ऑक्सीजन की कमी से ग्वालियर मेंदो की मौत, 


ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में 2 कोरोना मरीजों की मौत हो गई. ये मौतें ऑक्सीजन की कमी से हुईं. देर रात ऊर्जा मंत्री प्रद्मन सिंह तोमर अफसरों के साथ पहुंचे. वे खुद ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर आए.

ग्वालियर. ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में शनिवार देर रात ऑक्सीजन की कमी से 2 कोविड मरीजों की मौत हो गई. इसके बाद वहां जबरदस्त हंगामा मच गया. 65 साल के राजकुमार बंसल और 75 साल के फुंदन हसन की ऑक्सीजन खत्म होने के बाद शिफ्टिंग की जा रही थी. इस बीच उनकी सांसें रुक गईं.

जिले का सबसे बड़ा जयारोग्य अस्पताल ऑक्सीजन की किल्लत से जूझ रहा है. यहां के ICU में अफरा-तफरी और हड़कंप का माहौल बना हुआ है. शनिवार देर रात भी जैसे ही ऑक्सीजन की कमी हुई तो भगदड़ मच गई. अटेंडर अपने मरीजों को स्ट्रेचर पर वेंटीलेटर सहित पत्थर वाली बिल्डिंग की ओर भागे. गौरतलब है कि शहर के 80 सरकारी और-निजी अस्पतालों में 2055 मरीज़ भर्ती हैं. इनमें से 1009 मरीज़ ऑक्सीजन सपोर्ट पर चल रहे हैं. रोज 3000 सिलेंडर की खपत हो रही है.

रात भर डटे रहे मंत्री और अफसर

इधर, मरीजों की मौत की खबर लगते ही ऊर्जा मंत्री प्रदुम सिंह भी जयारोग्य पहुंचे. तोमर रात भर ग्वालियर के ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्थाओं में डटे रहे. उन्होंने रात 3 बजे महाराजपुरा प्लांट से खुद ऑक्सीजन सिलेंडर अस्पतालों को भिजवाए. इस दौरान कलेक्टर, जिला पुलिस अधीक्षक, नगर निगम आयुक्त भी ऑक्सीजन प्लांट में मौजूद थे. तोमर ने कहा- ऑक्सीजन की क्राइसिस है. उन्होंने गैस संचालकों से हाथ जोड़कर मरीज़ों के लिए ऑक्सीजन देने की गुजारिश की.

यहा अब रात में भी जल रही चिताएं

ग्वालियर में अब चिताओं को रात में भी जलाया जा रहा है. जगह नहीं होने पर उन्हें श्मशान घाट के रास्ते में ही जला दिया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम अब कोविड से मरने वाले लोगों के शवों का बोझ नहीं उठा पा रहा. यहां एक ही दिन में 20 से ज्यादा चिताएं जलाई जा रही हैं. गुरुवार को यहां 22 चिताओं को अग्नि दी गई. शाम 4:30 बजे यहां 8 चिताएं जमीन पर जल रहीं थीं और 12 शव का अंतिम संस्कार गैस शवदाह गृह में किया गया. यहां अब रात में भी शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है.

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