नींबू की चार बूंदे बदल देंगी कोरोना काल में जिंदगी – गुलजारीलाल नन्दा फाउंडेशन ने आयुर्वेद शास्त्रों से निकाली संकटमोचक संजीवनी


आगरा। कोरोना महामारी से परिवारों को बचाने के लिए पूरा विश्व संघर्ष कर रहा है। भारत के अस्पतालों में ऑक्सीजन व बेड लेने को मारामारी है। समय पर आपूर्ति नहीं होने से कईयों की जान तो लाइनों में खड़े-खड़े ही जा रही है। ऐसी स्थिती का मुकाबला करने और कोरोना महामारी को हराने के लिए जहां कई उपाय हो रहे हैं वहीं दिल्ली में स्थापित गुलजारीलाल नन्दा फाउंडेशन नामक विश्व प्रसिद्ध संस्था ने आयुर्वेद शास्त्र से संकटमोचक संजीवनी खोज में नींबू, तिर्फला, सहजन में सक्रमण को हटाने में काफी सच्चाई पाई है।
भारतवर्ष के एक महान संत ने भी वीडियो की वायरल कर मुहर लगा दी वहीं हुबली के डॉक्टर भी इस बात को प्रमाणित करते है।
रामबाण है नींबू की 4 बूंदे
गुलजारीलाल नन्दा फाउंडेशन चेयरमेन चर्चित समाज विज्ञानी वरिष्ठ पत्रकार के.आर. अरुण ने वर्चुअल रूप से जानकारी दी है कि भारतीय देशी पद्यति में नींबू की 4 बूंदे नाक-नथुनों में डालकर ऑक्सीजन की आपूर्ति स्वस्थ मार्ग बनता है 20-30 मिनटों में नतीजे की सच्चाई देखी जा सकती है। शरीर का कफ कचरा बाहर आ जाता है इससे आक्सीजन का रास्ता शुध्द होता है।
कई लोग ऑक्सीजन की कमी होने पर निम्बू 4 बून्द डालकर वह खुद तो बचे ही हैं। इस पद्द्ति को अपनाने पर असंख्य लोगों की जान बची है। उन्होंने दावा किया है कि नींबू औसधि में काफी उपयोगी है इस रामबाण पद्दति के बारे में कोई भी डॉक्टर या हकीम वैध भी मना नही करें तो बेहतर होगा क्योंकि निम्बू स्वस्थ्य आयुर्वेदिक औषधि में चर्चित है। वैसे नीम की 10 पत्तियां विथ डंठल सुबह शाम थोड़ा गुड़ मिलाकर काढ़ा बनाकर पियें फर्क मिलता है । नीम को अमेरिका ने भी माना है हल्दी दूध को माना है फिर हमारा देश निम्बू महत्व को क्यों नही मानता आश्चर्य है बात बात पर कहता है वेज्ञानिक प्रमाण नही है,बताइये निम्बू में आँखिर नुकसान क्या है। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन के अनुसंधान शोध में देखा गया है कि कोरोना संक्रमण में सबसे बड़ा कारण खांसी (कफ) है, जिसका शरीर से निकालना जरूरी है। हल्दी दूध काढ़ा, त्रिफला चूर्ण सुबह शाम लेने और सहजन वृक्ष के पत्ते व फलियों के काढ़े का प्रयोग कोरोना संक्रमण का सबसे बड़ा दुश्मन है। शहद, काली मिर्च, नींबू, दाल चीनी का काढ़ा भले ही कारगर होता है लेकिन निम्बू 4 बून्द नाक में बेहद उपयोगी यह प्रयोग कारगर है लोग जानकार भूगर्भ वेज्ञानिक राजेन्द्र सिंह जो धरोहर विकास योजना के प्रमुख हैं वे घर घर औसधि व्रक्ष वाटिका पर जोर दे रहे हैं। अरुण ने कहा हैकि उनके शोध में पिछले 2 महीने के दौरान लखनऊ, मुम्बई, आगरा व इंदौर जहां जहां इस नुस्खे पर बात हुई वहां से बेहतरीन परिणाम सामने आ रहे हैं। वहीँ उन्होंने कहा कि घर से निकलने से पहले करौना काल मे नीम के 30 पत्ते, नीम की 4 डंठल टाहनी, 100 ग्राम अदरक कुक्कर प्रेशर में डाल लें, 5 मिनट तक उबाल दें, उसकी 2 बार भांप लें। यह प्रयोग व्यक्ति के अंदर और बाहर से सेनेटाईज कर देगा। यदि समय की कमी है तो 10 पत्ती नीम, 1-2 टहनी कूट लें, 50 ग्राम अदरक के साथ थोड़ा गुड़ मिला कर काढा बना रोजाना दिन में 3 बार पीयें शरीर से सक्रमण कफ गायब होगा। जबकि तिर्फला चूर्ण भी पतञ्जलि से केवल 23 रुपये मात्र में काफी महत्व देता है दिन में 2 बार गर्म पानी से लें सक्रमण निकालने में सप्ताह में काफी रिजल्ट मिलता है ।एक संत ने वीडियो वायरल कर लगाई मुहर कोरोना संक्रमित होकर ऑक्सीजन के अभाव में मौत से मुकाबला कर रहे अपने परिवार को कोरोना रूपी मौत से बचाकर लाए भारतवर्ष के एक संत ने 8 मिनट 6 सैकेंड की वीडियो की वायरल की है। उन्होंने नींबू की 4 बूंदे नाक-नथुनों में डालकर ऑक्सीजन की आपूर्ति होने तथा बुखार व खांसी खत्म हो जाने की पुष्टि की है। यहाँ यह कहना मुनासिब लगता है कि सक्रमण इत्यादि फंगस खत्म करने में नींबू चमत्कारिक है नींबू टोटकों और स्वस्थ्य दृष्टि से तगड़ी औसधि है नींबू सेवन हर तरह से औसधि है शरीर की खुजली में नीम निम्बू राम बाण है जोकि शरीर को हमेशा स्वस्थ रखता है। पुनरू शुरु होंगे भारतीय देशी पद्द्ति के फार्मेसी विद्यालय। गुलजारीलाल नन्दा फाउंडेशन चेयरमेन चर्चित समाज विज्ञानी के.आर. अरुण कहते हैं कि मिशन भारतरत्न नन्दा नैतिक ज्योति के जरिए नन्दा फाउंडेशन द्वारा भारतीय देशी पद्द्ति को गावों व शहरों में औषधियों का विस्तार देने देश भर में अलख जगाई जाएगी। भारतरत्न नन्दा जी ने 1968 में हरियाणा कुरुक्षेत्र में आयुर्वेदिक कॉलेज भी चलवाया था तथा श्री कृष्ण आयुर्वेदिक फार्मेसी भी चलाई थी। गुलजारीलाल नन्दा फाउंडेशन दिल्ली 1994 में (रजि) द्वारा इस फार्मेसी का पुनरू आरम्भ करने पर विचार किया जाएगा और देशभर में फार्मेसी विद्यालय शुरु किए जाएं पर विचार हो रहा है ताकि नई पीढ़ी इस ओर जाग्रत हो सके।

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