आंच:गौतम गंभीर, श्रीनिवास के बाद क्या शरद पवार, देवेंद्र फडणवीस, प्रियंका और राहुल गांधी से भी होगी पूछताछ?

कोरोना संकट के बीच नेता दवाइयां और इक्विपमेंट बांट रहे हैं। गुजरात के भाजपा अध्यक्ष सीआर पाटिल ने 10 अप्रैल को जरूरतमंदों को मुफ्त में 5,000 रेमडेसिविर इंजेक्शन बांटने का ऐलान किया। पूर्वी दिल्ली से सांसद गौतम गंभीर ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर फेबि फ्लू और रेमडेसिविर जरूतमंदों को देने की घोषणा की। यूथ कांग्रेस के नेता श्रीनिवास बी.वी. तो लगातार लोगों तक दवाइयां और मेडिकल इक्विपमेंट पहुंचा रहे हैं। यह लिस्ट यहीं खत्म नहीं होती है। कई और बडे़ नेताओं के नाम भी इसमें शामिल हैं, लेकिन, अब मदद करने वाले इन नेताओं से पूछताछ भी शुरू हो गई है।

हमने जमाखोरी नहीं की, हम तो बस लोगों के लिए जरिया बने
कोरोना महामारी के बीच जरूरतमंदों को मेडिकल मदद पहुंचाने वाले यूथ कांग्रेस प्रेसिडेंट श्रीनिवास बी. वी. से 14 अप्रैल को दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ने तकरीबन 40 मिनट तक पूछताछ की। श्रीनिवास बी. वी. ने ‘दैनिक भास्कर’ से बातचीत में कहा, ‘टीम ने उनसे पूछा कि आखिर लोगों की मदद के लिए वे दवाएं और मेडिकल उपकरण कहां से ला रहे हैं? उन्होंने जवाब दिया, कि यूथ कांग्रेस लोगों तक दवा और इक्विपमेंट पहुंचाने का माध्यम भर बन रही है। वह कोई जमाखोरी नहीं कर रही है।’ श्रीनिवास ने इसे और स्पष्ट किया, उन्होंने कहा मैंने मदद के तरीके को विस्तार से पुलिस के सामने रखा।

वे कहते हैं उदाहरण के तौर पर इसे ऐसे समझिए, ‘दिल्ली की आर्क फार्मास्यूटिकल कंपनी है, उसके 30 स्टोर हैं। हमें पता है कि उसके पास रेमडेसिविर या दूसरी दवाइयां हैं तो हम लोगों को इसकी जानकारी देते हैं। उनका आधार कार्ड, कोविड रिपोर्ट, डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन वहां जमा होता है और लोगों को दवाई मिल जाती है।

इसी तरह ऑक्सीजन का एक सिलेंडर एक ही नहीं बल्कि कई लोगों के काम आता है। हम एक व्यक्ति के पास इस्तेमाल हो चुके सिलेंडर को दूसरे जरूरतमंद तक पहुंचाने का काम करते हैं।’ श्रीनिवास कहते हैं, हम लोगों के लिए माध्यम बन रहे हैं न कि हम दवाइयों की जमाखोरी कर फिर लोगों की मदद कर रहे हैं।

मुफ्त में दवाइयां बांटने वाले ‘मसीहा’ या ‘गुनहगार’?
दरअसल, 29 अप्रैल को ह्रदय फाउंडेशन के चेयरमैन, डॉ. दीपक सिंह ने एक जनहित याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में लगाई थी। इस याचिका में कहा गया था कि कोरोना के दौर में एक तरफ तो लोग रेमडेसिविर जैसी दवा के लिए एक जगह से दूसरी जगह भागदौड़ कर रहे हैं तो दूसरी तरफ नेता और राजनीतिक दल दवाइयां की ‘जमाखोरी’ करके हीरो बन रहे हैं। आखिर यह कैसे हो रहा है?

जनहित याचिका लगाने वाले मशहूर निशानेबाज दीपक सिंह ने दैनिक भास्कर से कहा, ‘खुलेआम नेता दवाइयां और इक्विपमेंट बांट रहे हैं। इसका सीधा मतलब है कि इन लोगों के पास बड़ी मात्रा में दवाइयों को खरीदने की व्यवस्था है। लेकिन, क्या इनके पास ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट-1940 के तहत इतनी बड़ी मात्रा में दवाइयां खरीदने के लिए जरूरी लाइसेंस है।’

वे कहते हैं कि पहली नजर में तो यह सब धर्मार्थ लगता है, लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर जब आम आदमी दवाइयों के लिए भटक रहा है तो ये लोग इन्हें कहां से खरीदकर अपने खास लोगों तक पहुंचा रहे हैं?

कहीं मेडिकल-माफिया-पॉलिटिशियन के तार तो नहीं जुड़े?
वायुसेना के पूर्व अधिकारी के बेटै डॉ दीपक सिंह कहते हैं कि बिना लाइसेंस दवाइयां खरीदी नहीं जा सकतीं, फिर इन्हें कैसे मिलीं? बिना लाइसेंस इतनी मात्रा में दवाई रखना जमाखोरी के दायरे में आता है। दूसरी बात ‘बराबरी के अधिकार’ के तहत सभी को एक जैसी मेडिकल सुविधाएं पाने का हक है। फिर नेता अपने क्षेत्र में दवाइयों को कैसे बांट रहे हैं? वे समझाते हुए कहते हैं कि नेता अपनी पॉवर के इस्तेमाल से थोक दवाइयां खरीद रहे हैं और पॉलिटिकल फायदे के लिए इन्हें बांट रहे हैं।

मतलब इन नेताओं तक कोई जरूरतमंद आम व्यक्ति पहुंच जाएगा तो उसे दवाई मिलेगी, बदले में उस नेता को पैसे नहीं, बल्कि पॉलिटिकल सपोर्ट मिलेगा। उसका वोट बैंक तैयार होगा। जबकि यह दवाई किसी नेता से गुजरकर नहीं, बल्कि लोगों को सीधी मिलनी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि आम जनता पर छिटपुट मामलों पर तुरंत FIR हो जाती है, लेकिन अवैध जमाखोरी के इन मामलों पर बड़े नेताओं की मिलीभगत की पूरी जानकारी के बावजूद कोई कार्रवाई होती।

सुप्रीम कोर्ट और अलग-अलग राज्यों की कोर्ट महामारी के दौरान दवाइयां और मेडिकल इक्विपमेंट की ब्लैक मार्केटिंग को लेकर सख्त टिप्पणी कर चुके हैं। ऐसे में इन नेताओं से पूछताछ कर यह पता लगाना चाहिए कि आखिर किस तरह से इन्होंने इन्हें जमा किया? याचिकाकर्ता ने देश में चल रहे मेडिकल-माफिया-पॉलिटिशियन के इस गठजोड़ का पर्दाफाश करने के लिए CBI जांच की मांग की थी।

याचिका में कई दिग्गज नेताओं के नाम
याचिका में पूर्व शिवसेना विधायक चंद्रकांत रघुवंशी, गुजरात के भाजपा नेता सीआर पाटिल, महाराष्ट्र के भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस, भाजपा नेता सिरीश चडूरी, NCP के शरद पवार और रोहित पवार, कांग्रेस की प्रियंका वाड्रा गांधी और राहुल गांधी का नाम भी शामिल है।

दिल्ली हाईकोर्ट की अनुमति के बाद याचिकाकर्ता ने दिल्ली पुलिस में की शिकायत
4 मई को दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा, अभी इस मामले में CBI जांच की अनुमति नहीं दी जाती है। लेकिन, कोर्ट याचिकाकर्ता को कमिश्नर ऑफ दिल्ली पुलिस से शिकायत करने की अनुमति देती है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से एक हफ्ते में स्टेटस रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था। अनुमति के बाद याचिकाकर्ता ने दिल्ली पुलिस को अपनी शिकायत सौंपी। इसके बाद से दिल्ली पुलिस सभी नेताओं से पूछताछ और जांच कर रही है।

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