दुनिया में पहली बार आधा इंसान आधा रोबोट 

ब्रिटेन के चिकित्सक पीटर स्कॉट मार्गन ने कैसे खुद को बदला आधा इंसान और आधा मानव में। पीटर ने मोटर न्यूरॉन नाम की घातक बीमारी होने के बाद खुद को दुनिया के पहले रोबोमैन के रूप में बदल लिया। इस बीमारी के कारण उनकी मांसपेशिया बर्बाद हो रही थीं। अब मशीनों की सहायता से वे उन सभी कामों को आसानी से कर लेते हैं, जिन्हें कोई स्वस्थ इंसान करता है।

ब्रिटेन के एक वैज्ञानिक ने मोटर न्यूरॉन नाम की घातक बीमारी होने के बाद खुद को दुनिया के पहले रोबोमैन के रूप में बदल लिया है। इस बीमारी के कारण उनकी मांसपेशिया बर्बाद हो रही थीं। अब मशीनों की सहायता से वे उन सभी कामों को आसानी से कर लेते हैं, जिन्हें कोई स्वस्थ इंसान करता है। आधे इंसान आधे रोबोट वाले वैज्ञानिक हैं 62 साल के डॉक्टर पीटर स्कॉट मॉर्गन।

डॉक्टर पीटर स्कॉट-मॉर्गन इंग्लैंड के डेवोन में रहते हैं। साल 2017 में उन्हें पहली बार पता चला कि उन्हें मांसपेशियों को बर्बाद करने वाली एक दुर्लभ बीमारी हो गई है। इस कारण उनके कई अंग काम करना बंद करने लगे थे। उन्होंने रोबोटिक्स का उपयोग करके अपने जीवन का विस्तार किया। डॉ मॉर्गन अपनी 65 साल की पार्टनर फ्रांसिस के साथ रहते हैं। उनके मुताबिक, नवंबर 2019 में उन्होंने खुद को आधे इंसान और आधे मशीन में ढालने का काम शुरू किया था। विज्ञान कथाओं, खासकर कॉमिक्स में साइबोर्ग नामक एक चरित्र की कल्पना की जाती रही है, जो आधा इंसान और आधा मशीन हुआ करता है।

मॉर्गन ने उसी को आधार बनाकर अनुसंधान शुरू किया। वे कहते हैं कि आधा मशीन होने के बाद भी मेरे पास प्यार है, मैं मस्ती करता हूं, मुझे उम्मीद है, मेरे पास सपने हैं और मेरे पास उद्देश्य हैं। उन्हें अपने प्रयोग में कई जटिल और जोखिम भरे रास्तों से गुजरना पड़ा। बीमारी के दौरान उनके चेहरे पर भाव भंगिमाएं बताने वाली कई मांसपेशियां खत्म होने लगी थीं। फिर उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या एआइ) की मदद से शरीर की भाषा को बताने की तकनीक का ईजाद किया। डॉ स्कॉट मॉर्गन ने केवल अपनी आंखों का उपयोग करके कई कंप्यूटरों को नियंत्रित करने में सक्षम करने के लिए आइ-ट्रैकिंग तकनीक की खोज की है। वे वेंटिलेटर से सांस ले सकते हैं।

मानव जाति के 13.8 अरब साल के इतिहास में पहली बार कोई इंसान रोबोट में बदला है। आधा मानव, आधा रोबोट के तौर पर खुद को वे पीटर 2.0 कहते हैं। पहले के जीवन को उन्होंने पीटर 1.0 नाम दिया है। पीटर को रोबोट में बदलने के लिए डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने कई तरह की सर्जरी की। उनके शरीर के फूड पाइप को सीधे पेट से, कैथेटर को ब्लैडर से जोड़ने के साथ ही एक वेस्ट बैग भी जोड़ा गया है, ताकि मल मूत्र साफ हो सके। चेहरे को रोबोटिक बनाने वाली सर्जरी की जा चुकी है, जिसमें कई आर्टिफिशियल मांसपेशियां हैं। 10 अक्तूबर 2020 को की गई आखिरी सर्जरी में उनके दिमाग को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) से जोड़कर उनकी आवाज भी बदल दी गई। अब मनुष्य और एआइ के सामंजस्य की बेहतरीन मिसाल बनने जा रहे पीटर एक सायबोर्ग आर्टिस्ट के तौर पर काम करेंगे। डीएक्ससी टेक्नोलॉजी के मुताबिक, एआइ वो डेटा इस्तेमाल करेगा जो पीटर का डिजिटल फुटप्रिंट यानी लेख, वीडियो, इमेज और सोशल मीडिया आदि तैयार करेगा। एआइ की मदद से पीटर का रोबोटिक हिस्सा विचार, अनुभव और तस्वीरों को पहचानेगा। पीटर एक थीम देंगे तो एआइ उसका स्वरूप बताएगा।

पीटर के इस कायापलट के लिए दुनिया की बेहतरीन टेक्नोलॉजी कंपनियों ने अलग-अलग काम किए। जैसे डीएक्ससी ने पीटर के शरीर में लीड सिस्टम इंटिग्रेटर, सायबोर्ग आर्टिस्ट और एक होस्ट लगाया। इंटेल ने वर्बल स्पॉन्टिनिटी सॉफ्टवेयर, माइक्रोसॉफ्ट ने होलोलेंस, एफजोर्ड ने यूजर इंटरफेस डिजाइन और मानव पक्ष को लेकर काम किए। चेहरे में जो आइ कंट्रोलिंग सिस्टम लगाया गया है, उसकी मदद से अब पीटर 2.0 कई कंप्यूटरों को आंखों के इशारे से एक साथ चला सकेंगे। पीटर अब वेंटिलेटर से ही सांस लेते हैं। उन्होंने बताया कि आधा इंसान और आधा मशीन बनाने या यूं कहें कि बनने की प्रेरणा उन्हें साइंस फिक्शन कॉमिक के कैरेक्टर साइबोर्ग से मिली है।

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