पित्र पक्ष शुरू भाद्रपद पूर्णिमा आज ही है

Bhadrapada Purnima Puja Vidhi: इस वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा 20 सितंबर, दिन सोमवार यानी आज है. भाद्रपद पूर्णिमा हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है. हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्र माह में आने वाली पूर्णिमा को भाद्रपद पूर्णिमा कहा जाता है. यह दिन भाद्रपद मास का अंतिम दिन होता है और इसके बाद आश्विन मास का प्रारंभ हो जाता है. पूर्णिमा तिथि का संबंध माता लक्ष्मी से माना जाता है और इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु के सत्यनारायण रूप की पूजा की जाती है. यह पूर्णिमा इसलिए भी महत्व रखती है क्योंकि इसी दिन से पितृ पक्ष यानि श्राद्ध प्रारंभ होते हैं, जो आश्विन अमावस्या पर समाप्त होते है. इस दिन उमा-महेश्वर व्रत भी रखा जाता है.

भाद्रपद पूर्णिमा व्रत मुहूर्त

आज से पितृ पक्ष शुरू, जानें राहु काल, शुभ और अशुभ समय

सितंबर 19, 2022 को 18:09:31 से पूर्णिमा आरम्भ

सितंबर 20, 2022 को 15:30:28 पर पूर्णिमा समाप्त

भाद्रपद पूर्णिमा का महत्त्व

धार्मिक मान्यता है कि भाद्रपद पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी और भगवान सत्यनारायण की पूजा करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इस व्रत को विधि-विधान के साथ किए जाने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं.

भाद्रपद पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर नित्यकर्म करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहने फिर व्रत का संकल्प लें. इसके बाद विधिवत तरीके से माता लक्ष्मी और भगवान सत्यनारायण की पूजा करें और उन्हें नैवेद्य व फल-फूल अर्पित करें. इस अवसर पर भगवान सत्यनारायण की कथा भी सुनें. इसके बाद भगवान की आरती करें और फिर पंचामृत और चूरमे का प्रसाद वितरित करें. इस दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को दान भी दें. पुराणों में भाद्र पूर्णिमा को भाग्यशाली तिथि माना गया है. इस दिन धन-संपदा प्राप्ति के लिए लक्ष्मी स्त्रोत या कनकधारा स्त्रोत का पाठ भी करना चाहिए. साथ ही पूर्णिमा की मध्य रात्रि को भी भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए. इसके साथ ही रात के समय घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक भी जलाना चाहिए. कहा जाता है कि ऐसा करने माता लक्ष्मी घर में प्रवेश करती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है.

ये भी मान्यता है कि पूर्णिमा तिथि के दिन पीपल के वृक्ष में माता लक्ष्मी का आगमन होता है. इसलिए इस दिन सुबह-स्नान के बाद पीपल के पेड़ को जल चढ़ाएं और धूप, दीप और फूल अर्पित करके भोग लगाएं. कहा जाता है कि ऐसा करने से माता लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है और स्वास्थ्य सम्बन्धी दिक्कतों से मुक्ति मिलती है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Thenewslight इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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