देसी ‘कोवैक्सिन’ का अमेरिका ने भी माना लोहा, कहा- कोरोना के 617 वेरिएंट्स को बेअसर करने में सक्षम

दुनिया खासतौर पर एशिया के कई विकासशील देश कोरोना से जंग के सबसे बड़े हथियार यानी वैक्सीन के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हैं, वैसे में भारत ने एक नहीं बल्कि दो वैक्सीन के साथ अपना टीकाकरण अभियान शुरू किया था। हालांकि, उस समय भारत बायोटेक की बनाए स्वदेशी टीके ‘कोवैक्सिन’ पर देश में ही सवाल खड़े हो रहे थे लेकिन अब अमेरिका ने भी इस वैक्सीन का दम माना है। अमेरिका ने माना है कि भारत में बनी कोवैक्सिन कोरोना वायरस के एक-दो नहीं बल्कि 617 वेरिएंट्स को बेअसर करने में सक्षम है। 

व्हाइट हाउस के मुख्य चिकित्सा सलाहकार और अमेरिका के शीर्ष महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ एंथनी फाउची ने कॉन्फ्रेंस कॉल में मीडिया को यह जानकारी दी है। 

फाउची ने कहा, ‘यह कुछ ऐसा है जहां हमें रोजाना अब भी आंकड़े मिल रहे हैं। लेकिन सबसे ताजा आंकड़ों में कोविड-19 मरीजों के खून के सीरम और जिन लोगों को भारत में इस्तेमाल होने वाला कोवैक्सिन टीका दिया गया है उनको शामिल किया गया है। यह 617 प्रकारों को बेअसर करने वाला पाया गया है।’

फाउची ने कहा, ‘इसलिए, भारत में हम जो मुश्किल हालात देख रहे हैं उसके बावजूद टीकाकरण इसके खिलाफ बहुत-बहुत प्रतिकारक हो सकता है।’

न्यूयॉर्क टाइम्स ने मंगलवार को खबर दी कि कोवैक्सीन प्रतिरक्षा तंत्र को SARS-cov-2 कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज बनाना सिखाकर काम करती है। ये एंटीबॉडीज वायरल प्रोटीन जैसे कथित स्पाइक प्रोटीनों से जुड़ जाते हैं जो इसकी सतह पर फैल जाते हैं।

राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के साथ साझेदारी में भारत बायोटेक के बनाए कोवैक्सिन के आपातकालीन प्रयोग को तीन जनवरी को मंजूरी मिली थी। ट्रायल के परिणामों में बाद में सामने आया कि यह टीका 78 फीसदी तक प्रभावी है।

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