बहुत ही चमत्कारी है यह अमृत बेल, ना तो खुद मरती है और ना ही मरने देती है

आयुर्वेद में गिलोय को अमृत बेल भी कहा जाता है। कारण है, न तो यह खुद मरती है और न ही सेवन करने वाले को कोई रोग होने देती है। गिलोय का सेवन किसी भी उम्र के व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है। यह चमत्कारिक जूड़ी-बूटी दस्त जैसे सामान्य से लेकर डेंगू व कैंसर जैसे प्राण घातक रोगों में भी बहुत लाभदायक है।

गिलोय एक बहुवर्षीय लता होती है | इसके पत्ते पान की तरह होते है, और फल मटर के दाने जैसे होते हैं | गिलोय के पत्ते स्वाद मैं कड़वे कसैले और तीखे होते हैं |

आयुर्वेद मैं इसे ज्वर की महान औषदि माना गया है और इसे जीवंतिका नाम दिया है | गिलोय पचने में आसान होती है, भूख बढ़ाती है और आँखों के लिए भी लाभकारी होती है |

गिलोय के फायदे

1. ज्वरनाशक :

गिलोय के तत्त्वों में ज्वरनाशक क्षमता होती है | ज्वर के समय गिलोय का रास पीने से ज्वर में आराम मिल सकता है | यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है, जिससे ज्वर आने की संभावना कम हो जाती है |

2. पाचन क्षमता:

त्रिफला के साथ यदि गिलोय का भी प्रयोग किया जाता है तो पाचन तंत्र सबंधी विकारों से शीघ्र लाभ मिलता|

3. रक्त को बनाये साफ़ :

गिलोय में एंटी ऑक्सीडेंट्स और एंटी बैक्ट्रियल गुण होते हैं जो की हमारे रक्त को साफ़ करते हैं और उसे स्वस्थ बनाने में मदद करते हैं।

4. गिलोय से मानसिक तनाव कम करें :

तनाव से जीवन का हर क्षेत्र प्रभावित होता है, इसलिए तनाव से मुक्ति के लिए गिलोय लाभदायक हो सकती है। गिलोय के सेवन से आप तनाव भी कम कर सकते हैं, इसका कारण है इसमें पाए जाने वाले एडाप्‍टोजेनिक जो की तनाव कम करने में मदद करते हैं। आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर से ऐसे तत्वों को बाहर निकलता है जो की मानसिक अवसाद का कारन बनते हैं। आयुर्वेदिक टॉनिक में इसका उपयोग मस्तिष्क की क्षमता को बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसके चूर्ण को शहद में मिलाकर लेने से मस्तिष्क से सबंधित बिमारियों में सहारा मिल सकता है।

5. गिलोय का उपयोग त्वचा के लिए :

गिलोय का उपयोग त्वचा सबंधी रोगों की रोकथाम के लिए भी किया जाता है। त्वचा के संक्रमण जनित रोगों के लिए गिलोय उपयोगी होता है। दाद खाज फोड़े फुंसी के अलावा गिलोय के सेवन से त्वचा की झुर्रियां और कालेपन के निशान दूर होते हैं, ऐसा इसमें पाए जाने वाले एंटी एजिंग प्रॉपर्टीज के कारन होता है। त्वचा पर इसके रस को लेप की तरह से लगाना भी लाभदायक होता है।

6. कैंसर में गिलोय का प्रयोग :

गिलोय में एंटी ऑक्सीडेंट्स गुण होते हैं जो शरीर में स्थिर फ्री रेडिकल्स को शरीर से बाहर निकालने में हमारी मदद करते हैं। गिलोय के साथ तुलसी, नीम और गेंहू के ज्वारे का स्वरस लिया जाय तो यह कैंसर के फैलने को रोकने में मददगार हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!