Navratri: इस बार घोड़े पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, आठ दिन के होंगे शारदीय नवरात्र, जानिए घट स्‍थापना की विधि

तृतीया और चतुर्थी तिथि एक साथ पड़ने से इस बार शारदीय नवरात्र का एक दिन घटा। इस बार घोड़े पर होगा मां दुर्गा का आगमन हाथी पर करेंगी प्रस्थान। मां दुर्गा का आगमन सामान्‍य फलदायक तो प्रस्‍थान होगा शुभ फलदायक।

इस बार नवरात्र में मांग दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आएंगी और हाथी पर प्रस्‍थान करेंगी।

शारदीय नवरात्र की शुरुआत सात अक्टूबर से होगी। अश्विन मास, शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से आरंभ होने वाले शारदीय नवरात्र में इस बार मां दुर्गा का आगमन घोड़े पर होगा, जो सामान्य फलदायक है, जबकि दशमी शुक्रवार को होने से माता का प्रस्थान हाथी पर होना शुभ फलदायक होगा। इस बार नवरात्र नौ नहीं, बल्कि आठ दिन तक चलेंगे।

ज्योतिषाचार्य पं. चंद्रेश कौशिक ने बताया कि शारदीय नवरात्र की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ छह अक्टूबर को तीसरे पहर चार बजकर 35 मिनट पर होगा, जबकि प्रतिपदा तिथि का समापन सात अक्टूबर को तीसरे पहर तीन बजकर 28 मिनट पर होगा। इसलिए उदया तिथि के अनुसार प्रतिपदा तिथि सात अक्टूबर को सुबह सूर्योदय के समय छह बजकर 13 मिनट मानी जाएगी, जो तीसरे पहर तीन बजकर 28 मिनट तक रहेगी। इस समय के अंतर्गत कभी भी कलश स्थापन संपन्न की जा सकती है।

नौ नहीं, आठ दिन के होंगे नवरात्र

इस बार नवरात्र नौ नहीं, आठ दिन तक चलेंगे क्योंकि दो तिथियां तृतीया और चतुर्थी, एक साथ पड़ने से नवरात्र का एक दिन घट रहा है। पंचांग के अनुसार नौ अक्टूबर, शनिवार को तृतीया तिथि सुबह सात बजकर 48 मिनट तक रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू होगी, जो 10 अक्टूबर को सुबह पांच बजे तक रहेगी।

यह हैं स्थापना का विशेष मुहूर्त

– सुबह छह बजकर 13 मिनट से छह बजकर 40 मिनट तक कन्या लग्न में।

– सुबह 11 बजकर 14 मिनट से दोपहर 01 बजकर 19 मिनट तक धनु लग्न में।

– सुबह 11 बजकर 36 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट तक अभिजित मुहूर्त में कलश स्थापना करें।

ऐसे करें पूजन

श्रद्धालु मिट्टी की वेदी बनाकर उसमें जौ और गेंहू मिलाकर बोएं। उस पर विधिपूर्वक कलश स्थापित करें। कलश पर देवी जी मूर्ति (धातु या मिट्टी) या चित्रपट स्थापित करें। नित्यकर्म समाप्त कर पूजा सामग्री एकत्रित कर पवित्र आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें। आचमन, प्राणायाम, आसन शुद्धि करके शांति मंत्र का पाठ कर संकल्प करें। रक्षादीपक जला लें।सर्वप्रथम क्रमश गणेश-अंबिका, कलश (वरुण), मातृका पूजन, नवग्रहों व लेखपालों का पूजन करें। प्रधान देवता-महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती-स्वरूपिणी भगवती दुर्गा का प्रतिष्ठापूर्वक ध्यान, आह्वान, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, गंध, अक्षत, पुष्प, पत्र, सौभाग्य द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, ऋतुफल, तांबूल, निराजन, पुष्पांजलि, प्रदक्षिणा आदि से विधिपूर्वक श्रद्धा भाव से एकाग्रचित्त होकर पूजन करें।

व्रत का पारण

12 अक्टूबर को सप्तमी तिथि संपूर्ण दिन और रात्रि को एक बजकर 49 मिनट तक व मूल नक्षत्र का योग होने से पंडालों मे मूर्ति स्थापन कार्य इसी दिन होगा। 13 अक्टूबर को महाअष्टमी तिथि रात्रि 11 बजकर 42 मिनट तक है। अष्टमी का उपवास इसी दिन रखा जाएगा। महा निशा पूजन और रात्रि में बलिदानिक कार्य भी इसी दिन होंगे। 14 अक्टूबर को नवमी तिथि रात्रि नौ बजकर 53 मिनट तक है।इस दिन मां दुर्गा के पूजन व पूर्णाहुति के लिए सूर्योदय से रात्रि नौ बजकर 53 मिनट का समय उत्तम है। व्रत का पारण 15 अक्टूबर को होगा।

शारदीय नवरात्रि का कार्यक्रम

07 अक्टूबर- मां शैलपुत्री पूजा व घटस्थापना

08 अक्टूबर- मां ब्रह्मचारिणी पूजा

09 अक्टूबर- मां चंद्रघंटा पूजा

10 अक्टूबर- मां कुष्मांडा पूजा

11 अक्टूबर- मां स्कंदमाता और मां कात्यायनी पूजा

12 अक्टूबर- मां कालरात्रि पूजा

13 अक्टूबर- मां महागौरी पूजा

14 अक्टूबर- मां सिद्धिदात्री पूजा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!