जावेद अख्‍तर की बेतुकी तुलना पर स्‍वामी का जवाब, ‘अच्‍छा होगा मांग लें माफी, नहीं तो होगी दिक्‍कत’

नई दिल्‍ली
भाजपा सांसद सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने जाने-माने लेखक और चिंतक जावेद अख्‍तर के बयान पर उनकी क्‍लास लगाई है। समाचार चैनल सीएनएन न्‍यूज 18 के साथ बातचीत में स्‍वामी ने जावेद अख्‍तर के बयान पर तीखी प्रति‍क्रिया दी। इंटरव्‍यू की शुरुआत होते ही उन्‍होंने जावेद अख्‍तर को ‘हल्‍का-फुल्‍का’ कम्‍युनिस्‍ट बताया। साथ ही कहा कि उनकी दुबई में मजबूत जड़ें हैं। ऐसे लोगों को आरएसएस के बढ़ते नेटवर्क से खतरा है। सुझाव दिया कि जावेद अख्‍तर को अपने बयान पर माफी मांग लेनी चाहिए। नहीं तो उन्‍हें कोर्ट में घसीटा जा सकता है।

हाल ही में एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में जावेद अख्तर ने तालिबान की तुलना आरएसएस और कई अन्‍य हिंदू संगठनों से की थी। उन्‍होंने कहा था कि तालिबान बेशक बर्बर है। उसकी हरकतें भी निंदनीय हैं। लेकिन, आरएसएस, विश्‍व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल का समर्थन करने वाले सभी एक जैसे हैं। अख्तर ने कहा था कि पूरी दुनिया में दक्षिणपंथियों में एक अनोखी समानता है। तालिबान एक इस्लामी देश चाहता है। ये लोग एक हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं। अख्तर के इस बयान का बीजेपी और शिवसेना जैसी कई पार्टियां विरोध कर रही हैं। बीजेपी ने उनसे माफी की मांग की है। वहीं, शिवसेना ने भी उनके बयान का विरोध किया है।

आरएसएस को समझने में लोगों से भूल हुई
चैनल के साथ बातचीत के दौरान स्‍वामी बोले कि आरएसएस (राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ) को समझने में कई लोगों से गलती हुई है। इनमें कई जाने-माने लोग शामिल हैं। ये वही लोग हैं जिनका संघ से संपर्क नहीं रहा है।

स्‍वामी ने कहा कि पहले जय प्रकाश नारायण की भी राय आरएसएस को लेकर उलटी थी। लेकिन, बाद में उनका रुख आरएसएस को लेकर बिल्‍कुल बदल गया था। इस नजरिये में यहां तक बदलाव आ गया था कि उन्‍होंने एक सार्वजनिक मंच से कहा था कि अगर आरएसएस फासीवादी है तो उतना ही वह खुद हैं।

स्‍वामी बोले जो लोग आरएसएस के संपर्क में नहीं रहे हैं, वे संगठन के बारे में गलत निष्‍कर्ष निकालते हैं। जहां तक जावेद अख्‍तर का सवाल है तो वह थोड़े-बहुत कम्‍युनिस्‍ट हैं। उनकी दुबई में मजबूत जड़ें हैं। उनके जैसे लोग आरएसएस के नेटवर्क से खतरा महसूस करते हैं। वो लोगों को डराने की कोशिश करते हैं जो सरासर गलत है।

अच्‍छा होगा मांग लें माफी
स्‍वामी ने कहा कि जावेद अख्‍तर ने निश्चित तौर पर आरएसएस को बदनाम करने की कोशिश की है। आरएसएस से तालिबान की तुलना करने की उनकी टिप्‍पणी इसके लिए काफी है। महाराष्‍ट्र में कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने भी ऐसा ही कुछ कहा था और बाद में उन्‍हें माफी मांगनी पड़ी थी। स्‍वामी ने कहा कि अच्‍छा होगा जावेद अख्‍तर माफी मांग लें। भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए उनके खिलाफ कोर्ट केस हो सकता है। फिर वह पछताएंगे।

जानबूझकर की जाती हैं बातें
क्‍या हिंदुत्‍व या हिंदू राष्‍ट्र की अवधारणा को जानबूझकर गलत समझा जाता है या वाकई लोग इसके बारे में नहीं जानते हैं? इस सवाल के जवाब में सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने कहा कि संविधान में ऐसे कई आर्टिकल हैं जो हिंदू स्‍वभाव के हैं। जब संविधान बना था तभी यह बात साफ थी कि यहां की संस्‍कृति हिंदू आधारित है। सेक्‍युलर शब्‍द तो इमर्जेंसी में इंदिरा गांधी के समय संविधान में जुड़ा था। इसका कारण यह था कि हम पहले से ही ‘सर्वधर्म सम्‍भाव’ में यकीन करते थे।

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