18 महीने बाद खुला भारत-नेपाल का वीरगंज बॉर्डर, इन शर्तों के साथ मिल रही एंट्री की अनुमति

करीब 18 माह से कोविड संक्रमण के कारण बंद नेपाल के वीरगंज बॉर्डर को भारतीय समेत तीसरे देशों के नागरिकों व भारतीय वाहनों की आवाजाही के लिए औपचारिक तौर पर खोल दिया गया। शुक्रवार से नेपाल कस्टम ने कोविड से जुड़ी शर्तों के साथ भारतीय निजी वाहनों के प्रवेश की अनुमति दे दी। इससे बॉर्डर से सटे क्षेत्र के लोगों में हर्ष है।

शुक्रवार सुबह करीब सवा दस बजे वीरगंज स्थित नेपाल कस्टम पर सबसे पहले भारतीय वाहन से पहुंचे टूर-ट्रेवल्स व्यवसायी देशबन्धु गुप्ता व मीडिया फॉर बॉर्डर हार्मोनी संगठन के एम राम, दीपक कुमार, अनुज कुमार, लव कुमार समेत अन्य को एंट्री दी गई। इसके लिए इन्हें हेल्थ डेस्क के थर्मल स्क्रीनिंग व कोविड जांच से गुजरना पड़ा। रिपोर्ट निगेटिव आने व नेपाल इमिग्रेशन के अधिकारियों द्वारा सीसीएमसी फॉर्म भरवाने के बाद प्रवेश की अनुमति मिली।

शंकराचार्य गेट पर किया गया स्वागत

इससे पहले वीरगंज बॉर्डर के शंकराचार्य गेट पर पर्यटन एवं होटल व्यवसायी संघ समेत नेपाल, कस्टम, इमिग्रेशन व आर्म्ड पुलिस फोर्स, नेपाल पुलिस आदि के अधिकारियों ने सबसे पहले प्रवेश पाने वाले भारतीय दल का फूल माला से स्वागत किया। वीरगंज के मेयर विजय सरावगी, होटल एवं पर्यटन व्यवसायी संघ के अध्यक्ष हरी पंत, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सचेन्द्र सिंह थापा, महासचिव माधव बस्नेत, उपाध्यक्ष कुमार श्रेष्ठ, कोषाध्यक्ष पुष्प श्रेष्ठ, पर्यटन पत्रकार महासंघ के अध्यक्ष शंकर आचार्य, राधे श्याम पटेल आदि भी मौके पर थे। 

पंत व आचार्य आदि ने बॉर्डर खोलने व भारतीय वाहनों की आवाजाही की अनुमति देने के लिए प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा का आभार किया। कहा कि इससे पर्यटन, व्यापार की तरक्की के साथ ही द्विपक्षीय जनता के स्तर संबंधों में भी मजबूती आएगी। 

हटाया गए तार व बैरिकेडिंग, एपीएफ का कैंप कायम

बॉर्डर बंद होने के बाद रक्सौल से वीरगंज जाने के क्रम में शंकराचार्य गेट के पास बायीं तरह तार-कांटे का बैरियर लगा दिया गया था, जिसे आर्म्ड पुलिस फोर्स व नेपाल पुलिस के अधिकारियों ने काट कर हटाया गया। उसके बाद पहले भारतीय वाहन को प्रवेश मिला।

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