14 सितंबर से वक्री गुरु और वक्री शनि होंगे एक घर में, जानिए क्या होगा असर

दैवगुरु बृहस्पति 14 सितंबर 2021 मंगलवार भाद्रपद शुक्ल अष्टमी तिथि के दिन वक्री गति से चलते हुए मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस राशि में पहले से शनि वक्री अवस्था में बैठे हुए हैं। गुरु इस साल 20 जून को कुंभ राशि में वक्री हुआ था और अब 14 सितंबर को दोपहर 2.34 बजे से वक्री अवस्था में मकर राशि में प्रवेश करेगा। गुरु 18 अक्टूबर 2021 को मार्गी हो जाएगा। मकर राशि में पहले से शनि वक्री होकर बैठा हुआ है। शनि इस साल 23 मई को मकर राशि में वक्री हुआ था और 11 अक्टूबर को मकर राशि में ही मार्गी हो जाएगा। इस प्रकार 14 सितंबर से 18 अक्टूबर तक का समय सभी राशि के जातकों के साथ प्रकृति, पर्यावरण आदि के लिए मुसीबत बन सकता है। इसलिए सतर्क रहें, सावधान रहें, संयम से रहें और बुरे कर्मो से बचने का प्रयास करें।

व्यापक प्रभाव

वक्री गुरु और वक्री शनि की युति ठीक नहीं मानी जाती है। गुरु शुभ ग्रह और शनि क्रूर, दोनों की वक्री अवस्था में युति से रोगों और हिंसक घटनाओं में वृद्धि की आशंका रहती है। वक्रगति से पुन: गुरु मकर राशि में प्रवेश कर वक्री शनि से युति करेगा। जिससे हिंसक तत्व शांति भंग करने का षड्यंत्र करेंगे। विश्व में कहीं-कहीं प्राकृतिक आपदाएं जैसे भूकंप, तूफान, भूस्खलन आदि से जन-धन की हानि होगी। भारत के उत्तर-पश्चिम में स्थित देशों में सत्ता संघर्ष, आतंकी घटनाएं, आगजनी, युद्ध जैसे हालात बनेंगे। रोग फैलने की आशंका भी रहेगी।

राशियों पर असर

मेष : क्रोध बढ़ेगा, कार्य अटकेंगे या धीमी गति से होंगे, आपसी विवाद बढ़ेंगे। सदाचारिता में कमी आएगी।

वृषभ : आर्थिक मसले उलझेंगे, रोगों में वृद्धि होगी, खर्च की अधिकता होगी, पारिवारिक विवाद बढ़ेंगे।

मिथुन : व्यापारिक कार्य ठप होंगे, नौकरीपेशा परेशान रहेंगे। विवादित स्थितियां आ सकती है। संक्रामक रोग हो सकते हैं।

कर्क : मानसिक स्थिति गड़बड़ाएगी, अपशब्दों से विवाद बढ़ेंगे। आजीविका के साधनों पर संकट आ सकता है।

सिंह : संयम और धैर्य में कमी आएगी, संपत्ति को लेकर विवाद होगा, शारीरिक रोगों पर खर्च अधिक होगा।

कन्या : क्रोध पर काबू रखें, विवाद होगा। निवेश में सतर्क रहें। पुराने विवाद सामने आ सकते हैं। शारीरिक कष्ट होगा।

तुला : सुखों में कमी, पारिवारिक विवाद, जीवनसाथी से अलगाव, मानसिक परेशानी, कार्यो में विवादित स्थिति।

वृश्चिक : पराक्रम और साहस में कमी, संतान को कष्ट, भाई-बहनों से संपत्ति विवाद, कष्ट, रोग परेशान करेंगे।

धनु : वाणी पर काबू रखें, वर्चस्व को लेकर द्वंद्व होगा, धन में कमी, सुख घट सकते हैं। नेत्र रोग परेशान करेंगे।

मकर : शारीरिक कष्ट, मानसिक तनाव, स्वजनों से विवाद, आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है।

कुंभ : खर्च की अधिकता, बेवजह के कार्यो पर पैसा बहेगा, शारीरिक कष्ट, मानसिक तनाव, नौकरी में बदलाव।

मीन : आय के साधनों में स्थिरता, स्वजनों से मतभेद, आर्थिक कष्ट, मौका परस्त लोग आपका फायदा उठाएंगे।

क्या उपाय करें

वक्री गुरु और वक्री शनि की युति के कारण होने वाले कष्टों के निदान के लिए प्रत्येक मनुष्य को भगवान शिव और हनुमानजी की नियमित आराधना, दर्शन करना चाहिए। इस दौरान महामृत्युंजय मंत्र की एक माला नित्य जाप सारे कष्टों से रक्षा करेगी। प्रत्येक शनिवार को हनुमानजी के दर्शन कर एक श्रीफल अर्पित करें।

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