आखिर कहां हैं बरादर, मारे गए या घायल हैं? सरकार में पड़ी फूट की अटकलों पर आया तालिबान के सह-संस्थापक का जवाब

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार की स्थापना के कुछ ही दिनों के भीतर उसमें फूट की खबरों पर तालिबान के सह-संस्थापक और डिप्टी प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर का जवाब आया है। मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने बुधवार को अफगानिस्तान में तालिबान की नई कार्यवाहक सरकार में आंतरिक दरार का खंडन किया और इस बात से भी इनकार किया कि वह काबुल में राष्ट्रपति भवन में झड़प के दौरान घायल हुए थे। इससे पहले वरिष्ठ तालिबान सदस्यों ने ‘बीबीसी’ को बताया था कि बीते हफ्ते अंतरिम सरकार के दो विरोधी धड़ों के सदस्य काबुल स्थित राष्ट्रपति भवन में भिड़ गए थे। अमेरिका के खिलाफ जीत में किसका योगदान ज्यादा था, यह सवाल बहस का केंद्र था। 

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अफगान नेशनल टीवी के साथ एक साक्षात्कार में मुल्ला बरादर ने इन खबरों को अफवाह बताकर इसका खंडन किया कि वह पिछले हफ्ते काबुल में राष्ट्रपति भवन में एक विवाद में घायल हो गए थे या मारे गए थे। मीडिया में आई इन खबरों को लेकर पूछे जाने पर बरादर ने कहा, ‘नहीं, यह बिल्कुल भी सच नहीं है। अल्लाह का शुक्र है कि मैं फिट और स्वस्थ हूं। और मीडिया के दावे में कोई सच्चाई नहीं है कि हमारे बीचे आतंरिक असहमति है या फिर आंतरिक रार है।’

बरादर ने कहा कि अफगान में विदेशी सेनाओं के कब्जे को खत्म करने के लिए हमने बलिदान दिया है और कई सालों तक संघर्ष किया है। यह बलिदान और संघर्ष न सत्ता के लिए है और न पद के लिए। मालूम हो कि तालिबान सरकार में मतभेद की खबरें उप-प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर के सार्वजनिक मंच से गायब होने के बाद से ही जोर पकड़ रही हैं। सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया गया था कि राष्ट्रपति भवन में हक्कानी नेटवर्क और तालिबानी लड़ाकों के बीच हुए संघर्ष में मुल्ला बरादर मारा गया है। हालांकि, मुल्ला बरादर ने बाद में एक ऑडियो संदेश जारी कर अपनी मौत की खबरों को झूठी एवं बेबुनियाद करार दिया था।

खबर तो यह भी आई थी कि वह हक्कानी नेटवर्क संग झड़प के बाद काबुल छोड़कर भाग गए हैं। बरादर ने कहा कि वह दावे का खंडन करने के लिए मीडिया को बताए बिना काबुल के बाहर यात्रा पर थे। उन्होंने कहा कि इसलिए हम अफगान राष्ट्र और सभी वरिष्ठ और जूनियर मुजाहिदीन को आश्वस्त करते हैं कि वे बिल्कुल भी चिंता न करें और न ही चिंता की कोई बात है। 

बरादार से यह भी पूछा गया कि जब वह रविवार को काबुल गए तो कतर के विदेश मंत्री से क्यों नहीं मिले। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, बरादर को अफगानिस्तान के कार्यवाहक प्रधान मंत्री मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद के साथ नहीं देखा गया था, जब वह शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी से मिले थे। इसके जवाब में बरादर ने कहा कि हमें इस बात की जानकारी नहीं थी कि विदेश मंत्री कतर से आ रहे हैं। अगर हमें पता होता, तो हम अपनी यात्रा स्थगित कर देते। और हम यात्रा पर थे, इसलिए बैठक नहीं हुई। 

उन्होंने आगे कहा कि हमारे लिए विदेश मंत्री से मिलने के लिए यात्रा से लौटना संभव नहीं था। अगर हमें पहले से खबर मिलती, तो शायद हम बैठक में अन्य दोस्तों के साथ शामिल हो जाते। तालिबान अधिकारियों ने कहा कि इस दौरान बरादार कंधार गए थे, जहां समूह का सर्वोच्च नेता हैबतुल्ला अखुंदजादा रहता है। माना जा रहा है कि हक्कानी की अंखुदजादा से शिकायत करने बरादर कंधार गया था। बरादर तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख हैं और उन्होंने पूर्व सरकार और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ दोहा वार्ता का नेतृत्व किया।
 कुछ लोगों को उम्मीद थी कि उन्हें प्रधानमंत्री बनाया जाएगा, लेकिन नई सरकार को लेकर काफी मंथन के बाद भी बरादर को प्रधानमंत्री नहीं बनाया गया। 

तालिबान के एक सूत्र ने बताया कि बीते हफ्ते राष्ट्रपति भवन में मुल्ला बरादर और खलील उर रहमान हक्कानी के बीच तीखे शब्द बाण चले थे। धीरे-धीरे दोनों के समर्थक भी आपस में भिड़ गए। हक्कानी को अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार में शरणार्थी मामलों का मंत्री बनाया गया है। वह हक्कानी नेटवर्क के प्रमुख कमांडरों में से एक है। कतर स्थित तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी मुल्ला बरादर और हक्कानी के बीच झगड़े की पुष्टि की है।

आमने-सामने की वजह
-मुल्ला बरादर गुट का मानना है कि अफगानिस्तान की सत्ता में तालिबान की वापसी का श्रेय उसके जैसे शीर्ष कमांडरों की ओर से की गई कूटनीतिक पहल को दिया जाना चाहिए

वहीं, हक्कानी गुट का कहना है कि अमेरिका पर जीत का श्रेय तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के उन लड़ाकों को मिलना चाहिए, जिन्होंने विदेशी और अफगान बलों से लड़ाई लड़ी

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