बिल्व वृक्ष:- कुछ महत्त्व पूर्ण जानकारी 

सामान्य तौर पर बिल्व वृक्ष को बेल पत्र वृक्ष भी कहा जाता है। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका जीवन में बहुत महत्त्व है।


आइये जाने इसके महत्त्व के बारे में
बिल्व वृक्ष के आसपास सांप नहीं आते l
अगर किसी की शव यात्रा बिल्व वृक्ष की छाया से होकर गुजरे तो उसका मोक्ष हो जाता है l
वायुमंडल में व्याप्त अशुध्दियों को सोखने की क्षमता सबसे ज्यादा बिल्व वृक्ष में होती है l
चार, पांच, छः या सात पत्तो वाले बिल्व पत्र पाने वाला परम भाग्यशाली और शिव को अर्पण करने से अनंत गुना फल मिलता है l
बेल वृक्ष को काटने से वंश का नाश होता है एवं बेल वृक्ष लगाने से वंश की वृद्धि होती है।
सुबह शाम बेल वृक्ष के दर्शन मात्र से पापो का नाश होता है।
बेल वृक्ष को सींचने से पित्र तृप्त होते है।
बेल वृक्ष और सफ़ेद आक् को जोड़े से लगाने पर अटूट लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
बेल पत्र और ताम्र धातु के एक विशेष प्रयोग से ऋषि मुनि स्वर्ण धातु का उत्पादन करते थे ।
जीवन में सिर्फ एक बार और वो भी यदि भूल से भी शिव लिंग पर बेल पत्र चढ़ा दिया हो तो भी जीव सभी पापों से मुक्त हो जाते है l
बेल वृक्ष का रोपण, पोषण और संवर्धन करने से महादेव से साक्षात्कार करने का अवश्य लाभ मिलता है। बिल्व पत्र का पेड़ जरूर लगाये । बिल्व पत्र के लिए पेड़ को क्षति न पहुचाएं l

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