तालिबानी सफलता से आतंकवाद को नई हवा मिलने का खतरा, कश्मीर में भी दिख सकता है असर

पंजशीर पर कब्जे में पाकिस्तान की मदद के रूप में सामने आने से रक्षा विशेषज्ञों ने चिंता जाहिर की है। हालांकि उनका कहना है कि पाकिस्तान के इस कृत्य पर किसी को आश्चर्य नहीं है लेकिन तालिबान को मिल रही मदद और उसकी सफलता से जेहादी संगठनों के हौंसले बुलंद हो सकते हैं। जो भारत और पूरे विश्व के हित में नहीं है।

लेफ्टिनेंट जनरल राजेन्द्र सिंह (सेवानिवृत्त) ने ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। पाकिस्तान लगातार तालिबान की मदद करता रहा है। यह मदद वित्तीय भी है और रक्षा उपकरणों की आपूर्ति के रूप में भी है। यदि पाकिस्तान मदद नहीं कर रहा होता तो तालिबान कब का खत्म हो चुका होता। अब पाकिस्तानी सेना तालिबान को शीर्ष स्तर पर योजना बनाने में मदद कर रही है। उसकी मदद से ही वह पंजशीर में सफल हुआ है। यह अब किसी से छुपा नहीं है। लेकिन इसे हमें या विश्व को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

जनरल सिंह के अनुसार, पंजशीर समेत अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद इस सोच को बल मिल रहा है कि जेहाद में सफलता मिल सकती है। अभी तक लोग मानते थे कि जेहाद बेकार है, इस रास्ते को अपनाकर सफलता नहीं मिल सकती है। इसलिए बहुत कम लोग ही ऐसी विचारधारा के साथ खड़े होते थे, लेकिन तालिबान की सफलता से जेहादी सोच को मजबूती मिल सकती है। उनका समर्थन करने वालों की संख्या बढ़ सकती है। आतंकी संगठनों में नई भर्ती बढ़ सकती है। 

जनरल सिंह के मुताबिक, कश्मीर घाटी के संदर्भ में भी यह बात बेहद महत्वपूर्ण है। एक चिंता यह है कि क्या वहां तालिबानी आतंकी घुस आएंगे। मुद्दा यह नहीं कि वहां आतंकी पाकिस्तानी हैं, तालिबानी हैं या स्थानीय, उनसे सेना सख्ती से निपटती रही है और आगे भी निपटेगी। लेकिन असल खतरा यह है कि इस तालिबानी सफलता से वहां आतंकवाद को नई हवा मिल सकती है।

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