Broom Astro Tips : झाड़ू के इस उपाय को करते ही दूर होगी दरिद्रता, हो जाएंगे मालामाल

घर की गंदगी को साफ करने वाली झाड़ू का संबंध आपके सुख और सौभाग्य से भी है क्योंकि इसका सीधा संबंध महालक्ष्मी से मिलने वाली कृपा से बताया गया है. कहा भी गया है कि जिस घर में हमेशा साफ-सफाई रहती है, वहां हमेशा माता लक्ष्मी का वास होता है. कई बार लोग माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए किसी मंदिर में झाड़ू का दान भी करते हैं. घर में झाड़ू के प्रयोग के कुछ नियम बताए गये हैं, जिनका पालन करने पर घर में हमेशा सुख-समृद्धि और खुशियां कायम रहती हैं. आइए झाड़ू से जुड़े जरूरी नियम को जानते हैं.

झाड़ू को देवी लक्ष्मी का रूप माना गया है, ऐसे में कभी भी उसे घर में जोर से पटकना या फेंकना नहीं चाहिए. जिस घर में झाड़ू का अनादर होता है, वहां से लक्ष्मी माता रूठ कर चली जाती हैं.

घर में हमेशा झाड़ूू को छिपा कर रखने का नियम है क्योंकि यदि वह सबके सामने कहीं रखी होगी तो उसे गलती से पैर लगने का हमेशा डर बना रहेगा. यदि गलती से झाड़ू में पैर लग जाए तो तुरंत मन ही मन में उससे माफी अवश्य मांग लें.

झाडू को दरवाजे के पीछे रखना काफी शुभ माना गया है. हालांकि इस बात का पूरा ख्याल रखें कि झाड़ू को कभी भी खड़ी करके नहीं रखें. खड़ी झाड़ू रखना एक बड़ा अपशकुन माना गया है.

झाड़ू को कभी भी घर से बाहर या छत पर नहीं रखना चाहिए. यह अशुभ माना जाता है. ऐसा करने पर घर में चोरी होने का हमेशा खतरा बना रहता है.

यदि आपके घर का सदस्य किसी जरूरी काम के लिए निकलता है तो उसके जाते ही घर में तुरंत झाड़ू नहीं लगाना चाहिए. ऐसा करने पर उस व्यक्ति को असफलता का सामना करना पड़ सकता है.

झाड़ू से कभी भी गाय या अन्य किसी जानवर या फिर घर के सदस्य को झाड़ू से नहीं मारना चाहिए. इसे भयंकर अपशकुन माना गया है.

हम जब भी किसी नए घर में प्रवेश करें तो उसमें हमेशा नई झाडू लेकर ही प्रवेश करना चाहिए. इसे शुभ शकुन माना जाता है. मान्यता है कि इससे नए घर में सुख-समृद्धि और बरकत बनी रहती है.

टूटी हुई झाड़ू का भूलकर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि टूटी हुई झाड़ू से घर की सफाई करने पर जीवन में तमाम तरह की परेशानियां आती हैं.

झाड़ू को हमेशा कृष्णपक्ष में खरीदना चाहिए और इसका इस्तेमाल शनिवार के दिन शुरु करना शुभ माना जाता है.

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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