हाई कोर्ट ने कहा DNA रिपोर्ट नहीं मिलने पर आरोपी को रिहा करना मजबूरी, गंभीर मामलों में जल्दी पूरी की जाए जांच

ग्वालियर; हाईकोर्ट में राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला सेवाएं (स्टेट FSL) के डायरेक्टर डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कोर्ट में अपना जवाब पेश कर कहा है कि लैब में 4386 मामले DNA के लिए पेंडिंग है। स्टाफ कम है उसके बाद भी हर महीने 200 से ज्यादा मामलों को सुलझाया जा रहा है। उनके जवाब से कोर्ट संतुष्ट नजर नहीं हुई है।
स्टेट फोरेंसिक साइंस लैब सर्विस के जवाब से पहले कोर्ट ने नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में आरोपी सोनू परिहार की DNA रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उसके जमानत आवेदन को खारिज कर दिया। आरोपी सोनू परिहार को नाबालिग से बलात्कार के मामले में 8 फरवरी 2021 को गिरफ्तार किया गया है तभी से आरोपी जेल में है। आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 363, 343, 376, 120बी, 376 डी, तथा पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के आधार पर आरोपी का DNA प्रोफाइल पीड़िता के कपड़े पर पाया गया है। इसलिए जमानत नहीं दी गई है।
लैब में स्टॉफ कम होने से बढ़ रही पेंडेंसी
– कोर्ट में जवाब पेश करते हुए राज्य फोरेंसिक साइंस प्रयोगशाला सर्विस के डायरेक्टर द्वारा पेश किए गए हलफनामे में कहा गया है कि 15 सितंबर 2021 तक DNA के कुल 4386 मामले लंबित थे। लैब में कर्मचारियों के खाली पदों की संख्या अधिक होने के कारण भी जांच कार्य प्रभावित हो रहा है। जवाब में कहा गया है कि इंदौर में क्षेत्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला बनने जा रही है, एक माह में यह प्रयोग शाला काम करने लगेगी। इसके बाद जांच की गति और बढेगी। मुख्य लैब पर लोड कम होगा। जबकि कोर्ट का यह कहना था कि DNA रिपोर्ट समय पर न मिलने पर आरोपी को जमानत देना उनकी मजबूरी हो जाती है। इसलिए गंभीर मामलों को समझते हुए जल्द जांच पूरी किया करें।
इन पॉइंट के आधार पर आरोपी को ठहराया जा सकता है दोषी
-न्यायालय ने कहा कि बलात्कार के मामलों में पीडि़ता के बयान
-यदि अभियोजन मुकर जाता है तो वैज्ञानिक और फोरेंसिक साक्ष्य के आधार पर,
-डीएनए प्रोफाइल की उपस्थिति के आधार पर
कर्मचारियों की कमी के जवाब से संतुष्ट नहीं कोर्ट
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि केवल यह कहना कि कर्मचारियों की कमी के कारण जांच नहीं हो पा रही है यह उचित आधार नहीं है, जबकि इसके लिए प्रयास होने चाहिए और समय पर रिपोर्ट मिले इसकी व्यवस्था होना चाहिए। न्यायालय ने यह भी कहा कि जैसे ही रिपोर्ट तैयार हो जाती है लैब को तत्काल ही संबंधित न्यायालय को इसकी सूचना देनी चाहिए। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिए कि यदि किसी मामले में प्राथमिकता के साथ DNA जांच कराना है तो ऐसे मामलों में प्रयोगशालाओं को प्राथमिकता के आधार पर मामले में जांच रिपोर्ट तैयार करना चाहिए। न्यायालय ने आदेश की प्रति प्रयोगशाला महानिदेशक को भेजे जाने के निर्देश दिए जिससे कि इस संबंध में वे आयश्यक कार्यवाही कर सकें।

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