता है तो फॉर्मास्युटिकल प्रोडक्ट्स के दामों में उछाल आने की संभावना है। बता दें कि भारत में विभिन्न उद्योगों को 70 फीसदी दवाओं से जुड़ी सामग्री का आयात चीन की ओर से किया जाता है। हालांकि सरकार की ओर से कहा गया है कि देश में दवाओं का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय आगे की स्थिति से निपटने के लिए योजना पर काम भी शुरू कर चुका है।

गौरतलब है कि देश में आने वाली कई दवाएं ऐसी हैं जिनका मटेरियल चीन के वुहान शहर में ही तैयार किया जाता है। Coronavirus का सबसे ज्यादा कहर वुहान में ही रहा है, ऐसे में वहां सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है और कारोबार पूरी तरह से बंद है।

वाराणसी से उज्जैन महाकाल एक्सप़ेस रेल को हरी झंडी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी से काशी महाकाल एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. आम यात्री 20 फरवरी से इस ट्रेन में सफर कर पाएंगे. इस ट्रेन के माध्यम से मध्य प्रदेश के इंदौर के समीप स्थित ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर (इंदौर), उज्जैन स्थित महाकालेश्वर और उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ तीन तीर्थस्थल जुड़ेंगे.

यह ट्रेन काशी विश्वनाथ की नगरी वाराणसी से इंदौर के बीच चलेगी. यह ट्रेन तीन ज्योतिर्लिंगों- काशी विश्वनाथ, ओमकारेश्वर (इंदौर के निकट) और महाकालेश्वर (उज्जैन)- को जोड़ेगी. इसके अलावा यह ट्रेन मध्य प्रदेश के इंडस्ट्रियल हब इंदौर और राजधानी भोपाल को भी जोड़ेगी.

यह ट्रेन हर मंगलवार और गुरुवार को दोपहर 2.45 बजे वाराणसी से चलेगी और अगले दिन सुबह 9:40 बजे इंदौर पहुंचेगी. वापसी में यह ट्रेन हर बुधवार और शुक्रवार को सुबह 10:55 बजे इंदौर से चलेगी और अगले दिन सुबह 6 बजे वाराणसी पहुंचेगी. यह ट्रेन दोनों तरफ से उज्जैन, संत हिरदाराम नगर, बीना, झांसी, कानपुर, लखनऊ और सुल्तानपुर स्टेशनों पर रुकेगी.

वहीं इस ट्रेन को हफ्ते एक दिन प्रयागराज के रास्ते चलाया जाएगा. ट्रेन हर रविवार को वाराणसी से दोपहर 3:15 बजे इंदौर के लिए चलेगीऔर अगले दिन सुबह 9.40 बजे इंदौर पहुंचेगी. वापसी में यह ट्रेन हर सोमवार को सुबह 10.55 बजे इंदौर से चलेगी और अगले दिन सुबह 5 बजे वाराणसी पहुंचे. दोनों दिशाओं से यह ट्रेन उज्जैन, संत हिरदाराम नगर, बीना, झांसी, कानपुर और प्रयागराज स्टेशन पर रुकेगी.

आईआरसीटीसी द्वारा चलाई जाने वाली काशी महाकाल एक्सप्रेस तीसरी कॉरपोरेट ट्रेन है. आईआरसीटीसी की वेबसाइट के मुताबिक वाराणसी से इंदौर के बीच एक यात्री का किराया इस ट्रेन में 1951 रुपये लगेगा. काशी महाकाल एक्सप्रेस में भी तेजस की तरह डायनैमिक किराया वसूला जाएगा.

आईआरसीटीसी ने कहा कि रातभर के सफर को ध्यान में रखते हुए इस ट्रेन में यात्रियों को उच्च गुणवत्तापूर्ण शाकाहारी भोजन, बेडरॉल और हाउसकीपिंग सर्विस जैसी सुविधाओं के साथ-साथ प्रत्येक यात्री को यात्रा के दौरान 10 लाख रुपये की यात्रा बीमा कवर भी दी जाएगी.

बता दें, IRCTC द्वारा चलाई जा रही तेजस ट्रेन के लेट होने पर हर्जाने का भी प्रावधान है. तेजस एक घंटा लेट होने पर यात्रियों को 100 रुपये, जबकि 2 घंटे से ज्यादा की देरी पर 250 रुपये का मुआवजा मिलता है. हर्जाना पाने के लिए कोई भी पैसेंजर आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर जाकर क्लेम का तरीका जान सकते हैं और वहां से इस धनराशि का क्लेम ले सकते हैं. टोल फ्री नंबर पर कॉल कर भी मुआवजे का क्लेम किया जा सकता है.

इस ट्रेन की खासियतें
महाकाल एक्सप्रेस में विमान की तरह व्यक्तिगत एलसीडी एंटरटेनमेंट-कम-इंफोर्मेशन स्क्रीन, ऑन बोर्ड वाई-फाई सेवा, आरामदायक सीटें, मोबाइल चार्जिंग, व्यक्तिगत रीडिंग लाइट्स, मोड्यूलर बायो-टॉयलेट और सेंसर टेप फिटिंग की सुविधाएं हैं.

मध्यप्रदेश में सबसे महंगी शराब ग्वालियर संभाग के शिवपुरी जिले में 🔥🔥

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शिवपुरी में शराब माफियाओं और आबकारी विभाग की आमजनता की लूट के लिए खुली छूट

मनमर्जी दामों में बेची जा रही है शराब

आबकारी विभाग व शराब माफिया की मिली भगत से संभाग में सबसे ऊँची दरों में

शिवपुरी- मध्यप्रदेश में सबसे महँगी शराब शिवपुरी में बेची जा रही है और इसमें ऐसा नहीं है कि आबकारी विभाग को इसकी जानकारी नहीं है बल्कि आबकारी विभाग की पूरी मिली भगत है क्योंकि सूत्रों की मानें तो एक बड़ा हिस्सा आबकारी विभाग के पास भी पहुंचता है । क्योंकि सारे जिले में सिर्फ एक ही आवकारी ठेकेदार( कंपनी )का राज है इसलिए मनमाने दामों में कंपनी द्वारा शराब बेची जा रहीं है इतना ही नहीं शराब में कंपनी द्वारा जमकर मिलावट की जा रही है यदि इसकी शिकायत आबकारी अधिकारी से की जाती है तो आबकारी अधिकारी द्वारा दलील दी जाती है कि कोई मिलावट नहीं कि जा रही है और ना ही हमारे यहां प्रिंट रेट से अधिक दरों पर शराब बेची जा रही है ।

नहीं लगा रखा कोई रेट कार्ड

शराब कंपनी की इतनी जबरजस्त दादागिरी है कि उन्होंने पूरे जिले में किसी भी दुकान पर रेट कार्ड नहीं लगा रखा है इतना ही नहीं जब शराब विक्रेता से दाम बड़े होने की बात की जाती है तो वे कहते है कि लेना हो तो लो नहीं तो मत लो हम तो इसी रेट में बेचेंगे । यदि किसी ग्राहक द्वारा शराब के दाम को लेकर बहस की जाती है तो कंपनी के गुर्गे लड़ाई झगड़े पर उतारू हो जाते हैं ।

गांव गांव में अबैध तरीके से बेची जा रही शराब

आवकारी विभाग की मौन स्वीकृति के कारण गाँव गाँव में अबैध तरीके से कमीशन पर परचूने की दुकानों पर शराब विक्रय की जा रही है ऐसे में आवकारी विभाग के द्वारा कार्यवाही ना करना कहीं ना कहीं इन सव में खुद की संलिप्पतता दर्शाता है…..अव देखना होगा कि आवकारी आयुक्त क्या संज्ञान लेते हैं.

अरविंद केजरीवाल ने पूरी दिल्ली को साथ लेकर चलने का आश्वासन देते हुए कहा, सबको साथ में लेकर चलेंगे

दिल्ली
अरविंद केजरीवाल ने पूरी दिल्ली को साथ में लेकर चलने का आश्वासन देते हुए कहा, ‘अभी चुनाव हुए कुछ लोगों ने आम आदमी पार्टी को वोट दिया।और कुछ लोगों ने बीजेपी को वोट दिया। कुछ लोगों ने कांग्रेस और अन्य को वोट दिया। आज जब मैंने सीएम पद की शपथ ली है। मैं सबका मुख्यमंत्री हूं।’
दिल्लीवासियों को श्रेय देते हुए कहा है।कि अब पूरे देश की राजनीति बदल रही है। उन्होंने अगले पांच साल के लिए दिल्ली के 2 करोड़ लोगों का साथ मांगा तो दिल्ली के विकास के लिए पीएम नरेंद्र मोदी से भी आशीर्वाद की अपेक्षा की है।

केजरीवाल ने छह मंत्रियों के साथ शपथ के बाद कहा, ‘आज आपके बेटे ने तीसरी बार शपथ ली है। यह मेरी जीत नहीं है। यह आपकी और एक-एक दिल्ली वाले  लोगों की जीत है। एक-एक मां, बहन, युवा, छात्र और परिवार की जीत है। पिछले 5 सालों में हमारी यही कोशिश रही है। कि एक-एक दिल्ली वाले लोगों की जिंदगी में खुशहाली ला सकें। हमारी कोशिश रही। कि किस तरह दिल्ली का खूब तेजी के साथ में विकास हो। अगले 5 साल भी हमारी यही कोशिश जारी रहेगी। सब लोग अपने गांव में फोन करके कह देना हमारा बेटा सीएम बन गया अब चिंता की बात नहीं है।’
‘मैं सबके लिए काम करूंगा’
आज जब मैंने सीएम पद की शपथ ली है मैं सबका मुख्यमंत्री हूं। मैं आप, बीजेपी, कांग्रेस और दूसरी पार्टी वालों का भी मुख्यमंत्री हूं। पिछले इन पांच साल में मैंने किसी के साथ सौतेला व्यवहार नहीं किया। मैंने किसी का काम यह कहकर नहीं रोका कि तुम दूसरी पार्टी के हो। मैंने सबका काम किया।’
केजरी के शपथ में विपक्ष नहीं, क्या संकेत?

उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे पता चला यह मोहल्ला बीजेपी वालों का है मैंने वहां भी काम कराया। मैं 2 करोड़ दिल्लीवासियों को यह कहना चाहता हूं कि चुनाव खत्म हो गया। आपने जिसको वोट दिया अब आप सभी मेरा परिवार हो। आप चाहे किसी भी पार्टी के हो आप मेरे परिवार के हिस्सा हो, कभी कोई काम हो मेरे पास बेहजिजक आना। सबका काम करूंगा चाहे कोई किसी पार्टी, किसी धर्म या जाति का हो।’

सबका मांगा साथ, पीएम से आशीर्वाद
सीएम अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के विकास के लिए सभी का साथ मांगते हुए कहा, ‘अभी दिल्ली के लिए बहुत बड़े-बड़े काम करने हैं। मैं अकेले नहीं कर सकता। हम सब मिलकर काम करेंगे। चुनाव खत्म हो गए। चुनाव में राजनीति होती है। एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी होती है। हमारे विरोधियों ने हमें जो कुछ बोला हमने उन्हें माफ कर दिया आज, मैं उनसे भी निवेदन करता हूं जो कुछ उठापटक हुई भूल जाओ। मैं सारी पार्टियों के साथ मिलकर दिल्ली का विकास करना चाहता हूं। मैं केंद्र के साथ मिलकर काम करना चाहता हूं। मैं दिल्ली को दुनिया का सबसे अच्छा शहर बनाना चाहता हूं। मैंने पीएम को भी न्योता भेजा था वे कहीं और व्यस्त हैं आ नहीं पाए। लेकिन मैं इस मंच से दिल्ली को आगे बढ़ाने के लिए पीएम का भी आशीर्वाद चाहता हूं।’
नई तरह की राजनीति’
दिल्लीवासियों को नई तरह की राजनीति का श्रेय देते हुए केजरीवाल ने कहा, ‘आपने इस चुनाव में नई राजनीति को जन्म दिया है। एक नई राजनीति इस देश में पैदा हुई है, काम की राजनीति, स्कूल की राजनीति, अस्पताल की राजनीति, सस्ती बिजली की राजनीति, अच्छी सड़कों की राजनीति, भ्रष्टाचार मुक्त भारत की राजनीति, 21 वीं सदी की राजनीति।’ इन्होंने इस एक कविता के जरिए समझाया।

‘पूरे देश में बजा डंका’
नई राजनीति का डंका पूरे देश में बज रहा है। देशभर से खबर आ रही है फलानी सरकार ने मोहल्ला क्लीनिक बनानी शुरू कर दी है, फलानी सरकार ने बिजली मुफ्त कर दी है। दिल्ली वालों आपने कमाल कर दिया है। पूरे देश में डंका बज रहा है। अब कोई नेता कहता है कि सरकारी स्कूल ठीक नहीं हो सकते तो लोग कहते हैं दिल्ली की ओर देखो। कोई कहता है कि सरकारी अस्पताल नहीं सुधर सकते तो लोग कहते हैं कि दिल्ली की ओर देखो, दिल्ली के लोगों ने देश की राजनीति बदल दी है।’
नई राजनीति से पूरी दुनिया में बजेगा भारत का डंका
केजरीवाल ने आम लोगों को दिल्ली का निर्माता बताते हुए कहा कि नेता आते-जाते रहते हैं, पार्टी आती-जाती रहती है दिल्ली इन लोगों की वजह से आगे बढ़ती है। कुछ लोग कहते हैं कि केजरीवाल सबकुछ फ्री करता जा रहा है। दोस्तों इस दुनिया के अंदर जितनी भी अनमोल चीजें हैं भगवान ने फ्री बनाई है। केजरीवाल ने कहा कि आने वाला समय भारत का होगा। पूरी दुनिया में भारत का डंका बजेगा। लंदन, अमेरिका, अफ्रीका में भारत का डंका बजेगा और यह संभव इस नई राजनीति से होगा।

शरद यादव की सक्रियता से बढ़ी लालू की बेचैनी, बड़ा सवाल: क्‍या शुरू की तीसरे मोर्चे की कवायद?

पटना, । बिहार की राजनीति में फिर हलचल मची है। समाजवादी नेता शरद यादव ने महागठबंधन के पांच में से तीन घटक दलों के प्रमुख नेताओं से बंद कमरे में बातचीत कर राष्‍ट्रीय जनता दल और कांग्रेस की बेचैनी बढ़ा दी है। शरद यादव की क्रियाशीलता को प्रत्यक्ष तौर पर तीसरे मोर्चे की कवायद से जोड़कर देखा जा रहा है, किंतु पर्दे के भीतर की कहानी यह भी है आरजेडी पर दबाव डालकर वे लालू प्रसाद यादव से अपने लिए राज्यसभा की सदस्यता सुनिश्चित करना चाहते हैं।

रांची में लालू से मुलाकात, बड़े मुद्दों पर बात

बिहार कोटे की राज्यसभा की पांच सीटें अप्रैल में खाली होंगी। आरजेडी के खाते में दो सीटें आनी तय हैं। शरद यादव भी इसके लिए दावेदार हैं। इसी मकसद से उनकी रांची में शनिवार को लालू से मुलाकात भी हुई। इस दौरान दोनों नेताबों के बीच बड़े मुद्दों पर बातचीत हुई।

शरद यादव के नाम पर सहमत नहीं तेजस्‍वी

सूत्रों का कहना है कि शरद के नाम पर तेजस्वी सहमत नहीं हैं। पटना में तीन दिनों तक रहते हुए भी दोनों नेताओं के बीच मुलाकात नहीं हो सकी। जबकि, तेजस्वी को मुख्यमंत्री का चेहरा मानने से परहेज करने वाले जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा और मुकेश सहनी से शरद की लंबी मंत्रणा हुई। इसके भी दो मायने निकाले जा रहे हैं। पहला यह कि शरद को तेजस्वी की सरपरस्ती स्वीकार नहीं है और दूसरा, 74 वर्षीय शरद बताना-जताना चाह रहे हैं कि राजनीति में अभी वह पूरी तरह अप्रासंगिक नहीं हुए हैं।

तेजस्वी के चारों ओर घेरा डालने की कोशिश

बहरहाल, शरद यादव महागठबंधन के अन्य घटक दलों के सहयोग से तेजस्वी यादव के चारों ओर घेरा डालने की कोशिश में हैं। शरद यादव के फ्रंट पर आकर खेलने की बेचैनी का असर है कि मांझी, कुशवाहा और मुकेश सहनी को उनमें नेतृत्व का अक्स दिखने लगा है। हालांकि, आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह कहते हैं कि शरद देश के नेता हैं। बिहार तेजस्वी के लिए है।

कानों देखी : रिंकिया के पापा की बढ़ी मुसीबत

सार

अब दिल्ली विधानसभा चुनाव का नतीजा आ गया है तो रिंकिया के पापा की भी मुसीबत बढ़ गई है। तिवारी विनम्रता दिखाकर और पहले ही हार की जिम्मेदारी लेकर चतुराई भरा पासा फेंक चुके हैं। मगर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इतने से मानने वाला नहीं है।
 

विस्तार

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी का…भोजपुरी में रिंकिया के पापा वाला गाना मशहूर है।अब दिल्ली विधानसभा चुनाव का नतीजा आ गया है तो रिंकिया के पापा की भी मुसीबत बढ़ गई है। तिवारी विनम्रता दिखाकर और पहले ही हार की जिम्मेदारी लेकर चतुराई भरा पासा फेंक चुके हैं। मगर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इतने से मानने वाला नहीं है।

कारण भी साफ है कि अपने पूरे कार्यकाल में मनोज तिवारी ने दोस्त कम, दुश्मन अधिक बना लिए हैं। हालांकि उनके समर्थकों का कहना है कि तिवारी के चलते पूर्वांचल के मतदाताओं ने जमकर भाजपा के पक्ष में वोट दिया है, लेकिन विरोधी भी सूचना सामग्री इकट्ठा करके अभियान में जुटे हैं।

प्रदेश भाजपा के बड़े नेता की टीम भी चाह रही है कि तिवारी की छुट्टी हो। इस खेल में दिल्ली के परंपरागत नेता भी अब कोई कसर नहीं छोडना चाहते। हालांकि मनोज तिवारी के एक करीबी का कहना है कि दिल्ली में जो हुआ है, उसमें अध्यक्ष के हाथ में था ही क्या? सब कुछ तो केंद्रीय नेतृत्व ने तय किया है। लेकिन एक कहावत तो है। अनुष्ठान संपन्न होने के बाद बलि का बकरा दे दो।

कांग्रेस में घमासान…सोनिया खामोश

कांग्रेस पार्टी में इस समय वैचारिक घमासान जोरों पर है। युवा ब्रिगेड तीर कमान लेकर खड़ी हो गई है। बताते हैं राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट गुस्से में हैं। वह कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के लगातार संपर्क में है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया की भी यही हालत है। वह प्रियंका गांधी से संवाद में तंज तक कस देते हैं। राहुल गांधी की टीम की होनहार सदस्य सुष्मिता देव को भी नहीं पता कि उनकी पार्टी का क्या होगा? गुलाम नबी आजाद राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। उन्हें लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी कुछ ज्यादा ही स्मार्ट दिखाई दे रहे हैं। आजाद को भी लग रहा है कि कांग्रेस में फैसले अब जरूरत से ज्यादा अटकने लगे हैं।

पीसी चाको का चेहरा तो देखने लायक बन जाता है। अजय माकन लंबी सांस लेकर अजब सी चुप्पी साध लेते हैं। सबका मानना है कि पार्टी को एक दिशा लेनी चाहिए। पार्टी के एक पूर्व महासचिव का कहना है कि कांग्रेस के पास जैसे लगता है कि दिमाग खत्म हो चुका है। केवल शरीर बचा है। पार्टी लगातार लोक विरुद्ध निर्णय ले रही है। संगठन में सुधार का कोई कदम नहीं उठा रही है और बड़े अफसोस की बात है कि दिल्ली में खुद ही अपना संगठन खत्म करने जैसा कदम उठा लिया।

नड्डा जी के सामने तीन संकट

जेपी नड्डा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। संगठन की राजनीति को गहराई से समझने वाले जगत प्रकाश नड्डा की व्यावहारिक परेशानी यह है कि भाजपा के नेता उनसे ज्यादा गृहमंत्री अमित शाह से मिलने के लिए चक्कर काट रहे हैं।

दरअसल पार्टी के नेताओं को लग रहा है कि नड्डा जी भले अध्यक्ष बन गए, लेकिन होगा वही जो पुराने अध्यक्ष जी चाहेंगे। पश्चिम बंगाल के नेताओं का भी यही हाल है। बिहार के भाजपा नेताओं का भी यही हाल है। दूसरी बड़ी चुनौती संगठन को लेकर है। सभी पदाधिकारी पुराने अध्यक्ष जी के समय के हैं। इन्हें हटाना, बदलना सब कुछ बहुत आसान नहीं है।

तीसरी बड़ी चुनौती पार्टी के जनाधार को बढ़ाना, सदस्य संख्या को बढ़ाना और आगामी राज्यों में विधानसभा चुनाव जितवाना है। बताते हैं बारीकी से काम करने वाले नड्डा के पास सभी संकटों से निपटने का उपाय है। बस सबसे बड़ा संकट यह है कि वह स्वतंत्र होकर काम करने की तरकीब कैसे तैयार करें। यही सबसे बड़ा संकट है।

चुनाव हार गए लेकिन आगे भी बोलेंगे…बिगड़े बोल

दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भले ही केंद्रीय गृहमंत्री और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह ने अपने नेताओं के बिगड़े बोल से किनारा कर लिया हो, लेकिन इस तरह की भाषणबाजी कम नहीं होने वाली है।

भाजपा के एक महासचिव को इसमें कुछ भी गलत नहीं लग रहा है। एक अन्य नेता का कहना है कि भाजपा में लोगों की कई स्तर पर ट्रेनिंग होती है। चुनाव प्रचार अभियान में वालेंटियर और राज्यों के कार्यकर्ता भी होते हैं। वह अपने प्रशिक्षण और समझ के आधार पर चुनाव प्रचार करते हैं।

सूत्र का कहना है कि यह विचारधारा की लड़ाई है और इसे कैसे रोका जा सकता है। सूत्र का कहना है कि आप दिल्ली विधानसभा चुनाव को लोकसभा चुनाव 2019 से मत जोड़िए। विधानसभा चुनाव राज्य के मुद्दे पर लड़ा जाता है। प्रधानमंत्री हमारे सबसे लोकप्रिय नेता हैं, हम उनके चेहरे पर चुनाव लड़ते हैं, लेकिन इसके साथ अन्य फैक्टर भी होते हैं।

बताते हैं दिल्ली में पिछले विधानसभा चुनाव से भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़ा है। विधायकों की संख्या बढ़ी है। केवल भाजपा और आम आदमी पार्टी में मुकाबला हुआ है और हमारे प्रत्याशियों का हार का अंतर बहुत कम रहा है। पिछली बार की तुलना में दो दर्जन सीटों पर यह बहुत ही कम है।

2021 में होगा अखिलेश…शिवपाल

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव भतीजे के निमंत्रण का इंतजार कर रहे हैं। मुलायम सिंह यादव भी चाहते हैं कि मामला जल्दी से निपट जाए ताकि प्रदेश भर के समाजवादी समय रहते इकट्ठा हो सके। अखिलेश यादव की टीम इस परिस्थिति का अपने हिसाब से अभी भी गुणा-भाग कर रही है। उसे लग रहा है कि धीरे-धीरे शिवपाल सिंह यादव राजनीति की बाउंड्री के बाहर की तरफ जा रहे हैं। प्रोफेसर राम गोपाल यादव भी स्थिति पर निगाह लगाए हैं। बताते हैं इस घटनाक्रम पर निगाह तो मुख्यमंत्री योगी, बसपा प्रमुख मायावती की भी है, लेकिन अभी कोई प्रगति 2021 में होगी क्योंकि चुनाव 2022 में है। तब तक सब कुछ इसी तरह से चलता रहेगा।

बसपा नेता मायावती…भीम आर्मी नेता चंद्रशेखर

बसपा प्रमुख मायावती के सामने भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर लगातार बड़ी मुसीबत बनते जा रहे हैं। मायावती को अब यह खबर मिलने लगी है कि सहारनपुर से लेकर प्रदेश के दूसरे हिस्सों और अन्य राज्यों में भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर की फालोइंग बढ़ रही है। स्कूल, कालेज में पढ़ रहा युवा चंद्रशेखर की क्रांतिकारी राजनीति से तेजी से प्रभावित हो रहा है।

बसपा के एक नेता का भी मानना है कि यू-ट्यूब, सोशल मीडिया पर भी चंद्रशेखर काफी देखे जा रहे हैं। इससे बड़ी चौंकाने और हैरान करने वाली बात है कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी चंद्रशेखर से लगातार संपर्क बनाए रखती हैं। वैसे भी दिल्ली में बसपा ने बहुत खराब प्रदर्शन किया है।

मध्य प्रदेश में भी उसकी स्थिति पहले से खराब हुई है। राजस्थान में उसके विधायक कांग्रेस में चले जाते हैं। पार्टी की आर्थिक स्थिति भी लगातार गिर रही है। ऐसे में बसपा सुप्रीमो को अब पार्टी के जनाधार की चिंता सताने लगी है। बताते हैं इसके साथ-साथ दूसरी मुसीबत भी है। वह चाहकर भी सरकारों पर पहले की तरह खुलकर राजनीतिक हमला नहीं कर पा रही हैं। किसी ने सही कहा है, जब हाथ बंधे हो तो जनता के विश्वास का ही भरोसा रह जाता है।

समस्या तो गंभीर है प्रियंका जी

पुरानी कहावत है कि अंधा पीस रहा था और कुत्ता आटा खा गया। यूपी के कांग्रेसी नेता इस समय इस कहावत से फिर परेशान हैं। उनकी परेशानी का हालांकि एक कारण और है। प्रियंका गांधी की टीम में कोई वामपंथी सोच का घुस आया है।

वह यूपी कांग्रेस पार्टी से ब्राह्मण चेहरों को रह-रहकर टारगेट कर रहा है। जबकि रणनीतिकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी के ठाकुरवाद से निराश ब्राह्मण कांग्रेस का वोटबैंक बनने वाले हैं। राज्य में दस प्रतिशत से अधिक हैं भी। दूसरी बड़ी समस्या है कि प्रियंका गांधी वाड्रा यूपी में लगातार सरकार विरोधी लहर पैदा करने के लिए जमीन तैयार कर रही हैं।

कड़ी मेहनत कर रही हैं और बार-बार, लगातार यूपी दौरे पर हैं। कांग्रेसियों का डर है कि कहीं कमजोर संगठन, पुराने ब्राह्मण समेत अन्य नेताओं से दूरी, वामपंथ की चल रही लाइन का कांग्रेस को नुकसान न उठाना पड़ जाए। सरकार विरोधी लहर कांग्रेस खड़ी करे और फायदा समाजवादी पार्टी या बसपा उठा ले जाए?